आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन 🙏🏻
1. सभी परीक्षाओं में Exam Fee सभी के लिए समान होना चाहिए। किसी वर्ग के लिए ₹0 और किसी अन्य वर्ग के लिए ₹1000 शुल्क जैसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
2. सभी अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा Age Limit समान होनी चाहिए। प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में सभी वर्गों के लिए एक समान आयु सीमा लागू की जाए।
3. आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी SC/ST ओबीसी की तरह छात्रवृत्ति Scholarship और शैक्षणिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
4. कक्षा, विद्यालय या कॉलेज में किसी भी छात्र का उसकी जाति, वर्ग या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर मज़ाक उड़ाने, अपमान करने या भेदभाव करने पर सख्त कार्रवाई के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान होने चाहिए।
5. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 30% करने की मांग की जाए. ताकि आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्ग को इसका लाभ मिल सके।
6. EWS प्रमाण पत्र की वैधता अवधि 1 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों को बार-बार प्रमाण पत्र बनवाने की आवश्यकता न पड़े।
इंस्टाग्राम अकाउंट Reservation Hatao Andolan पर इस समय 1.8M followers हो गए है। 🔥
जिस स्पीड से फॉलोवर्स बढ़ रहे है। उसे देखकर लगता है कि कल तक 5M का आंकड़ा भी पार हो जाएगा?
अब NEET Aspirant .@Harshdubey9956 को भी आरक्षण, कटऑफ एग्जाम फीस और स्कॉलरशिप जैसे विषयों पर। अपना अनशन शुरू कर देना चाहिए।
माहौल अच्छा है जनता का साथ भी मिलेगा और सरकार और नेता अभिनेता, पत्रकार सबकी असलियत भी जाहिर हो जाएगी। कि सवर्ण समाज के साथ कौन है और कौन नहीं।