>ब्रो का नाम गजेंद्र सिंह खिमसर है
>ब्रो राजस्थान का स्वास्थ्य मंत्री है
>ब्रो का काम राजस्थान की स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करना है
>पिछले कुछ दिनों में राजस्थान में 19 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु हो गयी
>ब्रो से जब मीडिया वालों ने सवाल पूछे, तब ब्रो खींसे निपोरने लगा
>ब्रो ने बेशर्मी में PhD कर रखी है
>ब्रो को इस्तीफा देना चाहिए लेकिन ब्रो तो ठीक से जवाब भी नहीं दे पा रहा
आर्थिक तूफ़ान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफ़ी बाँट रहे हैं!
किसान, युवा, महिलाएँ, मज़दूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं - PM हंसकर रील बना रहे हैं, और BJP वाले ताली बजा रहे हैं।
यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।
NEET 2024:
पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द नहीं हुई। मंत्री ने इस्तीफ़ा नहीं दिया। CBI ने जांच बिठाई। एक कमेटी बनी।
NEET 2026:
पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। मंत्री ने फिर इस्तीफ़ा नहीं दिया। CBI फिर जाँच कर रही है। एक और कमेटी बनेगी।
मोदी जी, देश आपसे कुछ सवाल पूछ रहा है - जवाब दो!
बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं?
बार-बार इस "परीक्षा पे चर्चा" पर आप चुप क्यों हैं?
बार-बार फेल हो रहे शिक्षा मंत्री को आप बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं?
#SackPradhan
मोदी सरकार में ज़िम्मेदारी नहीं होती - सिर्फ़ जालसाज़ी का एक तय फ़ॉर्मूला है।
पहले लंबी खामोशी।
फिर गुनहगारों को संरक्षण।
फिर सवाल पूछने वालों पर हमला।
NEET पेपर लीक हुआ - एक भी मंत्री ने इस्तीफ़ा नहीं दिया।
2024 में NTA DG को "हटाया" - अब मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बना दिया।
यह सरकार जवाबदेही लेने वाली नहीं - जवाबदेही से दूर भागने की मशीन है।
#SackPradhan
NEET के 22 लाख बच्चों के साथ धोखा हुआ है। पर मोदी जी एक शब्द भी नहीं बोल रहे।
धर्मेंद्र प्रधान जी को अभी हटाइए, या जवाबदेही ख़ुद लीजिए।
Modi ji, SACK Dharmendra Pradhan ji NOW.
राजस्थान में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों को लंबे समय से सरकार द्वारा भुगतान नहीं किए जाने के कारण गंभीर स्थिति बन गई है। कई अस्पतालों ने कैशलेस उपचार सीमित या बंद करना शुरू कर दिया है, जिससे प्रदेश के लाखों सरकारी कार्मिक, पेंशनर्स और उनके परिवारजन इलाज के लिए परेशान हो रहे हैं। बीमार व्यक्ति को उपचार के समय आर्थिक और प्रशासनिक परेशानी झेलनी पड़े, यह किसी भी व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। आरजीएचएस जैसी योजना का उद्देश्य राहत देना था, लेकिन अस्पतालों के बकाया भुगतान लंबित रहने से इसका लाभ प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को अस्पतालों के लंबित भुगतान को नियमानुसार शीघ्रता से जारी करवाने हेतु आवश्यक निर्देश देने चाहिए ताकि राज्य सरकार के कर्मचारियों व पेंशनर्स को बिना किसी बाधा के उपचार मिल सकें |
जन - स्वास्थ्य से जुड़े विषय को अनावश्यक रूप से लंबित रखना सरकार की नकारात्मक सोच को दर्शाता है |
@RajCMO
इस बार NEET की परीक्षा के लिए केंद्रीय बलों के 2.4 लाख जवानों को तैनात करना चाहिए। सभी DG को परीक्षा केंद्र का प्रभारी बना देना चाहिए। चुनाव आयोग को निगरानी का काम दे देना चाहिए। शर्मनाक है कि एक परीक्षा नहीं करा सकते। मालूम नहीं चोरी से कितने लोग डॉक्टर बन कर अस्पतालों में काम कर रहे हैं और राष्ट्रवादी राजनीति के पीछे छुपे हुए हैं।
देश में धर्म और राष्ट्रवाद की राजनीति का तूफ़ान भी चल रहा है और लोग चोरी से डॉक्टर भी बन रहे हैं । यह कैसे हो सकता है।
देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ।
एक काम कीजिए - खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?”
देखा? समझ आया?
BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है - उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है।
साफ़ है - मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं।
जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
NEET 2026 की परीक्षा रद्द हो गयी।
22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया।
किसी पिता ने कर्ज़ लिया,
किसी माँ ने गहने बेचे,
लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की,
और बदले में मिला, पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।
यह सिर्फ़ नाकामी नहीं, युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है।
हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं।
अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे।
अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुँच से तय होगा, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?
प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।
तीन स्तर पर भर्ती रद्द होना
सिर्फ प्रक्रिया नहीं,
सिस्टम पर लगे दाग की गवाही हैं।
संवेदनाएं अपनी जगह हैं,
लेकिन न्याय का आधार
तथ्य, पारदर्शिता और निष्पक्षता ही हैं।
हम खूब कहते थे कि मास्टर साहब आप अकेले नहीं करवाते ट्रेंड, राजस्थान के हजारों अभ्यर्थी अपना समय देते हैं तब ट्रेंड होता है कोई भी मुद्दा। क्यों श्रेय का झंडा उठाए फिरते हो? हजारों अभ्यर्थियों को ट्रेंड का और मुद्दा उठाने का श्रेय देना सीखो।
लेकिन फूफाजी के सहारे से नौकरी लगे भूगोल व्याख्याता कहां मानने को तैयार थे?... कहते थे सारी भर्तियां मेरे ट्रेंड करवाने से होती हैं, राजस्थान में ट्रेंड सिर्फ़ मैं ही करवा सकता हूँ, मैं ट्रेंड करवा कर चाहूं जो भर्ती रद्द करवा दूंगा, चाहूं जो भर्ती यथावत रखवा दूंगा....
मखा लाड़ले.... मैं मैं मैं और मैं करते करते करते म्याऊं हो गई...
लगा लिया कल जोर? करवा लिया ट्रेंड? तेरे ट्रेंड की आवाज़ RPSC तक भी ना पहुंची, कल ट्रेंड करवा रहा था और आज RPSC ने भर्ती रद्द का नोटिफिकेशन जारी कर दिया...
अगर बकाया बढ़ने की यही स्पीड रही तो?
पता नहीं कितना बकाया चढ़ जाएगा सरकार पर। अगर सरकार बकाया चुकाएगी नहीं तो बकाया बढ़ना ही है लेकिन बकाया बढ़ने की यह स्पीड चौंकाने वाली है। वैसे अभी तो योजना में काम ही नहीं चल रहा तो एक ही दिन में इतना बकाया बढ़ा कैसे? इसकी भी जांच तो होनी ही चाहिए।
कहीं कोई बड़ा घोटाला तो नहीं चल रहा?
राजस्थान में #RGHS के तहत निजी अस्पतालों में इलाज बीते 20 दिनों से पूरी तरह बाधित है, जिससे कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था ठप पड़ गई है। इस स्थिति ने प्रदेश के करीब 50 लाख कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिवारों को गंभीर संकट में डाल दिया है, जो इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार सरकार पर 2200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया होने के बावजूद अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
यह पूरा मामला सरकार की कार्यशैली, वित्तीय प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। जिस योजना को राहत का माध्यम होना चाहिए था, वह आज अव्यवस्था और असमंजस का प्रतीक बनती जा रही है। जनता को राहत देने के बजाय यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता और नाकामी का बड़ा उदाहरण बन गई है।
@GovindDotasra
राजस्थान में 20 दिन से निजी अस्पतालों में RGHS के तहत इलाज बंद पड़ा है, लेकिन भाजपा सरकार कोई फर्क नहीं पड़ता।
विडंबना देखिए.. 50 लाख कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिवार इलाज, दवाइयों और जांचों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। पिछले महीने से कैशलेस इलाज बंद पड़ा है, लेकिन भाजपा सरकार बेरवाह बनी हुई है।
भाजपाई भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी RGHS योजना अब लापरवाही, अव्यवस्था और संवेदनहीनता का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है। सरकार पर 2200 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया है। सबसे शर्मनाक बात ये है कि भाजपा के ढाई साल के कार्यकाल में ये योजना 3 बार बंद हो चुकी है।
आखिर ये कैसा "सुशासन" है, जहां बीमार कर्मचारी और बुजुर्ग पेंशनर्स अस्पतालों के बाहर लाइन में खड़े हों और सरकार सिर्फ विज्ञापन व इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त रहे?
20 जून से 30 जून के बीच अत्यधिक तापमान, हीटवेव में ऐसा कौनसा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण है जो आज से पहले नहीं होता था।
शिक्षण बहुत ही संवेदनशील विषय है और मानसिक रूप से एकदम सुदृढ़ व ऊर्जा के साथ शिक्षण हो तो ज्यादा उचित है, ग्रीष्मावकाश में कटौती उचित नहीं।
@BhajanlalBjp@svoruganti1466