सम्राट चौधरी जी के मुख्यमंत्री बनने से फायदा यह होगा कि बिहार में अब राजनीतिक विचारधारा, परिवारवाद, नेता की शिक्षा जैसे मुद्दे गौण हो जाएंगे। अब सिर्फ और सिर्फ चर्चा होगी कि बिहार का विकास कौन बेहतर ढंग से कर सकता है।
भाजपा और राजद दोनों अब सिर्फ और सिर्फ विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ पाएंगे क्योंकि बाकी सारे मुद्दे स्वयं भाजपा ने खत्म कर दिए। अब तेजस्वी जी पर कोई परिवारवाद या नवमी फेल का तमगा लगाकर हमला नहीं कर पाएगा।
सारण में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध के विरोध में जन सुराज के नेताओं- अनुप मैथिल, आदित्य मोहन, अशोक गुप्ता, अतुल सिंह, राम प्रकाश सिंह और राघवेंद्र सिंह ने अन्य साथियों के साथ स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। जन सुराज इस मामले में पीड़ित परिवार के लिए त्वरित न्याय और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग करता है।
'पापा मर गए', 'माँ मर गई'...
एक अच्छा शिक्षक कितना कुछ बदल सकता है! बालक को संभवतः इस आयु में माता-पिता के जाने की पीड़ा का भार समझ में आता भी नहीं हो, पर वो विद्यालय जा रहा है, पढ़ रहा है! इस वीडियो पर मैं बहुत कुछ लिख सकता हूँ, परंतु शिक्षक के इस व्यवहार ने हृदय को शान्ति दी।
बच्चा अनुशासित है, बाल व्यवस्थित हैं, कपड़ों में बटन है, जो ही पहना है साफ़ है, ठीक से पहन रखा है।
ऐसे शिक्षक पिता और देवता तुल्य होते हैं। बात कपड़े की नहीं है, बात उसे अपनी तरफ़ खींच कर उसे ढाढ़स देने की है कि वो अच्छे से रहे, पढ़ाई करे। ये शब्द आपका चरित्र निर्माण करते हैं। इतनी नकारात्मकता के मध्य यह वीडियो मेरे दिन को कितना सकारात्मक बना गया, मैं कह नहीं सकता।
यही विपन्नता, यही कपड़े की कमी, यही बोरे पर बैठ कर पढ़ाई... 1990 के दशक में कई बच्चे इसी निर्धनता में जी रहे थे। ऐसे हज़ारों बच्चे उपहास का पात्र बनते हैं, उन्हें स्नेह नहीं मिलता। पुनः प्रणाम इस शिक्षक को।
सामान्य वर्ग के नागरिको, दिल्ली पहुँचो!
आने वाले कुछ माह (और यदि सरकार हमारी बातें न माने, तो कुछ वर्ष) हमारे भविष्य के लिए निर्णायक होने जा रहे हैं। कुछ लोगों ने मुझे कहा था कि 5-6 दिन मैं प्रधानमंत्री को कुछ न कहूँ, वो लोग ‘कुछ’ कर रहे हैं।
सरकार ने कुछ भी नहीं किया, कोई संकेत भी नहीं किया। सरकार ने वही किया जो ये करते रहे हैं: इस बात पर दाव लगाया कि लोग सुप्रीम कोर्ट, केजरीवाल और ईरान के समाचारों के बीच यूजीसी समाप्त हो जाएगा, यदि कुछ बड़े हैंडल लिखना बंद कर दें।
अभी बिहार चुनाव चर्चा में है, नए सीएम की घोषणा तक समाचारों में वही विषय बना रहेगा। ऐसा @BJP4India और @narendramodi जी के सूचना संचालन दल का सोचना है।
अतः, आठ मार्च को दिल्ली आइए। जहाँ तक मुझे ज्ञात है, जंतर मंतर और रामलीला मैदान, दो स्थानों पर प्रदर्शन है। मैं आयोजकों से आग्रह करूँगा कि रामलीला मैदान में ही यह प्रदर्शन हो, ताकि एक स्थान पर अधिकाधिक लोग आ सकें।
यह प्रदर्शन राजनैतिक रूप न ले, इसका ध्यान करें। उचित बातें हों, और अपनी संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। सरकार चाहेगी कि मंच से कुछ विचित्र बोला जाए, और मैं जानता हूँ कि कुछ लोग आपके बीच सेंधमारी कर चुके होंगे। उनकी पहचान करें।
सरकार से हमने आरक्षण हटाने को नहीं कहा, हमने यह नहीं कहा कि तुम जय भीम करना बंद कर दो। हमने उनसे सवर्णों पर हो रहे घृणास्पद बयानबाजी, नारेबाजी, पोस्टरबाजी और हिंसक व्यवहारों को उसी तरह अपराध बनाने को कहा, जैसे इन्होंने SC/ST और BC एक्ट में किया है। हमारी एक भी माँग अनुचित नहीं बताई गई है।
अन्य माँगों की एक सूची हमने सार्वजनिक कर रखी है, जो बेयर मिनिमम है। हमारे और आपके ऊपर कॉन्ग्रेसी, सपाई समेत कई पार्टियों के एजेंट होने के आरोप लग चुके हैं, पर हमारी माँगों को अनुचित बताने का कोई तर्क नहीं है इनके पास।
किसी ने भी ‘तुम्हारी भाषा सही नहीं है’ और दो कौड़ी के झाँटू तर्क कि ‘स्टे तो लग ही गया’, के इतर तीसरी बात नहीं कही है।
इसलिए, वापस लिखना चालू कीजिए, वीडियो बनाइए, दलित-वंचित-शोषित-पीड़ित के तुष्टिकरण के हर पर्चे को सार्वजनिक कीजिए। पार्टी या सत्ता के जो भी भ्रम हैं, वो दूर कीजिए। यह हमारे भविष्य की लड़ाई है और भाजपा-संघ को इसे धागे भर का अंतर नहीं पड़ता।
इन पतितों के सामने, इस आंदोलन से जुड़ी हर लड़की का चरित्र हनन इसी भाजपा के कुछ CMO में बैठे लोगों ने किया। भाजपा के आइटी सेल (और वानाबी आइटी सेल) के दलालों की शब्दावली आप देख चुके हैं। इन्होंने नैतिकता की हर सीमा लाँघी है। इनके नेता आज भी चुप ही हैं।
पार्टी ने न तो उन्हें रोका है, न ही वो स्पेस आदि में गाली देने से रुक रहे हैं। स्पष्ट है कि इन चिरकुटों को पार्टी का मौन समर्थन है और वो वही कर रहे हैं जो पार्टी चाहती है। अतः, इनको उचित उत्तर देते रहिए।
सुप्रीम कोर्ट के सामने इस सरकार का लिजलिजापन हम सबने देख लिया। पूरी सरकार रेंगने लगी, नरेन्द्र मोदी स्वतः संज्ञान लेने लगे, उनकी नाराजगी की खबर ‘सूत्रों के हवाले से’ लीक करा कर चलाई गई। पर यह पार्टी यूजीसी पर फेविकोल पी कर सोई हुई है।
यह मैं विश्वास के साथ कह रहा हूँ कि सरकार पिछले सात दिन को अपनी सफलता मान कर नाच रही होगी। उन्हें लग रहा है कि यह समाचार दब गया, विश्व युद्ध के ग्राफिक्स में लोग भूल जाएँगे।
ठीक है, ये मान कर भी देख ही लो।
PS: भाजपा/संघ के लोगों से आग्रह है अब मुझे संपर्क करने की चेष्टा न करें। आपको बहुत समय दे दिया गया, आपने धोखेबाजी की है।
असली धुरंधर प्रज्ञान ओझा और आरपी सिंह हैं। इन्होंने ही ईशान किशन को टीम में लाया। रेसिस्ट बिहारियों से नफरत करने वाले अजीत अगरकर ने अपना पर्सनल ईगो सेटिस्फाई करने के लिए ईशान किशन को क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट से बाहर कर दिया था। सारा क्रेडिट प्रज्ञान ओझा और आरपी सिंह को जाता है। @rpsingh@pragyanojha
NEET PG की कट-ऑफ माइनस 40 प्रतिशत का मामला हो या UGC के नए रेगुलेशन, इनका सीधा मकसद विश्वविद्यालयों को जातिवादी अड्डों में बदलना है….
आप बेहिचक दोनों लागू कर दीजिए लेकिन एक शर्त के साथ।
शर्त यह कि किसी भी राजनीतिक दल के किसी भी नेता का बच्चा किसी भी विदेशी विश्वविद्यालय में पढ़ने नहीं जाएगा।
यह दोहरा चरित्र अब नहीं चलेगा कि राजनीतिक स्वार्थों के लिए देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को जानबूझकर थर्ड-ग्रेड शैक्षणिक संस्थान बना दिया जाए जबकि नेताओं के बच्चे दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ें।
और उससे भी ज़्यादा शर्मनाक यह है कि विदेश से पढ़कर लौटे वही बच्चे फिर देश की जनता को मूर्ख बनाने के लिए अपने पिता की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने में लग जाएँ।
#UGCRegulations
#विजय_सिन्हा जी की कार्यशैली और स्पीड देखकर तो यही महशूस हो रहा है कि जल्द ही उनसे ये मंत्रालय भी छीना जायेगा।
और अगर इस बार ऐसा नहीं हुआ और ये स्पीड बरकरार रहा तो साल भर के अंदर पूरे बिहार का #भूमि_विवाद ही खत्म हो जायेगा।
मैं AAP का कार्यकर्ता नहीं हूं फिर भी दावे के साथ कह सकता हूं की देश को राघव चड्ढा जैसे नेताओं की जरूरत है 🔥
जिस सदन में खड़े होकर एक तरफ़
अखिलेश यादव ,अनुप्रिया पटेल और नगीना सांसद चंद्रशेखर जैसे तमाम नेता सिर्फ आरक्षण और जाति की बात करते है !
उसी सदन में AAP सांसद राघव चड्ढा
• टोल टैक्स और नाकों पर गुंडागर्दी
• प्राइवेट हॉस्पिटल्स के मनमानी
• इंश्योरेंस कंपनियों के बेहिसाब लूटमारी
• बैंक के द्वारा SMS,ATM चार्जेस के नाम पर लूट
• कंटेंट क्रिएटर्स पर ग़लत ढंग से कॉपी राइट क्लेम
जैसे जनहित के तमाम मुद्दों को इस युवा सांसद ने सदन में उठाया है क्योंकि ये नेता जाति की राजनीति से नहीं निकला है।
जिस दिन सदन में एक चौथाई सांसद भी
राघव चड्ढा जैसे शिक्षित और युवा होंगे उसी दिन से
भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलनी शुरू हो जाएगी !