रोज़ाना 1 फेस चला जाता है जिससे काफ़ी परेशानी होती है बिजलीघर में लगातार कंप्लेंट करने के बाद भी कोई पक्का समाधान नहीं कराया गया है बस खानापूर्ति कराकर लाइन चालू कर दी जाती है कृपया फेस का पक्का समाधान करें जिससे रोज़ाना परेशानी न हो @UPPCLLKO@PVVNLHQ@1912PVVNL ph 8470868447
नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए यमुना-हरनंदी दोआब के 29 किलोमीटर क्षेत्र को चार लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है।
नई कनेक्टिविटी से यमुना किनारे ग्रेटर नोएडा में बसी 75 ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों, 25 सेक्टरों और 20 गांवों के लगभग पांच लाख लोगों को सीधा लाभ होगा।
इससे नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को भी जाम से निजात मिलेगी, उनका आवागमन आसान होगा। परियोजना पर नोएडा प्राधिकरण करीब पांच सौ करोड़ रुपये खर्च करेगा।
यमुना तटबंध पर पहले से 11.200 किलोमीटर का चार लेन एक्सप्रेसवे बना हुआ है, जिसका नवीनीकरण 34 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इसमें से 11 करोड़ रुपये का फंड नोएडा प्राधिकरण ने जारी किया है।
यमुना दोआब को एक किलोमीटर और चार लेन में बढ़ाया जाएगा, जबकि हरनंदी दोआब को 17 किलोमीटर चार लेन में विकसित किया जाएगा। इसे सेक्टर-150 तक लाया जाएगा, जहां इसे कोंडली बांगर की ओर से आने वाली 75 मीटर चौड़ी सड़क से जोड़ा जाएगा।
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास 22 से 28 मीटर चौड़ी जगह दोआब क्षेत्र में मौजूद है, जिससे चार लेन एक्सप्रेसवे बनाने में किसानों की जमीन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सिंचाई खंड गाजियाबाद के अधिशासी अभियंता राज कुमार वर्ण और दिल्ली ओखला के अधिशासी अभियंता बिनोद कुमार सिंह को निर्देशित किया है कि वह तत्काल प्रभाव से कार्ययोजना प्रस्तुत करें।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर किसानों की सहमति से तटबंध को बढ़ाने की संभावना है। जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों से सहमति ली जा सकती है और प्राधिकरण मुआवजे का भुगतान करने के लिए तैयार है।
वर्तमान में नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर लगभग दस लाख वाहनों का दबाव है, जिससे राहत पाने के लिए प्राधिकरण लगातार प्रयास कर रहा है। शहर में नई कनेक्टिविटी पर काम चल रहा है, और कुछ परियोजनाओं को सीईओ से सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है।
यमुना हरनंदी दोआब के किनारे सेक्टर-150 में स्पोर्ट्स सिटी और जेपी विश टाउन में कई सोसायटियां तेजी से विकसित हो रही हैं। भविष्य में इन क्षेत्रों में रिहायशी क्षेत्र बढ़ेगा, जिससे यातायात जाम की समस्या उत्पन्न होगी।
सेक्टर-94, 124, 125, 126, 127, 128, 131, 132, 133, 134, 129, 135, 130, 168, 163, 164, 158, 159, 155, 154, 153, 152, 151, 150 समेत गांव रायपुर, बख्तावरपुर, असगरपुर जाहगीर, सुल्तानपुर, शाहपुर गोवर्धनपुर, शाहपुर गढ़ी, नंगला नंगली, रोहिल्लापुर, नंगला वाजिदपुर, छपरौली, मंगरौली, मोहियापुर, बदौली, झट्टा, दल्लूपुरा, गुजरान डेरिन, कामबक्शपुर, याकूतपुर, गुलावली, मोमनाथल को सीधे लाभ होगा।
#Noida #GreaterNoida #NoidaExpressway #DainikJagran
कांग्रेस का पायलट...
लोकसभा चुनाव का पांचवां चरण पूरा होते होते सचिन पायलट देश के 14 राज्यों के 51 लोकसभा क्षेत्रों में 98 जनसभाएं कर चुके हैं। गांधी परिवार और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के अलावा कांग्रेस में पूरे देश में एकमात्र सचिन पायलट ऐसे नेता हैं जिनकी मांग हर राज्य में रही है। कांग्रेस के तीन-तीन मुख्यमंत्री और दर्जन भर पूर्व मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनकी भी ऐसी मांग नहीं है। फिर भी राजस्थान के कुछ लोकसभा क्षेत्रों में उनकी उपयोगिता नहीं समझी गई। क्या सचिन पायलट को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर उनकी लोकप्रियता को नहीं भुनाया जा सकता?
@SachinPilot
नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे बड़े भाई श्री शिवप्रकाश जी गुर्जर को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य,दीर्घायु एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
@ShivprakashGjr@SachinPilot
नालियों की मिट्टी निकले क़रीब दो महीने हो चुके हैं जिसके कारण रोड पर गंदा पानी फैल रहा है लगातार सुपरवाइज़र को अवगत कराने के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है कृपया संज्ञान ले @dmgbnagar@noida_authority@CeoNoida@InduPrakashPCS
मैं पूज्य वीर दुर्गादास राठौड़ जी की परंपरा का अनुयायी हूँ गहलोत जी, डर मेरे खून में नहीं है।
आपको तो उल्टे अपने अप्रासंगिक हो जाने का भय सताता रहता है, इसलिए आप लगातार मेरे खिलाफ बोलते रहते हैं। सच तो यह है कि मैं न होता, तो आपकी राजनीति ही खत्म हो जानी थी।
मैं आपकी तरह किसी एक परिवार का सेवक नहीं हूँ।
आपका पूरा राजनीतिक जीवन पदलोलुपता और सत्ता से चिपके रहने का प्रमाण रहा है, इसलिए कम से कम आपसे मुझे किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं।
आप ध्यान भटकाने की राजनीति करते रहिए,
मैं जनसेवा के अपने संकल्प पर प्रतिबद्ध हूँ।
बाकी… समय स्वयं सबको जवाब दे देगा।
@ashokgehlot51
#WATCH जयपुर: राजस्थान सरकार के मंत्री जोगाराम पटेल ने कांग्रेस नेता अशोक गहलोत के बयान पर कहा, "जब-जब सचिन पायलट का नाम किसी प्रतिष्ठित पद के लिए आगे आता है और संभावना बनती है तब-तब अशोक गहलोत होटल में बंद होने वाली कहानी पुन: दोहराते हैं और प्रत्यक्ष तौर पर उनपर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर पार्टी तोड़ने का प्रयास किया। अगर उनकी सरकार में ऐसा कोई घटनाक्रम हुआ तो उन्होंने आज तक मुकदमा दर्ज़ क्यों नहीं कराया? वे(अशोक गहलोत) स्वयं अपनी पार्टी में दरकिनार हो गए हैं इसलिए बिना किसी आधार पर ऐसे बयान देने के आदि हो चुके हैं।"
जो आरोप लग रहे हैं,,, जनता सब जानती है, कौन क्या है किसकी क्या कार्यशैली रही है, किसका क्या इतिहास रहा है,,,
किसकी कितनी निष्ठा है ये सब जानते हैं।- श्री सचिन पायलट
@SachinPilot
25 सितम्बर को कांग्रेस की मर्यादा तार-तार करने वाले आज वफादारी के प्रमाणपत्र बाँट रहे हैं।
श्रीमती सोनिया गांधी जी का अपमान करने वालों को आईना दिखाने के लिए अजय माकन जी का यह वीडियो ही काफी है।
सच कड़वा है, लेकिन रिकॉर्ड झूठ नहीं बोलता। 👇🔥
@RahulGandhi@kharge@SachinPilot
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सरकार गिराने में अमित शाह पर लगाए गए आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि–
“उनकी ये मित्रता सचिन जी से ज्यादा है। वो कोई भी बात कहते हैं तो वो सचिन जी के लिए कहते हैं। अब ये उनका आपस का है, इसमें मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन उनका दर्द कुछ ऐसा ही है कि जो वो बार-बार उनको टारगेट करते हैं।”
गांव शहदरा अब समय सुबह के 5:32 हो रहा है 3 बजे से लाइट नहीं आ रही।। बिजली घर, लाइन मैंन, जेईई, एसडीओ, एक्शन सभी को 10-10 काल कर चुके हैं कोई फोन का जबाव देने को तैयार नहीं है।। क्या ग्रामीण बिजली के बिल का भुगतान नहीं कर रहे जो लोगों को शांति से सोने भी नहीं दिया जाता। @UPPCLLKO
2022 की बगावत के साये में 2028 की तैयारी?
केरल में जनादेश को तवज्जो और कर्नाटक में ढाई साल का फॉर्मूला तीन साल बाद लागू करने के कांग्रेस आलाकमान के फैसलों ने राजस्थान कांग्रेस में सियासी हलचल तेज कर दी है।
विधायक हों, चुनाव हार चुके प्रत्याशी हों या अलग-अलग गुटों के नेता हर कोई इन फैसलों को अपने-अपने नजरिए से देख रहा है और 2028 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर राजनीतिक समीकरण साधने में जुटा है।
असल में राजस्थान कांग्रेस आज भी 25 सितंबर 2022 की उस घटना के असर से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है, जब गहलोत सरकार के दौरान हुई बगावत ने पार्टी को भीतर तक झकझोर दिया था। माना जाता है कि उसी सियासी संकट ने 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की पृष्ठभूमि तैयार की।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस आलाकमान 2028 से पहले राजस्थान में कोई नई रणनीति और नया नेतृत्व सामने लाएगा, या फिर पुरानी गुटबाजी एक बार फिर इतिहास दोहराएगी।
अगर राजस्थान में अभी कांग्रेस सरकार रही होती
तो ये TV चैनलों पर डिबेट का विषय बन गया होता है।
जैसलमेर के डंपिंग यार्ड में सैकड़ों गायों के शव पड़े हैं, तस्वीर हृदयविदारक है। मगर गौमाता के लिए आउटरेज सलेक्टिव है