जिला गाजियाबाद के नंदग्राम में IIT की तैयारी कर रहे दलित छात्र आयुष प्रताप सिंह की 28 दिसंबर 2025 को हुई मृत्यु के मामले में उनके पिता, वायुसैनिक श्रद्धेय खजान सिंह जाटव जी, पिछले कई महीनों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पुलिस कमिश्नर को तीन बार प्रार्थना पत्र देने के बाद करीब साढ़े पांच महीने में 17 जून 2026 को एफआईआर दर्ज हुई। पिता का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों में हत्या की आशंका स्पष्ट होने के बावजूद दोषियों को बचाने के लिए मामले को सड़क दुर्घटना के रूप में दर्ज किया गया।
एफआईआर में आठ अभियुक्त नामजद हैं, लेकिन चार महीने बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। खजान सिंह जी इस मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी से दो बार, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी, मंत्री असीम अरुण जी, मंत्री बेबी रानी मौर्य जी, सांसद अतुल गर्ग जी और विधायक संजीव शर्मा जी से मिल चुके हैं। इसके बावजूद परिवार को न्याय नहीं मिला।
पिता का आरोप है कि पुलिस ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी को भी यह कहकर गुमराह किया कि मामला खुल गया है। मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, जब एफआईआर में आठ अभियुक्त नामजद हैं और उपमुख्यमंत्री @brajeshpathakup जी तक को मामले की गलत जानकारी दी जा रही है, तो सवाल है कि पुलिस आखिर किसके दबाव में काम कर रही है और उसे किसका संरक्षण प्राप्त है?
@UPGovt इस मामले की तत्काल निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराए, सभी साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच हो और दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। एक वायुसैनिक अपने बेटे की मौत का सच और न्याय मांग रहा है, उसे केवल आश्वासन नहीं बल्कि न्याय चाहिए।
@NCSC_GoI
मनुवादियों का धन्यवाद, जिन्होंने सोए हुए बहुजन समाज को जगा दिया।
अब बहुजन समाज सिर्फ आरक्षण बचाने की नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र में आरक्षण बढ़ाने और कॉलेजियम सिस्टम को खत्म कर न्यायपालिका में पारदर्शी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर चुका है।
हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ सिविल अविएशन करनाल में महेंद्रगढ़ की रहने वाली प्रीती की कहानी दुःखद है की किस तरह जाति वाद हर जगह कायम है कहीं पीएचडी पुरी नहीं होने देते कहीं NFS के तहत पोस्ट किसी और को देते हैँ.उड़यन मंत्री और सिविल अविएशन मंत्रालय संज्ञान लें @RamMNK,@MoCA_GoI,
बेहतरीन, इन्होंने चोटी भले ही रख ली लेकिन बुद्धि 1 पैसा की नहीं है, इसीलिए मंदबुद्धि मनुवादी कहा जाता है 🔥🔥
मनुवादियों को ऐसे ही बैठकर समझाना चाहिए, नहीं समझे तो ताड़ना दो और आगे बढ़ जाओ 🔥
महाड सत्याग्रह (1927) दलितों को सार्वजनिक चावदार टैंक का इस्तेमाल मना था। पानी नहीं था, ऐसा नहीं,अलग कुओं, नदियों या दूसरों के पानी पर निर्भर रहना पड़ता था, भेदभाव के साथ। गाँवों में आम कुओं से पानी भरना वर्जित था। @ajeetbharti@neha_laldas@talk2anuradha