कोई बुढ़ापे तक नहीं सीख पाता, कोई बचपन में ही दुनिया तराश देता है...
छोटी उम्र में बड़ा अनुभव
शब्द क�� पड़ गए इस लाडली के बारे में जितना लिखूं उतना ही कम है।
स्पेन में, यह महिला सुबह एक रेडियो स्टेशन में गाना गाती हैं। यह वीडियो दुनिया भर में वायरल हो रहा है
भारत की समृद्ध संस्कृति पूरी दुनिया में प्रशंसा हो रही है।
सब को सुबह की राम राम 🙏
सुप्रभात 🌞
Good morning 🌞
"नियति ने इस बच्ची को 2 बाजू नहीं दिए तो क्या हुआ, इस बिटिया ने अष्ट सिद्धियों को सिद्ध करके सभी शक्तियों को अपने बस में कर लिया हे"
हाथों के बिना बॉडी का इतना बैलेंस वाकई कमाल हे ।
हार्दिक बधाई के साथ ढेरों आशीर्वाद💐
��ाबा नीब करौरी (नीम करौली बाबा / महाराज-जी) एक प्रसिद्ध हिंदू संत और हनुमान जी के अनन्य भक्त थे।
● मूल जानकारी
• असली नाम: लक्ष्मी नारायण शर्मा (कुछ स्रोतों में लक्ष्मण नारायण शर्मा भी लिखा मिलता है)।
• जन्म: लगभग 1900 में (कई स्रोतों के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी, 30 नवंबर 1900) उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की टूंडला तहसील के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में।
• पत्नी: रामबेटी देवी। बचप�� में ही विवाह हो गया था (लगभग 11 वर्ष की आयु
• परिवार: दो पुत्र (अनेक सिंह शर्मा और धर्म नारायण शर्मा) तथा एक पुत्री।
● नाम कैसे पड़ा ?
युवावस्था में साधु के रूप में घूमते समय वे बिना टिकट ट्रेन में सवार थे। फर्रुखाबाद क्षेत्र के नीब करौरी (नीम करोली) गांव के पास टिकट न होने पर उन्हें उतार दिया गया। इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। अधिकारियों के अनुरोध पर वा��स बैठने के बाद ही ट्रेन चली। इसी घटना और उस स्थान से जुड़ाव के कारण वे नीब करौरी बाबा या नीम करौली बाबा के नाम से प्रसिद्ध हो गए। उन्हें हांडी वाले बाबा, तलैया बाबा, तिकोनिया बाबा और चमत्कारी बाबा जैसे नामों से भी जाना जाता था।
☆ जीवन और आश्रम:
बचपन में ही वैराग्य की ओर रुझान था। कुछ समय घर छोड़कर साधना की, बाद में परिवार के अनुरोध पर लौटे, फिर आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़े।
उनके प्रमुख आश्रमः
• ���ैंची धाम (नैनीताल, उत्तराखंड) – 1964 में स्थापित, हनुमान मंदिर सहित सबसे प्रसिद्ध केंद्र ।
• वृंदावन (उत्तर प्रदेश)
• अन्य स्थानों पर भी कई मंदिर और आश्रम बने (भूमियाधार, काकरीघाट, हनुमानगढ़ी आदि)।
वे “सब एक" (सभी एक हैं), प्रेम, सेवा और सत्य पर जोर देते थे। भक्त उन्हें हनुमान जी का अंश मानते हैं और कई चमत्कारिक घटनाओं से जोड़ते हैं।
उफनती नदी के सामने नेपाल की एक हिन्दू महिला आटा अर्पित कर प्रार्थना कर रही है -
“हे प्रकृति, अपना रौद्र रूप त्यागो और सबकी रक्षा करो।” ��
हे प्रकृति, शांत हो जाओ… सबकी रक्षा करो। 🕉️🙏
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी “स्वतंत्रवीर सावरकर जयंती समारोह” में प्रसन्नचित्त नज़र आ रहे हैं (1988)
इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में सावरकर पर पोस्टेज स्टैंप जारी किया था और नेहरु ने सावरकर को विवादास्पद मानने के बावजूद स्वतंत्रता संग्राम में उनकाी “महत्वपूर्ण भूमिका” स्वीकार की थी
सारी समस्या सिर्फ़ सोनिया, राहुल और प्रियंका को है
#नीति_और_नीयत #राजीव_गांधी
ये जूताखोर पगला "दिमागी नक्सल" योगेंदरा समझ ही नहीं रहा....
इस योगेंदरा को यह भी नहीं मालूम कि, जिसका किसी से भी संबंध नहीं, उसका भी शिव से संबंध है। जहर का शिव से संबंध है। भूत, प्रेत, पिशाच, सांप, बिच्छू, धतूरा, श्मशान सबका शिव से संबंध है। शिव से संबंध होने मात्र का अर्थ यह नहीं है कि हम सबको स्वीकार कर ले बिना हानि लाभ का विचार किए ही।
योगेंदरा को यह भी नहीं मालूम कि, रावण का भी शिव से संबंध था... लेकिन उसकी करतूतों के कारण जब उसको प्रभु राम द्वारा रौंदा गया तो गोस्वामी तुलसीद��स जी ने लिखा कि...
सायक एक नाभि सर सोषा।
अपर लगे भुज सिर करि रोषा ॥
लै सिर बाहु चले नाराचा।
सिर भुज हीन रुंड महि नाचा ॥1॥
डोली भूमि गिरत दसकंधर।
छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर ॥
धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई।
चापि भालु मर्कट समुदाई॥3॥
लेकिन ये जूताखोर पगला, "दिमागी नक्सल" योगेंदरा समझ ही नहीं रहा।
Wow! What a beautiful expressions to ask for a chair…
Sab ko pagal samjha hua hai kya? She is clearly saying stop and it’s a pure insult to our National Song 😡