सुना है मुख्यमंत्री जी आयोजकों पर बेहद गुस्सा हैं, क्योंकि उन्होंने महफ़िल तो बड़ी ज़बरदस्त सजवाई थी लेकिन उनके अपने चेले चपाटों के सिवा वहाँ केवल तंबू-टेंट वाले ही आये थे, और कोई आया ही नहीं।
जब जनता से धोखा होता है तो ऐसा ही होता है।
भाजपाइयों की चला-चली की बेला वक़्त से बहुत पहले ही आ गई है।
#भाजपा_ख़त्म
At Namo Narayana, we stand with the people of Assam during this difficult time. Our team is committed to supporting flood-affected families through relief efforts and essential aid. Together, we can bring hope where it’s needed most. 🙏
#AssamFloods#NamoNarayana
देशभर के आंदोलनकारियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके संगी-साथियों के दुर्व्यवहार, दुर्वचनों और हिंसा को सब देख लें। इनका दुस्साहस देखिए कि अभी युवाओं को वचन दिए हुए चंद घंटे भी नहीं हुए हैं और ये भाजपाई अपने इतिहास को दोहराते हुए फिर से धोखा दे रहे हैं। भाजपा के ये संस्कारी नेताजी अपने शीर्ष नेतृत्व के दिये गये आश्वासन की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और वीडियो भी बना रहे हैं। अब क्या ये भी डबल इंजन की टकराहट के कारण हो रहा है।
तुरंत गिरफ़्तारी हो!
भाजपाई तो अपने वचन के भी सगे नहीं हैं।
भरोसे का विलोम भाजपा!
इलाहाबाद छात्र आंदोलनों की राजधानी है। वहाँ भी जिस तरह भाजपा के ख़िलाफ़ जनाक्रोश उभरा है, वो कल का इतिहास रचेगा।
है इलाहाबाद के छात्रों के साथ, हमारी भी पुरज़ोर आवाज़!
सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की। AK-47 से भी फायरिंग की गई।
जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। #Bihar
I’m neither a BJP supporter nor a Congress supporter. But what is happening to the students is completely wrong.
The students who came forward with genuine issues should not have been subjected to violence. Their concerns deserve to be heard, and appropriate action should be taken.
भाजपा की ‘चोरी-लूट-छल-कपट-झूठ-फ़रेब’ की अधर्मी राजनीति अब प्रभु रामजी के मंदिर से आगे बढ़कर हनुमानगढ़ी तक पहुँच गई है। जो ‘महामुख’ हनुमानगढ़ी को लेकर मिथ्या-प्रचार कर रहे हैं, वो अपने महापाप का प्रायश्चित करें और स्वीकार करें कि वो राम मंदिर की चोरी से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहे हैं अन्यथा हनुमानगढ़ी की सीढ़ियाँ घुटनों के बल चढ़कर, आस्था के इस अनादि तीर्थ से क्षमा याचना करें। संकीर्ण राजनीति करते-करते वो भूल जाते हैं कि वो झूठ बोलकर अपने ‘धर्मपद’ को भी अपमानित कर रहे हैं। अगर उन्हें झूठ बोलना ही है तो वो ऐसा साधारण व्यक्ति की वेशभूषा धारण करके करें। अपने स्वार्थ की सिद्धी के लिए, श्रद्धा के प्रतीकों को धारण करके भोल-भाले आस्थावानों को ठगना महा-अधर्म है।
हनुमानगढ़ी की अतिशय शक्ति जब सामान्य पापियों का ही शमन कर देती है, तो इन ‘महापापियों’ का क्या हश्र होगा, कहने की आवश्यकता नहीं। प्रभु रामजी और हनुमान जी के प्रकोप से कोई अधर्मी नहीं बचेगा।
आज पूरा देश देख रहा है कि जहाँ-जहाँ भाजपा और उनके अपंजीकृत संगी-साथी क़ब्ज़ा करके बैठे हैं वहाँ-वहाँ घोर बेईमानी, चोरी, गबन, लूट हो रही है। अभी तो ये पहली परत खुली है, आगे-आगे देखिए खुलता है क्या!
श्री सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए।
जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वो आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है अत: भाजपाइयों से सदाचार और हृदय-परिवर्तन की कोई भी अपेक्षा निरर्थक है। भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है। उनके लिए धन ही प्रधान है। वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं। उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है। जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। ‘सत्याग्रह’ का महत्व वो क्या जानें जो ‘सत्ताग्रह’ के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। उन्हें न युवाओं के भविष्य से कुछ लेना-देना है, न उनके माता-पिता और अन्य परिजनों के सपनों से, वो तो ख़ुदगर्ज़ लोग हैं।
लोकतंत्र का गला घोंटनेवाली महापापी-अधर्मी भाजपा और उसके भूमिगत अपंजीकृत संगी-साथियों के गिरोह को हराने और सदैव के लिए हटाने के लिए आपके मनोबल और नैतिकता की महाशक्ति हर सच्चे भारतीय की प्रेरणा बनती रहे और आप देशवासियों, युवाओं, लोकतंत्र और पर्यावरण के संघर्ष के लिए नकारात्मक ताक़तों के ख़िलाफ़ सदैव प्रकाश स्तंभ बने रहें, यही हम सबकी चाह है और प्रार्थना भी।
@Wangchuk66
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
कृपया अपने बयान की विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए, आप अपने द्वारा खाली कराई गई ‘तथाकथित 64000 एकड़’ ज़मीन के क्षेत्रफल और भू-लेखा विवरण की ज़िलेवार सूची भी ज़ारी करें।
अयोध्या के मंदिर में हुई चोरी के बाद, आपने झूठ-मूठ की SIT बनाकर और उससे मनमानी रिपोर्ट लिखवाकर जो लीपा-पोती की है उससे आपके कथन-वचन से समाज का विश्वास पूरी तरह उठ गया है। आपके द्वारा बताए गये, कुंभ मेले के मृतकों के आँकड़े जिस प्रकार झूठे साबित हुए थे, वो आज भी जनता के मानस में अंकित हैं।
जन-प्रश्न : जब बोले गये और लिखे गये आँकड़े में ही अंतर होगा, तो जनता भरोसा किस पर करे?