मेरी माँ की 2 महीने पहले मौत हो गई, मैं उन्हें नागपुर में हॉस्पिटल में लेकर था, यहाँ मेरे प्लॉट पर जाने के लिए दी गई सड़क को ही भू माफिया बेच दे रहे हैं…….और फफक-फफक कर रो पड़ा ये फौजी।
प्रीतम द्विवेदी सेना में हैं। लोन लेकर प्लॉट लिया। प्लॉट के लिए जो सड़क दी गई थी भू माफिया अब उसी की प्लॉटिंग कर रहे हैं।
भारत माँ का ये सेवक अपनी माँ की दवा करवा रहे थे, तब ये पाप किया गया। मामला MP के रीवा का। इन्हें न्याय कौन दिलवाएगा?
सरकार देवी-देवता, ऋषि-महर्षि और धर्म ग्रंथों के अपमान के खिलाफ SC-ST ऐक्ट जैसा कानून क्यों नहीं बना रही है?
सरकार ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य, जैन, सिख के जाति सूचक अपमान के खिलाफ SC-ST ऐक्ट जैसा कानून क्यों नहीं बना रही है?
@PMOIndia@HMOIndia
ये हैं भारत के सबसे अमीर लोगों में शामिल आनंद देशपांडे। हाल ही में उन्होंने एक अरब डॉलर से अधिक संपत्ति वाले लोगों की सूची में जगह बनाई है। वे बहुराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी Persistent के संस्थापक हैं।
18 देशों में 53 कार्यालयों वाली Persistent ने दो दिन पहले अपने एक नए कार्यालय में ‘गृह प्रवेश’ किया। सॉफ्टवेयर कंपनी का नाम सुनते ही अक्सर हमारे मन में आधुनिक या पश्चिमी संस्कृति की छवि उभरती है, लेकिन Persistent इस मामले में एक अलग उदाहरण पेश करती है।
साथ में दी गई तस्वीर देखिए। नए कार्यालय में प्रवेश से पहले भारतीय परंपरा के अनुसार सत्यनारायण भगवान की विधिवत पूजा की गई।
कंपनी की छुट्टियों की बात भी दिलचस्प है। यहां भारतीय, खासकर मराठी परंपराओं से जुड़े त्योहारों को महत्व दिया जाता है। 1 जनवरी की बजाय गुड़ी पड़वा पर छुट्टी होती है। क्रिसमस के बजाय गणेश स्थापना और गणेश विसर्जन के अवसर पर छुट्टी दी जाती है।
पुणे के हिंजवड़ी स्थित Persistent के कार्यालय के चार टावरों के नाम ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद हैं। नल स्टॉप के पास स्थित कार्यालय के दो टावरों के नाम प्राचीन भारतीय गणितज्ञ पिंगल और आर्यभट्ट के नाम पर रखे गए हैं। वहीं सेनापति बापट रोड स्थित कार्यालय भवन का नाम ‘भगीरथ’ है। इमारत के भीतर भी जगह-जगह वेदों से जुड़े संदर्भ देखने को मिलते हैं।
सिर्फ यह कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है। संस्कृति को जीवित रखने के लिए उसे अपने व्यवहार और कार्यों में भी उतारना पड़ता है। Persistent ने इसे कई मौकों पर अपने तरीके से दिखाया है।
मैंने इस कंपनी के माहौल को करीब से देखा है—करीब ढाई साल यहां काम किया है। एक छोटी-सी बात बताता हूं। आईटी कंपनी होने के बावजूद यहां महिला कर्मचारी हल्दी-कुमकुम जैसे पारंपरिक कार्यक्रम भी पूरे उत्साह से मनाती हैं। सत्यनारायण पूजा भी विधिवत होती है।
और खास बात यह है कि आधुनिकता और परंपरा के इस मेल के बावजूद Persistent ने आईटी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। पिछली तिमाही में कंपनी का राजस्व करीब 1,491 करोड़ रुपये रहा।
यहां काम करने वाला व्यक्ति सिर्फ ‘कर्मचारी’ नहीं, बल्कि Persistent परिवार का ‘सदस्य’ माना जाता है। दुनिया भर में 15 हजार से अधिक सदस्यों वाली यह कंपनी आज सैकड़ों करोड़ रुपये का कारोबार कर रही है।
हम अक्सर सादगी और ऊंचे विचारों के प्रतीक के रूप में रतन टाटा का उदाहरण देते हैं। उसी तरह आनंद देशपांडे भी आधुनिक उद्योग, भारतीय परंपरा और मराठी सांस्कृतिक पहचान को साथ लेकर चलने वाले एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में सामने आते हैं।
कहते हैं अंग्रेज राजधानी दिल्ली लाए तो लाइब्रेरी भी कलकत्ता से दिल्ली आ गई और तब से समय के साथ बढ़ती गई,पाठकों की प्यास बुझाती गई। मैं अनेक वर्ष इसका सदस्य रहा, आज विश्वास नहीं हो रहा कि बदलती राजधानी में इसके लिए स्थान नहीं है।
हम इस अमूल्य संपदा को नहीं सँभाल सकते तो नालंदा को लेकर दुखी क्यों रहते हैं!
ओडीशा के किसी सामान्य वर्ग के NEET परीक्षार्थी को आप जानते हों जिन्हें नई आरक्षण नीति के कारण इस बार सीट न मिली हो तो कृपया हमें संपर्क करें। हम आपका केस निःशुल्क लड़ेंगे।
विद्यार्थी या उनके माता-पिता हमसे संपर्क करें।
I can't believe this!!! 🤯
Why commercialise sacred Teerth Kshetras? No way! Only devoute yatris need to visit teerth. For other activities there are enough places! 🙏 Leave #BadrinathBhagwan alone
I have a dream. That one day India would have a Prime Minister who is not afraid to speak out about Hindu persecution at an international platform.
Or even a domestic one.
In Bangladesh. In Pakistan. Even in India.
This German citizen, Navneet Pal, was at the hospital with Marxist goons Paribhasha Yadav and others on the 19th.
As per Sahil’s relative, they have instigated Sahil's parents to take his body to IITB to create riots in Maharashtra by giving a caste angle to this case.
I request @MumbaiPolice@HMOIndia to investigate this case under UAPA.
Why was a German citizen on the ground with Marxists?
Why she was helping them?
शर्जिल इमाम को उसके कजन की शादी अटेंड करने के लिए 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत मिल गई है।👏👏👏 और वो दारा सिंह जो 26 साल से जेल में बंद है। उस गुनाह के लिए, जिसके बारे में सीधे सीधे कोई एविडेंस उसके खिलाफ नहीं था, circumstantial एविडेंस के आधार पर उसे 14 साल की सजा सुनाई गई थी । सजा पूरी होने के बाद भी उसे रिहाई नहीं मिली। और अब तो छब्बीस साल हो गए उसको जेल में और ताज्जुब की बात यह कि इस दौरान उसे एक बार भी अंतरिम जमानत या पैरोल नहीं मिला, उसे उसके माता पिता की मृत्यु के वक्त भी पैरोल नहीं मिला, वो उनके अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाया। फिर सवाल तो खड़े हो होते हैं ना? एक आरोपी को आप शादी अटेंड करने के लिए अंतरिम जमानत दे रहे हैं और दूसरे आरोपी को उसके माता पिता के अंतिम दर्शन करने के लिए भी जमानत नहीं मिली। फिर कैसे कहा जाता है कि कानून सबके लिए एक जैसा है।
The amount of courage that @yogrishiramdev possesses is just amazing. He took Antonia Maino head-on, risking his vast enterprise. At a time when she was uncrowned tyrant in our country.
Now, he has the gall to take on the casteist incumbents head-on.
Amazing man.
सही सवाल।
अंग्रेजों के राज में हाँ जातियाँ और मजबूत पारंपरिक रूढ़ियों में थी। पर सरकार कोई भेदभाव नहीं करती थी, इसलिए *राजनीतिक* झगड़े नहीं थे।
अब जातियाँ मूल रुढ़ियों में नाम को रह गई हैं, नेताओं की स्वार्थ राजनीति व शासकीय नीतियों में ही उस का बोलबाला है - पर दोष जनता को!
बिहार सरकार के लिए निर्धन और आवासहीन केवल SC/ST/OBC/EBC में हैं। यानी सामान्य वर्ग की जातियों से टैक्स लो और उनकी जातियों के लोगों को किसी भी स्कीम का लाभ मत दे। यही बकलोली इन्होंने हर योजना में कर रखी है। समाज को पूछना चाहिए कि हमारे पैसे का लाभ हमारी ही जाति के निर्धनों को क्यों नहीं दिया जा रहा? हर बात क्या जाति देख कर ही होगी?