पहली बार हिंदी में शिव तांडव स्तोत्र 🔱
आशुतोष राणा की दमदार प्रस्तुति ने रोंगटे खड़े कर दिए हर शब्द में भक्ति, हर स्वर में महादेव की शक्ति का एहसास
नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव 🚩🙏
आज राहुल गांधी का जन्मदिन है लिखने को बहुत कुछ है लेकिन जैसे ही आज फेसुबक खोला तो सबसे पहले भाई Aseem Tiwari की पोस्ट सामने आ गई अब उसे पढ़कर लगा कि आज के दिन इससे बेहतर और कुछ नहीं लिखा जा सकता और हम भी यही लिखते और पढ़कर ये भी लगा कि राहुल गांधी उम्मीद हैं और उस उम्मीद का सुरक्षित रहना भी जरूरी है इसलिए वो स्वस्थ रहें और उनके आसपास के लोग उनकी सुरक्षा का ध्यान रखें। अब आप असीम भाई का लिखा हुआ पढ़िए...✍️
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आज राहुल गांधी छप्पन साल के हो रहे हैं.
यह बधाई किसी दरबारी की आरती नहीं है, यह किसी पार्टी दफ्तर की दीवार पर चिपका पोस्टर नहीं है, यह उस आदमी को याद करने की कोशिश है जिसे इस देश की राजनीति ने सबसे आसान मजाक समझा, और जिसने उसी मजाक को धीरे धीरे अपनी जिद, अपनी यात्रा, अपनी भाषा और अपने धैर्य से एक गंभीर सवाल में बदल दिया.
राहुल गांधी को पसंद करना ज़रूरी नहीं है, उनसे सहमत होना भी ज़रूरी नहीं है, राजनीति में किसी भी नेता को देवता बना देना वैसे भी लोकतंत्र का पहला आलस्य है, लेकिन यह मानना पड़ेगा कि इस आदमी ने उस दौर में चलना चुना जब बाकी लोग उड़ते हुए पोस्टर बनना चाहते थे, इसने उस समय सुनना चुना जब हर तरफ सिर्फ भाषणों का धुआं था, इसने उस समय सवाल पूछे जब सवाल पूछना देशद्रोह, नकारात्मकता, परिवारवाद, टुकड़े टुकड़े और न जाने कितनी सरकारी मुहरों के नीचे दबा दिया गया था.
छप्पन साल की उम्र अपने आप में कोई उपलब्धि नहीं होती, उम्र तो कैलेंडर भी पूरी कर लेता है, फर्क यह है कि इन छप्पन सालों में आदमी ने क्या बचाया, अपनी भाषा बचाई या सिर्फ अपना नारा बचाया, अपना विवेक बचाया या सिर्फ अपनी जयकार बचाई, अपने भीतर मनुष्य बचाया या सिर्फ माइक के सामने खड़ा एक विशाल आकार बचाया.
एक तरफ छप्पन इंच का दावा था, सीना नापकर राष्ट्रवाद बेचने का महान भारतीय स्टार्टअप, मानो देश कोई दर्जी की दुकान हो और देशभक्ति का बिल कपड़े के नाप से बनता हो, दूसरी तरफ छप्पन साल का एक आदमी, जिसने छाती नहीं नापी, सड़क नापी, भीड़ नहीं खरीदी, लोगों के बीच गया, शक्ति का अभिनय नहीं किया, कमजोरी स्वीकार की, और यही बात कई लोगों को सबसे ज्यादा चुभती है.
क्योंकि ताकत का अभिनय करने वालों को सबसे अधिक डर उस आदमी से लगता है जो अभिनय नहीं करता.
राहुल गांधी की राजनीति की सबसे बड़ी बात यह नहीं कि वह हमेशा सही हैं, सबसे बड़ी बात यह है कि वह गलती करने के बाद भी मनुष्य दिखते हैं, वे गुस्से में भी आदमी लगते हैं, हार में भी आदमी लगते हैं, हँसी में भी आदमी लगते हैं, और आज की राजनीति में आदमी लगना भी एक जोखिम भरा काम हो गया है, यहां तो नेता या तो अवतार है या विज्ञापन, या तो महामानव है या महामंच, सामान्य मनुष्य के लिए जगह बची ही कहां है.
उन पर जितना हँसा गया, उतना शायद किसी भारतीय नेता पर नहीं हँसा गया, उनकी टीशर्ट से लेकर दाढ़ी तक, उनकी हिंदी से लेकर चाल तक, उनकी छुट्टियों से लेकर चुप्पियों तक, सब पर व्यंग्य हुआ, और कई बार ठीक भी हुआ, सार्वजनिक जीवन में आलोचना कोई अन्याय नहीं है, मगर एक समय के बाद यह साफ दिखने लगा कि मजाक विचार का नहीं था, मजाक उस संभावना का था जिसमें सत्ता से डरना बंद हो जाए
मैं राहुल गांधी को मसीहा नहीं मानता, मुझे मसीहाओं से दिक्कत है, मसीहा आते ही नागरिकों को भक्त बना देते हैं, और इस देश ने भक्तों की लागत बहुत ज्यादा चुका दी है, मैं राहुल गांधी का इसलिए सम्मान करता हूं कि उन्होंने कम से कम नागरिक को नागरिक कहने की कोशिश की, बेरोजगार को आंकड़ा नहीं कहा, किसान को फोटो अवसर नहीं कहा, छात्र को भीड़ नहीं कहा, मजदूर को राष्ट्र निर्माण का बैकग्राउंड म्यूज़िक नहीं बनाया, उन्होंने ऐसे लोगों की तरफ देखा जिन्हें सत्ता अक्सर कैमरे के बाहर रखती है.
यहां राहुल गांधी की बधाई दरअसल एक आदमी की बधाई नहीं है, यह उस संभावना की बधाई है कि राजनीति में अभी भी करुणा बच सकती है, असहमति बच सकती है, सवाल बच सकते हैं, और सबसे ज़रूरी, शर्म बच सकती है.
शर्म, वही चीज जो आजकल सबसे कम मिलती है.
छप्पन इंच की राजनीति ने हमें सिखाया कि नेता जितना ऊंचा बोलेगा, उतना बड़ा होगा, राहुल गांधी की छप्पन साल की उम्र शायद यह याद दिलाती है कि नेता कभी कभी धीमे बोलकर भी बड़ा हो सकता है, कभी कभी ठहरकर भी बड़ा हो सकता है, कभी कभी हारकर भी बड़ा हो सकता है, और कभी कभी मजाक सहकर भी बड़ा हो सकता है.
जो लोग छप्पन इंच पर फूल चढ़ाते रहे, उन्हें आज छप्पन साल के इस आदमी को देखकर थोड़ी बेचैनी होनी चाहिए, क्योंकि एक छप्पन शरीर का दावा था, दूसरा छप्पन समय की गवाही है, एक छप्पन ने डर पैदा किया, दूसरे छप्पन ने डर के बावजूद बोलना सीखा, एक छप्पन मंच पर गूंजता रहा, दूसरा छप्पन सड़क पर धूल खाता रहा, एक छप्पन ने भक्त पैदा किए, दूसरा छप्पन शायद नागरिकों को याद दिला रहा है कि झुकना कोई राष्ट्रीय कर्तव्य नहीं है.
जन्मदिन मुबारक राहुल गांधी.
कई बार आपसे असहमति रहेगी, सवाल रहेंगे, आलोचना भी रहेगी, लेकिन इस दौर में आपका होना ज़रूरी है, क्योंकि अंधेरे में हर दीया सूरज नहीं होता, पर हर दीया यह प्रमाण ज़रूर होता है कि अंधेरा अंतिम सत्य नहीं है.
छप्पन साल की उम्र में यह आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि जिन्होंने आपको खत्म मान लिया था, वे आज भी आपको समझाने, छोटा करने, मिटाने और मजाक बनाने में अपनी पूरी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं.
राजनीति में आदमी की असली मौजूदगी वही होती है, जब उसके विरोधियों की नींद में भी उसका नाम आता रहे.
#HappyBirthdayRahulGandhi
@RahulGandhi@srinivasiyc You gave a very wonderful speech, you kept everything beautifully, your strength is that you moved forward with all the alliance partners, Mahadev is with you, may your victory be assured. Har Har Mahadev 🔱
इस चौपाई की शक्ति असीमित है, आप जहां भी अटकें कि-
📌अब क्या होगा?
📌आगे क्या करें?
तो बस बाबा का ध्यान करके इस चौपाई का जाप शुरू कर दें। उठते बैठते सोते जागते बस बाबा को कहना है।
कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
जगत में कौन सा ऐसा कठिन काम है जो हे बजरंगबली! तुमसे न हो सके।
मुझ पर भी कृपा करो और मुझे इस कठिन समय से बाहर निकलो।
साथ साथ करतल ध्वनि के साथ ये कीर्तन करें।
जय राम जय राम जय जय राम
जय जय श्री विघ्नहरण हनुमान
मौत आए तो पण्डित नेहरू जैसी… — कि विरोधी रोए, विपक्षी रोए, दोस्त रोए, दुश्मन रोए, सारा जहाँ रोए। —
सन् 1964 में आज ही के दिन जब पण्डित नेहरू का निधन हुआ तो तत्कालीन रक्षामंत्री वाई.बी. चव्हाण अमेरिका दौरे पर थे। — समस्या थी — अंतिम संस्कार से पहले दिल्ली कैसे पहुँचा जाए? —
जिस विमान से भारतीय दल गया था, वह छोटा था। स्पीड कम थी। रास्ते में कई जगह रुकना पड़ता। —
जब यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन तक पहुँची तो उन्होंने अपना आधिकारिक विमान भारत के प्रतिनिधिमंडल के लिए उपलब्ध कराया। —
लेकिन एक और बाधा थी। पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद कर रखा था। अगर रास्ता बदलते तो दिल्ली पहुँचने में कई घंटे और लगते। —
फिर पाकिस्तान से संपर्क हुआ। और पण्डित नेहरू के सम्मान में पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस खोल दिया। —
सोचिए… जिस नेता के निधन पर अमेरिका अपना राष्ट्रपति विमान दे दे, और पाकिस्तान अपना आसमान खोल दे… उस नेता का क़द क्या रहा होगा। —
ये था पण्डित जवाहरलाल नेहरू का वैश्विक सम्मान। —
विनम्र श्रद्धांजलि 🙏 #Nehru
#घोरकलजुग
KHAN SIR ने खोल दी सरकार की “विश्वगुरु” विदेश नीति की पोल 🔥
ईरान भारत को 60 दिन का Oil Credit देता था…
तेल लो, पेट्रोल-डीजल बेचो, फिर पैसे दो 💰
ऊपर से वही पैसा भारत के सामान खरीदने में लगता था 🇮🇳
लेकिन अमेरिका ने आंख दिखाई और सरकार घुटनों पर आ गई 😡
जिसे राष्ट्रवाद बताया गया,
वो असल में विदेशी दबाव के सामने सरेंडर था.
असली बातें सिर्फ पुराने लोग ही जानते है
अंध भक्तों को सिर्फ़
WHATSAPP University के ज्ञान का पता हैं
जब व्यक्ति बराबरी नहीं कर पाता तो वह सिर्फ बुराई ही करता है
सुनिए मेजर जनरल सी.एस. धवन जी को
Rahul Gandhi Is Very Intellectual
जो उनकी मीडिया में इमेज बनाई हुई है वो बिल्कुल गलत है..कुछ लोगों ने उनके खिलाफ एक नैरेटिव बना किया
He is Well Educated.
शशि थरूर भी काफी पढ़े लिखे हैं उनकी बातों को समझने के लिए तो साथ में डिक्शनरी रखनी पड़ती है.
राहुल गांधी की एज काफी है
But He looks So Healthy
सुनो बच्चों, NEET का एग्जाम बाद में भी हो सकता है लेकिन तुम्हारे मम्मी-पापा ने जो शेर पाला है वो दोबारा नहीं मिलेगा.
शेर अभी तुम्हारे एग्ज़ाम्स खा रहा है, कल करियर खायेगा और परसों पूरा फ्यूचर खा जाएगा…तो क्या शेर पालना छोड़ दोगे?
खोज लीजिए अब ऐसे प्रधानमंत्री
जिन्होंने
240 रुपये में यूरिया,
450 रुपये में अमोनिया,
600 रुपये में डीएपी,
350 रुपये में गैस का सिलेंडर,
60 रुपये में पेट्रोल,
55 रुपये में डीजल दिया।
RTI Act, Right to Education Act, FRA 2006, Food Security Bill, आधार कार्ड, मनरेगा जैसी योजनाएँ — जो आम आदमी को सीधे छूती हैं, उन महत्वपूर्ण कामों को बिना किसी फोकट के फर्जीवाड़े या भ्रष्टाचार के पूरा किया।
देश के करोड़ों किसानों के कर्ज माफ कर दिए, कपास और मूंगफली के रिकॉर्ड तोड़ भाव दिए। जब पूरी दुनिया महामंदी के चंगुल में फँसी थी, तब भी भारत जैसे देश पर उसकी मार नहीं पड़ने दी।
RTI Act जैसे कानून लागू करके अपनी ही सरकार के भ्रष्टाचारियों को जेल भिजवाया।
जब जरूरत पड़ी तो मीडिया के सामने सीधा संबोधन किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कम बोले, लेकिन सख्त बोले।
किसी से डरे बिना विदेश में जवाब दिए और देश का अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपना स्टैंड साफ किया।
ऐसे महामानव का ऋण हम कभी नहीं चुका सकते।
हमेशा याद रहेंगे — सरदार मनमोहन सिंह 🙏
NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी।
परीक्षा नहीं - NEET अब नीलामी है।
कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे।
22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक - 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है।
22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।
मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है - मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।