यह प्रार्थना उपालम्भपूर्ण रोमांस में बदल जाती है है :-
होयो रै पाळिड़ा तेरैड़ी रांड
खेत उजाड़ा रै मेरै बाप का।
मत दे हे सुंदर बरधा की गाळ
तेरै सरीकी म्हारै बी गौरड़ी।
आइए हे सुंदर म्हारैड़ै देस
लैहए¹ रंगा हे ऊपर चूंदड़ी।
@raag_sangam
1. लहँगा
हरियाणा का लोकसाहित्य पुस्तक से।
हरियाणवी कृषक-पत्नी जिसका पति आधी रात से ही कूआ चलाने उठ जाता है, बादळ से प्रार्थना करती हुई कहती है :-
☁️🌤️
ऊपरां बादळिड़ा ऊपरां क्यूं जा
बरसै तै क्यूं नां हे म्हारै देस।।
छिण मैं पाळिड़ा धूळमधूळ
छिण मैं तै भर दे झोड़-डाबड़ा।।
सूत्या रै पाळिड़ा रूखां छां
खेत उजड़ा मेरै बाप का।
@ChaiBiskit_@Ubermensch_male Haryana was never culturally or litterly part of pb it was merged with Pb post 1857 to keep the rebellion in haryana chz the Punjabi mullas and sikhs were in hand with the British
@PunchTantrum हरियाणा में इस पर कानून भी बनवा रहे हैं। कई लोग संघर्ष कर रहे हैं।
हरियाणे में गाँव, गोहांड (गाँव के पड़ोसी गाँव ��िनसे भाईचारा होता है। जैसे हमारे 5 गोहांड हैं), शासन आदि टाळकर ही विवाह होता है।
@tattvamasi01
@Awadhinfra Ahirwati is not transtional. If it is transtional then Bagri is also transtional. But as always, to please the Rajasthanis, wrong map of Haryana has been posted.
And mewati is not Rajasthani
read this and understand👇
@tattvamasi01@drsureshpant झकोळणा
बच्चोँ को पकड़ कर जल्दी जल्दी पानी में डुबकी मरवाना
न्हाण सँजोणा/सँजोवणा :- विशिष्ट एवं आदरपूर्ण प्रयोग।
आज म्हारा पित्तर कूवै ऊपर आया, कूवै पै न्हाण सँजोया कै पित्तर म्हारा आज घर आया।
@tattvamasi01@drsureshpant खखाळणा, खखाळा - शरीर पर जल्दी से पानी डालकर नहाना।
खळ-खळखोट्टा - बालकों को कराया जाने वाला स्नान।
खळ-खळ खोट्टा, तेरला माम्माँ म��ट्टा। (बालकों को नहलाते समय बोली जाने वाली जकड़ी।)
खळखोट्टा -जल्दी जल्दी में किये जाने वाला स्नान।
..
झकोळी/ळा - डुबकी लगात�� हुए स्नान करना
सिर पर बोझ ढोने को महिला-पुरुष देशभर में इस प्रकार का घेरा प्रयोग करते हैं। हरियाणा में इसके भाॅंति-2 के प्रयोग व नाम :
1) 'इण्ड्डी' (वैदिक इण्ड्र) (सुंदर, कसकर बुनी इण्ड्डियाॅं और घेरों से छोटी व हलकी, घर में प्रयुक्त। नवविवाहिताओं को भेंट में देते हैं) इसपे झालर भी लगी हो��ी है
“ईंढी/ईंढई” छोटी होती है जोकि बिना चूंडे सिर पर रखते हैं। “ईंढवा” बड़ा होता है जोकि चूंडे वाले सिर पर रखी जाती है। ईंढवी छोटी होती है।
ईंढियों के रंग-रूप, निर्माण सामग्री के लिहाज़ से कई प्रकार हैं।
कोडाळू - ���ौड़ी जड़ित ईंढी
जाळीदार, मिणियाँ, झालरी, रतणजड़ी etc.
फळवाँ ईंढी 👇
@Haryanvikisnigr@Apno_Aheerwal सम्पन्नता अनुसार चाँदी-सोने की ईंढियाँ भी गढवाई जाती हैं। विशेषतया विवाह, जळवा पूजन इत्यादि निमित्त। आज पणघट के साथ ही ईंढी भी लुप्त हो रही हैं। किन्तु शुभ-मांगलिक कार्यों में अब भी इनका प्रयोग अब भी हो रहा है।
ईंढी पर छिकमाँ गीत हैं जोकि फिर कभी।
कोडाळू ईंढवी 👇
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“ईंढी/ईंढई” छोटी होती है जोकि बिना चूंडे सिर पर रखते हैं। “ईंढवा” बड़ा होता है जोकि चूंडे वाले सिर पर रखी जाती है। ईंढवी छोटी होती है।
ईंढियों के रंग-रूप, निर्माण सामग्री के लिहाज़ से कई प्रकार हैं।
कोडाळू - कौड़ी जड़ित ईंढी
जाळीदार, मिणियाँ, झालरी, रतणजड़ी etc.
फळवाँ ईंढी 👇
सिर पर बोझ ढोने को महिला-पुरुष देशभर में इस प्रकार का घेरा प्रयोग करते हैं। हरियाणा में इसके भाॅंति-2 के प्रयोग व नाम :
1) 'इण्ड्डी' (वैदिक इण्ड्र) (सुंदर, कसकर बुनी इण्ड्डियाॅं और घेरों से छोटी व हलकी, घर में प्रयुक्त। नवविवाहिताओं को भेंट में देते हैं) इसपे झालर भी लगी होती है
@Haryanvikisnigr@Apno_Aheerwal 1. जाळीदार ईंढवी।
दाईं ओर रंग-बिरंगी पन्नी से बनाई हुई ईंढी जोकि Best out of waste का अप्रतिम उदाहरण है।
2. ईंढी का पिछला भाग कपड़े से बना है जिसपर गोटा-लटकण हैं। व “फूल” लगाए गए हैं। छफूल्ली।
पणिहारणों में ईंढियों को लेकर होड़-सी मच जाती थी कि सबसे सुन्दर ईंढी किसकी है।
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Iss handle ko rajasthani rajput chalata hai par isne Rajasthan ko sabki dharti bata diya sivaye brahmano ke
Jaha tak ki jin jato se inke handle ladate rehte unka bhi naam liya par brahmano ka nhi
Yeh dikhata hai ki asli nafrat aise handle ke andar brahmano ke khilaf hi hai
@tattvamasi01@nirvantkr कैम्माँ/कैम्मीं का हिंदी अर्थ "कितना-वाँ, कितनी-वीं" होगा।
हरियाणवी "कै"(countable) में माँ/मीं (Ordinal suffix) लगाकर बनाया है।
इसीलिए कै, कितणा, कोड आदि में अंतर हैं। यह हरियाणी कि विशेषता है।
कैमैं - कितने में
कैमाँह् तैं कै आये?
कैपै - कितने पर
कैपै आवैगी गाॅॅड्डी?
“किब/कद”, “कोढाणै” & “कूह्याँ/कूहीं” में क्या अंतर है?
What's the difference between Haryanvi words “kib/kad”, “kōḍhāṇae” & “kūhyām̐”?
In Hindi there is only "kab".
@tattvamasi01@nirvantkr कोत्था, कोत्थी भी इसी से संबंधित लगता है(?)
आँहे! रींगटी कोत्थी मैं पड्ढै?
छोह्रा नैं कोत्थी का परचा दिया सैं?
कोत्था लंबर सै?
इसके लिए "कैम्माँ/कैम्मों, कैम्मीं" भी प्रयुक्त है।
कैम्मीं मैं हो लिया?
कैम्माँ ए लंबर कोन्याँ पड़्या।