श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण मे एक चीज नोटिस की है 👇
ट्रस्ट के सदस्यो व आरोपित व्यक्तियो मे अधिकांश ब्राह्मण होने के बावजूद ब्राह्मण समाज इस प्रकरण मे या तो खामोश है या खुलकर कांड की भर्त्सना कर रहा है!
पर आश्चर्यजनक रूप से चंपत राय को जाति के आधार पर भी समर्थन मिल रहा है!
आप भले ही मोदी-योगी के भक्त हों,
पर अपने परिवार के 14-22 वर्ष आयु के बच्चो से NEET पेपर लीक,दिल्ली लाठीचार्ज जैसे मुद्दो पर बात करके देखिये, तो मालूम चलेगा कि नई पीढ़ी कतई मोदी भक्त नहीं है,न ही उसे सांप्रदायिक मुद्दो से कोई लेना देना है!
माहौल बदल रहा है,यही पीढ़ी सत्ता बदलेगी.
देश का माहौल वाकई बदल रहा है!
परिपक्व युवा ही नहीं, बल्कि
8th से 10th क्लास तक के बच्चों में भी परीक्षाओं में धांधली और कल के लाठीचार्ज को लेकर सरकार के प्रति भारी आक्रोश है!
गुज्जू लॉबी और नागपुर लॉबी आँखें खोलकर माहौल भाँप ले
कम से कम शिक्षा क्षेत्र और मंदिरों को तो बख्श देते
@MediaHarshVT मोदी सरकार और पूरा उद्योग जगत गत डेढ़ दशक से सोया रहा, जब AI पर ध्यान देने की आवश्यकता थी, तब कुछ नहीं किया, अब छटपटाने से कुछ नहीं होगा,
AI की ट्रेन मिस हो चुकी है
शर्मनाक , राम मंदिर के कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर ₹10 लाख मिले:* गोबर के ढेर में छिपाए थे; चढ़ावे में चोरी के आरोपों पर ट्रस्ट की SIT जांच की मांग ।
श्रीराम के वंशजों को राम मंदिर ट्रस्ट में स्थान तक नहीं दिया गया!!
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आनंद मोहन सिंह के एक हुंकार ने बिहार की राजनीति को धधका दिया है। प्रदेश में जिस तरह का माहौल बन गया है, उससे कई समीकरण आने वाले वक्त में बदल जाएंगे।
आनंद मोहन ही वो कारण हैं कि पवन सिंह को MLC का टिकट मिल गया। श्रेयशी सिंह से लेकर कई क्षत्रिय मंत्रियों के पोर्टफोलियो में बदलाव करके नाममात्र के विभाग से कुछ बेहतर मंत्रालय दे दिए गए।
आनंद मोहन ने थैली पॉलिटिक्स और चांडाल चौकड़ी का जिक्र करके डूबते जेडीयू को न सिर्फ़ जीवनदान दे दिया, बल्कि हर तरफ से हताश हो चुके नीतीश कुमार को भी अपनी पार्टी और अपने पुत्र को लेकर उम्मीद जगा दी।
यही कारण है कि नीतीश कुमार अपने हाथ से निकल चुकी पार्टी को अपने कब्जे में लेने के लिए खुद नेताओं के घर जा रहे हैं और उनसे मुलाकात कर रहे हैं। वे 8 जून को जमां खान के घर गये और लंबी मुलाकात की। उनके साथ अशोक चौधरी से लेकर मनीष वर्मा भी साथ थे।
ये आनंद मोहन की राजनीतिक पहल का ही नतीजा है कि RCP सिंह जेडीयू की तरफ खींच रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी RLM को भाजपा में विलय करने के बजाय जेडीयू में विलय करने को तैयार हैं।
बदलते हालात को लेकर संजय झा और ललन सिंह के माथे पर चिंता की लकीरें उभर गई हैं। कहा जा रहा है कि जेडीयू के वयोवृद्ध नेता वशिष्ठ नारायण सिंह के पुत्र का टिकट काटकर बेचने वाले वाले संजय झा और ललन सिंह को लेकर जेडीयू में भारी असंतोष है। इस असंतोष का असर बहुत जल्दी दिख सकता है।
@Baliyan_x पर इस प्रकरण में अन्य हिन्दू ही उद्वेलित हैं,
क्षेत्र के किसान संगठन ,किसान नेता, सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर,जाट समाज के अधिकांश लोग चुप्पी साधे हुए हैं
क्योंकि उन्हें इस प्रकरण से जाट मुस्लिम भाईचारे की चिंता ज्यादा हो रही है
यदि जाति के नाम पर अंतर्राष्ट्रीय खिलाडी का महिमामंडन होगा,तो उस जाति से द्वेष रखने वाले तमाम लोग उस खिलाड़ी के भी स्वाभाविक रूप से आलोचक बन जाएंगे।
उसकी जरा सी असफलता पर उसे कोसा जाएगा,मजाक उड़ाया जाएगा!
जातिवादियो की मूर्खता का खामियाजा बेचारे खिलाड़ी को भुगतना पड़ता है!
जिस भी खिलाड़ी का जाति के नाम पर महिमामंडन होगा उसके पतन मे जयजयकार करने वाले स्वजातियों की बड़ी भूमिका होगी।
कपिल देव,सचिन तेंदुलकर की जाति से किसी को कोई मतलब नहीं था।
सूर्यकुमार यादव का करियर @Profdilipmandal और @AnilYadavmedia1 जैसे लोग खा गए।
वैभव को बख्श दो भाइयों 🙏
NEET पेपर लीक,SSC की अव्यवस्थाएँ और CBSE की त्रुटिपूर्ण OSM मार्किंग से लाखों छात्रो का भविष्य प्रभावित हुआ है।
छात्रो और अभिभावकों मे @narendramodi सरकार के प्रति भारी नाराज़गी और आक्रोश है।
फिर भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्यवाही न होना?
पूर्व मे भी कई बार ऐसा हुआ है जब ग्राम पंचायत चुनाव और क्षेत्र/जिला पंचायत चुनाव अलग अलग हुए हैं।
सत्तारूढ़ दल की असली चिंता ही क्षेत्र/जिला पंचायत चुनाव (ब्लॉक प्रमुख/जिला पंचायत चेयरमैन) के टिकट वितरण में संभावित गुटबाजी से है।
इसके लिए ग्राम पंचायत चुनाव टालना समझदारी नहीं है।
महामानव 12 वर्ष सोते रहे,
अब डेमोग्राफी बदलने की सुध आई!
बदलती डेमोग्राफी का सिर्फ डर दिखाकर वोट हासिल किया,पर समस्या निवारण का कोई गम्भीर उपाय नहीं किया।
यदि 2014 मे ही जनसंख्या नियंत्रण कानून बना देते तो स्थिति काबू से बाहर न होती।
इस दिशा में सिर्फ संजय गांधी ने काम किया था।
यूपी सरकार द्वारा ग्राम पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव तक टालने से फायदे के बजाय नुकसान अधिक होगा,इस निर्णय से प्रधान के विपक्षी सरकार से नाराज होंगे।
उचित होगा कि ग्राम पंचायत चुनाव विधानसभा से पहले अक्टूबर माह मे और क्षेत्र/जिला पंचायत चुनाव विधानसभा के बाद कराएं
@myogiadityanath
@Scion_of_Agni जैसे प्रतिहार वंश के साथ स्थानसूचक गुर्जर जुड़ा होने का उल्लेख दक्षिण के राजवंशों , अरब यात्रियों आदि ने किया,ठीक उसी तरह परमार वंश के साथ जुड़ा मालव भी स्थानसूचक हो सकता है।
मैंने कुछ देर पहले संगठन के एक बहुत ताकतवर व्यक्ति से बात की, सवाल था कि अगर यही विभाग देने थे मुख्यमंत्री जी को तो इतनी देरी क्यों।
सवाल का जवाब सुनकर मुझे बहुत देर तक हंसी आई
भाई साहब का कहना था ढूंढ ढूंढ कर देखा जा रहा था की सबसे खराब विभाग कौन से हैं
जिस प्रकार सीकर पिछले कुछ सालों में अचानक से ही #NEET और JEE की कोचिंग के लिए विख्यात हो गया था, विशेषकर NEET में तो सीकर के कोचिंग संस्थानों ने रैंकिंग के मामले में कोटा को भी पीछे छोड़ दिया था, उससे लग ही रहा था कि कोई न कोई गड़बड़ जरूर है।
@ArvindSinghUp@ippatel UGC बिल्कुल गलत है,वापस होना चाहिए।
पर इसके नाम पर एक्टिविज्म का दिखावा कर रहे एक जाति विशेष के कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर दरअसल सपा की दिहाड़ी पर काम कर रहे हैं,
इनका असली निशाना मोदी नहीं योगी है और राजपूत समाज के प्रति इनके मन में अंदर तक जहर भरा हुआ है।