TCS Nashik UPDATE:
Suspended HR employee Nida Khan has confessed during interrogation that she gave namaz training to victims as part of the forced conversion racket.
She had provided burqas, religious books, Islamic apps and videos to Hindu women employees.
Charge sheets filed in all 9 FIRs.
""मैं BJP से पूछना चाहता हूं क्यों आपने बाबासाहेब की जयंती की नयी परमिशन नहीं दी?"
-चंद्रशेखर रावण
मतलब सरकार बिछी हुई है इनके आगे, हर रोज countdown कर रही है, पुलिस से लेकर CISF से भी ट्रिब्यूट दिलवा दिया, IIT से लेकर NSE तक नीला कर दिया!
तब भी खुश नहीं?
"हिंदू समाज में एकता की कमी से हुई बार-बार गुलामी।"
समाज में आंतरिक कमजोरी को दूर करके ही विदेशी शासन के खिलाफ प्रभावी रूप से लड़ाई की जा सकती है।"
: डॉ मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
तेलंगाना के कंडाकुर्थी गांव में एक सभा में कहा कि हिंदू समाज में एकता की कमी ही गुलामी का प्रमुख कारण रही है।
Don’t do this. When you’re already in a pit, stop digging. People can tolerate poor governance, but not such blatant censorship.
Instead, form a think tank and introspect on why you’re getting community-noted lately. I’ll give you a hint: it can’t happen unless your traditional supporters are turning against you.
Anyone can write community notes. They don’t go live and appear on posts unless people across different ideological perspectives upvote them. Before the UGC equity issue, your supporters downvoted community notes against you, even when those notes had some merit, but now they’re not. They are actively upvoting them.
So introspect and make corrections. That’s the only way forward. Turning a blind eye and handling it with arrogance will only make things worse for you.
@ajeetbharti बोल ही रहे हैं ना..मोदी सरकार की तरह हिंदुओं को धोखा तो नहीं दे रहे..हिंदुओं को लगता है मुसलमानों का तुष्टिकरण कांग्रेस करती है..गलत बीजेपी से ज्यादा नहीं करती कांग्रेस..��ंतर इतना है इनको बंटोगे तो..बोल के वोट लेने है इसलिए मुसलमानों को छिपकर अपीज करते हैं
भारत मे रहना है तो जय भीम बोलना पड़ेगा। वरना देश छोड़ो :- भीम आर्मी अमर ज्योति
नोट :- SC ST Act अगर नहीं होता तो ये महामानव इतना बड़ा ब���ान यह दे पाता ?
मुझे आज ही पता चला कि प्रधानमंत्री बनने के पूर्व नरेंद्र मोदी 2012 मे�� ही 'सामाजिक समरसता' नामक पुस्तक ���िख चुके हैं जिसके कवर पेज पर अंबेडकर विद्यमान हैं।
एक रोचक तथ्य यह भी है कि उनके हैंडल से भगवान अंबेडकर (PBUH) को श्रद्धांजलि वाला पहला ट्वीट 2011 का है और 2015 तक साल में एक ही ट्वीट आता था।
एक वो दिन और एक आज का दिन।
अब ऐसा कोई हफ्ता नहीं गुजरता जब भगवान का नाम उनके श्रीमुख से ना निकले अथवा ट्विटर पर मेंशन ना हो।
बेगूसराय के दिनकर भवन में चल रहे ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ की विराटता देख लीजिए। RSS के क्षेत्र कार्यवाह उपस्थित हैं पर भीड़ के नाम पर तीस कुर्सी नहीं भरी है। ये 05:22 PM के फोटो हैं।
ऐसा इसलिए है क्योंकि संघ और भाजपा के आयोजनों में अब ‘हिन्दू’ शब्द केवल राजनैतिक सत्ता लोलुपता के लिए प्रयुक्त होता है। हाल ही में बेगूसराय के ही रोसड़ा में ऐसे ही ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ में कुर्सियाँ खाली थीं।
बेगूसराय के ही मकरदही में संघ के राम कुमार जी को कहा गया कि यदि वो यूजीसी पर नहीं बोलेंगे तो सारे आयोजन की ऐसी की तैसी हो जाएगी। आए ही नहीं। मुजफ्फरपुर में मोहन भागवत जी को आठ लोगों ने घेरा तो बोले कि विषय पर अध्ययन नहीं है उनका।