बस , ट्रैन में जब भीड़ होती है असली मज़ा तो तब ही आता है ,,,
जब हर नए स्टॉप पर नए - नए , छोटे - बड़े लन्ड आकर "गांड के बीच " मे सेट होते जाते है ,
ओर हर झटके के साथ मज़ा बढ़ता जाता है ,,,,
कई " लंड " तो पेंट में ही पानी छोड़ देते है ....
बस , ट्रैन में जब भीड़ होती है असली मज़ा तो तब ही आता है ,,,
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