In just 1 hour of Rahul Gandhi’s Jhooth ki Goonj at Indore, we found 11 false statements and 1 misleading statement.
5 Rallies and 52 Lies till now.
Days of Rahul Gandhi shooting lies and scooting away to Thailand are over.
स्वतंत्र भारद्वाज ने गलत किया तो 70 दिन बाद भी SC/ST लगा दिया जाएगा और वो जेल जाएगा लेकिन उसको पीटनेवाले वीडियो में दिख रहे हैं पर उनपर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
अजीत भारती को गाली देनेवाले का बाल भी बांका नहीं होगा लेकिन अजीत के जवाब पर SC/ST एक्ट भी लगेगा और उसको एंटीसिपेटरी बेल भी नहीं मिलेगी।
ये सिर्फ दो उदाहरण नहीं हैं.. यही आज की डेट में हमारे समाज की सच्चाई है।
सवाल बस इतना है कि जब किसी के गलत पर होनेवाला कानूनी एक्शन उसकी जाति देखकर होता है तो वो प्रक्रिया बटेंगे तो कटेंगे की कैटेगरी में आती है या नहीं?
जब देश की व्यवस्था ही हमें एक नहीं मान रही तो काहे का एक हैं तो सेफ हैं फिर? आज कोई और है.. कल को हममें से कोई होगा। बस अपनी बारी का इंतजार कीजिए।
Last year has seen India's highest ever GST collection: $270 billion; highest ever vehicle sales: 29 million; highest ever Manufacturing PMI: 59.3; highest ever Forex reserves: $726 billion; highest ever Sensex: 86,100. And now Q1 GDP zooms to 7.8%.
Terrible. Modi must resign.
मुल्ले शवों के साथ भी रेप करते थे। पाकिस्तान में आज भी वही हो रहा है। इसलिए हिन्दू स्त्रियाँ जौहर करती थीं। किसी दो कौड़ी की मुल्ला प्रेमी, करियर में फुँक चुकी लौंडी के लिए यह समझना कठिन हो सकता है क्योंकि उसके लिए उसकी ‘पुसी फॉर अ रेंट’ ही जीवन का सत्य है।
ऐसी लौंडियाँ सेक्स को स्वतंत्रता मानती हैं, जितनों के साथ सेक्स, उतनी अधिक स्वतंत्र। हर स्त्री ऐसा नहीं मानती। उनके लिए अरब के बाजारों में सेक्स स्लेव बनना उतना अडवेंचरस और फुलफुलिंग नहीं दिखा होगा, जितना आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझती, भैया कह कर सैंया बनाने वाली के लिए दिखता हो।
तुम नंगी हो कर एम्सटर्डम के बाजारों के शीशे में नाचों, तुम्हारी मुटल्ली देह भी किसी को पसंद आ जाएगी। हाँ, किसी योनि-केन्द्रित लौंडिया का नारीवाद यह तय नहीं करेगा कि दूसरी स्त्रियाँ रंडी बन कर ही घूमें क्योंकि तुम्हें रंडीपना बहुत पसंद है।
यह पोस्ट मैंने बहुत माइल्ड लिखा है। हिन्दू नारियों पर ऐसे आक्षेप का उत्तर मैं और भी अच्छी शब्दावली के साथ दे सकता हूँ।
After hurling constant threats and intimidation, Congress has now filed a police complaint against @jhoothkigoonj, a website run by a brave twenty-year old that exposes the industrial scale lies of @RahulGandhi.
Stand with @jhoothkigoonj, support them, and follow them.
"अब तुम्हारे भाई, बाप दादा हमारे खेत में ट्रैक्टर चला रहे हैं, 100-50 के लिए! अपने लिमिट में रहकर घूम! 1990-1995 वाला समय मत समझ! ये 2026 है, अब तुझमें और मुझमें कोई फर्क नहीं है! अब चमार किसी से कम नहीं है, तुझे औकात दिखा दिया जाएगा!"
-भीम आर्मी जिलाध्यक्ष वीरेंद्र भारती
जब ये खुद कह रहे हैं कि ये किसी से कम नहीं, इनके पास बहुत पैसा है, जमीन है, अब ये हर तरह से हमसे अच्छी स्थिति में हैं, तो इनको आरक्षण क्यों दिया जा रहा है????
ये रेकॉर्डिंग हर जगह फैलाइये ताकि लोगों को समझ आये कि अब इस जाति को आरक्षण की कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि अब ये खुद मान रहे हैं कि ये बराबरी हासिल कर चुके हैं🙏
हे दलित-पीड़ित-शोषित और अनपढ़, ये सब लिख कर तुम्हारा केस स्ट्रॉंग नहीं हो रहा। एक-एक स्क्रीनशॉट, हैंडल का IP एड्रेस नोट हो रहा है, सब ऑन रिकॉर्ड रखा जाएगा और तुम ट्वीट डिलीट करके भागोगे।
फिर भी, रणवीर सेना का नाम एक बार पढ़ लेना।
ये चूतिया लॉ में ही नहीं कॉमन सेन्स और फिजिक्स में भी फेल है! इसके हिसाब से पंखा हवा ‘बनाता’ है, हवा को डिस्प्लेस नहीं करता।
ऐसे चूतिए देश की शिक्षा व्यवस्था ठीक करने निकले हैं। नाम में ही ‘ass’ है, तो बहुत कुछ आगे कहने की आवश्यकता नहीं।
Some congressmen are trolling me on my swimming techniques! They think that swimming in gushing rivers of Arunachal Pradesh is like swimming in pools or simple rivers. In raging rivers, our head should be up, not down as those swimming coaches tell & our body should be more upright, not flat as we do in normal swimming. Negotiating in toughest rivers is a child's play for me since childhood. Inko pata nahi hai, "Mein yahan ka khiladi hun" 💪
The SC/ST Act used against Ajeet Bharti is draconian
RT if you support him and if you want amendments in the SC/ST Law
This case should be made an example of how the SC/ST Act is misused
जंतर मंतर पर पूरे देश से आए युवा अकेले नहीं है
हम पूरी ताक़त के साथ खड़े है साथ
भोजन पानी रुकने की व्यवस्था हॉस्पिटल व अन्य कोई भी सकंट होने पर निसंकोच फ़ोन कीजिए
8882002222 प्रीत सिरोही
#JantarMantar
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
मनुस्मृति। जब मुद्दाविहीन हो जाओ तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब स्वयं को आधुनिक व बुद्धिजीवी दिखाना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब वोक दिखना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो।
मनुस्मृति कहती है कि कन्या का अविवाहित रह जाना बेहतर है, लेकिन उसका विवाह किसी गुणहीन पुरुष से नहीं किया जाना चाहिए। नारी-सशक्तिकरण के लिए इससे बेहतर समझ रखते हैं आप? मनुस्मृति कहती है कि शारीरिक परिपक्वता के बाद निर्धारित अवधि तक प्रतीक्षा करने के बाद ही लड़की का विवाह हो, उस समय के हिसाब से 17 वर्ष तक। बाल-विवाह के विरुद्ध इससे बेहतर कोई प्रमाण है आपके पास?
मनुस्मृति कहती है - विन्देत सदृशं पतिम्। कन्या अपने योग्य पति का स्वयं वरण करे। यदि अभिभावक विवाह नहीं कराते और कन्या स्वयं पति चुन ले, तो न कन्या किसी पाप या अपराध की भागी होती है, और न वह पुरुष जिसे वह चुनती है। स्वेच्छा और कंसेंट को इससे बेहतर परिभाषित कर सकते हैं आप?
पुत्रेण दुहिता समा। पुत्री पुत्र के समान है। स्त्री-पुरुष समानता के लिए मनुस्मृति से बेहतर कुछ ला सकते हैं आप? क़ुरान या बाइबिल लेकर आइए, देख लीजिए। स्वयं डॉ आंबेडकर ने बुढ़ापे में मनुस्मृति का लोहा माना है, उत्तराधिकार वाले विषय को लेकर। मनुस्मृति माता की निजी संपत्ति को अलग से मान्यता देती है और उसे अविवाहित पुत्री का भाग बताती है। परिवार में महिलाओं को सशक्त रखने के लिए इससे बेहतर कोई व्यवस्था अबतक लेकर आए आप?
बल, दबाव या जबरन नियंत्रण से स्त्रियों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। विश्वसनीय पुरुष भी उन्हें क़ैद नहीं रख सकते। आत्मानमात्मना यास्तु रक्षेयुस्ताः सुरक्षिताः। मतलब, जो स्त्री अपने विवेक से अपनी रक्षा करती हैं, वही सुरक्षित है। बाहरी निगरानी से ऊपर विवेक को रखा गया है। स्त्रियों को विवेकी माना गया है। इससे अधिक सम्मान देते हैं आप? आपने तो अपनी बहन तक को चुनावी राजनीति में खुद के 2 दशक बाद उतारा।
धन के देखभाल एवं प्रबंधन के लिए मनुस्मृति ने स्त्रियों पर विश्वास जताया है। राजा को मनुस्मृति आदेश देती है कि ऐसी स्त्रियों की रक्षा करे जिनके पति बाहर हैं, जिनका परिवार प्रभावशाली नहीं है, जो बीमार हैं या जिनके पति या पुत्र नहीं हैं। अगर कोई संबंधी भी किसी स्त्री की संपत्ति हड़पता है तो उसे चोर मानकर दंड देने को कहा है। इससे अधिक परवाह है आपको स्त्रियों की?
पति को आदेश है कि बाहर जाने से पहले पत्नी की आजीविका की व्यवस्था करके जाए। अब ये मत कहिएगा कि पत्नी ख़ुद नहीं कर सकती क्या। जीवेच्छिल्पैरगर्हितैः। आगे ये भी लिखा है कि पति न करे तो स्त्री ख़ुद सम्मानजनक कार्यों के जरिए कमाए। आत्मनिर्भरता के लिए इससे बेहतर नियम बना लेंगे आप?
तस्मात्साधारणो धर्मः श्रुतौ पत्न्या सहोदितः। धार्मिक कार्य पति-पत्नी साथ मिलकर करें। पत्नी के बिना कोई अनुष्ठान पूरा नहीं होता है। हमारे यहाँ पत्नी को बेगम नहीं, अर्धांगिनी कहा गया है। यहीं से निकला है 'आधी आबादी'। पूरे पचास प्रतिशत - उतना ही, जितना पुरुष का हिस्सा। पचास-पचास। इससे अधिक सटीक तरीके से बराबरी का सन्देश दे सकते हैं आप? अन्योन्यस्य। एक-दूसरे के प्रति। वैवाहिक जीवन में भी दोनों की ज़िम्मेदारियाँ हैं। मनुस्मृति कहती है कि न स्त्री और न ही पुरुष वैवाहिक मर्यादा का उल्लंघन करे। इसमें क्या जोड़ देंगे आप क्रांतिकारी कहलाने के लिए? कुछ बाक़ी है क्या? मनुस्मृति कहती है कि नियम दोनों पर हैं।
मनुस्मृति ने स्त्री को महाभागाः (सौभाग्यशालिनी और सौभाग्य लाने वाली) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को पूजार्हाः (सम्मान की अधिकारी) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को गृहदीप्तयः (घर को प्रकाशित और प्रसन्न रखने वाली) कहा। परिवार के सुख का आधार कहा। गृहस्थ-जीवन का प्रत्यक्ष आधार कहा।
अब जिसने परिवार नामक संस्था को ख़त्म करने का लक्ष्य ले रखा हो, उसे ये सब बुरा लगेगा ही। वो पूछेगा कि स्त्री परिवार के सुख के लिए तिनका भी क्यों हिलाए। वो ये नहीं पूछेगा कि मनुस्मृति ने पुरुष को भी स्त्री के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी उठाने को क्यों कहा है।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते… रटा-रटाया है, इसीलिए इसे नहीं गिनाया। सबको पता है। इसी प्रसङ्ग में ये भी लिखा है कि जिस घर में स्त्री दुःखी रहती है वह परिवार शीघ्र नष्ट होता है। यानी, परिवार की स्थिति का पैमाना यह तय कर दिया गया है कि उसमें महिलाओं को प्रसन्न रखा जा रहा है या नहीं।
लेकिन नहीं, गाली तो केवल मनुस्मृति को ही पड़ेगी। क़ुरान और बाइबिल का नाम नहीं लिया जाएगा। राहुल गाँधी आज 'स्त्रीवादी' बने हैं, काश मनुस्मृति पढ़ लिया होता कम से कम। पढ़ा तो हमने भी नहीं है, इसीलिए जो कहा जाता है मान लेते हैं। सफाई देने लगते हैं कि ये उस समय की व्यवस्था थी।
मनुस्मृति से अधिक फेमिनिज्म और कहीं नहीं है। फ़िलहाल इस इकोसिस्टम के लिए तो फेमिनिज्म सिर्फ़ अश्लीलता और अंग-प्रदर्शन ही है।