“मुझे पूरी ईमानदारी से लगता है कि नरेंद्र मोदी का भारत का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए एक बड़ी आपदा साबित होगा।”
– पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मई 2014
सैल्यूट है सर🫡
कोई तो सेलिब्रिटी है जो आम जनता की आवाज़ उठाता है,
वरना बाकी सारे तो बस फिल्मों में हीरो बनते हैं पर रियल लाइफ में कुछ नही करते.
@FanClubV1SH4L
💔🇵🇸 गाजा का एक अनाथ बच्चा खंडहरों के बीच नंगे पैर चल रहा है।
🇮🇱अगर कोई आईडीएफ सैनिक उसे देख लेता, तो वह उसे गोली मार देता।
क्या इसे 10000 बार रीपोस्ट कर सकता है गाजा की आवाज़ बुलंद करें.!💔🖐️
ईरान ने अपना असली मकसद साफ कर दिया है और मैं यही बात पिछले 8–9 दिनों से कह रहा हूँ।
ज़्यादातर लोग हँस रहे थे।
लोग कह रहे थे ईरान खत्म हो गया। इज़राइल ने उसकी 80% एयर डिफेंस तबाह कर दी। अब खेल खत्म है।
लेकिन मैंने कहा था,
ईरान इस जंग को जीतने की कोशिश नहीं कर रहा।
ईरान कोशिश कर रहा है कि इस जंग को जीतना इतना महँगा बना दे कि जीतना ही बेकार हो जाए।
ये दो बिल्कुल अलग खेल हैं।
और अभी भी बहुत लोग इस फर्क को समझ नहीं पा रहे।
ईरान अब सिर्फ सैन्य युद्ध नहीं लड़ रहा।
ईरान अब आर्थिक युद्ध लड़ रहा है।
उनका असली निशाना कोई सैन्य अड्डा नहीं है।
न कोई युद्धपोत।
और न ही सिर्फ इज़राइल।
(हमले तो वो इन पर भी कर रहे हैं, लेकिन यहाँ मैं मकसद की बात कर रहा हूँ , यानी ईरान के लिये जीत कैसी दिखेगी)
ईरान का असली निशाना है . तेल की कीमत।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने अपना लक्ष्य लगभग साफ कर दिया है।
$200 प्रति बैरल तेल।
यही नंबर है।
यही मिशन है।
ईरान के लिये जीत का मतलब होगा — तेल की कीमत को इतना ऊपर पहुँचा देना।
यानी जीत का मतलब यह नहीं कि उन्होंने कोई F-35 गिरा दिया।
बल्कि यह कि तेल इतना महँगा हो जाए, इतना दर्दनाक हो जाए, कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल जाए और दुनिया के नेता अमेरिका के राष्ट्रपति को फोन करके कहने लगें कि इस युद्ध को रोकिए।
जरा इस रणनीति के बारे में सोचिए।
ईरान इसे कैसे कर रहा है?
15,000 डॉलर के Shaheed ड्रोन से अरबों डॉलर के तेल के ढाँचे पर हमला।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें
वही रास्ता जहाँ से दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई गुजरती है।
तेल पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक, लॉजिस्टिक हब और रिफाइनरी पर हमले।
ये सब बेतरतीब नहीं है।
न ही घबराहट में किया गया है।
ये सब सोची-समझी रणनीति है।
(क्योंकि ईरान इस तरह की जंग की तैयारी दशकों से कर रहा है)
हर हमला सिर्फ एक काम के लिये किया जा रहा है —
तेल की सप्लाई को रोकना।
और जब तेल की सप्लाई रुकती है तो कीमत बढ़ती है।
जब कीमत बढ़ती है तो पूरी दुनिया परेशान हो जाती है।
ईरान की सोच बहुत सीधी है।
जिस दिन तेल $200 प्रति बैरल पहुँचेगा. उस दिन ईरान अपने आपको विजेता मान लेगा।
इसलिये नहीं कि उन्होंने कोई विमान गिराया।
बल्कि इसलिए कि $200 तेल होने पर
हर अरब देश परेशान होगा,
हर यूरोपीय नेता वॉशिंगटन को फोन करेगा,
और अमेरिका में पेट्रोल पंप पर खड़े लोग गुस्से में होंगे।
तब अमेरिका के राष्ट्रपति के सामने एक बिल्कुल अलग फैसला खड़ा होगा।
ईरान इस जंग में सिर्फ बचने की कोशिश नहीं कर रहा।
ईरान कोशिश कर रहा है कि इस जंग को जीतना ही हार से ज्यादा दर्दनाक बन जाए।
यही उनकी रणनीति है।
मैं यही बात पिछले 8–9 दिनों से कह रहा हूँ।
मिसाइलें असली कहानी नहीं हैं।
असली हथियार है . तेल की कीमत।
इसलिये मिसाइलों की गिनती मत देखिए।
तेल की कीमत पर नजर रखिए।
✍️ रॉबर्ट कियोसकी के पोस्ट का हिंदी अनुवाद । ये वही राबर्ट कियोसकी हैं जिन्होंने मशहूर किताब Rich Dad Poor Dad लिखी है ।
2014 से पहले:
आमिर खान, सचिन तेंदुलकर, अमिताभ बच्चन सहित सभी फिल्मी कलाकारों में हिंसा से पीड़ित लोगों के खिलाफ बोलने की हिम्मत थी।
लेकिन फिर 2014 के बाद:
- मणिपुर पर चुप
- हाथरस पर चुप
- SSC प्रोटेस्ट पर चुप
- किसान प्रोटेस्ट पर चुप
आखिर इनमें इतना बदलाव क्यों आ गया? 🤔
जेरेमी वेड: वाराणसी में गंगा मानव मल से भरी हुई है।
प्रोफेसर मिश्रा: समाधान मौजूद हैं। सरकार की इच्छाशक्ति नहीं है।
जेरेमी: पानी सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं है। यह मानसिक कल्याण के लिए भी ज़रूरी है।
नदी की हर जगह पूजा होती है, लेकिन कहीं भी इसकी रक्षा नहीं होती।
यह क्या देखने को मिल रहा है कि ‘हिंदू हृदय सम्राट’ कहे जाने वाले नरेंद्र मोदी जी को ‘तेली’ और ‘घांची’ जैसे जातिसूचक शब्दों से गालियाँ दी जा रही हैं! जाति है कि जाती ही नहीं।