शैतानियत, हैवानियत और बुराई क्या प्रलय आने पर ही धरती के साथ खत्म हो पायेगी? इसका उत्तर कोई इंसान तो नहीं, शायद भगवान ही जानते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार अब तक तीन युग बीत चुके हैं और आखरी "कलयुग" चल रहा है। कहते हैं कि कलयुग में धर्म भी होगा, कर्म भी होगा परंतु शर्म नहीं होगी।
ये भी कांड है? एक स्त्री ने अपना दूसरा विकल्प चुन लिया तो इतना हंगामा। रिश्ते टूटते हैं। उनके बीच सौ कारण हो सकते हैं। पति को छोड़ा जैसे वाक्यों से स्त्री को ही संदिग्ध बना रहे हैं। जैसे उसका दूसरा विकल्प चुनना कोई अपराध हो। किसी रिश्ते का टूटना दुखद ख़बर है लेकिन इस तरह की हेडलाइन से लगता है कि पति को छोड़ना कोई अपराध है। पति को भी स्वीकार कर आगे बढ़ जाना चाहिए। चली गई तो चली गई। आप भी चले जाइये। ज़मीन बेचा, मकान बेचा ये सब मत कीजिए। जब रिश्ते अच्छे थे तो पति ने किया। अब उसे अहसान की तरह गिनवा रहे हैं। अहसान कोई बैंक का निवेश नहीं है कि रिर्टन फिक्स होगा। अफसर बनने और बनाने की सनक का इलाज खोजिए। घूस और किसी को फर्ज़ी फंसाने का सुख न हो तो सरकार दरवाज़ा खोल कर बैठी रह जाएगी कोई अफसर बनने नहीं जाएगा। सामंती सुख के लिए ज़मीन बेच रहे थे। सामंती सुख को डबल करने के लिए किसी ने नया रिश्ता चुन लिया। CBSE जैसा कांड हो गया उससे तो फर्क ही नहीं पड़ रहा इस देश को।
@ArvindKejriwal कहते हैं कि 'अहम या घमंड' ईश्वर का प्रिय भोजन होता है, और उक्त दोनों प्रदेशों में भाजपा की जीत से अधिक वहां के मुख्यमंत्रियों के घमंड की हार है।