क्योंकि वाकई हमारा भारत विकास कर रहा है.
@PMOIndia@RailMinIndia कृपया इस भीड़ में हरदा स्टेशन पर मेरा आसानी से उतरना सुनिश्चित करें। @digvijaya_28
SL 4 ,41 no.,
train no 15945
A terrible experience in indian railway
ये वही दृश्य है जिसपर कोई ध्यान नहीं देता और हादसे होने पर सब नेता, मंत्री दुहाई देते फिरते है
ये भारतीय रेल्वे की दिब्रूगढ़ एक्सप्रेस का स्लीपर डिब्बा हैं। जिसमें टिकट लेकर बैठना या बिना लिए बैठना एक समान हैं।
#indian_railway#election
टिकिट होने के बावजूद भी इस डिब्बे में चढ़ते समय मैं गिरते गिरते बची हूँ। खचाखच भरी ट्रेन में कितनी असहजता के साथ मैं अपनी सीट तक पहुँच पाई हूँ।
भीड़ की शिकायत दर्ज करने पर पता चलता है कि डिब्बे के लिए कोई टीसी नियुक्त ही नहीं हैं।चुनावों में इन मुद्दों पर कभी चर्चा नहीं होगी.?
स्मृतियां शेष.....😢😓..... सन् 2020 में उनके जन्मदिन पर की गई एक पोस्ट साझा कर रही हूं, जिसमें मैंने प्रयास किया था कि उनके व्यक्तित्व को परिभाषित कर सकूं,और समाज से उनकी क्या अपेक्षाएं है ये बता सकूं.......
सुखदेव दादा अमर रहे......
https://t.co/s0vJLdnEcy
पर उनका कहना था कि "तुम मरी तो नहीं" ये कड़वी वास्तविकता हैं।
पता चला वहां कई लोग आते है सामान वापस करवाने और वे दुकानवाले कर देते हैं। इस कथन में उन्हें गर्व की अनिभूति थी। वाकई यह गर्व करने वाली बात हैं या शर्म करने वाली।
ऐसे अनुभव कई लोगों को होते है, शिकायतें होती है, 2/3