@Desirefinix1 No empathy with these goons … He or his boss must face the legal consequences for such behaviour and act against snatching a private car without prior notice and leaving them on road with their family,what about their security? @PMOIndia@narendramodi,for this we have voted BJP?
लगातार आप सब के विचारों के सुनने के उपरांत, हमने एक सरलीकृत माँग पत्र बनाया है। एक बार आम सहमति बन जाए, फिर डिजिटल से धरातल की योजना बनाई जाएगी। तब तक, नीति निर्धारकों के लिए यह पत्र हम सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि उन्हें AI से हिन्दी लिखवा कर, उसमें प्राइवेट में आरक्षण जैसी बकलोली न करनी पड़े।
@JPNadda जी, कॉपी ही करना है, तो ठीक से करो। वैसे, आपको दोबारा झुका देख कर दुख हुआ।
The SC/ST Act used against Ajeet Bharti is draconian
RT if you support him and if you want amendments in the SC/ST Law
This case should be made an example of how the SC/ST Act is misused
@ajeetbharti सरकार को अब समझना होगा कि स्वर्ण उन की बपौती नहीं , जब हम हर हर मोदी घर घर मोदी कर सकते हैं तो उन्हें सरकार से बाहर भी भेज सकते हैं । अब सवाल हमारे बच्चों के भविष्य का है । अब की बार नयी पार्टी का आगाज होना चाइए ।
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
आठ महीने बाद अचानक UGC पर पुनर्विचार की बात, आज हर तरफ से राजनीतिक तौर पर घिरी भाजपा सरकार के पीछे हटने के संकेत हैं।
और भाजपा के उन डिजिटल श्रमिकों पर दया आती है, जिन्होंने पार्टी में पद पाने के लिए इसी विषय पर क्या-क्या नहीं लिखा।
पहली बार जंतर-मंतर पर ऐसा आंदोलन हो रहा है, जिसका समर्थन कोई पार्टी नहीं कर रही है।
ये आंदोलन इस देश की सभी राजनीतिक दलों की पारंपरिक दोगली राजनीति के खिलाफ है और ये इस राजनीति के अंत की शुरुआत भी है।
कोई भी चाटुकार इन तीखे सवालों का जवाब नहीं दे पाएगा।
यह भारत के असल में प्रतिभाशाली और पढ़े-लिखे वर्ग का एकमात्र विरोध-प्रदर्शन है।
यहाँ तक कि 100 दिलीप मंडल भी उनका मुकाबला नहीं कर सकते।
@JaipurDialogues The way the CJP is attempting to take over the agenda against the BJP government is apparent to everyone. Why are they not visiting schools in non-BJP states? This marks the beginning of public anger against these biased So called leader of CJP.
मैं कम लिखता हूँ , पर आज लिखना पड़ेगा - लोकतंत्र और भीड़ तंत्र में फ़र्क़ को समझना होगा ।
अगर दिल्ली में भीड़ दिखा कर कुछ लोग ये समझते है कि वो देश बदल सकते हैं , तो देश को चाहने वाले घंटों में वहाँ पर करोड़ो आ सकते हैं , किंतु ऐसा हमे सिखाया नहीं गया । वोट से जीतों और आओ फिर.