#12
तुमसे मेरा हंसना गाना,
तुमसे मेरी सांसें हैं।
पढ़ना सीखा मैंने तुमसे,
तुमसे दिन और रातें हैं
तुम ही मेरी मंजिल भी हो,
तुम ही मेरी सारी राहें।
लाख पढ़ु मैं शेर, ग़ज़ल
पर तुमसे मेरी बातें है।
#9/1
ये मुँह ये आँख - कान बंद,
अच्छे बुरे की छान बंद,
इंसानियत किधर गई,
रेत में ये दब गई,
दुखों की ये सज़ावटें,
ख़ुशी की हर दुकान बंद,
ताक़त की ही ये प��यास है,
दिलों में बस भड़ास है,
अब छीन के ही खाना है,
मेहनत की वो थकान बंद,
#9/2
ये आन बंद, ये शान बंद,
तारीफ का भी दान बंद,
ये यार, प्यार, जान बंद,
अपनों से भी पहचान बंद,
अब एक ही लड़ाई है,
पैसा ही बहन भाई है,
मासूमियत को मार कर,
अच्छाई का मकान बंद,
कैसा समय ये आ गया...
धरती को ही ये खा गया,
गन्दगी की आड़ लेकर,
बंदगी दबा गया,
#5
खुद को खुद का
ध्यान नहीं था,
खुद को खुद की
ख़बर नहीं,
खुद ही खुद को
चुप कर बैठा,
खुद को खुद की
समझ नहीं...
पर
खुद ने खुद से
बात करी जो,
खुद ने खुद को
खुद से मिलाया,
जगह जगह जो
खुद को ढूंढा,
उस खुद को वो
खुद मैं पाया।
#4
सुनो ना, रुक जाओ,
सूरज के पिघलने तक,
पानी के जलने तक,
आसमान के ढलने तक,
भगवान के मिलने तक,
रुक जाओ ना..
ठहर जाओ,
तारे गिनवाने तक,
मेरे सुरीला गाने तक,
एक नये जमाने तक,
चलो..... अच्छे दिन आने तक।
रुक जाओ ना।
#3
जब याद तुम्हे आता होगा,
मिश्रा का वो घर गाना,
बैठे बैठे, यूंही छत पर,
चंदा को तकते जाना,
उस मुखड़े में, उस ठंडक में,
मैने एतबार किया होगा,
हल्का फुल्का, छोटा मोटा,
शायद प्यार किया होगा।