@RiaRevealed So paid influencers like you have been hired to set an alternate narrative.
Wow.
But the tweet couldn't hide the fear of your political client.
Try how hard u may. Natural justice will find its way
The same Congress that back in March and August flagged the zero-MDR UPI model as financially unsustainable and demanded a calibrated and tiered MDR on high-value transactions, is today opposing it.
Here, I expose these hypocrites and separate fact from fiction on the UPI issue:
@RanaAyyub What a fake news !!
Ground reality is absolutely different.
All this hype happens for RaGa prior to every next election till it looses all its gas by the time results are declared.
This guy is not winning anything for next one decade for sure.
Rahul Gandhi, consider this advance notice. Jhooth ki Goonj is expanding. And this time, we’re not just checking what you said yesterday. We’re going all the back to 2004.
The archives are opening 😎
_फिल्म "धुरंधर " के शॉक से_
_अभी संभले नहीं कि ,_
_एक और मुहकाला आ रहा हैं,_
_"खानग्रेस" की_
_पोल खोलने के लिए।_
_अगले माह सितम्बर में आ रही है।_
🫵 _अंत तक देखें ट्रेलर।_ 🫵🎥📽️
🫵✋
ये आज का न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) अख़बार है। रविवार का संस्करण बहुत महत्वपूर्ण होता है। अमेरिका के अख़बार अब अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रम्प से ऊपर रख रहे हैं। ये बड़ी बात है!
NYT इससे हैरान है कि कैसे पिछले एक वर्ष में तमाम उथल-पुथल के बीच पीएम मोदी ने कई देशों की यात्राएँ करके साझेदारियों का दायरा बढ़ाया है। अख़बार का मानना है कि 2025-26 में हुई 20+ देशों की यात्राओं में अधिकतर में बंद कमरों में कारोबारी बैठकें हुईं। केवल मोदी ही नहीं गए, दर्जन भर से अधिक राष्ट्राध्यक्ष भारत भी पहुँचे।
जर्मनी से पनडुब्बी तकनीक, फ्रांस से छात्रों के लिए वीज़ा और ब्रिटेन से सस्ती स्कॉच व्हिस्की शामिल हैं - प्रधानमंत्री के हर दौरे से भारत के लिए कुछ न कुछ निकलकर आ रहा है। अख़बार मान रहा है कि कई देश अब ख़ुद आगे बढ़कर भारत के साथ सम्बन्ध बनाने की पहल कर रहे हैं। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ सम्बन्ध मजबूत हुए हैं।
AI के क्षेत्र में फ्रांस और भारत साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। नॉर्वे ने भारत में 10 लाख नौकरियाँ पैदा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। दक्षिण कोरिया वाले भारत में जहाज बनाएँगे। यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक समझौता हो चुका है। न्यूजीलैंड के साथ समुद्री सुरक्षा पर बात हुई है।
और हाँ, अब कोई ये आकर न कहे कि पहले भी तो ये सब होते थे या फिर पुराने प्रधानमंत्री भी तो विदेश जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का हिसाब माँगने वालों को ये भी देखना चाहिए कि न्यूयॉर्क टाइम्स अपने विश्लेषण में लिखा है कि पुराने दौर की कई शीर्ष-स्तरीय बैठकों में लक्ष्य बहुत व्यापक और अस्पष्ट होते थे। जबकि अब स्पष्ट लक्ष्य, निश्चित टारगेट और संख्याएँ तय की जा रही हैं।
पिछले साल ब्रिटेन ने भारत के कपड़ों पर टैरिफ घटाया है। इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को 'मेलोडी' टॉफी गिफ्ट किए जाने का भी ज़िक्र है इस आर्टिकल में। अमेरिका द्वारा लगाए गए तमाम टैरिफ के बावजजूद भारत अड़ा हुआ है, ईरान-युद्ध के बावजूद सबकुछ सामान्य है - तो इसके लिए नेतृत्व का धन्यवाद तो बनता है। तभी विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति भी चर्चा कर रहा है।
राहुल जी,
मैं बहुत लंबी बात नहीं कहता..
मैं बस अपने गाँव की एक कहानी कहता हूँ..
मेरे गाँव में भी जातियाँ थीं..आज भी हैं
कुछ घर पक्के थे, कुछ कच्चे
कुछ घरों में गैस थी, कुछ घरों में लकड़ी जलती थी
कुछ बच्चों के पास पढ़ने के लिए अच्छे साधन थे, कुछ बच्चे अभाव में बड़े हो रहे थे..
और इनमें से बहुत से गरीब परिवार वही थे जिन्हें हम सदियों से वंचित कहते आए हैं..
दलित
पिछड़े
गरीब
लेकिन राहुल जी मैं एक दूसरा सवाल पूछता हूं।
आपने उस गरीब की जिंदगी बदलने के लिए क्या किया?
क्योंकि मेरे गांव के गरीब को सिर्फ यह जानने में दिलचस्पी नहीं थी कि उसकी जाति कितनी है..
उसे यह जानना था कि..
उसके घर की छत कब पक्की होगी
उसकी बेटी शौच के लिए बाहर कब जाना बंद करेगी
उसके घर में पानी कब आएगा
उसकी पत्नी धुएं में खाना कब बनाना बंद करेगी
उसके पास बीमारी के समय अस्पताल जाने का भरोसा कब आएगा
उसका बैंक खाता कब खुलेगा
और उसके बच्चे को उससे बेहतर जिंदगी कब मिलेगी
फिर 2014 आया..
और यहीं से कहानी बदलनी शुरू हुई।
सरकार ने गरीब से यह पूछना शुरू किया
“तुम्हें क्या चाहिए?”
घर चाहिए?
बनाइए।
पानी चाहिए?
नल पहुंचाइए।
शौचालय चाहिए?
बनाइए।
गैस चाहिए?
कनेक्शन दीजिए।
बैंक खाता नहीं है?
खोलिए।
इलाज के पैसे नहीं हैं?
आयुष्मान दीजिए।
और फिर जो हुआ, वह सिर्फ योजनाओं की सूची नहीं थी..
सरकार गरीब के घर तक पहुंचने लगी
और यह बात समझना बहुत जरूरी है..
क्योंकि अगर सदियों से किसी समुदाय को सबसे ज्यादा deprivation झेलनी पड़ी है, तो उसके लिए welfare सिर्फ welfare नहीं है..
वह social justice है..
जब किसी दलित परिवार को पहली बार अपना पक्का घर मिलता है..
तो वह सिर्फ ईंट और सीमेंट नहीं होता
वह पिछली कई पीढ़ियों की बेबसी पर एक जवाब होता है
जब किसी गरीब मां के घर पहली बार नल आता है
तो वह सिर्फ पानी नहीं होता
उसके जीवन से रोज का एक अपमान और एक मजबूरी कम होती है..
जब उसकी बेटी शौचालय के लिए अंधेरा होने का इंतजार नहीं करती
तो वह सिर्फ sanitation नहीं है
वह dignity है..
और जब कोई गरीब पिता अपने बच्चे को देखकर कहता है "तुम्हें मेरी तरह नहीं जीना पड़ेगा”
तो शायद वही असली सामाजिक न्याय है..
इसलिए मैं राहुल गांधी से कहता हूं
जाति गिनना आसान है
जाति पर भाषण देना भी आसान है
मुश्किल है उस जाति से पैदा हुई गरीबी को तोड़ना
मुश्किल है उस घर तक सरकार पहुंचाना
मुश्किल है उस बच्चे को वह अवसर देना जो उसके पिता को कभी नहीं मिला
और शायद पिछले 12 वर्षों की मोदी की सबसे बड़ी कहानी यही है
पहली बार करोड़ों गरीबों ने सरकार को जाति के नाम से नहीं, अपने दरवाजे पर देखा
मेरे गांव की कहानी छोटी है..
लेकिन शायद यही कहानी आज भारत के करोड़ों गांवों की कहानी है..
जो अंततः हर समीकरण पर भारी पड़ती है..
PM Modi celebrated Raksha Bandhan with schoolgirls at his 7 Lok Kalyan Marg residence, interacting with children of different age groups as they tied rakhis on his wrist
Earlier, Modi extended Raksha Bandhan greetings across the country, wishing people happiness and prosperity and hoping the bond of love, affection and trust between siblings remains “forever unbreakable”
@NewsAlgebraIND abolish future elections for next 50 years, abolish freedom of speech, abolish reservation in jobs and education based on caste or religion, abolish freebies promised by political parties in their election manifesto, stop freebies or subsidies. nation to grow on meritocracy