जो लोगों का भरता पेट,
वह खुद खाता आधा पेट।
जो लोंगो के तन ढँकता,
वह खुद अर्धनग्न है।
जो देश का भाग्यविधाता है,
उसका भविष्य खुद अंधकार है।
हे! भारत के जनमानस तुम जागो,
इनके साथ तुम खड़ा हो जाओ,
आज यही उनकी पुकार है।।
#BharatBandh
सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि मई 2025,आपरेशन सिंदूर के दौरान 6 जवान शहीद हुए थे।जबकि आपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में देश को बताया था कि देश को किसी प्रकार की कोई क्षति नहीं पहुँची है।देश के लिए क़ुर्बानी देने वालो के नाम भी छुपाए जा रहे है।भारत माता की रक्षा करने वालो को सरकार सम्मान भी नही दे सकती ?
ट्रांसफर कब से बड़ा एक्शन हो गया ?
देश का हर परीक्षा तंत्र किसी न किसी खामी से जूझ रहा है।
कहीं पेपर लीक,
कहीं पोर्टल डाउन,
कहीं परिणाम में देरी।
अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं,
पूरी व्यवस्था का उपचार चाहिए।
जो न्यूज़ चैनल बोले की उनकी खबर का असर उन्हें बता दें की जब लड़के खुद सीबीएसई को एक्सपोज़ कर रहे थे तो वे बकरीद के बहाने हिन्दू मुस्लिम कर रहे थे!
और सभी को यह भी पता लगना चाहिए की सीबीएसई ने इतना बड़ा मजाक किया स्टूडेंट्स के साथ! phir जब मामला खुद स्टूडेंट्स ने उठाया तो
पहले तो सीबीएसई ने PR अभियान चलाया! जब वाह भी एक्सपोज़ हुआ तो बैकफुट आए!
और इस मामले में दूसरे विभाग में ट्रांसफर बड़ा एक्शन?? यह कड़ी कार्रवाई है?
कब से ट्रांसफर सजा है?
CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र।
CBSE सचिव - ट्रांसफ़र।
एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित।
और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान - सुरक्षित।
अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया।
यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है।
हमारी माँग आज भी वही है: शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो - ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए।
अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती - धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।
CBSE मामले में जो गोदी चैनल अपनी ‘ख़बर का असर’ बताए, उन सबको थोड़ी लानत भेज दीजिए। ये सार्थक जैसे बहादुर छात्र और सोशल मीडिया की वजह से बने दबाव का क्रेडिट लूट रहे हैं।
CBSE मामले में सरकार कार्रवाई करने को मजबूर हुई है क्योंकि @sidhant_sarthak जैसे नौनिहालों ने सिस्टम की पोल खोल दी। Blacklist वाले clause को बदलने जैसी बात सामने रख दी।
अब चंपादक लोग अपने अपने चैनल का चेहरा बचाने में जुट गए हैं।
कोचिंग व्यवस्था गलत है, तो पहले यह बताइए कि कोचिंग पैदा क्यों हुई?
करोड़ों बच्चे स्कूल से निकलने के बाद कोचिंग की तरफ भाग क्यों रहे हैं?
क्या उन्हें कोचिंग का शौक है?
शिक्षा व्यवस्था उन्हें वह नहीं दे पा रही जिसकी उन्हें आवश्यकता है|
कोचिंग बंद हो जाए, मुझे भी कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन उससे पहले स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था तो ऐसी बनाइए कि बच्चे को कोचिंग की ज़रूरत ही न पड़े।
कोचिंग बीमारी नहीं है, कोचिंग उस बीमारी का लक्षण है जो हमारी शिक्षा व्यवस्था में वर्षों से मौजूद है।
पंडित नेहरू ने संसद में सावरकर की मौत पर श्रद्धांजलि नहीं होने दी, यह बात एक आरएसएस वाले ने कही है:
ग़लत क्या कहा? नेहरू तो आज तक ज़िंदा हैं और हुक्मरानों के हर षड्यंत्र का रास्ता रोक रहे हैं। चाहे घुटने टेकने वाली विदेश नीति हो, देश को गिरवी रखने का अभियान हो, वोट की तानाशाही हो या फिर नफ़रत की सियासत—नेहरू आज भी गांधी की लाठी थामे इन फ़ासीवादी ताक़तों के सामने दीवार बनकर खड़े मिल जाते हैं।
आप कह रहे हैं कि बोर्ड के सभी सदस्यों को बर्ख़ास्त कर देना चाहिए। CBSE के चेयरमैन को पिछले साल दो साल का सेवा विस्तार दिया गया। दस दिन हो गए, छात्र और आप जैसे ही लोग CBSE की ग़लतियाँ पकड़ रहे हैं। CBSE ने अपनी तरफ़ से कोई प्रेस कांफ्रेंस की हो, ख़ुद ग़लतियों को पकड़ा हो, मुझे जानकारी नहीं है। असल में अब कुछ होता नहीं। लाख कहने के बाद भी कुछ नहीं होना है।
गुजरात में तीन दशक के आरजेडी की सरकार है और उसका ख़ामियाज़ा देखिए कि आणंद में अदास गांव के पास निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा गिर गया। बीजेपी की किरपा से किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है।
आ गए बिजली महंगी होने पर सरकार का बचाव करने
लेकिन ये जो भी खुद को पत्रकार कहते हैं और जनता को मिलने वाली मुफ्त सुविधाओं पर कोसते हैं ये लोग नेताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर बात नहीं करते कि उनके काफिले में 50-50 गाड़ियां कहां से चलती हैं❓
पेट्रोल,डीज़ल,रसोई गैस और सीएनजी के बाद अब उत्तर प्रदेश में बिजली 10 % महंगी हो गई है।ज़्यादा परेशानी वाली बात नहीं है,अगर आपका बिल 1000 ₹ आता है तो अब 1100 ₹ आएगा।5000 ₹ आता है तो 5500 आएगा।इतना तो देश 🇮🇳 के प्रति आपका भी फ़र्ज़ बनता है।
जिन राहुल गांधी के खानदान में देश के लिए लोग सालों जेल में रहे हों, दो-दो लोग शहीद हुए हों...उस खानदान को गद्दार बताकर उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा क्योंकि सब जानते हैं।
हां लेकिन पर्दे पर जो मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनते हैं उनकी समझ और व्यवहार की पोल जरूर खुल रही है...