महाभारत में द्रोपदी को ब्रह्मवादिनी कहने से, शकुंतला के दुष्यंत की सभा में दिए गये भाषण से, राजा विराट की पुत्रियों को गायन व नृत्य की शिक्षा से प्रतीत होता है उन दिनों कुमारियाँ पूर्ण स्वतंत्र वातावरण में रहते सुशिक्षाता होती थी। उस समय की शिक्षा महिला व पुरुष दोनों के लिए थी।
@AMahasangh इतिहास के अध्ययन से पता चलता है की आर्य जाति के प्रत्येक स्त्री , पुरूष ,शिक्षित होते थे क्योंकि उन्नत शुद्ध पवित्र विचार जो सदाचार के विषय में वेदो से सीखकर, दोषरहित व पवित्र रहती थी, बिना विद्या सम्भव नहीं। तेजस्वी, प्रतापी, पुरुषार्थी जन भी विद्या ही से थे।
#जय_आर्य#
@AMahasangh संशय नहीं राजा धर्म रक्षक हैं, वेद रीति नीति उसके यश अलंकरण है। अगर वह किसान रुप प्रजा, पशुधन, वायु शोध रुप यज्ञ, को संरक्षण देता हुआ चले । फिर यह भी ध्यान में रखें कि"कर भार"सीमा अन्तर्गत हैं, चोरी ठगी तो नहीं। इस पितृबुद्धिका युधिष्ठिर राज सुखदायक था।#जय_आर्य#जय_आर्यवर्त
@AMahasangh क्षत्रिय के दूसरे विवाह विधि भी सिद्धांत युक्त व नियम से बंधा हुआ था। विवाह में युद्ध जीतने के बाद भी वधु की सहमति पर ही विवाह सम्पन्न होता था। वैदिक सिद्धांत सर्वोपरी थे । शिक्षण का अद्भुत प्रयोग ,धन्य आर्य महासंघ। । #जय_आर्य#जय_आर्यव्रत
कुटील स्वार्थी व उदरपूर्ति जनमानस ने उल्टे हाथ से लिखे इतिहास में अपने विद्वान शुरवीर पूर्वजों को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे अधिकारी थे।आओ आर्यो अपनी वैदिक विभूतियों को इतिहास व पाठ्यक्रमों में स्थापित कर, कर्तव्य पालन करे।
#जय आर्य #जय आर्यावर्त
शिशुपाल जरासंध का सेनापति था, रुक्मिणी का भाई रुक्मी वीर था उसने सेना सहित कृष्ण का पीछा किया पर योगीराज को देखते ही रुक्मिणी कृष्ण के लग्न की अनुमति दे दी। जिस कृष्ण ने माता रुक्मिणी से प्रेम के लिए के जरासंध से शत्रुता मोल की उस कृष्ण को हमने 16108 रानियों वाला बना डाला।
शिशुपाल जरासंध का सेनापति था, रुक्मिणी का भाई रुक्मी वीर था उसने सेना सहित कृष्ण का पीछा किया पर योगीराज को देखते ही रुक्मिणी कृष्ण के लग्न की अनुमति दे दी। जिस कृष्ण ने माता रुक्मिणी से प्रेम के लिए के जरासंध से शत्रुता मोल की उस कृष्ण को हमने 16108 रानियों वाला बना डाला।
@AMahasangh वेद रीति को जानने, मानने, धारण करने वाले श्रीकृष्ण जी जानते थे, कि जरासंध बलवान पापी
राजा है। योगीराज यहां युक्ति का प्रयोग कर, बलवान भीम, धनुर्धर अर्जून, को अपनी गुप्त योजना को बता कर, जरासंध वध व 86 राजाओं
को मुक्त कराया। आर्यो को अपने पूर्वजों से सीखना होगा।
जय आर्य
जब एक आर्य बनता है तो उससे कोई संप्रदाय नहीं बढ़ता किंतु संसार भर में प्राणी मात्र का सुख चाहने वाला एक वैश्विक मानव बढ जाता है जिससे संसार के सभी प्राणियों को उपकार पहुंचता है इसलिए आर्य निर्माण और संरक्षण अतीव उपकार के कार्य हैं आर्य महासंघ सभी को भला के करने का अवसर देता है
संसार के करोड़ों अरबों लोग ठीक-ठीक मार्गदर्शन की इच्छा करते हैं सांप्रदायिक धर्म गुरुओं से इसकी आशा प्रायः नहीं की जानी चाहिए। यह जिम्मेदारी आर्यों पर आती है आर्य महासंघ उन्हें इस जिम्मेदारी को उठाने के योग्य बनाने में अहर्निश कार्यरत हैऔर योग्य लोगों को साथ आने का आह्वान करता है
@mukeshgonder@mlkhattar@cmohry श्री मान मुख्यमंत्री साहब , आप के अधिकारियों से बार बार आग्रह इस बात को लेकर, किया गया कि
गांव कानौऺदा जिला झज्जर बहादुरगढ़। श्मशान जाने वाले रास्ते पर नाले से पानी की निकासी नहीं।लोग परेशान, कोई कार्रवाई नहीं। आप के सुशासन को सलाम। नफे सिंह पुत्र श्री बिरखु।९०५३२०७६३०
@AMahasangh "आर्य महासंघ" द्वारा दी गई आर्य की परिभाषा
सटीक, ऐतिहासिक, पारदर्शी, वेद सम्मत, श्रेष्ठ पूर्वजों, ऋषि मुनियों द्वारा निर्मित अवधारणा व सीमाओं के अन्तर्गत हैं। इसमें सन्देह नहीं।
"आर्य महासंघ"रूप कार्य शाला, प्रयोगशाला,
निर्माणशाला, राष्ट्र रक्षा शाला की ।जय ,जय।
#जय_आर्य
नियामक विद्वानों के अभाव में हम महापुरुषों और ईश्वर के बीच का अन्तर भूल गए और माननीय पूर्वजों को ही ईश्वर मान लिया। आर्य महासंघ इस अन्तर को स्पष्ट कर रहा है।
@AMahasangh "आर्य महासंघ"रूप विद्यालय से उपजे विद्या रूप
अंकुरित हूऐ, वैदिक सिद्धांत, वैज्ञानिक दृष्टिकोण,
उन्नतशील विचार विश्लेषण सही में अपने धर्म निष्ठ,
मान्य पूवर्जों के बारे में तो बताता ही हैं। सादर यह उपदेश भी करता हैं,कि वे सर्वाधार, सर्वेश्वर, ईश्वर की उपासना करते थे। नमन।
#जय_आर्य
@AMahasangh "आर्य महासंघ" द्वारा दी गई आर्य की परिभाषा
सटीक, ऐतिहासिक, पारदर्शी, वेद सम्मत, श्रेष्ठ पूर्वजों, ऋषि मुनियों द्वारा निर्मित अवधारणा व सीमाओं के अन्तर्गत हैं। इसमें सन्देह नहीं।
"आर्य महासंघ"रूप कार्य शाला, प्रयोगशाला,
निर्माणशाला, राष्ट्र रक्षा शाला की ।जय ,जय।
#जय_आर्य
द्वितीय आश्रम की मातृशक्ति को विद्या युक्त कर, वैज्ञानिक व वैदिक सिद्धांतों के दृष्टिकोण की पूंजी
के अलंकरण से सुशोभित कर , वेद शिक्षा व्यवहार को निडरतापूर्वक ,कुशलता से समाज को सिखाने
का कार्य,या तो "स्वामी दयानंद सरस्वती "ने किया या
फिर"आर्य महासंघ"कर रहा है।नमन।
#जय_आर्य
आर्य समाज के इतिहास में गृहस्थ महिलाओं को विद्यायुक्त कर विदुषी बनाकर प्रचार के लिए तैयार करने का कार्य आर्य महासंघ के नेतृत्व में हो रहा है। #जय_आर्यमहासंघ
@AMahasangh आर्य महासंघ "आर्य समाज" स्थापित कर ऋषि दयानंद के स्वप्न को मूर्त रूप दे रहा है । समाज में वेद सिद्धांतों को प्रचारित कर रहा हैं।
जिससे राष्ट्र सबल, उन्नतशील होगा । अपने लोग सुखी होंगे।
आओ हम भी कर्तव्य भावना से"संरक्षणी सभा"के इस श्रेष्ठ कार्य को गति दे, सहयोगी बने।
#जय_आर्य
@AMahasangh वेदों की रीति से दी गई सुशिक्षा से ही जन कल्याण, समाज व राष्ट उन्नतशील होता हैं।इस ऋषि मुनियों की सुशिक्षा व्यवस्था को आर्य महासंघ का गौरवशाली घटक "
अन्तर्राष्ट्रीय आर्य निर्मात्री सभा" सजग, उदारता से निःशुल्क दे रहा है। विनम्र नमन ।
#जय_आर्य#जय_आर्यवर्त
@AMahasangh चतुर्थ आश्रम का पतन एक बड़े संकट कि आहट।
यह राजनेताओं की घोर अवसरवादिता व उनके मननशील गुण के अभाव को दर्शाता है। जनमानस
आत्म उन्नति शील मार्ग से अवगत नहीं है, बतलाता हैं। यह शासकीय कर्तव्य पलायन व कर्तव्य अनभिज्ञता हैं।जो चिन्ता का विषय हैं।
#जय_आर्य#जय_आर्यवर्त
@AMahasangh चतुर्थ आश्रम का पतन एक बड़े संकट कि आहट।
यह राजनेताओं की घोर अवसरवादिता व उनके मननशील गुण के अभाव को दर्शाता है। जनमानस
आत्म उन्नति शील मार्ग से अवगत नहीं है, बतलाता हैं। यह शासकीय कर्तव्य पलायन व कर्तव्य अनभिज्ञता हैं।जो चिन्ता का विषय हैं।
#जय_आर्य#जय_आर्यवर्त
@AMahasangh इसमें सन्देह नहीं कि "धर्म "हमें ज्ञान व आन्नदादि से परिपूर्ण करता हैं। मज़हब अविद्या, क्लेश, मूढ़ता,
द्वेषआदि में फंसाता डुबोता हैं।
क्या कहने "आर्य महासंघ" के आचार्यों का जिन्होंने
विज्ञान सम्मत तर्को से इसे सिद्ध कर दिखाया हैं।
आइए धर्मादि शुभ गुणों को धारण करे।
#जय_आर्य