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FIR slapped against @ajeetbharti after he responded to derogatory remarks made against his sister. Draconian clauses of SC/ST Act 3(1) and BNS sections 196(1)(c) and 351(3), carrying jail time of up to 5 years, have deliberately been used.
Stay safe, Ajeet. We stand with you.
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
—
मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
अगर आपको भी लगता है कि इस क़ानून का दुरुपयोग बंद होना चाहिए तो,
अगले एक घंटे में इस हैशटैग पर कम से कम 10, 000 ट्वीट, अधिक से अधिक कमेंट और RT करें:-
#StopMisuseOfSCSTAct
It's time for judicial review of the amendments made in 2018 to SC/ST Atrocities Act which removed the safeguards laid down by the Supreme Court to check its rampant misuse.The Amendments have made it worse. Every affected party must prefer a constitutional challenge to the Act.
अजीत भारती को उनकी बहन की शादी चंद्रशेखर से करने की सलाह देने वाले यह सलाह चंद्रशेखर को ही क्यों नहीं देते कि वो रोहिणी को न्याय दे?
अजीत भारती की बहन पर जो टिप्पणी की गई, उस संदर्भ को लिबरल लॉबी ने गायब कर दिया। उकसाने के बाद अजीत ने क्या कहा, उसे काटकर चलाया जा रहा है कि दलितों को गाली दे दी। यह झूठ है।
यदि टिप्पणी करने वाले की माँ-बहन और चंद्रशेखर को कुछ कहना अगर समूचे दलित समाज का अपमान है तो क्या अजीत की बहन की कोई गरिमा नहीं? या वो इस समाज का हिस्सा नहीं?
चंद्रशेखर किसी भी पद पर हों, उनके सार्वजनिक जीवन के अनेक अध्याय यहाँ उड़ते पाए जाते हैं। यह परिप्रेक्ष्य ही वितृष्णा के लिए पर्याप्त है। ऐसे व्यक्ति से अपनी बहन ब्याहने का कोई विचार भी कर सकता है? इसलिए अजीत पर किए कमेंट के बाद एक भाई का प्रतिकार समाज का अपमान नहीं हो सकता। व्यक्ति पर टिप्पणी थी, समाज पर नहीं। चंद्रशेखर कबसे “दलित समाज” हो गए?
और वैसे भी, कॉकरोच आंदोलन के बाद इन लिबरल्स ने सार्वजनिक भाषा का नया मानदंड रचा ही है कि गालियाँ दी जानी चाहिए, कोई अपराध नहीं है। कुछ दिन पहले ही गालियों के पक्ष में अनेक सौंदर्यशास्त्र रचा जा रहा था। आज अचानक ‘गाली’ पर मुक़दमा कैसे हो रहा है?
मोदी की माँ और उनको दी भद्दी गालियों से जब ओबीसी का अपमान नहीं हुआ तो आज दलितों का अपमान कैसे हो गया?
#AjeetBharti
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
किसानों ने इन्हें इतना पीटा था कि इन्होंने अपने घर की माँ-बहनों को धरने पर बिठा दिया था।
वहीं सामान्य वर्ग के सामने इनका एटिट्यूड देखिए।
शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के सामने चीख-चिल्लाहट और धमकी भरी भाषा? और ये 'दुबे' ऐसे बोल रही जैसे इसके घर का नौकर हो।
जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई
जंतर मंतर पर पंकज धावरैया का दिल्ली पुलिस ने बुरी तरह मारपीट कर हाथ तोड़ दिया है; पंकज जी बता रहे हैं कि इन्हें चलती बस से धक्का देकर फेका गया।
बेहोश होने के बाद RML हॉस्पिटल में भर्ती हैं।
This is not acceptable @DelhiPolice@BJP4Delhi
Peaceful protestors are attacked, while cockroaches were allowed to roam freely for weeks without permission??
Why these double standards??
This is the democracy they are so proud of.
A peaceful movement at Jantar Mantar is being suppressed while the same leaders preach about ahimsa in their speeches.
Fake leaders, fake principles, and vote-bank appeasement politics.
This is not democracy. This is political hypocrisy.