A priest named Vijay Pandit attempted to rape a 10-year-old Dalit girl inside a temple. When action was taken against the accused under the POCSO Act, the entire Brahmin community surrounded the police station in support of the accused.
This is a shameful situation where Brahmins are supporting the POCSO accused based on their caste. The incident took place in Saharanpur, Uttar Pradesh.
पुलिस के डंडे टूट गए लेकिन भाई का हौसला नहीं टूटा, देश में ऐसे नेता होने चाहिए, AC मैं बैठने वाले नहीं
नोएडा फेज 2 में करीब 1,000 से ज्यादा फैक्ट्री कर्मचारी वेतन, बोनस और शोषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे
श्रमिक ₹20,000 न्यूनतम वेतन और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग कर रहे थे जो हमारा संविधान ने दिया हुआ अधिकार है
उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई के दौर में ₹11,000-₹13,000 की पगार में गुजारा करना असंभव है
जिसके बाद ये सब देख सकते है पुलिस कीड़े मकौड़े की तरह से जानता को मारती हैं
क्या हम कॉक्रोच है?
क्या आपको पता है धुएँ कि भी जाति होती है 👇
मध्य प्रदेश में एक दलित की चिता जलने से केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं “ब्राह्मणों के श्मशान” तक चला जाता…
उस पर भी शर्मनाक ये कि पुलिस भी दलित परिवार पर ही दवाब डाल रही है क्यूं की पुलिस प्रशासन खुद जातिवाद से अंदर तक सड़ा हुआ हैं।
शर्म आनी चाहिए ऐसे समाज पर, जहां मौत के बाद भी दलित को सम्मान नहीं मिलता।
ज़िंदा था तब दलित होने नाम पर भेदभाव, नफ़रत, ज़लालत, छुआछूत,
और जब मर गया तो उसकी चिता का धुंआ भी "अछूत" हो गया जो ब्राह्मणों के शमशान तक नहीं पहुंचना चाहिए वरना बेचारे मरे हुए ब्राह्मण भी अशुद्ध हो जाएंगे।
ये सिर्फ भेदभाव नहीं, ये इंसानियत की लाश पर खड़ा ब्राह्मणवाद है।
जिस समाज में मृतक की चिता का धुआं भी जाति देखकर स्वीकार किया जाए, उस समाज को सभ्य कहलाने का कोई अधिकार नहीं।
I’ve figured out India’s number one problem: false pride.
When a society becomes more interested in defending its image than fixing its problems, progress stops. Pride without self-reflection is not strength-it’s denial.
Even though her remarks were outrageous, “this is not a fucking democracy “ will always remain. Whoever comes in power India will be “this is not a fucking democracy “.