वही हुआ जिसका शक हो चला था छात्रों के आंदोलन पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी आमने-सामने अब एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि आप राजनीतिक फायदा उठा रहे हैं सच्चाई यही है अब वह जो पत्रकार थे आप किसकी तरफ होंगे खासकर योगेंद्र यादव जी आप कांग्रेस का साथ देंगे आम आदमी का पाठ साथ देंगे सच्चाई तो यही है आप लोग राजनीति में चुनाव जीत नहीं सकते इसलिए किसी ने किसी की तरफ खड़ा होना पड़ता है खासकर हमारे पत्रकार बंधु जो केवल मोदी की कमियां ढूंढते हैं अब उनके लिए मुश्किल है कांग्रेस का साथ है या आम आदमी पार्टी का
इतनी पुरानी पार्टी कांग्रेस 140 साल पुरानी यह भी भूल गई संसद में विपक्ष नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए यह भी नहीं सोचा की सुरक्षा का क्या हाल हो सकता है हमें पता नहीं था कि कांग्रेस को कोई समझने वाला या कोई राय देने वाला कांग्रेस में रहा नहीं या कांग्रेस सुन नहीं रही इतना बड़ा फैसला कांग्रेस के समझदार नेता नहीं ले सकते जरूर कोई ना कोई कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए कांग्रेस में ही कोई ऐसा सलाहकार है धरने के लिए दिल्ली में अनेक स्थान है उसके लिए लिखित देना पड़ता है संसद में हल्ला करते हैं फिर कहते हमें बोलते नहीं देता मंत्री जी ने करने में शामिल श्रीमान राहुल गांधी जी से तुरंत बात की आधा घंटे के अंदर मंत्री जी धरना स्थल पर पहुंच गए और राहुल गांधी जी की बात मान दी लेकिन राहुल गांधी जी मीडिया के अनुसार तुरंत पलट गए और उसमें चार मांगे और जोड़ दी और कहा हम तो यही बैठेंगे मैं नहीं मानता कि कांग्रेस के समझदार नेताओं की यह राय होगी
यह काम हमारे देश के छात्र नहीं कर सकते छात्रों के नाम पर किसी और ने किया है जिसने भी किया है पूरी जांच के बाद उसके ऊपर कानूनी कार्रवाई जरूरी बनती है इसी का नाम है अराजकता फैलाना किसी को कहते हैं शांतिप्रिय प्रदर्शन तो फिर यह किसने किया इसमें छात्रों का हाथ नहीं कुछ विपक्षी दल जो इसी इंतजार में रहते हैं कोई आंदोलन आए और उसमें हम कानून हाथ में लेकर सरकार को बदनाम करें लेकिन यकीन मानिए मोदी जी आज देश में लोग मोदी जी को चाहते हैं अभी पश्चिम बंगाल के चुनाव हुए उन सब मुद्दों वोट चोरी राम मंदिर बम परमाणु बम हाइड्रोजन बम सब फोड़ने के बाद अब छात्र राजनीति को एक मोहरा बनाया जा रहा है और कहीं कहीं तो चैलेंज किया जा रहा है हम इसको नेपाल और बांग्लादेश बना देंगे हमारे देश में छात्र ऐसा कभी नहीं होने देंगे छात्रों में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है लेकिन कुछ लोग उनको भ्रमित कर रहे हैं लेकिन वह सफल नहीं होंगे दिल्ली में ऐसा प्रदर्शन करने से विपक्षी दल मनसा कुछ और थी हो कुछ और गया और यह सब अपने आप में इनका पर्दाफाश हो गया अब आप देखिए प्रधानमंत्री की निवास के बाहर धरना देना सुरक्षा की दृष्टि से कितना एम है लेकिन सबसे बड़ी पार्टी विपक्षी कांग्रेस उसने यह काम किया अब कांग्रेस इतनी पुरानी पार्टी है उनका सुरक्षा का जरा भी ध्यान नहीं है और मजे की बात सरकार ने कितनी इज्जत दी एक मंत्री और अधिकारी के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और श्री राहुल गांधी से बातचीत की और उनकी मांग मान ली लेकिन तुरंत वह अपनी मांग से पीछे हट गए और चार मांगे और जोड़ ली और ऐलान कर दिया हम यही बैठेंगे और जनता से भी अपील कर दी धरने में शामिल हो अभी एक क्या माहौल बनाने की मनसा थी इसको जानता अच्छी तरह समझती है
यह काम हमारे देश के छात्र नहीं कर सकते छात्रों के नाम पर किसी और ने किया है जिसने भी किया है पूरी जांच के बाद उसके ऊपर कानूनी कार्रवाई जरूरी बनती है इसी का नाम है अराजकता फैलाना किसी को कहते हैं शांतिप्रिय प्रदर्शन तो फिर यह किसने किया इसमें छात्रों का हाथ नहीं कुछ विपक्षी दल जो इसी इंतजार में रहते हैं कोई आंदोलन आए और उसमें हम कानून हाथ में लेकर सरकार को बदनाम करें लेकिन यकीन मानिए मोदी जी आज देश में लोग मोदी जी को चाहते हैं अभी पश्चिम बंगाल के चुनाव हुए उन सब मुद्दों वोट चोरी राम मंदिर बम परमाणु बम हाइड्रोजन बम सब फोड़ने के बाद अब छात्र राजनीति को एक मोहरा बनाया जा रहा है और कहीं कहीं तो चैलेंज किया जा रहा है हम इसको नेपाल और बांग्लादेश बना देंगे हमारे देश में छात्र ऐसा कभी नहीं होने देंगे छात्रों में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है लेकिन कुछ लोग उनको भ्रमित कर रहे हैं लेकिन वह सफल नहीं होंगे दिल्ली में ऐसा प्रदर्शन करने से विपक्षी दल मनसा कुछ और थी हो कुछ और गया और यह सब अपने आप में इनका पर्दाफाश हो गया अब आप देखिए प्रधानमंत्री की निवास के बाहर धरना देना सुरक्षा की दृष्टि से कितना एम है लेकिन सबसे बड़ी पार्टी विपक्षी कांग्रेस उसने यह काम किया अब कांग्रेस इतनी पुरानी पार्टी है उनका सुरक्षा का जरा भी ध्यान नहीं है और मजे की बात सरकार ने कितनी इज्जत दी एक मंत्री और अधिकारी के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और श्री राहुल गांधी से बातचीत की और उनकी मांग मान ली लेकिन तुरंत वह अपनी मांग से पीछे हट गए और चार मांगे और जोड़ ली और ऐलान कर दिया हम यही बैठेंगे और जनता से भी अपील कर दी धरने में शामिल हो अभी एक क्या माहौल बनाने की मनसा थी इसको जानता अच्छी तरह समझती है
यह आंदोलन एक ही दिशा से शुरू हुआ छात्र आंदोलन मांग सही पेपर लीक नहीं होने चाहिए लेकिन एक कारपोरेट पार्टी का जन्म और दो दिन में ढाई करोड़ सोशल मीडिया पर फॉलो और बन गए फिर उसका राजनीतिक ड्रामा शुरू हुआ जंतर मंतर पर प्रदर्शन फिर राजनीतिक पार्टी जो पश्चिम बंगाल के बाद शांत हो गई थी उनको कुछ नया दिखाई दिया और उन्होंने छात्रों के कंधों पर रखकर मोदी सरकार पर निशाना लगना शुरू किया 20 तारीख को मोदी विरोध के जो भी लोग थे इनमें छात्र तो नहीं के बराबर थे सभी को जंतर मंतर पर लाकर दिल्ली में एक अराजकता का माहौल पैदा किया संसद भवन के नजदीक पहुंच गए और कहा यह शांतिपूर्वक आंदोलन है और यह पहला नहीं है जब से मोदी जी 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक राजनीतिक पार्टियों में लोकतंत्र चुनाव में मोदी और मोदी की पार्टी को हराना मुश्किल है हो गया है तो इसलिए राजनीतिक दलों को कोई न कोई बहाना चाहिए चाहे वह किसान आंदोलन हो चाहे पहलवान आंदोलन हो अभी श्री राम मंदिर में एक छोटा सा चोरी का कैसे आया तो राजनीतिक दलों ने सोचा संजीवनी मिल गई लेकिन उसके बड़ी छात्रों का आंदोलन और छात्रों का इस्तेमाल राजनीति के लिए करना मुझे नहीं लगता कांग्रेस या अन्य विपक्षी दल इसे कुछ उठ पाएंगे क्योंकि यह जो आंदोलन था इसमें वही लोग थे जो शुरू से मोदी विरोधी है इसमें नया कुछ भी नहीं था
यह आंदोलन एक ही दिशा से शुरू हुआ छात्र आंदोलन मांग सही पेपर लीक नहीं होने चाहिए लेकिन एक कारपोरेट पार्टी का जन्म और दो दिन में ढाई करोड़ सोशल मीडिया पर फॉलो और बन गए फिर उसका राजनीतिक ड्रामा शुरू हुआ जंतर मंतर पर प्रदर्शन फिर राजनीतिक पार्टी जो पश्चिम बंगाल के बाद शांत हो गई थी उनको कुछ नया दिखाई दिया और उन्होंने छात्रों के कंधों पर रखकर मोदी सरकार पर निशाना लगना शुरू किया 20 तारीख को मोदी विरोध के जो भी लोग थे इनमें छात्र तो नहीं के बराबर थे सभी को जंतर मंतर पर लाकर दिल्ली में एक अराजकता का माहौल पैदा किया संसद भवन के नजदीक पहुंच गए और कहा यह शांतिपूर्वक आंदोलन है और यह पहला नहीं है जब से मोदी जी 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक राजनीतिक पार्टियों में लोकतंत्र चुनाव में मोदी और मोदी की पार्टी को हराना मुश्किल है हो गया है तो इसलिए राजनीतिक दलों को कोई न कोई बहाना चाहिए चाहे वह किसान आंदोलन हो चाहे पहलवान आंदोलन हो अभी श्री राम मंदिर में एक छोटा सा चोरी का कैसे आया तो राजनीतिक दलों ने सोचा संजीवनी मिल गई लेकिन उसके बड़ी छात्रों का आंदोलन और छात्रों का इस्तेमाल राजनीति के लिए करना मुझे नहीं लगता कांग्रेस या अन्य विपक्षी दल इसे कुछ उठ पाएंगे क्योंकि यह जो आंदोलन था इसमें वही लोग थे जो शुरू से मोदी विरोधी है इसमें नया कुछ भी नहीं था
मोदी जी को देश ने चुना है और जब देश चुनता है किसी को तो हीरा चुनता है आज मोदी जी हीरा है उनके कारण पूरे देश का नाम रोशन हुआ है यह आंदोलन आज से नहीं 2002 से शुरू हो गए थे और मोदी जी को जितना टॉर्चर किया गया था थाने में बैठ कर वह तो कुछ भी नहीं है अब यह छोटे-मोटे आंदोलन आते रहेंगे जाते रहेंगे पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद विपक्ष को कोई काम नहीं मिल रहा था एक काम यह मिल गया और अब पांच राज्यों के चुनाव 2027 में है उसके बाद और कोई आंदोलन कब होगा कैसे होगा और यह कॉकरोच पार्टी जैसी कोई आती रहेगी जैसे आम आदमी पार्टी आई थी और कांग्रेस को देश से साफ कर गई अब कॉकरोच आई है तो यह भी कुछ कमाल दिखाएंगे हो सकता है तीन-चार राजनीतिक दल छोटे-छोटे बच्चे हैं उनका भी सुपड़ा साफ हो जाए और एक बात और अभी इस बवाल के अंदर मोदी जी संसद में परिसीमन बिल पास करवा लेंगे और यह देखते रह जाएंगे फिर 50-60 साल के लिए बीजेपी कहीं जाने वाली नहीं है तो ठीक है बहन जी
मोदी जी को देश ने चुना है और जब देश चुनता है किसी को तो हीरा चुनता है आज मोदी जी हीरा है उनके कारण पूरे देश का नाम रोशन हुआ है यह आंदोलन आज से नहीं 2002 से शुरू हो गए थे और मोदी जी को जितना टॉर्चर किया गया था थाने में बैठ कर वह तो कुछ भी नहीं है अब यह छोटे-मोटे आंदोलन आते रहेंगे जाते रहेंगे पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद विपक्ष को कोई काम नहीं मिल रहा था एक काम यह मिल गया और अब पांच राज्यों के चुनाव 2027 में है उसके बाद और कोई आंदोलन कब होगा कैसे होगा और यह कॉकरोच पार्टी जैसी कोई आती रहेगी जैसे आम आदमी पार्टी आई थी और कांग्रेस को देश से साफ कर गई अब कॉकरोच आई है तो यह भी कुछ कमाल दिखाएंगे हो सकता है तीन-चार राजनीतिक दल छोटे-छोटे बच्चे हैं उनका भी सुपड़ा साफ हो जाए और एक बात और अभी इस बवाल के अंदर मोदी जी संसद में परिसीमन बिल पास करवा लेंगे और यह देखते रह जाएंगे फिर 50-60 साल के लिए बीजेपी कहीं जाने वाली नहीं है तो ठीक है बहन जी
ऐसा नहीं है कि बीजेपी या आरएसएस, हिन्दू संगठनों के पास कम लोग हैं।
आज मोदीजी कह दें कि दिल्ली आकर सबक सिखाओ तो दो दिनों के अंदर ये नजर तक नहीं आयेंगे...!
आज भीड़ के दबाव में अगर एक मंत्री का इस्तीफा हुआ,
तो कल कोई दूसरा,
इसी तरह 10-20 हज़ार लोगों को जुटाकर दूसरे किसी मंत्री का इस्तीफा मांगेगा।
इन्होंने शुरू किया धर्मेंद्र प्रधान से और फिर मोदी का इस्तीफा मांगने लगे।
गडकरी तो हैं ही निशाने पर.....
जिन 24 करोड़ लोगों ने वोट दिया है उनका कोई महत्व नहीं है क्या ....?
सिर्फ़ इन्हीं 5-10 हज़ार लोगों का Thnks है,
क्योंकि ये तोड़फोड़ कर सकते हैं...!
रही पेपर लीक की बात तो एक ऐसी सरकार बताएं जिसमें पेपर लीक नहीं हुआ हो।
क्या कांग्रेस राज में पेपर लीक नहीं होते थे?
हमने बिहार का लालूराज के दौरान भी देखा है बिहार में शिक्षा का खेल...!
वहां बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में क्या होता था,
किसे नहीं मालूम।
मीसा भारती कितनी बड़ी मेडिकल टॉपर हैं और कैसे हैं,
ये किसे नहीं पता?
आज तेजस्वी यादव भी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांग रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे।
उन्होंने नकल विरोधी सख़्त कानून बनाया ।
मुलायम सिंह यादव उस नकल विरोधी कानून के खिलाफ़ धरने पर बैठ गए।
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अगर छात्रों को नक़ल नहीं करने दिया तो सरकार को उखाड़ कर फेंक देंगे।
आज मुलायम सिंह का बेटा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांग रहा है...
और उसकी बहु राम मंदिर पर बुलडोजर एक्शन चाहती है .....!
बंगाल में Teachers Recruitment Scam पर एक शब्द नहीं बोलने वाली महुआ मोइत्रा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए हिंसा करने को कह रही हैं।
इस बीच मोदी सरकार Higher Education Bill लेकर आई है।
इसमें प्रतियोगिता परीक्षाओं को कैसे leak proof बनाया जाय,
इसके लिए बहुत कड़े नियम हैं।
बाकी इन लोगों को Solution नहीं बताना है,
सिर्फ़ समस्याएं गिनाकर देश में अराजकता फैलाना है।
कल रात को जंतर मंतर गया मै इनके बीच में इनके जैसा ही बनकर ...
ज्यादातर हिंसक लोग हैं इस प्रोटेस्ट में....
अराजकता फैलाना चाहते हैं केवल ...
मुझे अच्छी तरह वह दिन याद है जब किसानों का कोच लाल किले की तरफ कर रहा था दिल्ली में जो अराजकता का माहौल था सब तरफ से दिल्ली डरी हुई थी और लोग लाल किले पर भी चढ़ गए थे लेकिन सरकार ने एक भी डंडा भी नहीं चला था और वह आंदोलन भी पूरा हो गया था आज तो यह छोटे-मोटे आंदोलन है इसमें छात्र काम आए थे जो शुरू से मोदी विरोधी है वही बार-बार रूप बदलकर आते रहते हैं किसान आंदोलन हो या कॉकरोच पार्टी का आंदोलन को चेहरे वही है नया कोई नहीं जुड़ता जब यह उफान पर आता है थोड़ी सी देर के लिए तो यह खुश हो जाते हैं कि मोदी तो गया लेकिन जैसे आंदोलन खत्म होता है चुनाव होते हैं चुनाव होते ही इनको हर का सामना देखना पड़ता है फिर किसी दूसरे आंदोलन की खोज करते रहते हैं ऐसे ही जैसे कॉकरोच का मिला और दिल्ली में एक बार ऐसा माहौल बना दिया मोदी जी की सरकार गई अब देखना पार्लियामेंट में परिसीमन बिल पास हो जाएगा और यह देखते रह जाएंगे
https://t.co/MB45AZlgjb कांग्रेस ने प्लान बनाने में फिर देरी कर दी सारा श्रेय आम आदमी पार्टी ले जा रही थी तो कांग्रेस बीच में आई और प्रधानमंत्री आवास पर धरना लेकिन सरकार मान गई अब क्या करें फिर अचानक अपनी बात से पालते तो सरकार को धरना जबरदस्ती खत्म करना पड़ा कांग्रेस छुक जाती है एक बार में कई मौका पर गलती कर जाती है
https://t.co/MB45AZlgjb कांग्रेस ने प्लान बनाने में फिर देरी कर दी सारा श्रेय आम आदमी पार्टी ले जा रही थी तो कांग्रेस बीच में आई और प्रधानमंत्री आवास पर धरना लेकिन सरकार मान गई अब क्या करें फिर अचानक अपनी बात से पालते तो सरकार को धरना जबरदस्ती खत्म करना पड़ा कांग्रेस छुक जाती है एक बार में कई मौका पर गलती कर जाती है
कांग्रेस पार्टी चुनाव में मोदी को हरा नहीं सकती काफी कोशिश कर ली नरेंद्र मोदी को 2002 से टॉर्चर कर दिया रही है आज तक कुछ नहीं हुआ और आगे भी कुछ नहीं होगा चुनाव में नियर आ सकती इसलिए इस तरह के हाथ कंधे अपना रही है और अब यकीन मानिए जो थोड़ी बहुत जनता इनके साथ थी ना वह उनके कार्यों को देखकर दूर होने वाली है
कांग्रेस पार्टी चुनाव में मोदी को हरा नहीं सकती काफी कोशिश कर ली नरेंद्र मोदी को 2002 से टॉर्चर कर दिया रही है आज तक कुछ नहीं हुआ और आगे भी कुछ नहीं होगा चुनाव में नियर आ सकती इसलिए इस तरह के हाथ कंधे अपना रही है और अब यकीन मानिए जो थोड़ी बहुत जनता इनके साथ थी ना वह उनके कार्यों को देखकर दूर होने वाली है
@abhisar_sharma कांग्रेस ने बड़ा दावा खेल दिया है ताकि सरकार परिसीमन बिल पर विपक्ष को ना तोड़ पाए इसलिए आज कांग्रेस धरना प्रदर्शन पर आ गई वह भी प्रधानमंत्री निवास के बाहर जहां सुरक्षा की बहुत ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी होती है