ऋग्वेद के ऋषियों को अपने धर्म का नाम नहीं पता था। पूरे ऋग्वेद में कहीं किसी ऋषि ने सनातन शब्द ही प्रयोग नहीं किया। फिर आया तीन वेद।
उसके भी किसी ऋषि को अपने धर्म का नाम पता नहीं था।
असल में प्राचीन भारत में सनातन शब्द जैसा कोई शब्द ही नहीं था। बुद्ध ने अपने वचन में सनन्तन शब्द प्रयोग किया उसकी का अनुवाद बुद्धिस्ट लोगो बुद्धिस्ट हाइब्रिड संस्कृत में पाँचवी सदी में सनातन किया।
अब उनका क्या करे जो सनातन विशेषण को संज्ञा बताकर सिंड्रेला ड्रीम देख रहे है।
मैं @Archana_voice प्रशासन से अपील
करती हूँ कि इस जातिवादी व्यक्ति पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करें यह व्यक्ति स्पेशल फ़ोर्स मे है जोकि शाहजहांपुर में रहता था अब लखनऊ मे रहता है गलत पोस्ट करके बहुजन महापुरुषों का निरंतर करता है जो हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
@LkoCp@uppolic