महाराष्ट्र में पुलिस चेकिंग के दौरान एक कार रोकी गई। ड्राइवर शराब के नशे में था। कार में उसकी गर्भवती पत्नी भी थी, जिसकी डिलीवरी का इमरजेंसी केस था।
पुलिस अधिकारी ने चालान नहीं काटे, उन्होंने महिला की हालत समझी। ओर पति को पीछे बैठाया, खुद गाड़ी की स्टीयरिंग संभाली और अस्पताल पहुँचाया। वहाँ भर्ती कराया और महिला की डिलीवरी हो गई।
एक तरफ नशे में पति… दूसरी तरफ समय निकलता जा रहा था और गर्भवती पत्नी को अस्पताल पहुँचाना जरूरी था।
ऐसे वक्त में पुलिसकर्मी का मदद के लिए आगे आना उस परिवार के लिए जिंदगी भर याद रहने वाला पल बन गया।
धनबाद के शहरी क्षेत्र भी बिजली आपूर्ति की कमी से बधाल हैँ. रोज़ सुबह 6 बजे बिजली काट दी जाती है और घंटों गायब रहती है. आला अधिकारी कृप्या ध्यान दें।
@HemantSorenJMM@dc_dhanbad
Girl: Why do you wear this sacred thread?
Brahmin Boy: We wear it because we are born superior.
Girl: Did you invent the electric board, airplane, computer, motorcycle, bicycle?
Brahmin Boy: No.
Girl: So how did you become the Superior?
Boy: 😂😂
मैं X/Twitter छोड़ने के लिए तैयार हूँ, यदि कोई आरक्षण विरोधी यह साबित कर दे कि पिछले कई दशकों में किसी भारतीय निजी कंपनी ने ऐसा मौलिक इंजीनियरिंग या तकनीकी आविष्कार किया है जिसने ट्रांजिस्टर, माइक्रोप्रोसेसर, वर्ल्ड वाइड वेब, GPS, स्मार्टफोन, क्लाउड कंप्यूटिंग, CRISPR या जनरेटिव AI की तरह वैश्विक स्तर पर किसी उद्योग की दिशा ही बदल दी हो।
भारत के निजी क्षेत्र में वस्तुतः कोई आरक्षण नहीं है। फिर भी वही भारतीय व्यापार पर हावी है और सरकारी सब्सिडी, संरक्षणवादी नीतियों, कर प्रोत्साहनों तथा बड़े पैमाने पर ऋण माफी और राइट-ऑफ का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है।
तो फिर दुनिया बदल देने वाले आविष्कार कहाँ हैं?
IT सेवाओं, आउटसोर्सिंग, लागत कम करने, प्रक्रिया सुधार या सफल व्यावसायिक मॉडल का उदाहरण मत दीजिए। क्रमिक सुधारों को भी मत गिनाइए। किसी ऐसे मौलिक, पहली बार किए गए, वैश्विक स्तर पर परिवर्तनकारी इंजीनियरिंग या तकनीकी आविष्कार का नाम बताइए जो किसी उद्योग की नींव या प्रमुख प्रेरक शक्ति बन गया हो।
यदि आप ऐसा कर देते हैं, तो मैं X/Twitter छोड़ दूँगा। यदि नहीं कर सकते, तो भारतीय नवाचार की हर कमी का दोष आरक्षण पर मढ़ना बंद कीजिए।
जिस दिन ब्राह्मण,ठाकुर और बनिया जाति के लोग सार्वजनिक सड़कों,गलियों में झाड़ू लगाते और सार्वजनिक शौचालय,गटर या सेफ्टी टैंक में घुसकर सफाई करते दिखेंगे,उस दिन मैं SC,ST और OBC आरक्षण का विरोध करूँगा।
आपका सरनेम कहाँ से आया...
बहुत सारे सरनेम हमारे गौत्र नहीं हैं, किसने शुरू किया? यह कोई ज़्यादा पुराना नहीं है।
शर्मा, वर्मा, चौधरी, पटेल.... ये सब सिर्फ़ 150 साल पुराने हैं, कोई पुश्तैनी परंपरा नहीं।
इसे शुरू किया था अंग्रेज़ों ने, आपकी नाक नापकर दिए, टैक्स वसूलने के लिए दिए गए यह उपनाम।
जिसे इन नामों पर नाज़ हो, हक़ीक़त जान लें; यह अंग्रेज़ों द्वारा एक तरह का अपमान था जिसे आज आप शान समझते हैं।
भारत में गौत्र चलते थे, सरनेम नहीं।
1871 में देश में पहली जनगणना हुई थी। सबके जाति-धर्म-पेशा लिखने की कवायद थी, जो कामयाब नहीं हुई।
1881 में दूसरी कोशिश हुई, हर्बर्ट रिज़ले इसके कमिश्नर बने।
नाक और खोपड़ी के साइज़ नापकर नई तरकीब लगाई गई।
नाक की चौड़ाई और सिर के साइज़ पर समाज को विभक्त कर दिया गया।
#IndianHistory
A disturbing incident has gone viral on social media. According to the video, a police vehicle was parked on the roadside when the officer suddenly opened the door without checking for oncoming traffic. A motorcyclist collided with the door, resulting in an accident.
What happened next is even more concerning. The officer is seen allegedly slapping and hitting the biker with a baton instead of helping him.
If the video accurately reflects the incident, responsibility does not appear to lie with just one person. Opening a vehicle door onto a busy road without first checking for approaching traffic can itself create a dangerous situation.
No matter who is at fault, violence is not an acceptable response. Law enforcement officers are expected to remain calm, act professionally, and handle such situations according to the law—not with physical force.
Incidents like these can damage public trust in the police. Accountability, fairness, and respectful conduct are essential to maintaining confidence in those entrusted with enforcing the law.