परमादरणीय @nitin_gadkari जी, यदि आप एक डैश के डैश हो, तो आपको चुनौती देता हूँ राहुल गाँधी का यह वीडियो तीन घंटे में डिलीट करवाने का। मेरे जैसे लोगों को तो आपने 157 पेज का फाइल भेजा है, पर यदि साहस है तो upto E20 तक लिखे इस ढक्कन वाले नेता पर केस कर के दिखाओ।
जरा @DrMohanYadav51 जी बताएँ कि यह खर्चा कौन उठाएगा? ₹5 लाख करोड़ का कर्ज है राज्य पर, 73% आरक्षण करना चाहते हैं! फिर मुझे याद आया कि जो सरकार भगवान राम को जातिवादी हत्यारा बताती है, वो शंभूक का प्रायश्चित ऐसे ही प्राइवेट कमरों का किराया भर के ही करेगी।
अब एक राशन योजना और आ जाए, जिसमें चाय-सिगरेट और गर्लफ्रेंड के उपहार की व्यवस्था हो जाए, तो पढ़ाई ढंग से हो पाएगू।
1952 में 600-700 जातियाँ दलित थी, बाबा साहेब के संविधान ने 600 और जोड़ दिया, यानी 5000 वर्ष के मनुवादी, ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने 600 अछूत जातियाँ दी, 70 साल के बाबा साहेब संविधान ने 600 और जोड़ा। तार्किक रूप से सुधीजन ये बताएँ कि आरक्षण से जातियों का उत्थान हो रहा है या पतन?
SC के 135-145 IAS ऑफ़िसर्स हैं, 50-62000 क्लास 1 ऑफ़िसर्स, डेढ़ से पौने दो लाख क्लास 2 ऑफ़िसर्स हैं इस देश में। अंबेडकर को उनके शिक्षक ने और तत्कालीन महाराज सयाजीराव गायकवाड ने उन्हें विदेश भेजा, फिर छत्रपति शाहूजी महाराज ने उनकी लंदन की पढ़ाई पूर्ण करवाई।
अब प्रश्न यह है कि ऊपर के IAS, क्लास 1 और 2 के लगभग 2 लाख अफ़सरों में से कितनों ने अपनी ही जाति समूह के बच्चों को स्पॉन्सर किया है?
मीना समाज 1000% अधिक ओवर रिप्रिजेंटेड है, जाटव का भी प्रतिनिधित्व SC वर्ग में अधिक है, यादव, कुर्मी, जाट, गुर्जर को OBC में देख लीजिए! तो प्रश्न यह है कि असली आदिवासी, भील कहाँ हैं ST में?
मुसहर, माँझी, वाल्मीकि, सुदर्शन, बहेलिया, बंतार, डोम, हलालखोर, तुरी, पासी, भंगी और मदारगी के बच्चे स्कूल भी पहुँच पा रहे हैं? OBC की लगभग 1,000 जातियों की सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी शून्य या नगण्य है, जैसे कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, राजभर, पाल, बघेल, बढ़ई, कुम्हार, लोहार, तेली, चौरसिया, नाई (सैलानी) और नोनिया!
फिर कहा जाता है कि आर्थिक आधार पर रिजर्वेशन नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो दो-चार जातियाँ सारा आरक्षण खा रही हैं, उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक है, पर उन्होंने स्वयं को इन जाति समूहों में राजनैतिक रूप से ब्लैकमेलिंग करके घुसा रखा है, इसलिए वो कभी भी अपनी ही जाति समूहों में आरक्षण नीचे तक नहीं जाने देंगे।
इसीलिए, Reservation पर ReThink, Rationalise, Reform और अंततः Remove करने के लिए हमें चर्चा करनी चाहिए।
वैसे कठिन दिनों में मेरी माँ ने मुझे पालते समय बहुत दिन तक घर में बर्तन स्वयं साफ़ किए और मुझे बताया भी कि कोई काम बड़ा छोटा नहीं है । न बर्तन न घर न फ़र्श की सफ़ाई। हर काम भगवान का रूप है ।
जो बर्तन साफ़ करते है मैं उनका भी सम्मान करता हूँ।
खैर भाजपा ने तो मुझे नाज़ और प्यार से कार्यालय में भोजन दिया एक परिवार की तरह।
और भाजपा ने कभी भी मेरे से ताहिर हुसैन जैसे आतंकी का character witness बनने के लिए नहीं कहा। यह चलन तो वन पे वन फ्री टाइप पार्टियों का होता है !
Fact-checker @zoo_bear is begging for donations. I will make sure he gets his entire year’s requirements.
All he has to do is to fact-check publicly whether what Nupur said is derived from Sunan an-Nasa'i 3378; Vol. 4, B 26, Hadith 3380.
Take the challenge, Zubair. "Be a man."
जिस दिन सामान्य वर्ग भाजपा की नीतियों से तंग आकर दूसरे विकल्प तलाशने लगेगा, उस दिन आईटी सेलियो की पोस्टों पर ताली बजाने वाले तो छोड़ो थूकने वाले भी नहीं मिलेंगे।
न सामान्य वर्ग का भरोसा बचेगा, न पिछड़ों का पूरा समर्थन मिलेगा, न अति पिछड़ों का।
फिर चुनाव हारने के बाद वही लोग ट्वीट करेंगे—
"राम मंदिर दिया, फिर भी वोट नहीं मिला!"
अरे भाई, लोकतंत्र में वोट सम्मान, भरोसे और नीतियों पर मिलता है, सिर्फ भावनाओं के पुराने स्टॉक पर नहीं।
PM @narendramodi जी के सामाजिक न्याय के मंत्री @RamdasAthawale ने सामान्य वर्ग के बच्चों को 'जाहिल' और 'मानसिक रोगी' कहा है! @RHAreforms ने केवल आरक्षण में सुधारों और इसकी समीक्षा की बात की है, और इसके लिए सरकार हमें 'देशद्रोही', 'जाहिल' और 'मानसिक रोगी' कह रही है।
(विडंबना देखिए कि अनपढ़ नेता उच्चतम कटऑफ वालो को जाहिल बोल रहा है!)
मोदी जी, स्वयं के अभिमान को बगल में रखिए, बोलिए!
गोपाल राय इस पूरे आंदोलन के सूत्रधार हैं। सारा लॉजिस्टिक्स, योजना देख रहे हैं। संभावना है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन रामलीला मैदान तक पहुँचेगा। उन्हें रामलीला मैदान का अनुभव भी है, वो इसे लम्बा खींच भी लेंगे।
@BJP4India इनका कुछ न बिगाड़ पाई है, न बिगाड़ पाती दिखती है। ये न तो पंजाब में प्रदर्शनकारियों की पिटाई पर कुछ नैरेटिव बना पा रहे हैं, न केरल पर। न ये यह बता पा रहे हैं कि गहलोत और राहुल गाँधी किस मुँह से पेपर लीक पर बोल रहा है?
@narendramodi जी का व्यक्तिगत सम्मान/अहंकार/अकड़ वामपंथियों को अवसर दे रहा है कि वो इस बार शाहीन बाग और किसान आंदोलन के हायब्रिड मॉडल ला कर पूरे देश में ऐसे कॉकरोच पार्क बनवा देंगे। इसमें लोग मरेंगे, यह तय है।
बीच सत्र में मंत्री तो नहीं हटेगा, पर अब कॉन्ग्रेस अड़ गई है कि बिना उसके हम संसद में चर्चा नहीं होने देंगे। जब इनके अपने समर्थकों ने इनसे जनवरी से यही बात कही, तो ये चिढ़ा रहे थे कि गुजरात निकाय चुनाव जीत गए, बंगाल में 208 आ गया।
19 जुलाई तक मुझे विश्वास था कि इसे सरकार नियंत्रित कर लेगी, पर सरकार की नपुंसकता ने पुलिस को लाल किला वाली पिटाई याद दिला दी। हर तरफ पुलिस पर हो रही बर्बरता के चिह्न दिख रहे हैं।
‘@AmitShah भूलते नहीं’, यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है। नक्सली गतिविधियों को, कश्मीर को, NGO गिरोह को साधने में बहुत बड़ा रोल रहा है इनका। परंतु, उसके समानांतर CAA, किसान आंदोलन जैसी विफलताएँ भी हैं।
@PMOIndia में लोग हैं, @anil_baluni जैसे मँजे हुए मीडिया मैनेजर हैं सरकार के, क्या आप लोगों को लगता नहीं कि पीएम का एक ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ इस पूरी व्याधि को समाप्त कर देगा?
“मेरे प्यारे देशवासियो!
पिछले दिनों में विद्यार्थियों के नाम पर जो हो रहा है, उससे मुझे बहुत पीड़ा हुई है। विद्यार्थियों के हितों के लिए मैं उनके परिजन की तरह, पिता की तरह प्रतिबद्ध हूँ। मैं यह मानता हूँ कि पेपर लीक एक बहुत बड़ी समस्या है और सरकार इसे रोकने में विफल रही है।
हम यह भी जानते हैं कि पेपर लीक की व्यापकता किसी एक सरकार से परे है। अतः हम शीघ्र ही देश के हर शिक्षा मंत्री के साथ, ब्यूरोक्रेसी के साथ एक वृहद चर्चा कर के, इसका समाधान निकालेंगे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह मेरा व्यक्तिगत दायित्व है कि हम अपने बच्चों को एक स्वस्थ तंत्र दें।
हमने यह भी तय किया है कि 2024 में लाए पेपर लीक कानून को संशोधित कर, इस माफिया की जड़ तक जाएँगे। अब न केवल कंपनी, बल्कि हर व्यक्ति भी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
ब्ला ब्ला ब्ला…
नमस्कार!”
तत्पश्चात्, दो-चार बड़े अधिकारियों को (CBSE चेयरमैन, NTA डायरेक्टर आदि) को सेवामुक्त करें, जाँच बिठाएँ। यदि नहीं किया तो, चापलूस आपको ‘मोदी-शाह पुराने नेता हैं’ का सुगम संगीत सुना कर बर्बाद कर देंगे।
बाकी, आप बेहतर जानते हैं।
चूँकि मेरे दिए गए समाधान न तो जनवरी में माने गए, न फ़रवरी में (नीचे कमेंट में), और आज पुनः हम उसी मोड़ पर हैं जहाँ भाँग खाने वाले सलाहकारों और पे-रोल पर पलने वाले चापलूस 'कीप काम एंड ट्रस्ट मोदी' का जाप कर रहे हैं, मैं फिर भी पतितों की तरह कुछ समाधान बिंदु लिख रहा हूँ।
यह मैं इसलिए नहीं करता कि कोई इसे पढ़ कर अपनी अंतरात्मा जगा लेगा या सरकार मेरी बात मान लेगी, ये मैं केवल डॉक्यूमेंटेशन के लिए लिखता हूँ कि मैं केवल समस्या बताने वालों में से नहीं था, बल्कि मैं समाधान भी दे रहा था।
1. PM को सामने आ कर विद्यार्थियों, उनके परिजनों से सीधे बात करनी चाहिए। वहाँ स्वीकारिए कि यह समस्या है और सरकार उसे अभी तक केवल आंशिक रूप से सही कर पायी है, वृहद समाधान में समय लगेगा, और आप तत्परता से उस पर कार्य कर रहे हैं। क्या कर रहे हैं, उसकी एक झलक भी दिखाएँ/बताएँ।
2. अब धर्मेंद्र प्रधान को हटाना उचित नहीं लगता क्योंकि यदि अभी ऐसा होता है तो 'जो सबसे लंबा अनशन करेगा, उसके हिसाब से मंत्री हटाए जाएँगे' की एक परिपाटी बनेगी। वो हटे, पर अभी तो बिल्कुल नहीं। बात यह नहीं है कि कॉकरोच की डिमांड क्या है, बात यह है कि 28 करोड़ लोगों के द्वारा चुनी सरकार को अराजकतावादियों के हिसाब से मंत्री नहीं बदलना चाहिए। समर्थकों के कहने पर नहीं हटाया तो इन पर तो बिल्कुल नहीं।
3. चाहे NEET हो, SSC हो या अन्य परीक्षा, इसे ऑब्जेक्टिव तक ही सीमित ना रख कर इसका एक-दो चरण ऐसा हो कि केवल MCQ ही उनका भविष्य तय ना करे। बोर्ड तक उसकी सतत समझ की क्षमता के साथ साक्षात्कार आदि को भी डाला जाए या IIT की तरह उसे भी बड़ा बनाया जाए। यदि यह संभव ना हो तो आप IIT या UPSC से सीखें कि उनकी परीक्षा के प्रश्न लीक क्यों नहीं होते।
4. हर कोचिंग संस्थान, विद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता की नियुक्ति अनिवार्य की जाए ताकि हर 40 मिनट में एक विद्यार्थी आत्महत्या ना करते रहें।
5. हर विभाग का परीक्षा कैलेंडर (हर चरण का दिन पूर्व निर्धारित) हर वर्ष निकले और परीक्षा केंद्र छात्रों की सहजता के हिसाब से हो ना कि रैंडम। अभी ऐसी स्थिति है कि सेंटर अनावश्यक रूप से 4-500 किलोमीटर दूर तक दे दिए जाते हैं। इसका कोई तर्क नहीं होता।
6. पेपर लीक से जुड़ी फर्म ही नहीं, उनसे जुड़े व्यक्ति और उनके परिजन तक ब्लैकलिस्टेड होने चाहिए कि ये लोग इसी व्यवसाय में पुनः कहीं से भी नहीं आ सकते। यदि कोई सरकारी व्यक्ति पैसा खा कर ऐसा कुछ भी करता है, उन्हें कोई टेंडर आदि दे देता है तो उस पर देशद्रोह का केस चले और न्यूनतम 20 वर्ष का दंड हो।
7. ऐसे अपराध से जो जुड़े हों, उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अपना ट्रिब्यूनल हैंडल करे और ऐसी सुनवाई 'इन कैमरा' होने के स्थान पर 'ऑन कैमरा' सार्वजनिक रूप से हो। इसे एक तय समयसीमा में निपटाने की बाध्यता हो। यदि यह सार्वजनिक नहीं होता तो फिर से हर चीज मैनेज हो जाएगी और इसका कोई महत्व नहीं रहेगा।
8. इस नौटंकी आंदोलन में जो भी हैं, एक-एक को चिह्नित कर, उनका उदाहरण बनाया जाए। हाँ, कुछ वास्तविक विद्यार्थी भी होंगे, तो उन्हें काउंसलिंग के साथ छोड़ दिया जाए, परंतु अराजक तत्वों को, यदि वो किसी पार्टी से हैं, 18 वर्ष से ऊपर के हैं, तो उन्हें जेल में डाला जाए, उन्हें जीवन में कोई नौकरी ना मिले यह सुनिश्चित किया जाए और यह हर हिंसक आंदोलनकारी को बताया जाए कि प्रदर्शन का अधिकार है, आगजनी और हिंसा का नहीं।
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और भी कुछ सुझाव होंगे, परंतु अभी इतना ही। सरकार ऐसा कुछ नहीं करेगी पर 'दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है' के लिए मैं यह लिख रहा हूँ।
कायरता से भरा हुआ अप्रोच! PM के पास अपना सोशल मीडिया हैंडल नहीं है? दुनिया भर की बातें और फोटो डाली जाती हैं हर दिन, पर इस विषय पर ‘किरिन रिजिजू ने कहा कि पीएम ने कहा है’ वाली लाइन?
यही नौटंकी नीट के भी समय हुई थी कि पीएम चिंतित हैं। अरे चिंतित हैं तो क्या उँगलियों में कोढ़ हो गया है? टाइप नहीं कर सकते? डायरेक्ट स्टेटमेंट नहीं दे सकते?
मोदी जी का ईगो इतना विशाल हो चुका है कि उनकी सारी बुद्धि उसी शेल में कैद हो गई है। इनके ईगो के चक्कर में बच्चे पिस रहे हैं। सत्य यह है कि कल के प्रदर्शन में केवल भीम आर्मी, आपाई और सपाई ही नहीं थे जो अराजकता और हिंसा फैला रहे थे, उनमें से एक हिस्सा किशोर वय के छात्र-छात्राओं का भी था।
इन्हें लगता है कि ये लोग क्या कर लेंगे, भूल जाएँगे। परंतु यह पाइल-अप हो रहा है। चुनावों की जीत ही समस्याओं की अनुपस्थिति का एक मात्र मापदंड नहीं है @narendramodi जी!
अब मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि सरकार ने UGC पर इंगेज नहीं किया, CBSE/NEET पर जब बोलना था, तब एक शब्द नहीं बोला, आज कैसे थूक चाटने लगे?
यही बात तो पार्टी के समर्थक सात महीने से बोल रहे थे। पूरा कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट किया, मीडिया में अपने प्रवक्ताओं को भेजना बंद किया, हाउस अरेस्ट कराया, सुप्रीम कोर्ट से स्टे के बाद से ऐसे जताया कि उपकार कर दिया हो, आज घुटनों पर आ गए?
यही इस सरकार का पैटर्न बन चुका है। फोड़े को बवासीर बनने देते हैं, फिर जब लगता है कि अब मामला हाथ से निकल गया, तब झुक कर बात मानने को तैयार हो जाते हैं।
सुबह के 11 बजे तक यह आंदोलन सरकार के हिसाब से चल रहा था, नियंत्रण में था। अब यह स्पष्ट है कि नड्डा के घर बुलाने और तीन माँगें सुनने के बाद, तिलचट्टों का विश्वास आकाश पर है और वो CAA, किसान आंदोलन की तरह, भारत को नया, फर्जी आंदोलन देने जा रहे हैं।
अब मुझे देखना है कि माँगों पर सरकार करती क्या है! आत्महत्या करने वालों के परिजनों को एक करोड़ की माँग उचित है, क्योंकि अधिकांश पेपर लीक के कारण ही ‘सॉरी’ लिख कर मरे। दो अन्य माँगों में से एक प्रधान के त्यागपत्र की है, जो होना तो जनवरी में ही था, पर ईगो के कारण आज तक खींच लाई सरकार।
प्रधान अब इनके गले की फाँस बन चुका है।ये हर वो चीज करते हैं, जिसका इन्होंने पहले विरोध किया पर वामपंथी इनसे करवाते हैं। ‘कास्ट सेंसस’ ये राहुल के कहने पर करा रहे हैं, और प्रधान अब तिलचट्टों के कहने से जाएगा।
इनकी पुलिस आज फिर पिटी है, जैसे लाल किला वाले आंदोलन में पिटी थी। आईटीसेलिए फिर से विक्टिम बने घूम रहे हैं और यह पूछ रहे हैं कि ‘क्या ऐसे लोग विद्यार्थी हैं’? फिर अपने मालिक से पूछो न कि क्यों नड्डा से मीटिंग को तैयार हो गए?
जब सरकार अपने समर्थकों पर थूकती है तब उन्हें दूसरों का थूका चाटना ही पड़ता है।
वामपंथी मादरचोद होते हैं। और उन्हें जहाँ भी, जो भी पेलता है, मुझे प्रसन्नता होती है। मैं इन लौड़ा-लहसुन वाली दार्शनिक बातों से वर्षों पहले ऊपर उठ चुका हूँ जो तुम हाफ-पैंट पर बेल्ट लगा कर लिख रहे हो।
अमित मालवीय मान रहे हैं कि सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पम्प पर मिलावटी तेल मिलता है। मिलावटी मतलब इथेनॉल ब्लेंड में ऊपर से कुछ और मिला हुआ।
जब सरकार मान नहीं रही कि इंजन E20 तेल से खराब होता है, और यह मान रही है कि तेल ही खराब डाला जा रहा है, तो समझ जाइए कि सरकार स्वयं पेट्रोल में जल मिलाने को प्रमोट कर रही है।
ध्यान रहे कि यह सरकार का दायित्व है कि वो मिलावटी पेट्रोल बेचने वालों को पकड़ें। पर जब सरकार स्वयं 20% मिला रही है, पुराने टैंक में ही नमी खींचने वाले ब्लैंड फ्यूल रखवा देती है तो पम्प वाले थोड़ा जल मिला ही दें तो क्या हो जाएगा!
मुझे नहीं पता था कि संविधान के अनुसार कोई पद पति को मिले तो पत्नी भी निरीक्षण करने निकल सकती हैं। @BJP4India में ‘प्रधानपति’ की परिकल्पना अब जेंडर न्यूट्रल हो कर ‘मुख्यमंत्री-पत्नी’ तक पहुँच चुकी है।
अच्छा है कि लोग पत्नी के नाम पर प्रधानी और सांसदी करते हैं, यहाँ पति के नाम पर पत्नी निरीक्षण कर रही हैं। कुछ कर तो रही हैं, बाकी तो कुछ करते ही नहीं। फुल सपोर्ट।
तो सरकार अब खुल कर सामने आ रही है कि उखाड़ लो हमारी %# यदि दम है तो। ये @nitin_gadkari का कथन है (मनी कंट्रोल पर), पर गडकरी या @narendramodi यह बताएँ कि आपने प्योर पेट्रोल का विकल्प किस पेट्रोल पम्प पर दिया है? एक्सट्रा प्रीमियम तो प्रीमियम पेट्रोल है, जो 2009 में भी मिलता था और तब के ‘प्योर पेट्रोल’ से 10-12% महँगा होता था।
एक तो कभी ठीक से बताया नहीं कि कौन सा तेल दे रहे हैं, उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी की, और अब ज्ञान दे रहे हैं कि दिक्कत है तो ₹167 वाला भरवाओ! जो लोग बोलें उन पर नागपुर में FIR करवाओ?
कायर! कापुरुष!!
एक बकलोली चल रही है इथेनॉल को लेकर कि हम जो अमेरिका से आयात करते हैं, उसका एक प्रतिशत भी ब्लेडिंग में प्रयोग नहीं होता।
भाई, ये दो कौड़ी का तर्क है। 2021 से 2025 तक, 720, 550, 460, 600, 1000 मिलियन लीटर इथेनॉल भारत ने इम्पोर्ट किया। तो तुम्हारा घरेलू उत्पादन ब्लेंडिंग के लिए लॉक्ड होने से, इम्पोर्ट बिल तो नहीं घट रहा?
ये केवल शब्दों का खेल है जो @nitin_gadkari@HardeepSPuri खेल रहे हैं और भारत मंडपम काजू खाऊ गिरोह उसे आँख मूँद कर प्रचारित कर रहा है। क्रूड का इम्पोर्ट बिल कम करो, पर इथेनॉल इम्पोर्ट बिल 177% बढ़ जाए, वो तो हम डॉलर में नहीं लेते!
अंततः, जब तुम इम्पोर्ट बिल घटाना चाह रहे हो, तो ये क्या बकलोली हुई कि ये अमेरिका वाला इथेनॉल है और ये भारत वाला? इम्पोर्ट तो हो ही रहा है न?
ये लोग जन्मजात निर्लज्ज होते हैं क्या?
१. किसानों की आय कैसे बढ़ाती है इथेनॉल? क्या किसान इथेनॉल बना कर भेजता है? किसान पहले भी धान-गन्ना-मक्का उगाता था, आज भी वही कर रहा है।
२. सड़कें सही करने से विदेशी तेल पर निर्भरता, इथेनॉल मिक्सिंग से 5-7 गुणा अधिक कम होगी।
३. जो ‘सच्चाई’ @HardeepSPuri बता रहे हैं, वह आधा है। यह क्यों नहीं बताते कि ये सब फ्यूल आपने उपभोक्ता के इंजन की कम्पैटिबिलिटी देखे बिना जबरन डाला है?
४. इथेनॉल से समस्या नहीं है, समस्या तुम्हारे और @nitin_gadkari के झूठ से है जिसने भारत के 04/2023 के पहले बीस करोड़ पेट्रोल इंजन में जबरन ऐसा फ्यूल डलवाया जिसके लिए वो तैयार नहीं थे।
घूम-घूम कर बकलोली करने से अच्छा है कि इंजन की #% मारना बंद करो, E10 और शुद्ध पेट्रोल का विकल्प हर पम्प पर दो।
राज कर रही है? राज ही कर रही है इसलिए तो जानता के विषयों पर मौन धारण कर लेती है और अपने ऊपर या अध्यक्ष के ऊपर थोड़ी सी भी टिप्पणी होती है, लट्ठ ले कर पिल पड़ते हो।
जो व्यक्ति स्वयं का ध्यान रखने में असमर्थ हैं, व्हीलचेयर से चलते हों, वो किस तर्क से ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हुए हैं? संत हैं, अच्छी बात है, पर क्या संत को यह देखते हुए कि वो इस पद पर अपनी सेवा देने योग्य नहीं हैं, हट नहीं जाना चाहिए?
नृत्य गोपाल दास रोग-व्याधि से पीड़ित हैं, आयु अत्यधिक हो चली है, फिर भी उनका अध्यक्ष पद पर बने रहना कितना उचित है? वह भी तब जब ऐसे प्रकरण हो रहे हैं जिससे हर हिन्दू ठगा अनुभव कर रहा है?
भगवान राम की सेवा, भजन, आंदोलन में भाग लेना, आपके हिस्से के पुण्य हैं, परंतु दान की चोरी के समय अध्यक्ष होना, चोरी का पता चलने के उपरांत भी अध्यक्ष बने रहना सह बताता है कि आप पद से आसक्त हैं।
ऐसा व्यक्ति संत नहीं होता। उसके लिए दूसरा शब्द है, जो मैं नहीं लिख रहा। पूरा ट्रस्ट भंग होना चाहिए। जिनके रहते यह दुष्कृत्य हुआ, उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं।
नृत्य गोपाल दास ने महीने भर बाद एक रद्दी चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्हें मोदी-योगी से आशा है। किस मोदी से? जिसने एक शब्द नहीं बोला? किस योगी से? जिसकी इंटेलिजेंस यूनिट को पता तक नहीं पड़ा?
यह तो बाहर आ गया तो आज गिनने वालों को पकड़ा जा रहा है, परंतु जिन्होंने गिनने वालों को वहाँ लगवाया, वो क्या त्यागपत्र दे कर अपने दायित्व से हाथ धो लेंगे?