*युवाओं का हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर पुलिस भर्ती मुख्य परीक्षा की तिथियों में बदलाव*
*शिक्षक भर्ती और पुलिस भर्ती परीक्षा की तिथियां टकराने से अभ्यर्थियों को हो रही थी परेशानी, मुख्यमंत्री ने लिया त्वरित संज्ञान*
*अब सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर मुख्य परीक्षा 02, 03 एवं 04 नवम्बर को होगी आयोजित*
*मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा - परीक्षा तिथियों के टकराव से कोई भी पात्र युवा अवसर से वंचित न रहे*
रायपुर 10 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के युवाओं के हित में संवेदनशील निर्णय लेते हुए शिक्षक भर्ती परीक्षा और सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग/प्लाटून कमांडर मुख्य परीक्षा की तिथियां एक साथ होने से अभ्यर्थियों को हो रही परेशानी का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को परीक्षा तिथियों में आवश्यक बदलाव के निर्देश दिए थे। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग/प्लाटून कमांडर (मुख्य) परीक्षा-2024 की संशोधित तिथियां घोषित कर दी हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा गृह (पुलिस) विभाग के अंतर्गत सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग/प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 की प्रारंभिक लिखित परीक्षा का परिणाम 04 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। इसके साथ मुख्य परीक्षा के आयोजन के लिए 24, 25 एवं 26 अक्टूबर 2026 की संभावित तिथियां निर्धारित की गई थीं। इसी दौरान 25 अक्टूबर 2026 को शिक्षक भर्ती परीक्षा भी आयोजित होने के कारण दोनों परीक्षाओं की तिथियों में टकराव की स्थिति बन गई थी। इससे दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के सामने किसी एक परीक्षा से वंचित होने की आशंका उत्पन्न हो गई थी।
अभ्यर्थियों की इस व्यावहारिक समस्या की जानकारी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संज्ञान में आने पर उन्होंने तत्काल अधिकारियों को युवाओं के हित में समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा मुख्य परीक्षा की पूर्व निर्धारित तिथियों में परिवर्तन किया गया है। अब सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग/प्लाटून कमांडर (मुख्य) परीक्षा-2024 का आयोजन 02, 03 एवं 04 नवम्बर 2026 को किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवाओं का हित हमारी सरकार के लिए सर्वोपरि है। प्रदेश के युवाओं को आगे बढ़ने का हर अवसर मिले और केवल परीक्षा तिथियों के टकराव के कारण कोई भी पात्र अभ्यर्थी अवसर से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवा वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। ऐसे में प्रशासनिक अथवा परीक्षा कार्यक्रम से जुड़ी किसी व्यावहारिक समस्या के कारण उनके सामने दो अवसरों में से किसी एक को चुनने की विवशता नहीं होनी चाहिए। राज्य सरकार युवाओं की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील है और उनके भविष्य से जुड़े विषयों पर तत्परता से निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने मुख्य परीक्षा के लिए चिन्हांकित अभ्यर्थियों को पृथक से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने की सलाह दी है। इस संबंध में विस्तृत सूचना आयोग द्वारा अलग से जारी की जाएगी। अभ्यर्थियों से आयोग की वेबसाइट का नियमित अवलोकन करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने आगामी भर्ती परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले सभी अभ्यर्थियों को उज्ज्वल भविष्य और सफलता के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
छत्तीसगढ़ की माटी की महक को अपनी लेखनी के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले सुप्रसिद्ध कवि एवं पद्मश्री स्व. डॉ. सुरेन्द्र दुबे जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
उनकी लेखनी में छत्तीसगढ़ की लोकभाषा, संस्कृति, जीवन-मूल्य और आमजन की भावनाएं झलकती थीं।
साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को अपनी माटी, अपनी भाषा और अपनी समृद्ध लोक विरासत से जुड़े रहने की प्रेरणा देती रहेंगी।
#हर_घर_तिरंगा… अब हर प्रशासन में भी स्वाभिमान चाहिए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने “हर घर तिरंगा” का आह्वान किया, तो पूरा देश उठ खड़ा हुआ।
एक आवाज़ से लोग तिरंगा फहराने लगे।
कोरोना काल में थाली बजाई, ताली बजाई।
देश के लिए कुछ भी करने को तैयार दिखे। यह नेतृत्व की ताकत है।
यह दिखाता है कि आम भारतीय का स्वाभिमान जगाना कितना आसान हो सकता है, जब सही आवाज़ आए। पर एक जापानी पर्यटक का स्मार्ट ग्लास हमें दूसरा आईना दिखाता है। गुरुग्राम में बिना हेलमेट के ₹1000 कैश लिया गया, रसीद नहीं दी गई।
वीडियो वायरल होते ही तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड हो गए।
“Zero Tolerance Against Corruption” का बयान जारी हुआ। विदेशी ने शिकायत की तो सिस्टम जाग गया।
क्योंकि विदेश में भारत की छवि खराब न हो। यह अच्छी बात है।
पर सवाल यह है — जब आम भारतीय रोज ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ के सामने यही अनुभव करता है, तो क्या वही रफ्तार और वही सख्ती दिखती है? हर घर तिरंगा अभियान ने आम नागरिकों का स्वाभिमान जगाया।
अब जरूरत है प्रशासनिक स्वाभिमान जगाने की।
खासकर ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ में। 2026 का 15 अगस्त आने वाला है।
लाल किले से और हर मुख्यमंत्री के भाषण में फिर “Zero Tolerance” और “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” की बातें होंगी।
यह स्वाभाविक है। पर क्या इस बार सिर्फ बातें होंगी, या ठोस कदम भी बताए जाएंगे?
क्या सिर्फ आम मतदाता का स्वाभिमान जगाया जाएगा, या प्रशासन का भी? एक व्यक्ति ईमानदार हो जाए तो सिस्टम नहीं सुधरता।
सिस्टम तब सुधरता है जब पूरा ढांचा जवाबदेह बने। मोदी जी ने देश के स्वाभिमान को जगाने का काम किया है।
अब उसी नेतृत्व से यह उम्मीद की जा सकती है कि प्रशासनिक स्वाभिमान भी जगे। क्योंकि तिरंगा सिर्फ घरों पर फहराने से नहीं,
हर दफ्तर और हर चौराहे पर ईमानदारी से भी फहराना चाहिए। 2047 का विकसित भारत तभी संभव होगा,
जब “Zero Tolerance” सिर्फ भाषण का हिस्सा न रहकर,
सड़क और सिस्टम का हिस्सा बन जाए।
जापानी पर्यटक ने गुरुग्राम में बिना हेलमेट के ₹1000 कैश दिया, रसीद नहीं ली।
स्मार्ट ग्लास से रिकॉर्ड किया।
वीडियो वायरल… 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड। विदेशी की शिकायत पर तुरंत एक्शन।
अपने नागरिकों के साथ भी यही रफ्तार कब आएगी? Zero Tolerance सिर्फ भाषण में नहीं, सड़क पर भी दिखना चाहिए। #ZeroTolerance #CorruptionFreeIndia
यह घटना भारत में ट्रैफिक पुलिस की रिश्वतखोरी के खिलाफ एक और उदाहरण बन गई है, खासकर विदेशी पर्यटकों के साथ। स्मार्ट ग्लासेस जैसी टेक्नोलॉजी ने इसे पकड़ने में मदद की।
माननीय परिवहन मंत्री श्री @KedarKashyapBJP जी ,क्या आपको याद है?जुलाई 2017 – जब एबीपी न्यूज के खुलासे के बाद पूरे प्रदेश में #आरटीओ चेक पोस्ट पर खुलेआम लूट का पर्दाफाश हुआ था। तब मुख्यमंत्री @drramansingh के निर्देश पर तत्कालीन परिवहन मंत्री @RajeshMunat ने एक झटके में प्रदेश के सभी 16 सीमावर्ती आरटीओ बैरियर बंद कर दिए थे। रात 12 बजे से चेक पोस्ट सील हो गए थे। ड्राइवर खुश थे, ट्रक मालिक मिठाई बांट रहे थे। सरकार ने कहा था – अब छत्तीसगढ़ बैरियर-फ्री राज्य बनेगा।जुलाई 2020 – @INCChhattisgarh भूपेश बघेल सरकार ने इन्हीं 16 चेक पोस्टों को दोबारा खोल दिया। राजस्व और सुरक्षा का बहाना बनाकर। @BJPChhattisgarhने तब जोर-शोर से विरोध किया था कि यह भ्रष्टाचार को फिर से बढ़ावा देना है।अक्टूबर 2023 – विधानसभा चुनाव के दौरान रायपुर पश्चिम से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व परिवहन मंत्री राजेश मूणत ने स्पष्ट वादा किया था –
“भाजपा की सरकार आने पर आरटीओ बैरियर बंद कर दिए जाएंगे। हमने पहले बंद किए थे, कांग्रेस ने खोले, अब हम फिर बंद करेंगे।”चुनाव हुआ। ड्राइवर समाज – ऑटो चालक, टैक्सी चालक, छोटी गाड़ी के चालक, ट्रक-ट्रेलर के बड़े ड्राइवर और उनके परिवारों ने भाजपा को वोट दिए। आप सत्ता में आए। नए-नए लोगों को नए-नए पद मिले।अब बताइए मंत्री जी –
क्या बदला?मार्च 2025 में दैनिक भास्कर ने 40 दिनों तक रिपोर्टरों को ट्रक ड्राइवर बनाकर स्टिंग ऑपरेशन किया। नतीजा सामने आया – 16 बॉर्डर चेक पोस्ट पर “एंट्री फीस” के नाम पर हर महीने औसतन 13.5 करोड़ रुपये की अवैध वसूली हो रही है। सालाना अनुमान लगभग 162 करोड़ रुपये। 2025 में बस्तर हाईवे पर आरटीओ उड़ान दस्ते बिना रसीद के 300-400 रुपये वसूल रहे थे। 2026 में भी चिल्फी जैसे चेक पोस्ट पर शिकायतें आ रही हैं। कांग्रेस सरकार ने पांच साल लूटा। भाजपा सरकार आने के ढाई साल बाद भी वही चेक पोस्ट, वही वसूली, वही डर। अब बात करते हैं उन छोटे पिकअप वालों की, जो 13 कुंतल, 15 कुंतल या 2 टन माल लेकर सड़कों पर दौड़ते हैं। ये लोग मोदी जी के स्वरोजगार और एमएसएमई के नाम पर अपना छोटा-मोटा व्यवसाय चला रहे हैं। अर्थव्यवस्था में इनका योगदान बहुत बड़ा है। ये गरीब परिवार वाले लोग हैं, जो रोज अपना पेट पालते हैं। बड़े ट्रांसपोर्टर ओवरलोड का चालान भर सकते हैं, क्योंकि उनके पास मोटी कमाई होती है। लेकिन ये छोटे स्वरोजगारी ड्राइवर क्या करेंगे? अगर उन पर 2500-2500 रुपये का चालान काट दिया जाए तो घर का खर्च कैसे चलेगा? धमतरी में हाल ही में ऐसा ही एक कांड हुआ है। उसका वीडियो मौजूद है – जरूर देखें। छोटी पिकअप पर इतना भारी चालान कि ड्राइवर हक्का-बक्का रह गया। ड्राइवर समाज को याद रखिए।
इन्हीं लोगों के वोटों ने आपको सत्ता दिलाई। अब वही लोग सड़कों पर खड़े होकर पूछ रहे हैं –
“वादा कहां गया?”आप परिवहन मंत्री हैं। आपके जिम्मे है मोटर वाहन अधिनियम का सही क्रियान्वयन, सड़क सुरक्षा और आम ड्राइवर को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाना। लेकिन आज भी चालान का डर, रिश्वत की मांग और चेक पोस्ट पर “कुछ तो देना पड़ेगा” वाला माहौल जस का तस है। छोटे स्वरोजगारी को भी बड़े ट्रांसपोर्टर की तरह सजा दी जा रही है। मंत्री जी, याद रखिए –
2017 में बंद किए, 2020 में खोले गए, 2023 में बंद करने का वादा किया… और 2026 में भी वही पुरानी व्यवस्था चल रही है। अब या तो चेक पोस्ट और अनावश्यक चेकिंग बंद कीजिए, छोटे पिकअप और स्वरोजगारी ड्राइवरों पर अत्याचार रोकिए, भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई कीजिए…
या फिर स्वीकार कीजिए कि “सुशासन” सिर्फ नारे तक सीमित है।ड्राइवर समाज इंतजार कर रहा है।
अब आपकी बारी है।सादर,
छत्तीसगढ़ के ड्राइवर समाज की आवाज
सेवा में:
माननीय परिवहन मंत्री @KedarKashyapBJP जी एवं छत्तीसगढ़ सरकार माननीय मंत्री जी,क्या आपको याद है?जुलाई 2017 – जब ABP News के खुलासे के बाद पूरे प्रदेश में आरटीओ चेक पोस्ट पर खुलेआम लूट का पर्दाफाश हुआ था। तब मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर तत्कालीन #परिवहन मंत्री @RajeshMunat ने एक झटके में प्रदेश के सभी 16 सीमावर्ती आरटीओ बैरियर बंद कर दिए थे। रात 12 बजे से चेक पोस्ट सील हो गए थे। ड्राइवर खुश थे, ट्रक मालिक मिठाई बांट रहे थे। सरकार ने कहा था – अब #छत्तीसगढ़ बैरियर-फ्री राज्य बनेगा।जुलाई 2020 – @Incchhatishgarh की भूपेश बघेल सरकार ने इन्हीं 16 चेक पोस्टों को दोबारा खोल दिया। राजस्व और सुरक्षा का बहाना बनाकर। ने तब जोर-शोर से विरोध किया था कि यह भ्रष्टाचार को फिर से बढ़ावा देना है।अक्टूबर 2023 – #विधानसभा_चुनाव के दौरान रायपुर पश्चिम से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व परिवहन मंत्री राजेश मूणत ने स्पष्ट वादा किया था –
“भाजपा की सरकार आने पर आरटीओ बैरियर बंद कर दिए जाएंगे। हमने पहले बंद किए थे, कांग्रेस ने खोले, अब हम फिर बंद करेंगे।”चुनाव हुआ। ड्राइवर समाज – ऑटो चालक, टैक्सी चालक, छोटी गाड़ी के चालक, ट्रक-ट्रेलर के बड़े ड्राइवर और उनके परिवारों ने भाजपा को वोट दिए। आप सत्ता में आए। नए-नए लोगों को नए-नए पद मिले।अब बताइए मंत्री जी –
क्या बदला?मार्च 2025 में #दैनिक_भास्कर ने 40 दिनों तक रिपोर्टरों को ट्रक ड्राइवर बनाकर स्टिंग ऑपरेशन किया। नतीजा सामने आया – 16 बॉर्डर चेक पोस्ट पर “एंट्री फीस” के नाम पर हर महीने औसतन 13.5 करोड़ रुपये की अवैध वसूली हो रही है। सालाना अनुमान लगभग 162 करोड़ रुपये। 2025 में बस्तर हाईवे पर आरटीओ उड़ान दस्ते बिना रसीद के 300-400 रुपये वसूल रहे थे। 2026 में भी चिल्फी जैसे चेक पोस्ट पर शिकायतें आ रही हैं। कांग्रेस सरकार ने पांच साल लूटा। भाजपा सरकार आने के ढाई साल बाद भी वही चेक पोस्ट, वही वसूली, वही डर। अब बात करते हैं उन छोटे पिकअप वालों की, जो 13 कुंतल, 15 कुंतल या 2 टन माल लेकर सड़कों पर दौड़ते हैं। ये लोग मोदी जी के स्वरोजगार और एमएसएमई के नाम पर अपना छोटा-मोटा व्यवसाय चला रहे हैं। अर्थव्यवस्था में इनका योगदान बहुत बड़ा है। ये गरीब परिवार वाले लोग हैं, जो रोज अपना पेट पालते हैं। बड़े ट्रांसपोर्टर ओवरलोड का चालान भर सकते हैं, क्योंकि उनके पास मोटी कमाई होती है। लेकिन ये छोटे स्वरोजगारी ड्राइवर क्या करेंगे? अगर उन पर 2500-2500 रुपये का चालान काट दिया जाए तो घर का खर्च कैसे चलेगा? #धमतरी में हाल ही में ऐसा ही एक कांड हुआ है। उसका वीडियो मौजूद है – जरूर देखें। छोटी पिकअप पर इतना भारी चालान कि ड्राइवर हक्का-बक्का रह गया। ड्राइवर समाज को याद रखिए।
इन्हीं लोगों के वोटों ने आपको सत्ता दिलाई। अब वही लोग सड़कों पर खड़े होकर पूछ रहे हैं –
“वादा कहां गया?”आप परिवहन मंत्री हैं। आपके जिम्मे है मोटर वाहन अधिनियम का सही क्रियान्वयन, सड़क सुरक्षा और आम ड्राइवर को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाना। लेकिन आज भी चालान का डर, रिश्वत की मांग और चेक पोस्ट पर “कुछ तो देना पड़ेगा” वाला माहौल जस का तस है। छोटे स्वरोजगारी को भी बड़े ट्रांसपोर्टर की तरह सजा दी जा रही है। मंत्री जी, याद रखिए –
2017 में बंद किए, 2020 में खोले गए, 2023 में बंद करने का वादा किया… और 2026 में भी वही पुरानी व्यवस्था चल रही है। अब या तो चेक पोस्ट और अनावश्यक चेकिंग बंद कीजिए, छोटे पिकअप और स्वरोजगारी ड्राइवरों पर अत्याचार रोकिए, भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई कीजिए…
या फिर स्वीकार कीजिए कि “सुशासन” सिर्फ नारे तक सीमित है।ड्राइवर समाज इंतजार कर रहा है।
अब आपकी बारी है।सादर,
छत्तीसगढ़ के ड्राइवर समाज की आवाज
नगर_निगम की लीपापोती या जनसमस्याओं का समाधान? टैक्स वसूली पूरी, तो जवाबदेही अधूरी क्यों?
#शहर का विकास केवल कागजों और भारी-भरकम बजट के दावों तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसकी असलियत धरातल पर नजर आती है। लेकिन जब बात स्थानीय नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं और सड़कों की बदहाली की आती है, तो नगर निगम प्रशासन का रवैया हमेशा बहानेबाजी और खानापूर्ति वाला ही नजर आता है।
हाल ही में जब नागरिकों द्वारा क्षेत्र की बदहाल सड़कों, जानलेवा गड्ढों और जलभराव को लेकर आधिकारिक हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज कराई गईं, तो प्रशासन की ओर से गिट्टी/डस्ट की एक-आध गाड़ी गिराकर केवल औपचारिकता पूरी कर दी गई। जब इस अधूरी कार्रवाई पर सवाल उठाए गए, तो जिम्मेदार अधिकारियों का तर्क था कि 'क्षेत्र अनधिकृत है, कृषि भूमि है, डायवर्सन नहीं हुआ है या यह डायवर्जन एरिया है।'
यह तर्क न केवल हास्यास्पद है, बल्कि प्रशासन की दोहरी कार्यप्रणाली को भी बेनकाब करता है:
अवैध निर्माणों और ईंट-भट्टों पर चुप्पी क्यों?
यदि यह क्षेत्र मास्टर प्लान में दर्ज नहीं है या बिना डायवर्सन का है, तो नजूल और सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से चल रहे बड़े-बड़े ईंट-भट्टे और अनधिकृत निर्माण प्रशासन को क्यों दिखाई नहीं देते? कई बार स्थानीय मीडिया और न्यूज़ चैनलों ने इन अवैध गतिविधियों पर आवाज उठाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बिना डायवर्सन 25-30 लाख के मकान और कंस्ट्रक्शन कैसे?
क्षेत्र में बड़े-बड़े ठेकेदार और बिल्डर 25 से 30 लाख रुपये में मकान बनाकर धड़ल्ले से बेच रहे हैं। भारी-भरकम व्यावसायिक निर्माण हो रहे हैं। यदि क्षेत्र अनधिकृत है, तो इन बड़े प्रोजेक्ट्स को किसकी शह पर काम करने दिया जा रहा हैकारी योजनाओं का विरोधाभास:
#प्रधानमंत्री_आवास_योजना (PMAY) जैसी महत्वाकांक्षी सरकारी योजनाएं जब सरकार द्वारा विधिवत पास और स्वीकृत होकर नगर निगम के माध्यम से ही क्षेत्र में लागू की जाती हैं, तब क्या निगम को यह जानकारी नहीं होती कि जमीन का दर्जा क्या है? जब योजनाएं स्वीकृत हो सकती हैं, तो बुनियादी संपर्क सड़कों का निर्माण किस आधार पर रोका जा रहा है?
टैक्स वसूली जारी, तो सुविधाएं गायब क्यों?
नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स, सर्विस चार्ज और अन्य कर वसूलने में जरा भी देर नहीं लगाता। जब आम जनता से टैक्स पूरा लिया जा रहा है और शासन विभाग द्वारा नगर निगम को नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाता है, तो फिर समस्याओं को हल करने में इतनी तकलीफ और टालमटोल क्यों?
हेल्पलाइन की शिकायतों पर केवल एक गाड़ी माल गिराकर लीपापोती करना समस्या का स्थाई समाधान नहीं है।
स्थानीय जनता यह मांग करती है कि:
क्षेत्र का तत्काल उचित सर्वे कराकर टर्निंग पॉइंट और मुख्य मार्गों के बड़े गड्ढों का स्थाई डामरीकरण/पेवर निर्माण कराया जाए।
बिना लेआउट और अवैध रूप से सड़कों को क्षति पहुंचाने वाले भारी व्यावसायिक वाहनों/ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हो।
केवल बहाने बनाने के बजाय पारदर्शी तरीके से बुनियादी नागरिक सुविधाएं (सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट) उपलब्ध कराई जाएं।
प्रशासन को यह याद रखना चाहिए कि जनता का काम केवल टैक्स देना नहीं, बल्कि अपने अधिकारों का हिसाब मांगना भी है!
नगर निगम और जनप्रतिनिधियों को टैग करने के लिए
"टैक्स वसूली में आगे, सुविधाओं के नाम पर केवल लीपापोती! 🛑
हेल्पलाइन शिकायत के बाद सड़क के गड्ढों पर एक गाड़ी डस्ट गिराकर खानापूर्ति करने से नगर निगम अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता। अगर क्षेत्र में डायवर्सन नहीं है, तो अवैध ईंट-भट्टे और 30 लाख के व्यावसायिक कंस्ट्रक्शन कैसे हो रहे हैं? PMAY योजनाएं कैसे पास हो रही हैं?
शासन से पर्याप्त बजट मिलने के बाद भी आम जनता को बदहाल सड़कों पर चलने को मजबूर क्यों किया जा रहा है? जवाब दे नगर निगम प्रशासन
“एक हिंदू अच्छा हिंदू हो, मुसलमान अच्छा मुसलमान, सिख अच्छा सिख और ईसाई अच्छा ईसाई हो… और सब एक-दूसरे के धर्मों का आदर करें।”
“नकलची धर्मनिरपेक्षता” हिंदू को गाली देने से शुरू होती है।
स्वर्गीय श्रीमती सुषमा स्वराज जी
"हां हम सांप्रदायिक हैं"
जब विपक्ष उन्हें सांप्रदायिक कह रहा था, तो उन्होंने गरजते हुए कहा था:
"हां-हां हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम वंदे मातरम् गाने की वकालत करते हैं। हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए लड़ते हैं। हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम धारा 370 को खत्म करने की मांग करते हैं... हम सांप्रदायिक हैं क्योंकि हम हिंदुस्तान में समान नागरिक संहिता बनाने की बात करते हैं।"
और फिर कांग्रेस की तरफ इशारा करके कहा था - "दिल्ली की सड़कों पर 3000 सिखों का कत्ल-ए-आम करने वाले ये लोग सेक्युलर हैं।"
इतना शोर हो रहा था सदन में कि स्पीकर को कहना पड़ा "आप अपनी स्पीच को इतना रोचक मत बनाइए" और चंद्रशेखर जी को खड़े होकर सबको शांत कराना पड़ा था।
1. 2014 में लोकतंत्र की खूबी पर - सोनिया जी को लेकर उन्होंने कहा था "शरारत, शराफत के बीच..." वाला संवाद, जो संसदीय मर्यादा की मिसाल माना जाता है।
2. सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र में - विदेश मंत्री के तौर पर उन्होंने पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब किया था।
सादर नमन स्वर्गीय श्रीमती सुषमा स्वराज जी
"अध्यक्ष जी, ये इतिहास में पहली बार नहीं हुआ जब राज्य का सही अधिकारी राज्याधिकार से वंचित कर दिया गया हो। त्रेता में यही घटना राम के साथ घटी थी, राजतिलक करते-करते वनवास दे दिया गया था। द्वापर में यही घटना धर्मराज युधिष्ठिर के साथ घटी थी...
अध्यक्ष जी, जब एक मंथरा और एक शकुनी, राम और युधिष्ठिर जैसे महापुरुषों को सत्ता से बाहर कर सकते हैं तो हमारे खिलाफ तो कितनी मंथराएं और कितने शकुनी सक्रिय हैं।"
--स्वर्गीय श्रीमती सुषमा स्वराज जी
If a trip to orbit and even the Moon becomes as affordable as a great vacation… yes, many will go.
Technology is incredible, and dreams should come true.But I want to ask something from the depths of the heart—Even if humans reach the Moon… even if we reach Mars…
Will the mind finally become peaceful?
Will true contentment arrive?History has already shown us—
We conquered mountains, crossed oceans, changed cities, changed countries…
Yet the restlessness inside remained the same. The hunger for “more” never left.Contentment does not come from reaching any place.
It comes when the mind finally stops running.
When comparison ends.
When we learn to breathe in the present moment.
When gratitude awakens.Even on the Moon, if the mind is restless, the same loneliness will follow us there.
And in a simple room, if the mind is at peace… that place becomes heaven.Let the outer journey continue…
But the real journey is inward.
That is where peace lives.
That is where happiness lives.
That is where true contentment is found.
@narendramodi भारत की कहानियाँ और प्रतिभा दुनिया भर में पहुँचे, यही कामना है। नेटफ्लिक्स का नया स्टोरीटेलिंग इनिशिएटिव युवा कलाकारों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।
माननीय मंत्री जी,
वन महोत्सव और “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान अच्छी पहल है। बारिश के मौसम में पेड़ लगाने से उनके सूखने की संभावना भी कम रहती है, ये सही समय है। बस एक आंकड़ा जानना चाहता हूँ — कुल कितने पेड़ लगाए गए और उनमें से कितने सफलतापूर्वक जीवित/तैयार हो गए? इसी तरह परिवहन विभाग पर भी ध्यान देने की जरूरत है। छोटी गाड़ी चलाने वाले गरीब मजदूर, ऑटो-रिक्शा और मिनी ट्रक वाले आरटीओ-ट्रैफिक की अस्पष्ट एंट्री फीस और दलाली से परेशान हैं। हर जिले में अलग-अलग रेट चलते हैं।
कृपया छोटी गाड़ियों के लिए एंट्री/परमिट की साफ जानकारी जारी कर दीजिए, ताकि गरीब भी आसानी से अपना रोजगार चला सकें। पेड़ भी हरे रहें और गरीब की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रहे।
अनुच्छेद 370 हटाना वाकई ऐतिहासिक फैसला था। एक राष्ट्र-एक संविधान की दिशा में बड़ा कदम।
लेकिन हाल ही में कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों (दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना) की नाम और धर्म पूछकर हत्या कर दी गई।
370 हटने के इतने साल बाद भी ऐसी मानसिकता क्यों जिंदा है?
कानून और सुरक्षा व्यवस्था इतनी प्रभावी होती तो नाम-धर्म-जाति पूछकर हत्याएं और क्षेत्रीय घटनाएं नहीं होतीं।
उपलब्धि अच्छी है, अब आगे इन मजदूरों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस क्या कदम उठाए जा रहे हैं? मानसिकता खत्म करने का काम अधूरा नहीं रहना चाहिए।
@vishnudsai संत रविदास जी के आदर्शों को नमन।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि समानता और गरिमा का संदेश था।
दोहा जो आज की राजनीति में भी उतना ही प्रासंगिक है –
“ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन कूं अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसै, रविदास रहै प्रसन्न॥”
@vishnudsai शेड्यूल शेयर करने का तरीका अच्छा है।
कमेंट्स में ज्यादातर ऐसे अकाउंट्स हैं जो न किसी को फॉलो करते हैं, न उनके फॉलोअर्स हैं।
आज के डेटा और AI के समय में ये पैटर्न साफ दिख जाता है।
असली एक्टिव लोगों की आवाज़ भी जगह पाए तो और अच्छा लगेगा।
माननीय मुख्यमंत्री जी, वनवासी समाज के विकास की चर्चा अच्छी बात है।
कमेंट सेक्शन देखकर एक बात ध्यान में आई — कई नए अकाउंट्स (जिनके फॉलोअर्स लगभग शून्य हैं और किसी को फॉलो नहीं करते) बहुत सक्रिय दिख रहे हैं।
आज AI और डेटा एनालिटिक्स के जमाने में ये सब आसानी से पता चल जाता है कि कमेंट कहाँ से और कैसे आ रहे हैं।
असली एक्टिव और लंबे समय से जुड़े लोगों की आवाज़ पर भी थोड़ा ध्यान दिया जाए तो और अच्छा लगेगा।
@vishnudsai “बैठक का फोटो अच्छा है।
कमेंट बॉक्स देखकर तो लग रहा है कि छत्तीसगढ़ में ‘एक सुर’ वाली संस्कृति बहुत मजबूत है।
सब एक ही टेम्पलेट से लिख रहे हैं… शानदार समन्वय!”