बिहार बोर्ड द्वारा इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2025 का कार्यक्रम 10 से 20 जनवरी तक निर्धारित है, उक्त अवधि में दो रविवार एवं मकरसंक्रांति अवकाश है।
ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा वर्ग 11-12 के शिक्षकों का 12 से 17 जनवरी तक आवासीय प्रशिक्षण भी तय कर दिया गया है, ऐसे में प्रैक्टिकल जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
शिक्षा विभाग SCERT उक्त अवधि में अन्य शिक्षकों या 6 से 8 अथवा 9-10 के शिक्षकों का प्रशिक्षण तय करें।
@BiharEducation_@bepcslo@sunilkbv@Rajenderb1995
🏆🇮🇳 चैंपियंस बना भारत! 🇮🇳🏆
हीरो एशिया कप 2025 के फाइनल में भारत ने कोरिया को 4-1 से हराकर रच दिया इतिहास!
राजगीर, बिहार की धरती पर तिरंगा एक बार फिर शान से लहराया! 💪🇮🇳
🔥 टीम इंडिया के दमदार प्रदर्शन ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया।
यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों की उड़ान है! ✨🏑
💙 बधाई हो टीम इंडिया!
अब हर दिल बोलेगा — “जय हिंद, जय हॉकी!” 🥇🇮🇳
@NitishKumar@MLASurendraBJP@TheHockeyIndia@IndiaSports@BiharSportsDept@BSSABihar
#HeroAsiaCup2025
#TeamIndia
#Champions
#HockeyIndia
#BiharSportsDept
#Rajgir #जयहिंद
#IndianHockey #AsiaCupChampions #HockeyKeHeroes #OdishaHockey
Muzaffarpur stands out as the only major district in Bihar that lacks a central institute.
Given its rich cultural heritage and significant population, absence of such an institution is a glaring gap.
I hope Muzaffarpur is chosen as a site for NIFTEM soon. @iChiragPaswan
इतनी ज़्यादा मात्र में रिक्ति आई है , लेकिन सर्वर इशू के वजह से आवेदन नहीं कर पाने के वजह से कई अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होने के मौके से वंचित हो जाएँगे ।
आयोग रजिस्ट्रेशन कर चुके अभ्यर्थियों के लिए एप्लीकेशन विंडो रीओपन करे और नई परीक्षा तिथि की घोषणा करे ।
@NitishKumar@VijayKrSinhaBih@SanjayJhaBihar@News18Bihar@Live_Cities
#reopen70thBpscform
Only 7 days to go! Anticipation is soaring as we approach the Bihar Women’s Asian Champions Trophy 2024 in Rajgir! Brace yourself for electrifying matches, passionate performances, and the relentless spirit of our champions. The countdown has begun!
@DGBSSA@IPRDBihar@BiharSportsDept@TheHockeyIndia@asia_hockey@FIH_Hockey
#DilSeKheloMilKeJeeto
#HockeyKaParvBiharKaGarv #BWACT2024 #IndiaKaGame
माननीय शिक्षा मंत्री @sunilkbv
सर्वप्रथम बिहार के लाखों शिक्षकों का वर्षों से चिर-परिचित माँग #स्थानांतरण एवं पदस्थापन संबंधित नीति को शिक्षा विभाग,बिहार सरकार द्वारा अंतिम रूप से दिनाँक 08/10/2024 को बहुत ही तार्किक रूप से दुर्गा पूजा जैसे महत्वपूर्ण दिनों में बिहार के लाखों शिक्षकों को उपहार स्वरूप प्रदान करने हेतु बिहार सरकार एवं शिक्षा विभाग को लाखों शिक्षकों के तरफ से दिल से धन्यवाद और आभार व्यक्त करते है।
लेकिन वर्तमान में आये स्थानांतरण एवं पदस्थापन संबंधित नीति में कुछ त्रुटि है जो सरकार के उदारता में कमी ला रही है और शिक्षकों में असंतुष्टि पैदा कर रही है,
उस त्रुटि पर मैं महोदय का ध्यान आकर्षित करवाना चाहता हूँ जो निम्न है :- 👇
👉१.कंडिका 1 के (i-iv) में प्राथमिकता के आधार पर असाध्य रोग,रूगणता,दिव्यांगता एवं ऑटिज्म इत्यादि से प्रभावित व्यक्ति के स्थानांतरण में पति,पत्नी और बच्चे को बस जोड़ा गया है जहाँ संसोधन कर माता-पिता को भी जोड़ा जाए।
👉२.कंडिका 1 के (vii) नंबर के तरफ ध्यान आकर्षित किया जाये
जिसमें कंडिका 1 के (vi) में पहले ही स्थानांतरण में महिला को प्राथमिकता मिल चुका है और कंडिका 1 के (vii) में बस पति के आधार पर पत्नी(महिला) के स्थानांतरण का प्रावधान किया गया है जिसमें संसोधन कर पति अथवा पत्नी दोनों को एक दूसरे के आधार पर स्थानांतरण की सुविधा प्रदान किया जाये।
👉३. सबसे महत्वपूर्ण कंडिका संख्या 1(viii) की तरफ ध्यान आकर्षित करवाना चाहूंगा जिसमें पुरुष शिक्षको को अनुमंडल छोड़ कर स्थानांतरण करने की बात कही गयी है जिसके कारण पुरुष शिक्षकों में काफी असंतुष्टि पैदा हो गया है और आक्रोश भी,
इसलिए महाशय से नम्र निवेदन है कि इसे संसोधित कर गृह अनुमंडल के स्थान पर गृह प्रखंड किया जाए
चूँकि बहुत से ऐसे जिले हैं जहाँ 1 ही अनुमंडल है
और बहुत से ऐसे जिले है जहाँ 1 अनुमंडल में 10 प्रखंड तो दूसरे में 5 ही प्रखंड है ऐसे में 10 प्रखंड वाले का समायोजन 5 प्रखंड में होना मुश्किल है और संभावना ऐसी हो सकती है कि उन्हें जिला से बाहर जाना पर सकता है।
👉४. सक्षमता पास शिक्षकों को उनके आवंटित जिले प्राथमिकता के आधार पर शहरी क्षेत्रों में पोस्टिंग किया जाए चूँकि विभाग द्वारा पूर्व में जारी बहुत से ऐसे पत्रों में उल्लेख किया गया है कि सक्षमता पास शिक्षकों को शहरी क्षेत्रों में पोस्टिंग किया जायेगा जबकि इस स्थानांतरण नीति में इसकी चर्चा कहीं नहीं है जो सक्षमता पास शिक्षकों को ठगा हुआ महसूस करा रहा है।
महाशय उक्त बिंदुओं पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए गजट प्रकाशन से पूर्व नियमों में संसोधन किया जाए जिससे सरकार के प्रति शिक्षकों में अटुट आस्था और विश्वास बनी रहे।
जिसके लिए हम तमाम लाखों शिक्षक सरकार और विभाग का सदैव आभारी रहेंगे।
- राहुल कुमार झा, सहायक शिक्षक
महिला शिक्षिका को उनके पंचायत/नगर से बदर करना ठीक है पर पुरुष शिक्षकों को उनके अनुमंडल से बदर करना गलत है.. पुरुष शिक्षकों के लिए सिर्फ उनके ब्लॉक/नगर से बदर करने का प्रावधान करने पर सरकार (शिक्षा विभाग) को विचार करना चाहिए।
बिहार के प्रमुख त्योहारों में भी छुट्टी की कटौती करने से शिक्षक सिर्फ मानसिक अवसाद से ग्रसित होंगे इसका शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा । बिहार सरकार से निवेदन है की पूर्व के वर्षों की भांति पूजा की छुट्टी बहाल करे
#RestorePoojaVacation@BiharEducation_@NitishKumar@sunilkbv
बिहार का प्रमुख त्योहार #दुर्गा_पूजा , दीवाली और छठ में छुट्टियों की कटौती से शिक्षक तो विद्यालय पहुंच जाएंगे लेकिन बच्चे नहीं आएंगे । बहुत सारे विद्यालय के प्रांगण या बगल में दुर्गा पूजा का मेला लगता है ऐसे में कैसे विद्यालय सुचारु रूप से चलेगा ? @BiharEducation_
#RestorePoojaVacation
पूर्व के वर्षो की भांति पूजा की छुट्टी को विद्यालयों में बहाल करे शिक्षा विभाग । अब शिक्षक पर्व त्योहार में भी अपने परिवार से नहीं मिले क्या ? एक तो शिक्षकों को गर्मी की छुट्टी नहीं मिली उपर से दुर्गा पूजा , दिवाली और छठ पूजा की छुट्टी में कटौती कितना जायज है ?
#RestorePoojaVacation
शिक्षकों को जान से मारने के मानसिकता से मनमाने आदेश दिए जा रहे है.. देश भर के सभी स्कूलों में गर्मी की छुट्टी होती है फिर बिहार में शिक्षकों को गर्मी की छुट्टी क्यों नहीं मिलनी चाहिए?
शिक्षकों कों भी इस प्रचंड गर्मी में राहत दिया जाये.
#TeachersLivesMatter
मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में प्रचार थम गया है। 20 मई को वोटिंग है।
आज मुजफ्फरपुर को जानते है।
उत्तर बिहार का सबसे बड़ा शहर। एक समय इसे उत्तर बिहार की राजधानी कहते थे। अब शहर की सूरत बहुत बदल चुकी है। बाबा गरीबनाथ का मंदिर, लीची की मिठास, कपड़ों का बड़ा मार्केट सूतापट्टी, सुधा डेयरी, एल एस कॉलेज यहां की पहचान है।
एक दौर था जब मुजफ्फरपुर अपराध के लिए बदनाम हुआ करता था। बेगूसराय और मुजफ्फरपुर के गैंगवार में यूनिवर्सिटी के इलाके में न जाने कितने लोग मारे गए।
मिनी नरेश, अशोक सम्राट, चंदेश्वर सिंह से लेकर छोटन शुक्ला तक का दौर यूनिवर्सिटी के इलाके ने देखा।
शहर के एक इलाके में बृज बिहारी प्रसाद का सिक्का चलता। और शहर के अंडरवर्ल्ड पर कब्जे के लिए कोई ऐसा महीना न गुजरता जब दो चार लोग मारे नहीं जाते।
खैर इससे अलग शहर में लीची की मिठास है। चुनाव प्रचार खत्म हो गया। नहीं तो देश विदेश से गए पत्रकारों को यहां की लीची का स्वाद चखने का मौका मिलता।
शहर में स्टेशन रोड का इलाका इन दिनों हर साल लीची का बाजार बन जाता है। साल में करीब महीना डेढ़ महीना दोनों तरफ टोकरी में हरे पत्तों के साथ लाल हरे और हल्के सूखे से दिखने वाले लीची भरे होते हैं।
लीची यहां किलो के भाव नहीं बल्कि सौ दो सौ के हिसाब से मिलता है। बड़े शहरों में लीची किलो के भाव बेची जाती है।
भगवानपुर, बैरिया और बाईपास की सड़कों पर भी लीची का बाजार सजता है। और मुजफ्फरपुर से बाहर जाने वाले लोग टोकरी और कार्टून में भरकर ले जाते हैं।
मुजफ्फरपुर जिले में लीची का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। सकरा की तरफ हो या फिर मीनापुर की तरफ, दरभंगा जाने वाली सड़क या फिर मोतिहारी और सीतामढ़ी, पटना की सड़क लीची के बड़े बड़े बागान हैं।
बीच में लीची को दिमागी बुखार के बहाने बदनामी भी झेलनी पड़ी। भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग हो या फिर गाने । लीची की लोकप्रियता में कमी न सालों पहले थी न आज है।
लीची कभी चुनावी मुद्दा नहीं बना। नीतीश कुमार जब देश के कृषि मंत्री थे तब उन्होंने लीची अनुसंधान केंद्र की स्थापना करवाई थी।
नीतीश कुमार ने इस शहर को मंत्री रहते बहुत कुछ दिया। जॉर्ज यहां से सांसद रहे तो जिले को काफी कुछ मिला। बीच शहर में जो फ्लाईओवर का जाल दिखता है। जिसने कई मायनों में शहर की सूरत बिगाड़ दी वो फ्लाईओवर नीतीश जब रेल मंत्री थे तब लेकर आए थे।
बीस साल पहले मोतीझील जाने के लिए चंद्रलोक चौक से पीछे कलमबाग रोड और इधर टेक्निकल चौक की तरफ लंबे जाम में जूझना पड़ता था। उस तरफ से पहले नगर थाना था तो जाम तिलक मैदान रोड की तरफ तक पहुंच जाता। अब तो खैर तिलक मैदान और नगर थाना सब की खूबसूरती खत्म हो चुकी है।
गुमटी के पास स्वर्गीय रघुनाथ पांडेय का नया नया मार्केट बना था। फ्लाई ओवर ने उस मार्केट को खत्म कर दिया।
एक बात और बरसात के दिनों में पूरा मोतीझील नरक बना रहता था। वो तो आज भी कई बार खबरों में देखता हूं।
केके पाठक जब मुजफ्फरपुर में नगर निगम के प्रशासक थे तब उन्होंने स्टेशन रोड की तस्वीर बदलने की कोशिश की थी। छोटी छोटी दुकानें बनवाई थी पता नहीं अब हैं या नहीं।
खाने पीने के मामले में शहर हमेशा से समृद्ध रहा है। शाकाहारी खाने वाले लोगों के लिए भगवान भोजनालय,भारत जलपान, कचहरी का भागीरथी होटल तो अलग अलग तरह के लोगों की पसंद रहा ही है।
स्टेशन रोड में खाने की दो दुकानें बहुत मशहूर थी। मुझे लगता है अब वो नहीं होंगी। एक तो धर्मशाला चौक के पास दाल के साथ जलेबी वाली दुकान। दूसरी स्टेशन के गेट से पहले भुजा और आलू चप की दुकान। मोतीझील के पूजा मार्केट की सिंधी चाट और बांका बाजार के पाव भाजी के बिना चर्चा अधूरी है। मुझे नहीं पता अब है या नहीं।
शहर में कुछ ऐसे मोहल्ले भी हैं जिनका नाम बाहर के लोगों को चौंका सकता है। होम फॉर होमलेस चौक, पावर हाउस चौक, छाता लिए महिला वाला छाता चौक, हाथी की मूर्ति वाला हाथी चौक, गोबरसही चौक, लेलिन चौक, स्टालिन चौक, टेक्निकल चौक, बीबीगंज ये मुझे याद है इतना।
शहर में उत्तर बिहार के जिलों से भविष्य बनाने छात्र आते हैं। लंगट सिंह कॉलेज पढ़ना इस इलाके के छात्रों का सपना होता था। कॉलेज अपने आप में ऐतिहासिक विरासत और यादों को समेटे हुए आज भी खड़ा है।कई रहस्यों और खतरनाक यादों को समेटे।
शहर के बीचों बीच है बीबी कॉलेजियट पूरा नाम भूमिहार ब्राह्मण कॉलेजिएट। पहले इसी कॉलेज कैंपस में चुनावी रैलियां हुआ करती थी। अब इतना विस्तार हो चुका है कि जगह नहीं बचा।
मुजफ्फरपुर 1994 में हुए डीएम हत्याकांड से आज भी सुर्खियों में रहता है। बड़े बड़े दिग्गज यहां से चुनाव जीते। खास बात ये कि शहर को स्थानीय सांसद पसंद नही इसलिए कोई जीता नहीं। 20 तारीख को वोटिंग है।
बहुत कुछ छूटा हुआ है..फिर कभी अगले लेख में
अभी #ReviseSchoolTime नंबर वन पर ट्रेंड कर रहा है।कुछ लोग #ReviseSchoolTime को शिक्षकों से जोड़ कर देख रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है। स्कूल टाइमिंग बच्चों से जुड़ा हुआ मुद्दा है। 6 बजे सुबह में बच्चवा खा कर स्कूल चल आएंगे जी। गर्मी में भूखे पेट नहीं रहना चाहिए
#changeschooltiming