बाड़मेर-जैसलमेर में कांग्रेस का दोहरा चरित्र - मुसलमान सिर्फ वोट बैंक, टिकट नहीं*
बाड़मेर-जैसलमेर की सियासत में एक कड़वा सच है जिसे अब छुपाया नहीं जा सकता। कांग्रेस पार्टी यहां मुसलमानों को सिर्फ वोट लेने की मशीन समझती है।
चुनाव आता है तो अल्पसंख्यकों के घर-घर जाकर हाथ जोड़े जाते हैं, टोपी पहन ली जाती है, इफ्तार में फोटो खिंचवाई जाती है। लेकिन जैसे ही टिकट बांटने की बारी आती है, मुसलमान को दरकिनार कर दिया जाता है।
*सवाल साफ है -*
पोकरण हो, जैसलमेर हो, बाड़मेर हो या शिव - हर जगह मुसलमानों की आबादी हजारों में है, वो कांग्रेस का वफादार वोटर है, लेकिन टिकट के समय उसे क्यों नजरअंदाज किया जाता है?
कांग्रेस के बड़े नेता लगातार अल्पसंख्यकों के साथ ये दुर्व्यवहार कर रहे हैं। अपने चहेतों को, अपने वोट बैंक को साधने के लिए दूसरों को टिकट दे दिया जाता है, और जिस कौम ने हमेशा कांग्रेस को सींचा, उसी को किनारे लगा दिया जाता है।
आज बाड़मेर-जैसलमेर का मुसलमान खुद से पूछ रहा है - क्या हम सिर्फ झंडा उठाने और नारे लगाने के लिए हैं? क्या हमारी सियासी हिस्सेदारी नहीं बनती?
ये वक्त है सोचने का। अगर कांग्रेस को मुसलमान का वोट चाहिए, तो उसे मुसलमान को नेतृत्व भी देना होगा, सम्मान भी देना होगा। सिर्फ वोट बैंक की राजनीति अब नहीं चलेगी।
*हक मांगना बगावत नहीं है, हक मांगना लोकतंत्र है।
@ShaleMohammad_@Amardeenfakir@Barmer_Harish@UmmedaRamBaytu@INCRajasthan
✍️ Sabir jalora
वसुंधरा राजे के दौर से निकले अधिकारी आरबीआई गवर्नर, CAG चीफ और चीफ इलेक्शन कमिश्नर तक पहुँचे है और इस दौर के अधिकारी अपने घर भी सुरक्षित नहीं पहुँच पा रहे है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं मुख्यमंत्री के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) रहे शिखर अग्रवाल से जुड़ा मामला केवल कॉटेज-विला की खरीद तक सीमित नहीं है। यह मामला उनकी संपत्तियों के स्रोत, संपत्ति अर्जित करने के दौरान कथित तौर पर दिए गए अनुचित लाभों तथा संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों की भूमिका की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच से जुड़ा है।
राज्य सरकार ने शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया है, लेकिन एपीओ करना किसी जाँच का विकल्प नहीं है और न ही इससे किसी की दोषसिद्धि होती है। अब आवश्यकता है कि संपत्तियों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों, लीज डीड, आयकर रिटर्न, अचल संपत्ति विवरण, धन के स्रोतों तथा संबंधित कंपनी को दिए गए सरकारी प्रोत्साहनों की स्वतंत्र एवं विस्तृत जाँच करवाई जाए।
राज्य सरकार ने शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया है, लेकिन एपीओ करना किसी जाँच का विकल्प नहीं है और न ही इससे किसी की दोषसिद्धि होती है। अब आवश्यकता है कि संपत्तियों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों, लीज डीड, आयकर रिटर्न, अचल संपत्ति विवरण, धन के स्रोतों तथा संबंधित कंपनी को दिए गए सरकारी प्रोत्साहनों की स्वतंत्र एवं विस्तृत जाँच करवाई जाए।
राजस्थान सरकार ने विधायकों द्वारा कथित तौर पर रिश्वत लेकर विधायक कोष से राशि जारी करने से जुड़े मामले में भी जाँच पूरी किए बिना संबंधित विधायकों के फंड जारी कर दिए। अब एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को केवल एपीओ करके इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो अनुचित है।
मेरी प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
से माँग है कि—
1. प्रथम दृष्टया उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज करवाई जाए तथा मामले की विस्तृत एवं निष्पक्ष जाँच के लिए इसे सीबीआई को सौंपा जाए।
2. शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों तथा रिश्तेदारों की संपत्तियों की खरीद, उनके वास्तविक बाजार मूल्य, भुगतान के स्रोतों और लीज समझौतों की निष्पक्ष एजेंसियों से विस्तृत जाँच करवाई जाए।
3. प्रकरण के विभिन्न पहलुओं को देखते हुए इसमें मनी लॉन्ड्रिंग अथवा अपराध से अर्जित आय से जुड़े तथ्य सामने आने की आशंका की भी जाँच होनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जाँच हेतु तत्काल पत्र लिखे।
मैंने शिखर अग्रवाल की कार्यशैली और उनके कथित भ्रष्ट आचरण को लेकर पूर्व में भी कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी। लेकिन वो मुख्यमंत्री के करीबी होने का लगातार लाभ उठाते रहे और प्रदेश सरकार आरोपों को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जाँच करवाने के बजाय उन्हें संरक्षण देती रही।
@PMOIndia@DoPTGoI@RajCMO
अगर आज अमेरिका और पाकिस्तान में युद्ध होता है, तो हम पाकिस्तान के साथ हैं.
- राजस्थान BJP अध्यक्ष मदन राठौड़
अगर यही बयान मेरे भाई अब्दुल्ला ने दिया होता तो पता नहीं क्या-क्या अभी तक कह चुके होते....!
रद्द होने के बाद जब दोबारा परीक्षा हुई, तो उम्मीद न्याय की थी, न कि आउट ऑफ सिलेबस सवालों से मानसिक कत्ल की! 2021 के मूल मापदंडों की धज्जियां उड़ाने वाले इस परीक्षा ढोंग को सुधारा जाए और यह जीके का एग्जाम वापस होना ही चाहिए। सभी साथी तुरंत रीट्वीट करें!✊
#SI_Re_Exam_2021