सबके दरवाजे होली गाने के क्रम में अन्तिम घर और दोपहर2से रात1बजे तक के जोश में कोई अन्तर नहीं,यही है हमारी रूढ़िवादी होली!!
“लागेला अवधs अन्हार ऐ लाला लागेला अवध अन्हार होओ रामs
अरे राम,लखन,सुकुवार जानकी!„
डफ बजाने वाला ही शुभम है। वाला है।@shradhasumanRai@Bitti_witty#होली
वीरों और महान विभूतियों की पावन धरती बिहार के अपने सभी भाई-बहनों को बिहार दिवस की ढेरों शुभकामनाएं। भारतीय इतिहास को गौरवान्वित करने वाला हमारा यह प्रदेश आज अपनी विकास यात्रा के जिस महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है, उसमें यहां के परिश्रमी और प्रतिभाशाली बिहारवासियों की अहम भागीदारी है। हमारी संस्कृति और परंपरा के केंद्र-बिंदु रहे अपने इस राज्य के चौतरफा विकास के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे।
अचानक हार्ट अटैक आने पर 7 रुपये की ये सबसें सस्ती किट अपने जेब, पर्स, घर, दुकान, और कार्यालय की अपनी दराज में हमेशां अपने पास रखें, क्योंकि ये देखने में आ रहा है कि आजकल अचानक और पहली बार आ रहे हार्ट अटेक में लोगों को अस्पताल पहुंचने तक का समय भी नहीं मिलता,और जान चली जाती है !👇
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गात् अपि गरियासि ।
उत्तराखंड के जलते जंगलों के साथ विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनायें।
हम सब वसुधा के सच्चे सपूत बने और उसका सिंचन करें, कपूत बन कर उसे दोहें नहीं, अंधे विकास और आधुनिकीकरण के नाम पर उसे नोचते न जायें, ऐसी प्रार्थना 🙏
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥
जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीव–धनुषधारी अर्जुन है, वहीं पर श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है– ऐसा मेरा ( संजय का) मत है॥
कल भगवद्गीता जयंती है- कौन कौन पूरे 18 अध्याय का पाठ करेगा ?!🙋🏼♀️
मार्गशीर्ष एकादशी से महाभारत का युद्ध आरंभ हुआ था..18 दिन चला था..18 अक्षौहिणी सेनाएँ युद्ध में लड़ी थीं - 19,68,300 योद्धा - कुल 18 योद्धा जीवित बचे थे।
विध्वंस, पीड़ा,मृत्यु और मृत्युंजय !
#भगवद्गीता#गीताजयंती
इंद्रियाणि पराण्याहु: इंद्रियेभ्य: परं मन: । मनसस्तु परा बुद्धि: यो बुद्धे: परतस्तु स: ॥
३.४२
इंद्रियों के परे मन है, मन के परे बुद्धि है और बुद्धि के भी परे आत्मा है ।
यजन्ते सात्त्विका देवान्यक्षरक्षांसि राजसाः ।
प्रेतान्भूतगणांश्चान्ये जयन्ते तामसा जनाः ॥१७.४॥
सात्त्विक गुणों से युक्त मनुष्य अन्य देवी-देवताओं को पूजते हैं, राजसी गुणों से युक्त मनुष्य यक्ष और राक्षसों को पूजते हैं और अन्य तामसी गुणों से युक्त मनुष्य भूत-प्रेत आदि को पूजते हैं।
गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा ।
पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः ॥ १५.१३॥
मैं ही प्रत्येक लोक में प्रवेश करके अपनी शक्ति से सभी प्राणीयों को धारण करता हूँ और मैं ही चन्द्रमा के रूप से वनस्पतियों में जीवन-रस बनकर समस्त प्राणीयों का पोषण करता हूँ।
वैदिक गणित की यह पुस्तक आ पहुँची है।
आने वाले सप्ताह का लक्ष्य है :
१.@chalai71 जी की इस पुस्तक का अध्ययन आरम्भ करना (योग्य लगा तो इसके हिंदी अनुवाद का स्वघोषित प्रयास भी जारी होगा)
२. साई दीपक जी की इंडिया दैट इज़ भारत को पूरा करना !
श्रीमद्भागवत कथा हमें जीवन दृष्टि और सही दिशा प्रदान करती है। कथा सत्व की संसिद्धि एवं जीवन लक्ष्य निर्धारण में सहायक है। आत्मसाक्षात्कार अर्थात् परमात्मा की संप्राप्ति और शुभकर्मों की तत्परता ही हमारे जीवन का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए।
#श्रीमद्भागवत्_कथा#AvdheshanandG_Quotes
वाराणसी में होने वाले काशी तमिल संगमम् कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर बहुत उत्सुक हूं। यह एक ऐसा भव्य और ऐतिहासिक अवसर होगा, जिसमें भारत के सांस्कृतिक जुड़ाव और तमिल भाषा की सुंदरता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।