@Asharamjibapu__ संसार के आकर्षण से मन भटकता है, और भगवान की चाह सत्संग से बढ़ती है। जितना नश्वर का विवेक होगा, उतनी ही शाश्वत परमात्मा की प्यास गहरी होगी। यही जीवन की सबसे बड़ी कमाई है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
संसार बदलने वाला है, संसार के पीछे जीवन खपाना बुद्धिमानी नहीं। सत्संग से जब भगवान की शाश्वता, मधुरता और सामर्थ्य का अनुभव होता है, तब मन स्वतः संसार से हटकर परमात्मा की ओर लग जाता है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
आपकी बुद्धि में ये बिठा दो कि परमात्मा का सुख पाना ही सार है। हमारा आत्मा अनंत है और परमात्मा अनंत हैं। हमारा अंत नही होगा, शरीर का अंत होगा, हमारी मौत नही होती और परमात्मा एक रस है। आत्मा सदा है, परमात्मा सदा है।
शरीर भी बदलता है, संसार भी बदलता है, तो बदलनेवाले के लिए मांग मांग कर मजूरी करके युग बीत गए, अब तो अबदल की ही मांग पैदा हो।
ज्यों भगवान की गरिमा, भगवान की मधुरता, भगवान का सामर्थ्य सत्संग के द्वारा सुनोगे, त्यों बुद्धि में भगवद प्राप्ति की मांग की जगह बढ़ेगी। ज्यों संसार की पोलपट्टी विचार करोगे, त्यों-त्यों संसार की मांग की जगह घटेगी।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ अनेक संबंध, अनेक इच्छाएँ और अनेक चिंताएँ मन को बिखेर देती हैं। लेकिन "मैं एक का एक हूं" यह दृढ़ स्मरण मन को परमात्मा में टिकाकर जीवन को ईश्वरमय बना देता है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
मन जितना अनेक विषयों विकार में भटकेगा, उतना अशांत रहेगा। "मैं एक परमात्मा का हूं" यह दृढ़ निश्चय मन को एकाग्र, निर्मल और स्थिर बना देता है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ कपड़े बदलने से व्यक्तित्व नहीं बदलता, विचार बदलने से जीवन बदलता है।
प्रतिदिन अपने मन में एक दिव्य संस्कार, एक श्रेष्ठ विचार और एक सत्कर्म का संकल्प भरिए। यही सुख, शांति और सफलता का सच्चा मार्ग है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
भोजन, पानी और विश्राम के लिए समय मिल ही जाता है, तो प्रतिदिन समय निकाल कर आत्मचिंतन और सत्संग , ईश्वर-स्मरण के लिए भी अवश्य निकालिए। यही जीवन का वास्तविक निवेश है
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
प्रतिदिन अपने मस्तिष्क में दिव्य संस्कार भरने चाहिए, टाईम नहीं मिले, तभी भी!!
टाईम नहीं मिलता, तभी भी आप भोजन के लिए समय निकाल लेते हो, टाईम नहीं मिलता, पानी पीने के लिए समय निकाल लेते हो, टाईम नहीं मिलता, तो शयन के लिए समय निकाल लेते हो, टाईम नहीं मिलता तभी भी कपड़े बदलने के लिए समय निकाल लेते हो, ऐसे ही आप विचार बदलने के लिए भी समय निकालिए!
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ दुःख का कारण केवल विकर नहीं, बल्कि विकरो में आसक्त लोगों का प्रभाव भी है। कुसंग से वासनाएँ बढ़ती हैं, जबकि सत्संग से वैराग्य, विवेक और परमात्मा की ओर कदम बढ़ते हैं।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
विकार से बचना कठिन नहीं, विकारों में डूबे लोगों की संगति से बचना अधिक आवश्यक है। सत्संग मन को ऊपर उठाता है, जबकि कुसंग धीरे-धीरे विवेक का हरण कर लेता है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ कलयुग में झुठ ,कपट, वासना, का प्रभाव ज्यादा है
वासना के प्रभाव से बचना है तो ईश्वर-नाम, सत्कर्म और कथा-श्रवण ही बुद्धि को निर्मल बनाकर सही दिशा देते हैं।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
कलियुग का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि मनुष्य शाश्वत सुख छोड़कर क्षणिक सुखों के पीछे भागता है। कलयुग में नाम अधारा केवल भगवान का स्मरण, सत्संग और भजन यही कल्याण का मार्ग है
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
सतयुग गया तो सत्य गया (धर्म का एक पैर), त्रेता गया तो तप गया, द्वापर गया तो यज्ञ गया। दानं केवलं कलियुगे.. एक पैर पर धर्म खड़ा है, दान (धर्म का एक पैर सत्य और दूसरा पैर दान)।
लोग धर्म छोड़कर अधर्म पर, शाश्वत सुख छोड़कर नश्वर की तरफ जा रहे हैं। माता - पिता और हितैषी की बात अच्छी नही लगती, कलयुग ने ऐसी बुद्धि मार ली है!
इस कलियुग के दोषों से बचने के लिए... "कलयुग केवल नाम अधारा।
जपत नर उतरे सिंधु पारा ।।"
भगवान के नाम का आश्रय, सत्कर्म और भगवान की कथा, यही रक्षा करती है कलियुग के दोषों से।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ जो व्यक्ति हर कार्य में अपना श्रेष्ठत्व देता है, वही सफलता का अधिकारी बनता है। पूरे मन, पूरे भाव और पूरे प्रयास से किया गया कर्म ही विजय का मार्ग बनता है
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
विजय उसी को मिलती है
जिसने पूरे निष्ठा और लगन से कार्य किये तो जित पक्की है। आधे मन से किया गया कार्य कभी पूर्ण परिणाम नहीं देता।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ वस्तुजन्य सुख संसारी यो को लुभाता है, लेकिन भाव का मूल्य भगवान तय करते हैं।
जिस अर्पण में प्रेम, श्रद्धा और समर्पण हो, वही ईश्वर तक पहुँचता है।
भाव ही भक्त और भगवान के बीच का सच्चा सेतु है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
ईश्वर को चिज या वस्तु से प्रसन्नता नहीं होती, निर्मल हृदय का प्रेम प्रिय है।
भाव शुद्ध हो तो एक पत्ता, एक फूल, एक फल और एक बूँद जल भी भगवान को स्वीकार है।
भाव ही भक्ति की सबसे बड़ी संपत्ति है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
वस्तु का महत्व नहीं होता जितना भाव का होता है। अगर वस्तु का महत्व होता तो शबरी भीलन के जूठे बेरों में कौन सी ऐसी वस्तु थी? सुदामा के तंदुलों में ऐसी कौन सी वस्तु थी? लेकिन सुदामा का भाव, मीरा का भाव, भक्त का भाव जो वस्तु में नहीं होता भाव वो सबकुछ भर देता है।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ जिसे अपनी खामीयां को दिखती है, उसकी प्रार्थना में गहराई नहीं होती। अपनी कमियों का बोध ही सच्ची प्रार्थना और आत्मिक उन्नति का प्रथम चरण है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
प्रार्थना शब्दों से नहीं, हृदय की सच्चाई से पुकार स्वीकार होती है। जब अपनी कमियाँ खटकने लगती हैं, तभी ईश्वर की कृपा का मार्ग खुलता है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ एकादशी का दिन आत्मशुद्धि और ईश्वर-चिंतन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन संयम, उपवास और सत्संग का पालन करने से मन निर्मल होता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन चावल बिल्कुल भी नहीं खाना
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल खाने का निषेध बताया गया है।
इस दिन चावल खाने से शरीर व्याधि का घर बन जाता है
जो श्रद्धापूर्वक व्रत, जप और भजन करते हैं, उन्हें आत्मिक बल, मानसिक प्रसन्नता और पुण्य की प्राप्ति होती है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
जो एकादशी के दिन चावल खाते हैं उनको शारीरिक दोष तो प्राप्त होता है बीमारियां आदि, लेकिन मानसिक खिन्नता भी उनकी बढ़ती है एकादशी के दिन चावल खाना निषेध कहा गया शास्त्रों में और एकादशी के दिन उपवास रखने का बड़ा भारी माहात्म्य कहा गया है।
#AsharamjiBapuQuotes#निर्जला_एकादशी
@Asharamjibapu__ ईश्वर की सृष्टी को प्रेम, सहयोग और सेवा हे सजाओ।
जो भाव हम जगत को देते हैं, वही भाव घूमकर हमारे पास वापस आते हैं।
इसलिए सदैव शुभ सोचो, शुभ करो और शुभ बाँटो।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes