सैकड़ों राजपूतो का बाबर की तोप के आगे बलिदान
खानवा के युद्ध में जब बाबर ने तोप चलाई तो तोप
खराब करने के लिए राजपूतों ने बलिदान दिया
जय भवानी जय राजपूताना 🔥💪
घर में अकेली महिला का देख हैवानियत की सारी हदें पार कर दी...
ये घटना आज लगभग दोपहर 1 बजे की है जब सीमा घर पर अकेली थी...
उसे जोर की भूख लगी तो उसने एक फूड डिलीवरी ऐप से खाना ऑर्डर कर दिया...
जब डिलीवरी बॉय आसिफ खाना देने आया तो वो सीमा के गंठीले बदन को देखकर अपना आपा खो बैठा...
सीमा को देखते ही समझ गया कि वो इसी वक्त घर में अकेली है, इसलिए उसने सीमा से एक गिलास पानी मांगा, जैसे ही सीमा पानी लेने अंदर गई, तो डिलीवरी बॉय आसिफ ने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया...
और बेडरूम में सीमा को खींचता हुआ ले गया, वो चींखती रही, चिल्लाती रही लेकिन आसिफ की हैवानियत आगे लाचार हो गई...
30 मिनट तक उसने अपनी मनमानी की, रोते हुए जब सीमा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करने की बात की तो, उसने सीमा को बंधक बनाते हुए उसके सर के बाल काट दिए...
डिलीवरी बॉय आसिफ की हैवानियत यही नहीं रुकी, उसने अपनी बेल्ट उतारकर सीमा के बदन पर इतने वार किए कि सीमा दर्द सहन नहीं कर सकी और बेहोश होकर गिर गई...
उसके बाद आसिफ सीमा के घर में लूट कर ही रहा था, तभी अपने ऑफिस में बैठे हुए सीमा के पति अभिषेक अपने घर में लगे CCTV को चेक किया तो वो घर के अंदर उस डिलीवरी बॉय को लूटपाट करते देख, पुलिस को सूचना देकर खुद भी तुरंत घर पहुंच गया...
पुलिस अभी उस डिलीवरी बॉय को रंगे हाथों गिरफ्तार कर उससे पूछताज कर रही है।
एक समय ऑपरेशन सिंदूर ना रोकने और पाकिस्तान को और ठोकने की माँग करने वाले अचानक पाकिस्तान से बातचीत की वकालत क्यों करने लगे ?
ये 61 ‘पाक-प्रेमी’ और गाजा के स्वयंभू शांतिदूत, पहलगाम को कैसे भूल गए?
इनके हृदय परिवर्तन और सरेंडर की कहानी दिलचस्प है।
अखिलेश यादव रियल में नेता नहीं एक बिगड़ैल गुंडा है ...
बातों में उसका अभिमानी अंदाज़ उनका स्वभाव बन गया है अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव 5 साल सत्ता में रहे और अखिलेश यादव 5 साल सत्ता में रहे
इन 10 सालों के दौरान हर साल मुंबई से उत्तर प्रदेश सरकार के सरकारी विमान से और दूसरे आलीशान कारपोरेट जेट भाड़े पर लेकर सलमान खान कैटरीना कैफ रणबीर कपूर माधुरी दीक्षित अमिताभ बच्चन शिल्पा शेट्टी से लेकर पूरे बॉलीवुड को एक छोटे से गांव सैफई में बुलाया जाता था
जो मुलायम यादव का पैतृक गांव है और फिर 15 दिनों तक उस गांव में शराब शबाब और कबाब की महफिले सजती थी
अब इस महोत्सव पर खर्चा कौन करता था आरटीआई से जब पूछा जाता था कि समाजवाद के इस
नंगे नाच पर आपने कितना पैसा सरकारी खजाने से खर्च किया है तब यह आरटीआई से जवाब नहीं देते थे और जो कोई हाईकोर्ट में अपील करता था उसे गो ली मा र दी जाती थी
इस तरह से मुलायम सिंह यादव सरकार ने 4 आरटीआई
कार्यकर्ताओं की ह त्या करवा दी थी, जिन्होंने सैफई महोत्सव
का खर्च जानने की कोशिश की थी.........
वह दहशत भरा दौर जरा याद तो करिए मुलायम सिंह यादव के दौर के बाद जब मायावती आई तब उन्होंने यह खर्च बताया कि मुलायम सिंह यादव के पांच सैफई महोत्सव पर 18000 करोड रुपए खर्च हुआ
और फिर योगी सरकार ने बताया अखिलेश यादव के सैफई
महोत्सव पर ₹34000 करोड़ सरकारी खजाने से खर्च हुआ
और यह सब पैसे भाड़े पर कारपोरेट देने वाले तथा मुंबई के
अमीर फिल्मी दुनिया के सितारों पर खर्च कर दिए गए.....
अब आप सोचिए राज्य का कितना धन सैफई महोत्सव पर खर्चा हुआ, सही मायने में अखिलेश यादव का यही असली समाजवाद है
यह फोटोग्राफ देखिए किस तरह से मुंबई की पूरी फिल्मी दुनिया को सरकारी पैसे के दम पर अखिलेश यादव और मुलायम सिंह विमानों से सैफई में उतार देते थे और फिर समाजवादी शराब शबाब और कबाब का फर्राटेदार
दौर चलता था जाम से जाम टकराये जाते थे आपस में सभी
चखना का आदान प्रदान करते हुए रहते थे.......
समाजवाद का जो विकृत स्वरूप मुलायम सिंह यादव के
परिवार ने किया है उससे लोहिया जी का असली समाजवाद
किसी अंधेरे कोने में सिर को झुकाये रोता होगा....!!
अजमेर दरगाह में करोड़ों के 'चढ़ावे' की हेरा-फेरी-
उम्मीद है अखिलेश यादव अयोध्या की तरह से अजमेर दरगाह के “चंदा-चोरी” का मामला उठायेंगे?
राहुल गांधी, केजरीवाल, पूरा विपक्ष इसपर भी बोलेगा?
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*जिंकी गवाही से*
*भगतसिंह सुखदेव राजगुरु को*
*फांसी पर चढ़वा दीया गया*
*उस अंग्रेज़ों के मुखबीर*
*और आधी दिल्ली के मालिक*
*सर शोभा सिंह की प्रोपर्टी पर*
*मोदी जी का बड़ा एक्शन*
*इसीलिए देश के गद्दार चिल्लाते है*
*मोदी ने क्या किया*
इतने गम्भीर मसले का 70 साल में निष्कर्ष क्यो नही निकाला गया
धन्यवाद है सुवेंदु अधिकारी जी का जिन्होंने खुद को सत्ता में लाने के जनता के मकसद को समझा, सुरक्षा को समझा👊
जज अक्षय दिवेदी की न्यूज़ पढ़ कर बहुत अच्छा लगा। आज भी ऐसे सादगी से भरे कर्मयोगी इस दुनिया में हैं। ना घर, ना घर का स्टाफ, ना कार , ना टेलीफोन। ना अच्छी पदस्थापना की इच्छा, ना किसी से बैर। पैदल कोर्ट जाना , और फैसले जल्दी देकर, समस्याओं का समाधान करना उनका लक्ष्य। बिरले व्यक्तिव