लव जिहाद के फंदे चढ़ी नंदिनी।
गुजरात के राजकोट में असलम हुसैन ने आम ��दमी पार्टी की युवा नेता नंदिनी बोसमिया को अपने प्रेम जाल में फंसाया। लड़की घर से भागकर असलम के साथ रहने लगी।
बाद में पता चला कि असलम पहले से शादीशुदा है और उसका एक बेटा भी है। लड़की ने विरोध किया तो असलम उसे प्र���ाड़ित करने लगा। यहाँ तक कि उसके गहने भी गिरवी रख दिए। अत्याचार का आलम यह था कि असलम ने जबरन उसका गर्भाशय निकलवाने का ऑपरेशन भी कराया था।
अब नंदिनी की अपने फ्लैट में फांसी के फंदे से लटकी लाश मिली है। परिजनों ने असलम हुसैन और उसके परिवार पर नंदिनी की हत्या कर सबूत छिपाने और इसे आत्महत्या दिखाने का आरोप लगाया है।
नंदिनी बोसमिया स्वयं एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव थीं। वह आम आदमी पार्टी से जुड़ी हुई थीं और 2025 में AAP के टिकट पर नगरपालिका चुनाव भी लड़ी थीं। ऐसे में सवाल है कि इस जघन्य घटना पर आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल मौन क्यों हैं? क्या इस्लामिक तुष्टिकरण के लिए अपनी ही पार्टी की महिला नेता को न्याय दिलाने के लिए भी आवाज नहीं उठाएंगे?
सवाल यह भी है कि ��खिर ये दरिंदे कब तक समाज की लड़कियों को अपने झूठे प्रेम जाल में फंसाते रहेंगे और एक दिन उन्हें मौन के मुहाने पर खड़ा कर देंगे? Caste Atrocity और महिला अत्याचार पर काम करते हुए हमने ऐसे अनेक मामले उठाए हैं, जहाँ पीड़ित लड़कियों को बाकायदा ट्रैप में फंसाया गया और फिर उनके साथ यौन उत्पीड़न, हत्या आदि जैसे गंभीर अपराध किए गए। लव जिहाद एक कड़वी सच्चाई है। समाज एवं सरकार को इस पर गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए।
मेरिटधारी डॉक्टर बना दरिंदा। 😡
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के सरकारी हॉस्पिटल में एक 15 वर्ष की दलित बच्ची पेट दर्द का इलाज कराने आई थी।
इलाज के बहाने डॉक्टर शैलेन्द्र शर्मा ने उस मासूम बच्ची का रेप किया। दरिंदे डॉक्टर ने इतनी क्रूरता से दरिंदगी की कि बच्ची को हैवी ब्लीडिंग होने लगी।
खून बहना बंद नहीं हुआ तो परिजन एवं अन्य डॉक्टरों ने आनन फानन में बच्ची को इमरजेंसी वॉर्ड में शिफ्ट किया। होश आने पर बच्ची ने सीनियर महिला डॉक्टरों को अपने साथ हुए बर्बर घटना के बारे में विस्तार से बताया। उसने बताया कि डॉक्टर शैलेन्द्र शर्मा ने क्रूरतापूर्वक प्राइवेट पार्ट दबाए और उसके साथ मल्टीपल टाइम रेप किया।
पीड़ित बच्ची बहुत ही गरीब परिवार से आती है। उसकी मां की करीब एक साल ��हले मौत हो चुकी है। बच्ची को अबोध दलित एवं बेसहारा समझकर दरिंदे डॉक्टर ने उसके साथ निर्ममतापूर्ण दुष्कर्म किया। अत्यधिक ब्लीडिंग होने की वजह से उसकी जान को भी खतरा बन गया था। शुक्र है कि परिजन एवं महिला डॉक्टरों ने सूझबूझ से बच्ची की जान बचा ली। अच्छी बात है कि हॉस्पिटल के सभी डॉक्टर एवं कर्मचारी दरिंदे डॉक्टर के खिलाफ मोर्चा थाम लिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने उसकी सेवाएं समाप्त कर दी।
कहां गया वो रामभद्राचार्य जो शुभंकर मिश्रा के साथ पॉडकास्ट में ज्ञान दे रहा था कि आरक्षण वाले डॉक्टर ऑपरेशन करते हुए मरीज के पेट में कैची छोड़ देते हैं या यहां का ऑपरेशन वहां कर देते हैं? अभी कुछ दिन पहले प्रयागराज में एक मेरिटधारी डॉक्टर ने इलाज के नाम पर छात्रा का रेप किया था, अब कुरुक्षेत्र में मेरिटधारी डॉक्टर ने दलित मासूम बच्ची के साथ रेप किया। क्या यही है तुम्हारी मेरिट? ये लोग सर्द ब्राह्मण मेरिट का नगाड़ा बजाते हुए SCST एवं OBC के प्रतिनिधित्व का मजाक उड़ाना जानते हैं।
खैर ऐसे लोगों से इंसानियत की कल्पना करना बेईमानी है। अभी इसी हफ्ते सहारनपुर में एक ब्राह्मण पुजारी ने दलित बच्ची के साथ छेड़खानी की तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। अब ब्राह्मण संगठनों ने इसे उनके ब्राह्मणत्व पर हमला समझा और हैवान के समर्थन में हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ा और जय श्री राम को नारे लगाए।
झारखंड की राजधानी रांची के खेलगांव का मामला है जहां ठेकेदार ने महिलाओं से लगातार 15 दिन काम कराया
और वेतन के नाम पर केवल 200 रुपए थमा दिया.
महिला ने ऑन कैमरा कहा, घर पर छोटा बच्चा छोड़कर आती थी. 15 दिनों तक हर दिन आठ घंटे काम के बड़े 200 दिया गया. महिला कम वेतन मिलने पर रो रही थी.
आज कल सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स पर लोग 200 रुपए तो मिनटों के ह���साब से कमा रहे हैं. एक्स पर 15 दिनों के पेआउट में बहुत लोग 50,000 से 2,00,000 लाख रुपए कमा रहे हैं.
भारत में न्यूनतम मजदूरी 800 रुपए प्रति आठ घंटे की होनी चाहिए. इस लिहाज से इस महिला को 15×800 = 12000 रुपए मिलते. लेकिन भारत में बलिदान ठेकेदारों से नही, आम लोगों से मांगा जाता है.
आप दिलीप मंडल को पसंद कर सकते हैं, नापसंद कर सकते हैं। उनके विचारों से सहमत/असहमत हो सकते हैं। पर, इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि वो अथाह ज्ञान का भंडार हैं।
मेरे जैसे हजारों युवाओं ने उनसे लिखना सीखा । बहुत से लोग तो ऐसे हैं जो कभी उन्हें मिले भी नहीं और बहुत कुछ सीख लिया।
दिलचस्प ये है कि दिलीप मंडल @Profdilipmandal ने कभी उनसे अंगूठा नहीं मांगा ।
बंगाल में दलित मुख्यमंत्री क्यों?
हमने कल मांग की कि बंगाल में किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाया जाए। यह सुनते ही द्विज हिंदुओं में इतनी छनछनाहट क्यों मच गई? मां-बहन की गालियां देने पर उतर आए हैं।
बंगाल की 84 SC-ST सुरक्षित सीटों में से 67 सीटें भाजपा जीती है। भाजपा नेता इस उपलब्धि को खूब flex भी कर रहे हैं, लेकिन जब किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाने की बात आई, तो हिंदुत्व का चोला ओढ़े हुए ठेकेदारों को चुभन क्यों होने लगी? आज देश में एक भी दलित मुख्यमंत्री नहीं है। ऊपर से बंगाल में दलितों ने अपना एकमुश्त वोट भी भाजपा को दिया। तो क्या भाजपा की जिम्मेदारी नहीं बनती कि किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाया जाए?
द्विज हिंदू ठेकेदारों का तर्क है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार हिंदू विरोधी थी। अतः बंगाल में हिंदुत्व के नाम पर चुनाव लड़ा गया था। यह हिंदुत्व की जीत है, इसे ���ातियों में न बांटा जाए। तो क्या उसका मतलब यह समझा जाए कि दलित लोग हिंदू नहीं हैं? क्योंकि पश्चिम बंगाल में अभी तक द्विज हिंदू ब्राह्मण ही मुख्यमंत्री बनते आए हैं। क्या किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाया गया तो हिंदुत्व का समीकरण टूट जाएगा? अरे भाई, अगर ऐसी बात है तो किसी हिंदू दलित को मुख्यमंत्री बनाओ। उसमें भला क्या परेशानी होगी? या फिर स्पष्ट कहो कि दलित को मुख्यमंत्री बनाने से तुम्हारा जाती�� कमंडल टूट जाएगा। Caste Supremacy को टूटता देख मन में अजीब से अंगारे उठेंगे और तुम्हारे हृदय में बैठे मनु नाराज हो जाएंगे।
वैसे तुम्हारे तर्क के हिसाब से तुम तमिलनाडु में भी DMK सरकार को हिंदू विरोधी ��ानते हो। विजय थलापति ईसाई हैं, तो क्या तमिलनाडु में सारा वोट ईसाइयों के नाम पर पड़ा? अजीब बेवकूफी है। दलित समुदाय के लोग अपनी सुरक्षा एवं सम्मान के नाम पर वोट देते हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु उसका लेटेस्ट उदाहरण हैं।
दलितों एवं आदिवासियों ने ममता बनर्जी सरकार के दलित विरोधी आतंक से त्रस्त होकर भाजपा को एक विकल्प के रूप में चुना है। अगर आज इनका साथ नहीं मिलता, तो भाजपा पश्चिम बंगाल में कम�� नहीं खिला पाती। इस सच्चाई को हम ही नहीं, बल्कि स्वयं नरेंद्र मोदी, अमित शाह एवं भाजपा के सभी शीर्ष नेता मानते हैं। तो क्या अब भाजपा की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह दलितों एवं आदिवासियों को उनका नेतृत्व Give Back करे? एकता सिर्फ लच्छेदार भाषणों से नहीं बनती है, उसे जमीन पर दिखाना भी होता है।
2024 के लोकसभा चुनाव में दलितों ने संविधान बचाने के नाम पर समाजवादी पार्टी को एकमुश्त वोट दिया। सपा 37 सीटें जीत ग���। वहीं कांग्रेस भी 6 सीटें जीती। अर्थात सपा-कांग्रेस गठबंधन 43 सीटें जीतने में सफल रहा। हालांकि चुनाव जीतने के बाद से सपा के लोग दलितों पर दमन करना शुरू कर दिए। अखिलेश यादव अपने सजातीय लोगों द्वारा दलितों पर हो रहे अत्याचार पर मौन साधे रहते हैं। वहीं सपा समर्थक एवं IT Cell के लोग दलितों को ही अपमानित एवं criminalise करने में लगे रहते हैं। लिहाजा दलित अब अपने फैसले पर रो रहा है और इन्हें सबक सिखाने हेतु 2027 के चुनाव का इंतजार कर रहा है। भाजपा पश्चिम बंगाल में वही गलती न करे जो उत्तर प्रदेश में सपा ने की। सोशल मीडिया पर द्विज हिंदू भी सरेआम दलितों को अपमानित एवं गाली-गलौज करने में लगे हुए हैं। पुलिस शिकायतों के बाद भी भाजपा सरकार इन पर कोई कार्रवाई नहीं करती। इस भेदभाव को समाज देख रहा है। पश्चिम बंगाल का नेतृत्व किसी दलित के हाथ में देना बहुत ही सूझबूझ वाला एवं सबको साथ लेकर चलने वाला फैसला होगा। साथ ही इन जातिवादी लफंगों को एक कड़ा संदेश जाएगा, जो हिंदुत्व के नाम पर 24 घंटे Brahmin Supremacy सिद्ध करने एवं बहुजनों को अपमानित करने को ही अपना धर्म समझते हैं।
नरेंद्र मोदी जी स���वयं को अति पिछड़ा बताते हैं। RSS प्रमुख मोहन भागवत हिंदुत्व एकता की बात करते हैं, तो क्या यह सारी बातें सिर्फ दलितों, आदिवासियों एवं पिछड़ों को गुमराह करने के लिए हैं? पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री बनाए जाने का पहला अधिकार दलितों का है। हमारी मांग है कि भाजपा उन्हें सिर्फ मंत्रालय अथवा कैबिनेट में प्रतिनिधित्व न दे, बल्कि राज्य का प्रमुख नेतृत्व बनने की जिम्मेदारी दे। आज लोकतंत्र पर एक दाग ल���ा हुआ है कि देश में एक भी मुख्यमंत्री दलित समुदाय से नहीं है। ऐसे में भाजपा इस दाग को मिटा सकती है। नरेंद्र मोदी जी के पास इतिहास लिखने का मौका है, इस दाग को मिटाने की जिम्मेदारी है।
"Teacher attacked a poor student." 😡
A student studying at Allama Iqbal College, Bihar complained about irregularities in the college. So teacher got angry and attacked him, slamming him to the ground.
Terminate this monster urgently. He must be ARRESTED and PUNISHED strictly.
शादी के लिए जाति चाहिए।
मंदिर के पुजारी के लिए जाति चाहिए।
चुनाव में टिकट के लिए जाति चाहिए।
मकान किराए पर देने के लिए जाति चाहिए।
लेकिन जैसे ही 'नौकरी' की बात आती है, ये लोग अचानक 'कास्ट-ब्लाइंड' (जाति-विहीन) हो जाते हो?और कहते हैं-'जाति मत देखो, मेरिट देखो'।
#Casteism
बिहार के दरभंगा जिले के हरिनगर गाँव में अशरफ़ी पासवान के परिवार पर हुए कथित जातीय हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं। कर्ज विवाद के नाम पर दलित परिवार के साथ हिंसा अस्वीकार्य है। SC/ST एक्ट के तहत निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार की ��ुरक्षा और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।
आदरणीय मित्रों, बहुजन समाज के धुरंधर पत्रकार @Sumitchauhaan भाई बहुत मुश्किल में हैं. इस मुश्किल समय में हम सबको उनकी सहायता करनी चाहिए. जो भी आप लोगों से बन पड़ता है, QR CODE में स्कैन कर या अकाउंट में कै��� ट्रांसफर कर सहयोग करें 🙏🏼
साथियों, पुराने QR कोड पर UPI ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हो रही हैं इसलिए कई सारे QR कोड शेयर कर रहा हूं। आप इनमें से स्कैन करें और जिस पर भी ट्रांजेक्शन स्वीकार हो करें।
आप स��� गुज़ारिश है कि अगर UPI काम नहीं करे तो प्लीज़ पोस्टर में दिए गए अकाउंट नंबर पर अपनी मदद भेजें।
Account Holder: SUMIT CHAUHAN
Account Number: 50100037249582
IFSC: HDFC0002649
SWIFT: HDFCINBB
Bank: HDFC Bank
Branch: Sector 62, Noida
UPI - newsbeak@yesbank
UPI - isumitchauhan@ptyes
UPI - sumitchauhaan@icici
UPI - azrasumit@kotak
PhonePe, Paytm - 8595794224
---------------------------------------
मेरे परिवार के लिए ये मुश्किल घड़ी है। जय भीम साथियों, मेरी जीवनसाथी अज़रा इस समय गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। उन्हें दो तरह के रेयर एब्डॉमिनल ट्यूमर हैं और मेदांता अस्पताल (ग��रुग्राम) में उनका इलाज चल रहा है।
नवंबर 2022 में इन्हीं ट्यूमर की सर्जरी कराई गई थी लेकिन दुर्भाग्य से ये ट्यूमर फिर लौट आए हैं। इस बार मामला क्रिटिकल है और अज़रा को मल्टीपल सर्जरी और कीमोथेरेपी वग़ैरह से गुज़रना होगा।
हेल्थ इंश्योरेंस और पर्सनल सेविंग्स ख़त्म होने के बाद हमें आपकी मदद की ज़रूरत है। हमें कुल 30 लाख रुपये की ज़रूरत है इसलिए हम आपसे अपील कर रहे हैं।
मैं आपसे गुज़ारिश करता हूँ कि अगर आप हमारी मदद कर सकें तो प्लीज़ करें।
अगर आप मदद नहीं कर सकते तो प्लीज़ इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें। मुझे उम्मीद है कि इस मुश्किल वक़्त में आप हमारा साथ देंगे। आपका सुमित चौहान
पहले हैदराबाद के डॉ0 रोहित वेमुला,फिर मुम्बई की डॉ0 पायल तड़वी और अब हिमाचल प्रदेश की पल्लवी।
शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चो��� की जाति व जातिवाद के कारण सांस्थानिक हत्याएँ कब तक होती रहेंगी?
#JusticeForPallavi