🥹🥹😭 Même face à la mort, ils sont restés unis comme un seul homme et n’ont pas abandonné pour sauver leurs collègues. 💁🏻♀️ J’en ai eu la gorge nouée en regardant ça. Se battre pour gagner sa vie ne devrait pas être aussi éprouvant. ❤️
*घर के काम करने में शर्म महसूस करते है और धन देकर नौकरानी से करवाने में शान महसूस होती है.......
जिम में जाकर वही काम धन देकर खुद करते हो......बुद्धिमानी की पराकाष्ठा ऐसी भी....... **
वैसे भी कच्ची घानी तेल का इस्तेमाल खाने में कम अधिकारी और नेताओं की मालिश में ज़्यादा होता है,
भाई ने थोड़ा नहा लिया तो क्या गुनाह कर दिया।
है ना @fssaiindia ??
मिर्जापुर से हमने कुत्ते के काटने से कुत्ते जैसा भौकने वाले करन को लेकर स्टोरी की। स्टोरी पब्लिश हुई तो कई डॉक्टर्स ने आपत्ति जताई। कहा कि रेबीज होने के बाद बचने का चांस 0% होता है। मतलब मौत तय है। इस बच्चे को रेबीज नहीं था, कुछ लोगों ने कमेंट में लिखा- ये बच्चा नाटक कर रहा था।
अब इन डॉक्टर साहब और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोग यह वीडियो देख लें। पहली बार बच्चे को कछवां बाजार के क्रिस्चियन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया, वहां जवाब दे दिया गया। परिवार मिर्जापुर जिला हॉस्पिटल लेकर गया, वहां के डॉक्टरों ने कहा कि इसे तो रेबीज हो गया है, यहां इलाज नहीं होगा, वाराणसी लेकर जाओ।
परिवार जैसे-तैसे वाराणसी के बीएचयू में पहुंचा। दो डॉक्टर्स ने देखा। हाथ खड़े कर दिए। कहा कि इसे ले जाकर किसी काल कोठरी में बंद कर दीजिए। ये 3-4 दिन में खत्म हो जाएगा। यहां इसका इलाज संभव नहीं है।
इसके बाद परिवार के लोग रामा हॉस्पिटल, कबीर हॉस्पिटल लेकर गए। विशेषज्ञों ने देखा लेकिन जवाब एक जैसा ही। कहा- ये ठीक नहीं होगा, इसकी मौत तय है। अब इससे दूर रहिए, वरना काट लेगा।
करन के पिता भाई लाल इन चीजों से टूट से गए। वह हमसे बोले कि जब ये सुना कि ये नहीं बचेगा, काल कोठरी में बंद कर दीजिए, तब हम हिम्मत ही छोड़ दिए। हार से गए। हालांकि हम इसे लेकर इसके मामा के घर गए। वहां सीएसची हरहुआ में डॉक्टर साहब ने रेबीज का टीका लगाना शुरू किया। वहीं से ठीक हो गया।
अब आप लोग बताओ, अगर उसे रेबीज नहीं था तो आखिर डॉक्टरों ने मना क्यों किया? उन्हें तो समझकर इलाज करना चाहिए था न? अगर उनके कहने से ये परिवार बच्चे को एक अंधेरे कमरे में बंद कर देता तो बच्चा ऐसे ही मर जाता।
हम तो यही कहेंगे कि आप लोग इस बच्चे पर अध्ययन कीजिए। पता करिए कि कुत्ते की तरह भौकने के बाद, लार टपकने के बाद, लोगों पर हमला करने के बाद भी करन कैसे ठीक हो गया। क्या लक्षण आ जाने के बाद भी अगर रेबीज का टीका लगवाया जाए तो ठीक हो सकता है। समस्त सवालों के जवाब पर काम करिए। हमारा काम था इस मसले को सबके सामने लाना, हमने अपने हिस्से का काम कर दिया।
तमाम बड़े हॉस्पिटल के जवाब देने के बाद परिवार हार गया। वाराणसी के हरहुआ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार के पास पहुंचा। संतोष कहते हैं, ‘करन जब हमारे पास आया, तब वह पानी से डर रहा था, भौंक रहा था। उसे एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया। 24 घंटे के अंदर उसकी आक्रामकता कुछ कम दिखने लगी।’
संतोष आगे कहते हैं, ‘परिवार को समझाया कि डोज का पूरा कोर्स लगाना है। रेबीज के 5 टीके लगते हैं। यह जिस दिन से कुत्ते ने काटा होता है, उस दिन से शुरू होता है। इस केस में हम लेट हो चुके थे। फिर भी कोर्स शुरू किया, करन को 22 दिन में 5 डोज लगे, इसके बाद हमने 2 एक्स्ट्रा डोज लगाए। अब वह ठीक है।'
https://t.co/mRtMZ4PPgD
ये UP है बाबू....
यहाँ पब्लिक गलत करे या पुलिस...
सज़ा सबको मिलेगी 🖐️
ट्रैफ़िक रूल्स को तोड़ने वाले बाइक वाले की
बाइक की हवा निकालने वाले हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है....
चालान काटने का अधिकार है.. डैमेज करने का नहीं ✍️
ये सरासर अपराध हैं....
सक्षम वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ अविलंब विभागीय कार्यवाही करते हुए अपराधिक धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करके दंडात्मक कार्यवाही करना चाहिए।
लाडो, आप हिंदुस्तान की प्यारी बेटी हो। ❤️🇮🇳
आपकी बोली अलग हो सकती है, आपकी पोशाक अलग हो सकती है, पर आपके दिल में धड़कने वाला हिंदुस्तान वही है, जो हर भारतीय के दिल में बसता है।
देश का हर कोना हमारा है और हर बेटी हमारी अपनी है। हम अलग-अलग रंगों में रंगे हो सकते हैं, पर तिरंगा जब सिर के ऊपर लहराता है, तो हम सबकी पहचान एक हो जाती है।
यही हमारे भारत की खूबसूरती है - बोलियाँ अनेक, रंग अनेक, पर दिल एक… हिंदुस्तान एक।
लाडो, तू हिंदुस्तान की लाडली-कोडली बेटी सै। ❤️🇮🇳
तेरी बोली अलग हो सकै सै, तेरी पोशाक अलग हो सकै सै, पर तेरे दिल म्हं धड़कण आला हिंदुस्तान वोए सै, जो हर भारतीय के दिल म्हं बसै सै।
देश का हर कोना म्हारा सै और हर बेटी म्हारी अपनी सै। हम अलग-अलग रंगां म्हं रंगे हो सकैं सैं,
पर तिरंगा जब सिर के ऊपर लहरावै सै, तो सबकी पहचान एक हो जावै सै।
याए म्हारे भारत की खूबसूरती सै - बोली अनेक, रंग अनेक, पर दिल एक… हिंदुस्तान एक।
आप चाहे किसी भी पीढ़ी के हों,
Boomers, Gen X, Millenial, Gen-Z या Gen-Alpha
कभी भी कश्मीर , लद्दाक, अरुणाचल जैसी दुर्गम जगह पर घूमने अगर जा रहे हैं, तो मन में कृतज्ञता का भाव लेकर जाइएगा ।
क्यूँकि जो आपके लिए महज सैर-सपाटा है, उसे महफ़ूज़ रखने के लिए भारतीय सेना अपना ख़ून बहाती है ।
(ऐसी ही एक की एक वीडियो ,
18000 फीट पर,
पहाड़ों के ऊपर,
बंकरों में,
जहाँ सड़कें नहीं पहुँचती,
वहाँ भारतीय सेना के जवान अपने बंदूक की ट्रिगर पर उँगलियाँ रख तैनात रहते हैं, ताकि आपको आज़ादी मिलते रहे बुद्धिजीवी बन कर बात करने की)
पुलिस वालों की जब मर्जी हो किसी को पेल देते है ,
लेकिन जैसे ही कोई पलटकर उल्टा कंटाप जड़ देता है तो वर्दी वाले पर हाथ कैसे उठाया ,
जब यही वर्दी वाले कमजोरों पर हाथ उठाते है तो सारे नियम नाले में चले जाते है।
मैं सिद्धि सिंह, विवेकानंद विद्या मंदिर सेक्टर 2 धुर्वा रांची की छात्रा हूं। मेरा कसूर मात्र इतना है कि स्कूल के द्वारा जबरन बढ़ाई जा रही फीस और सिलेबस का विरोध मेरे पिता के द्वारा किया गया, और इसकी शिकायत उपायुक्त रांची और स्कूल से किया गया। बदले में आज चार महीना बीत जाने के बाद भी स्कूल ने मेरा एडमिशन नहीं लिया। जबकि मेरे द्वारा लगातार 2 - 3 महीने तक बकाया फीस अकाउंट में जमा करने के लिए स्कूल दौड़ लगाया गया, लेकिन मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के अलावा कोई निष्कर्ष नहीं निकला, इसकी शिकायत DC रांची, CBSE और अन्य सभी जगहों पर किया। लेकिन किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया, जबकि मेरे द्वारा DC रांची, DSE रांची, CBSE रांची के ही आदेशों का पालन किया जा रहा था।
अब मैं स्कूल नहीं जाती घर में ही रहती हूं, सिस्टम में बैठे लोगों ने मिलकर मेरा भविष्य खराब कर दिया। माननीय उच्च न्यायालय झारखंड से अनुरोध है कि मुझे इंसाफ दिलाया जाए।
सिद्धि सिंह
छात्रा, विवेकानंद विद्या मंदिर सेक्टर 2 धुर्वा रांची।
यूपी पुलिस ने नई टेक्नोलॉजी के जरिए ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वालो पर कार्यवाही हेतु एक नुकीला यंत्र तैयार किया है -
ये मोटा सा नुकीला यंत्र पुलिस कर्मी अपनी मनमर्जी अनुसार जितनी बार चाहे उतनी बार बाइक के टायर पर मारकर उसे छलनी कर सकता है..!
मथुरा की वृंदावन पुलिस इसका परीक्षण
कर रही है -
आप वीडियो में देख सकते हैं -👇👇
जहां एक उत्तर प्रदेश में कावड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस कांवड़ियों के पैरों में मलहम लगा रही है |
वही बिहार के बेगूसराय में यह पुलिस वाला कावड़ियों को ऐसे मार रहा जैसे जेल में लाइन ना लगाए जाने पर कैदियों को मारा पीटा जाता है | 😡
अगर यह पिटाई उपद्रव के दौरान होती तो हम पोस्ट नहीं करते पर वीडियो के साफ साफ दिख रहा है कि उपद्रव तो दूर कोई आवाज भी नहीं निकाल रहा | 😡
कावड़ियों चाहते तो एकजुट हो कर पुलिस वालों को जंतर मंतर के आन्दोलनकारियों की तरह डील कर सकते थे पर कांवड़ियों द्वारा सभ्यता का परिचय दिया गया |
हिंदुओं कांवड़िये तो इस पुलिस वाले ने बर्बरता से पीट लिए लेकिन अब हमारा उद्देश्य इस पुलिस वाले की हरकत का जवाब देने का है |
ट्विटर पर लिख सकते हो तो लिखे या इंस्टाग्राम पर स्टोरी लगाई या हमारी पोस्ट को हिंदुओं तक पहुंचाओ पर इस पुलिस वाले को सबक जरूर सिखाओ |
@SBICard_Connect@RBI@FinMinIndia Why am I repeatedly receiving the same Notice Prior to Filing of Execution Petition from different Veritas Law email IDs while my requests for the certified Arbitration Award proof of service Statement of Claim & arbitration records remain unans
बेटी कार में बैठी हुई है। पत्नी कार किनारे खड़े होकर रो रही है। 'रिटायर मेजर' हरियाणा पुलिस की करतूतों को झेल रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए दिव्यांग हुए मेजर हेमेंद्र सिंह को गुरुग्राम में ट्रैफिक पुलिस ने शराब पीकर गाड़ी चलाने के शक में रोका। एल्कोहल टेस्ट हुआ, लेकिन रिपोर्ट सामान्य निकली।
इसके बावजूद भी मेजर, उनकी पत्नी और बेटी को रात डेढ़ बजे तक सड़क पर रोके रखा। पत्नी किनारे खड़ी हो कर रोती रहीं, बेटी कार में बैठी रही।
परेशान होकर मेजर ने खुद डायल-112 पर फोन किया। मदद की टीम आने वाली थी, तभी ट्रैफिक पुलिसकर्मी वहां से भाग गई।
मां बाप की खुशी सर्वोपरी है पर हमे क्या रोकता है ऐसा करने से..ये सवाल बहोत समय से मै खुद से पूछ रहा हूं।
जीवन के उस मोड़ पर जब उनको सबसे ज्यादा जरूरत होती है हमारी और हम न जाने किस चीज के पीछे भाग रहे होते है कि चन्द समय उनको नही दे पाते जिनसे हम इस संसार मे आये है
माता पिता 🫶
Jammu and Kashmir has charted a journey from fear to freedom under the leadership of Modi Ji. Where hoisting the Tiranga once invited threats, J&K now hosts Tiranga Yatras, with millions waving our National Flag with joy and pride.
#HarGharTiranga
🇮🇳 आज का दिन हमें याद दिलाता है कि आज़ादी हमें विरासत में मिली है, लेकिन एक बेहतर भारत बनाना हमारी जिम्मेदारी है।
हम उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हैं, जिन्होंने अपने साहस, संघर्ष और बलिदान से देश की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।
एक डॉक्टर के रूप में मेरा मानना है कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके स्वस्थ नागरिकों में होती है।
इसलिए इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए केवल तिरंगे को सलाम ही न करें, बल्कि अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक होने का संकल्प लें।
स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मस्तिष्क और जागरूक समाज यही एक सशक्त भारत की पहचान है। 🇮🇳
आप सभी को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जय हिंद! 🇮🇳
— डॉ. विकास कुमार
न्यूरोसर्जन एवं ब्रेन-स्पाइन विशेषज्ञ
#IndependenceDay #स्वतंत्रतादिवस #JaiHind