@AMISHDEVGAN जैसे शरीर की शोभा अंगों से होती है
(उन लोगों का क्या जिनके किसी कारणवश कोई अंग नहीं है?)
चेहरे की शोभा आंखों से होती है।
(उनका क्या जो बेचारे आँख से अंधे हैं?)
युग को समझ न पाते जिनके भूसा भरे दिमाग़
लगा रही जिनकी नादानी पानी में भी आग
अजी, आपकी क्या बिसात है, क्या बूता है कहिए
सभ्य राष्ट्र की शिष्ट पुलिस है, तो विनम्र रहिये!
~नागार्जुन
एक स्वप्न के स्वप्न में खड़ा हूँ
एक स्वप्न जितना ही अकेला
एक मौन जितना भीतरी
एक अदृश्य जितना स्पष्ट
बिना हिले, एक ही जगह पर खड़ी हो रही है
बार-बार
एक खाली जगह,
एक जगह जो हमारे बीच पसरी है
और मैं तुम्हें चाहता हूँ
तुम्हारे बिना भी..
~ सोमेश शुक्ल 🌻🧡
आधी नींद में अक्सर लिखती हूँ एक कविता
जागने पर याद रह जाते हैं
बस कुछ अक्षर
शायद कभी हो कि एक ऐसी ही
आधी नींद से जागें
और कुछ शब्द हमेशा के लिए भूल चुके हों
आधी नींद लाती है अधूरे सपने,
अधूरी कविताएँ
एक अधूरी ज़िन्दगी
मुझे एक पूरी नींद चाहिए ...
~ रश्मि भारद्वाज 🌼✨
(@udvign__ )