जो फैजल खान को अभी भी बाप मान रहा है वो आंख फाड़कर इस फर्जीवाड़े को देखों.
जो इस सच्चाई के बाद भी विपिन सर को गाली देते हो वो भी देखों.
देखों कैसे फै़जल खान बच्चों को इमोशनली ब्लैकमेल कर शिक्षा माफिया बना..
फर्जी RO,फर्जी इनकमटैक्स ,फर्जी Air force 🥺
#Khan#vipinsir#Bihar
ये है भारत में सबसे अधिक दुरुपयोग होने वाले 5 कानूनों की सूची। इन कानूनों के तहत देश में लाखों परिवार फर्जी मुकदमों का सामना कर रहे हैं, जिससे न्याय की मूल भावना कमजोर पड़ रही है।
दुरुपयोग होने वाले एक्ट की सूची
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1. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
• इस कानून का उद्देश्य अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को अत्याचार से सुरक्षा देना था। लेकिन कई मामलों में इसे व्यक्तिगत बदले, राजनीतिक दबाव या संपत्ति विवादों के लिए इस्तेमाल किया गया। NCRB और राज्य सरकारों के रिपोर्ट के अनुसार, 10%–40% तक मामलों को जांच में झूठा या निराधार पाया गया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने भी वर्ष 2018 में इस एक्ट के बारे में कहा था कि – इस कानून का उद्देश्य संरक्षण है, प्रतिशोध नहीं।
2. धारा 498A/ दहेज निषेध अधिनियम, 1961
• महिलाओं को दहेज उत्पीड़न से बचाने के लिए बना यह कानून अब सबसे अधिक विवादित है। कई बार पूरे परिवार को झूठे आरोपों में फँसाया गया। NCRB के अनुसार 25–30% मामलों में आरोप साबित नहीं हुए, और सुप्रीम कोर्ट ने चेताया कि “498A का अंधाधुंध प्रयोग कानून की गरिमा को कमज़ोर करता है।”
3. बालकों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012
• बच्चों को यौन अपराधों से बचाने वाला यह कानून कई बार किशोरों के सहमति वाले संबंधों में भी लगाया गया। लेकिन परिवारजनों द्वारा लड़के के खिलाफ पोस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है। अध्ययनों के अनुसार 15–20% केस झूठे या अतिशयोक्तिपूर्ण पाए गए। जिसके परिणाम स्वरूप असली बाल शोषण मामलों से ध्यान भटक गया है।
4. घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम, 2005
• घरेलू हिंसा से महिलाओं की रक्षा के लिए बना यह कानून कई बार दहेज या संपत्ति विवादों में हथियार बन गया।
कई केस बाद में “सेटलमेंट” के रूप में वापस लिए गए। एक अनुमान के अनुसार लगभग 10–20% केस झूठे या बदले की नीयत से दर्ज हुए।
5. बलात्कार/ आईपीसी की धारा 376
• महिलाओं को यौन शोषण से सुरक्षा देने वाला यह कानून भी दुरुपयोग से अछूता नहीं रहा। NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, 8–10% रेप केस फर्जी या साबित न हो पाए। कई बार “शादी का वादा/ नौकरी या नौकरी में प्रमोशन/ आपसी सहमति से बनाए गए रिश्ते में धन–उगाही या रिश्ते में मतभेद” को भी झूठे आरोपों में बदल दिया जाता है।
~ साभार: @NCIBHQ
ये है भारत के 10 सबसे विश्वसनीय संस्थानों की सूची। जो जनता के बीच अपनी पारदर्शिता, सेवा, राष्ट्रीय हित में योगदान और निरंतरता के कारण सबसे अधिक विश्वसनीय माने जाते हैं।
भारत के 10 सबसे विश्वसनीय संस्थान
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1. भारतीय सशस्त्र बल
कारण: देश की सीमाओं की रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में हमेशा आगे। अनुशासन, बलिदान और देशभक्ति का सर्वोच्च प्रतीक।
2. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय
कारण: यह नागरिकों को न्याय दिलाने का अंतिम सहारा है। संविधान और कानून की रक्षा करती है। सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट्स भ्रष्टाचार और कार्यपालिका पर नियंत्रण रखने की शक्ति रखती है।
3. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
कारण: देश की मौद्रिक और वित्तीय स्थिरता का संरक्षक। महँगाई, ब्याज दरें और मुद्रा आपूर्ति नियंत्रित करता है। बैंकिंग प्रणाली की निगरानी और उपभोक्ताओं की सुरक्षा करता है।
4. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
कारण: कम बजट में विश्व स्तरीय अंतरिक्ष मिशन। चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-L1 जैसे अभियानों से भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की पहचान।
5. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
कारण: प्रशासनिक अधिकारियों (IAS, IPS, IFS आदि) की चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी। योग्यता और प्रतिस्पर्धा के आधार पर चयन। देशभर के युवाओं में निष्पक्ष संस्था की पहचान।
6. भारतीय चुनाव आयोग
(हालांकि वर्तमान समय में विपक्षी पार्टियों द्वारा इसके निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाया जा रहा हैं, लेकिन जनता के बीच अभी भी बड़े मामलों में इसकी छवि मजबूत है)
कारण: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी। लोकतंत्र की मजबूती का आधार। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और सख्त चुनाव आचार संहिता लागू करता है।
7. महालेखा परीक्षक (CAG)
कारण: सरकारी खर्च का हिसाब-किताब रखता है। भ्रष्टाचार और गड़बड़ी उजागर करने में सक्षम। संसद और जनता के प्रति जवाबदेह।
8. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
कारण: यह केंद्र सरकार विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए निगरानी रखता है। सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की शक्ति। पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने वाला संवैधानिक निकाय।
9. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
कारण: गंभीर अपराध, भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय महत्व के मामलों की जाँच। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा मामलों की निगरानी। बड़े अपराधों की जाँच में जनता का भरोसा बनाए रखने वाली एजेंसी।
10. भारतीय डाक विभाग
कारण: गाँव-गाँव तक सबसे बड़ा नेटवर्क। छोटे बचत योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं से करोड़ों लोगों का भरोसा। सस्ती, सुरक्षित और विश्वसनीय डाक एवं पार्सल सेवा।
~ साभार: @NCIBHQ
आवश्यक जानकारी
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अगर आप वाहन चालक है तो एनसीआईबी मुख्यालय द्वारा सुझाए गए 10 आवश्यक आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर आपके पास सुरक्षित होना चाहिए। उपरोक्त हेल्पलाइन किसी आपात स्थिति जैसे दुर्घटना/ झगड़ा/ लूटपाट या अन्य आपात स्थिति में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर
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• 112 – ऑल-इन-वन इमरजेंसी नंबर
किसी भी तरह की आपात स्थिति जैसे दुर्घटना, मेडिकल इमरजेंसी, आग लगना, लूटपाट, झगड़ा या गंभीर खतरा) में तुरंत 112 डायल करें। यह पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस तीनों सेवाओं को एक साथ जोड़ता है।
• 1033 – NHAI हेल्पलाइन
अगर आप हाईवे पर यात्रा कर रहे हैं और सड़क दुर्घटना हो गई हो या गाड़ी खराब हो गई हो, इस स्थिति में आपको एम्बुलेंस या क्रेन की ज़रूरत हो तो 1033 डायल करके तुरंत सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
• 1073 – सड़क दुर्घटना आपात सेवा
यह हेल्पलाइन विशेष रूप से रोड एक्सीडेंट्स के लिए है। इसमें दुर्घटना स्थल पर प्राथमिक उपचार, एम्बुलेंस, और नज़दीकी अस्पताल की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
• 18001804200 – परिवहन मंत्रालय हेल्पलाइन
इस नंबर पर वाहन चालकों को वाहन/ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी समस्या/ परिवहन से जुड़ी शिकायत/ सड़क सुरक्षा से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है।
• 1033 - फास्टैग हेल्पलाइन
यदि टोल प्लाज़ा पर फास्टैग से जुड़ी टैग स्कैन न होना/ डबल कटौती होना/ गलत डेबिट की समस्या हो तो इस हेल्पलाइन से तुरंत सहायता मिल सकती है।
• 182 – रेलवे हेल्पलाइन
वाहन चलाते समय रास्ते पर पड़ने वाले रेलवे ट्रैक/क्रॉसिंग पर अगर कोई समस्या हैं या फिर या कोई दुर्घटना हो गई हो तो इस नंबर पर तुरंत कॉल करें। यह नंबर यात्रियों और वाहन चालकों दोनों के लिए है ताकि रेलवे और सड़क पर दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
• 1091 – महिला हेल्पलाइन
यात्रा के दौरान यदि किसी महिला को छेड़छाड़, उत्पीड़न, असुरक्षा या आपराधिक स्थिति का सामना करना पड़े तो 1091 पर कॉल करें। कई राज्यों में यह नंबर 24×7 एक्टिव रहता है।
• 1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन
यदि यात्रा के दौरान किसी बच्चे को खतरे, उत्पीड़न, अपहरण, या बाल श्रम की स्थिति में देखें तो तुरंत 1098 पर सूचना दें।
• 1930 – साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन
यात्रा के दौरान अगर कोई संदिग्ध आपके वाहन के नंबर प्लेट साइड में खड़ा होकर फोटो/ वीडियो शूट करता है। जिससे भविष्य में किसी फर्जीवाड़े का संदेह हो तो इस नंबर पर कॉल करें।
• 100 - स्थानीय पुलिस कंट्रोल रूम
वाहन चोरी, लूटपाट, झगड़ा, हाइवे लूट, गाड़ी का एक्सीडेंट या किसी अन्य स्थानीय समस्या में सीधे अपने ज़िले की पुलिस कंट्रोल रूम हेल्पलाइन पर कॉल करें। ध्यान रहें कि कई प्रदेश में 100 नंबर को बंद करके उसके स्थान पर 112 नंबर संचालित किया जाता है।
~ सादर: @NCIBHQ
देश के बड़े घोटालों की सूची
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01. जीप घोटाला
वर्ष 1948 – लगभग ₹80 लाख
02. मुद्रा (LIC) घोटाला
वर्ष 1957 – लगभग ₹1.25 करोड़
03. बोफोर्स घोटाला
वर्ष 1987 – लगभग ₹64 करोड़
04. हवाला घोटाला
वर्ष 1991 – लगभग ₹100 करोड़
05. यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया घोटाला
वर्ष 1998 – लगभग ₹4800 करोड़
06. तेलगी स्टाम्प पेपर घोटाला
वर्ष 2003 – लगभग ₹30,000 करोड़
07. सत्यम घोटाला
वर्ष 2009 – लगभग ₹14,000 करोड़
08. 2G स्पेक्ट्रम घोटाला
वर्ष 2008 – लगभग ₹1.76 लाख करोड़
09. कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला
वर्ष 2010 – लगभग ₹70,000 करोड़
10. आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला
वर्ष 2010 – लगभग ₹8,000 करोड़
11. कोयला घोटाला
वर्ष 2012 – लगभग ₹1.86 लाख करोड़
12. चारा घोटाला (बिहार)
वर्ष 1990 – लगभग ₹950 करोड़
13. विजय माल्या बैंक लोन घोटाला
वर्ष 2016 – लगभग ₹9,000 करोड़
14. निरव मोदी–पीएनबी घोटाला
वर्ष 2018 – लगभग ₹11,400 करोड़
15. आईएल&एफएस घोटाला
वर्ष 2018 – लगभग ₹90,000 करोड़
~ सादर: @NCIBHQ
पंक्ति बाज़ार में टॉप 20 किताबें :
1. सरकारी चाय के लिए (उपन्यास)
2. जाना जरुरी है क्या (कविता)
3. गुनाहों का देवता (उपन्यास)
4. द से दुःख, बडी ई से ईश्वर (कविता)
5. इतवार का एक दिन (कहानी संग्रह)
6. दीवार में एक खिड़की रहती थी (उपन्यास)
7. देर रात तक (कहानी कविता के बीच)
8. उदास शहर (कविता)
9. रेत की मछली (उपन्यास)
10. अक्टूबर जंक्शन (उपन्यास)
11. कुढ़न (कविता)
12. दुःख के पंख (कविता)
13. सूरज का सांतवा घोड़ा (उपन्यास)
14. लिफ़ाफ़ा (प्रेम पत्र)
15. यार पापा (उपन्यास)
16. नदियाँ नहीं रुकतीं (कविता)
17. कोहबर की शर्त (उपन्यास)
18. मोस्ट वांटेड ज़िन्दगी (सेल्प हेल्फ़ कविताएं)
19. कनुप्रिया (काव्य संग्रह)
20. मुसाफ़िर कैफ़े (उपन्यास)
इनमें से आपने कौन कौन सी पढ़ी हैं ?
(टॉप 50 किताबों की सूची pankti bazaar पर देख सकते हैं और डिस्काउंट पर खरीद भी सकते हैं।)
परीक्षा तो ऐसे लेते हैं जैसे सीधा अंतरिक्ष में भेज रहे हों..
नकल करने की कोई सोच भी नहीं सकता.!
लेकिन फिर क्या होता है?
या तो पेपर लीक, या फिर घूस देने वालों की भर्ती।
अहमदाबाद में क्रैश हुये एयर इंडिया
क़े प्लेन में आख़री वक्त कोई वीडियो बना रहा रहा था
लेकिन एक ही पल में #planecrash हुआ
और सबकुछ खत्म हो गया ✍️
#AirIndia
तवायफ के पांव में मोच क्या आई...
शहर के मुरीदों का भेद खुल गया..!!
कहीं पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने पर आज भी अमेरिका का कंट्रोल तो नहीं? जिसे अतीत में वह भारत और चीन पर दबाव बनाने के लिए रखा हो।
क्योंकि जिस भिखारी के पास ढंग का फाइटर जेट खरीदने की औकात नहीं परमाणु हथियार क्या खाक संभालेगा?
बाते हवा हवाई नही है बल्कि इसके ठोस कारण है।
आइए पूरा लेख कमेंट में पढ़िए... 👇👇
आवश्यक जानकारी
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यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ झूठी एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है, तो वे संबंधित पुलिस अधिकारियों या आरोप लगाने वाले व्यक्ति को नीचे दिए गए प्रारूप का उपयोग करते हुए वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेज सकते हैं।
विधिक नोटिस
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सेवा में,
पुलिस आयुक्त/थाना प्रभारी, [संबंधित पुलिस स्टेशन का नाम]
विषय: झूठी एवं बेबुनियाद एफआईआर पंजीकृत करने के संबंध में विधिक नोटिस।
महोदय/महोदया,
मैं, [आपका नाम], [आपका पता], [आपका संपर्क नंबर], इस विधिक नोटिस को [झूठी एफआईआर के आरोपी का नाम] की ओर से भेज रहा/रही हूँ।
यह ध्यान दिलाया जाता है कि दिनांक [FIR दर्ज करने की तिथि] को आपके थाना में एफआईआर संख्या [FIR नंबर] के तहत [धारा संख्या] के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, उपरोक्त FIR में शिकायतकर्ता [शिकायतकर्ता का नाम/ पिता का नाम एवं पता यदि ज्ञात हो तो] द्वारा जो भी आरोप लगाया गया है वो पूरी तरह से झूठा, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण है।
इस झूठे मुकदमे को दर्ज करने से मेरे मुवक्किल की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँचा है और उसे मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। अतः, उपरोक्त नोटिस के माध्यम से मेरे मुवक्किल द्वारा निम्नलिखित मांगें की जाती हैं—
1. तत्काल प्रभाव से इस झूठी एफआईआर को वापस लिया जाए और इसकी स्वतंत्र जांच करवाई जाए।
2. संबंधित अधिकारी/शिकायतकर्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए, जिन्होंने दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठी शिकायत दर्ज करवाई।
3. मेरे मुवक्किल को हुए मानसिक एवं सामाजिक नुकसान के लिए [मांग की गई राशि] का हर्जाना दिया जाए।
यदि 15 दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो मेरा मुवक्किल माननीय उच्च न्यायालय/निचली अदालत में पुलिस अधिकारियों एवं शिकायतकर्ता के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने को बाध्य होगा।
सादर,
[वकील का नाम]
[वकील का पता]
[बार काउंसिल नंबर]
[तारीख]
(नोट: झूठी FIR पर पुलिस को कानूनी नोटिस भेजना एक संवेदनशील कानूनी मामला है, किसी अनुभवी वकील से सलाह लेना महत्वपूर्ण है)
~ सादर : @NCIBHQ
आवश्यक जानकारी :~
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अगर पुलिस FIR (First Information Report) दर्ज करने से इनकार करती है, तो आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
1. उच्च अधिकारी से शिकायत करें,
एफआईआर दर्ज करने हेतु सबसे पहले संबंधित पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (SHO) से संपर्क करें। यदि SHO भी FIR दर्ज नहीं करता या FIR दर्ज करने में आनाकानी करता है तो अपने जिला/ शहर के पुलिस अधीक्षक (SP)/ पुलिस आयुक्त (CP) या डीआईजी/आईजी को लिखित शिकायत दें।
2. ऑनलाइन FIR दर्ज करें
कई राज्यों में ऑनलाइन FIR दर्ज करने की सुविधा होती है। इसलिए संबंधित राज्य की पुलिस वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत करें। साथ ही कुछ राज्यों में मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा भी शिकायत पंजीकृत करने हेतु पोर्टल बनाया गया है (जैसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनसुनवाई पोर्टल) आप उपरोक्त पोर्टल पर भी पुलिस द्वारा FIR दर्ज न करने की शिकायत कर सकते है।
3. न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दें,
यदि पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही, तो अपने वकील के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन देकर मा० न्यायालय से FIR दर्ज करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। ध्यान रहे कि मजिस्ट्रेट पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच का आदेश दे सकता है।
4. मानवाधिकार आयोग या लोकायुक्त से शिकायत,
यदि मामला गंभीर है और पुलिस पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है, तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) या लोकायुक्त में भी आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
5. हाई कोर्ट में याचिका दायर करें,
अगर कोई भी उपाय काम न करे, तो हाई कोर्ट में रिट याचिका (Writ Petition) दायर कर सकते हैं, जिससे पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया जा सकता है।
6. मीडिया और सोशल मीडिया का सहारा लें,
कई बार मीडिया और सोशल मीडिया पर मामला उठाने से पुलिस हरकत में आ जाती है और FIR दर्ज कर लेती है।
~ सादर : @NCIBHQ