राजस्थान समेत बीजेपी शासित अन्य राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है :
चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। बीजेपी के राज्यों में जहां-जहां सरकारें इनकी है हाहाकार मचा हुआ है। ऐसी लूट कभी आज तक कभी सुनी नहीं, देखी नहीं और समझी नहीं है। हालात बड़े गंभीर हैं। एक के बाद एक घोटाले खुल रहे हैं जिसमें आपके मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भी आया है। जवाब इनके पास कुछ नहीं है, या तो चुप रहते हैं, प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। देते हैं तो खाली फॉर्मेलिटी करते हैं।
इसल��ए मैंने कहा राजस्थान में भी करप्शन की हदें ख��्म हो गई हैं। गाँव से लगा कर के जयपुर तक लोग दुखी हैं। मर्डर, रेप, डकैतियां अलग हो रही हैं, तो कहाँ जाए आदमी । मुख्यमंत्री खुद को समझ लेना चाहिए हालात क्या हैं और उसे ठीक करने का प्रयास करना चाहिए।
मॉरली हम उनको सपोर्ट करेंगे। हमारी कोई दुश्मनी नहीं है मुख्यमंत्री से। हम मॉरली सपोर्ट करेंगे, विपक्ष का सहयोग लें, पर स्थिति बहुत नाजुक है, उनके हाथ से निकलती जा रही है।
राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं
जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की:
अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो।
वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्य��ं के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है।
तो भाई ��सीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क��या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं।
आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।
पत्रकार का सवाल : बॉर्डर के इलाक़े में जो कार्रवाई हुई है उसको लेकर आपका क्या कहना है?
जवाब : बॉर्डर एरिया में एकतरफ़ा हो रहा है। अगर मान लो नेशनल हाईवेज़ बने थे, तो एक लाइन खींच गई थी कि भाई हमें तो फोर लेन बना���ी है, सिक्स लेन बनानी है, तो जो इस लाइन में आएँगे, वो सब एन्क्रोचमेंट, चाहे बंगला है, चाहे दुकान है, चाहे कुछ भी, टूटेंगे, तभी सड़कें चौड़ी होंगी। किसी को एतराज़ नहीं हुआ।
यहाँ पर चुन-चुन करके, चुन-चुन करके सिर्फ़ माइनॉरिटी, मुस्लिम माइनॉरिटी के जो दरगाह या मस्जिद हैं, बल्कि एक गाँव तो ऐसा है बड़ा, जहाँ हिंदू लोग, भील भी हैं, दूसरी जाति रायका भी है, उन लोगों ने उसको बनाया, उनकी वहाँ उस दरगाह पर आस्था है। उन्होंने कहा, "एक मुस्लिम का घर है हमारे गाँव के अंदर, बाक़ी सब हम हिंदू लोग रहते हैं।" उसको गिरा दिया। तो यह क्या कारण है कि आप चुन-चुन करके इस प्रकार की हरकतें कर रहे हो?
अमित शाह जी को जवाब देना चाहिए कि क्या आप क्या चाहते हो अल्टीमेटली? वो आके गए बीकानेर, उसक��� बाद में हरकतें हुई हैं। कल रात को आए थे डेलिगेशन उनके, बाड़मेर वालों के, मैंने उनको तसल्ली दी कि आप शांति बनाए रखें। हमने गृह मंत्री जी को टैग किया है मेरे ट्वीट में, तो मैं उम्मीद करता हूँ जनता को कोई-न-कोई जवाब देंगे।
भाजपा द्वारा लगातार सांसदों की खरीद-फरोख्त करना सीधे तौर पर जनमत को एक खुली चुनौती है। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जनता से '400 पार' सीटें जिताने का आह्वान किया था, लेकिन देश की सजग जनता ने उन्हें बहुमत से दूर केवल 240 सीटों पर ही समेट दिया।
आज केंद्र में एनडीए (NDA) गठबंधन की सरकार चल रही है, जिसमें फिलहाल कोई खींचतान भी नज़र नहीं आती। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना और बीजेडी (BJD) जैसे दलों के सांसदों को तोड़कर भाजपा और एनडीए में शामिल करना ��ह साफ़ दिखाता है कि भाजपा धनबल और बाहुबल के आगे जनता के जनादेश को कुछ नहीं समझती।
पहले तोड़-फोड़ का यह खेल केवल गुजरात तक सीमित था, जहाँ पूर्ण बहुमत की स्थिर सरकार होने के बावजूद भाजपा पाँच साल तक लगातार विपक्षी विधायकों को तोड़ती रहती थी। अब यही तथाकथित 'गुजरात मॉडल' पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
देश की जनता को सत्ता के इस खतरनाक खेल को गहराई से समझना होगा। मतदाताओं को न सिर्फ भाजपा से, ब���्कि अब पाला बदलकर एनडीए में जा रहे उन सांसदों से भी कड़े सवाल पूछने चाहिए कि जब जनता ने उन्हें पाँच साल के लिए एनडीए की नीतियों के खिलाफ वोट देकर जिताया था, तो वे अब किस मुंह से एनडीए की गोद में जाकर बैठ गए?
विशेषकर देश की युवा पीढ़ी को सोचना होगा कि आखिर इस देश में हो क्या रहा है? आज महँगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे आमजन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार ��ा कोई ध्यान नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे सांसदों की अनैतिक खरीद-फरोख्त लगातार जारी है। क्या यह सरकार विपक्ष और विरोध की हर लोकतांत्रिक आवाज़ को पूरी तरह कुचल देना चाहती है? क्या भारत का महान लोकतंत्र अब दम तोड़ने की कगार पर है?
श्री @RahulGandhi लगातार संसद के अंदर और बाहर संविधान की बात उठा रहे हैं। बार-बार राहुल जी देशवासियों से आह्वान कर रहे हैं कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आगे आएं। युवाओं को इस प�� गंभीरता से विचार करना चाहिए और हर दल की विचारधारा व उसकी नीतियों को समझकर देश की राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
मुज़फ्फरनगर में मजदूरों की बंधुआ मजदूरी का मामला बेहद चौंकाने वाला है।
बिना मज़दूरी दिए काम करवाने के अलावा, मजदूरों को कुत्तों से कटवाया गया, भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए, और उन्हें मवेशियों का चारा खिलाया गया। यह इंसानी गरिमा पर हमला है - पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
साथ ही हमें यह भी पूछना ज़रूरी ह��� कि मज़दूर ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में किन मजबूरियों में फंस जाते हैं।
जब रोज़गार ख़त्म हो जाते हैं, आमदनी ठहर जाती है, और सबसे कमज़ोर वर्गों के लिए बने मनरेगा और श्रम कानूनों जैसी सुरक्षाएं कमज़ोर कर दी जाती हैं, तो हताशा बढ़ती जाती है। जिन लोगों के पास कोई और विकल्प या सुरक्षा नहीं होती, वो ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
यह कोई आम आपराधिक घटना नहीं है - यह एक धराशाई हुई अर्थव्यवस्था क�� मलबा है।
देश के विकास और युवा शक्त��� को नई ऊर्जा प्रदान करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद स्व. श्री संजय गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
राष्ट्रहित एवं जनसेवा के लिए आपके द्वारा किए गए कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे और आने वाल�� पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।
आज जोधपुर सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता में मीडियाकर्मियों के सवालों के जवाब दिए : (23 जून 2026)
राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के विषय में :
मैं कोटा जाकर आया था, प्रसूताओं से मिलकर आया, वहां पांच प्रसूताओं की डे�� हो गई थी। हज़ारों प्रसूताएँ डिलीवरी के लिए अस्पताल जाती हैं वहाँ पर अगर मौतें हो जाएँ या इन्फेक्शन हो जाए और उसके कारण से अगर मान लीजिए, उनकी किडनी फेल हो गई है तो इसे मैं बहुत गंभीर घटना मानता हूँ। भगवान करे वहाँ पर रिवाइव हो जाए वरना ज़िंदगी भर के लिए तो डायलिसिस और या किडनी ट्रांसप्लांट। यह स्थिति बनी हुई है हक़ीक़त में यह है। बीकानेर में भी यह ख़बर आने लग गई। जोधपुर से आठ प्रसूताओं की जो क�� ख़बर आई है, तो आज मैं एम्स और उम्मेद अस्पताल भी जा रहा हूँ। सवाल यह नहीं है कि आज मैंने पढ़ा स्टेटमेंट कि यह जो है कोटा की तरह की स्थिति नहीं है।
कोटा की स्थिति हमें तो मालूम नहीं। सरकार बताए कि कोटा में कोई इन्फेक्शन हुआ या ओटी में कुछ गड़बड़ हुई, दवाइयों में कुछ गड़बड़ हुई तो हमें क्या पता? तो पहले ही आप कैसे कह सकते हो कि यह कोटा की तरह की घटनाएँ नहीं हैं? या तो वो स्पष्ट करें कोटा की घटना क्या थ���। तो मालूम पड़े पब्लिक को भाई कि कोटा की घटना अलग थी, यहाँ की घटना अलग है, यहाँ के कारण अलग हैं। तो यह इस प्रकार के स्टेटमेंट देना मैं समझता हूँ उचित नहीं है।
यह इतना बड़ा मामला है जहाँ हज़ारों प्रसूताएँ जाती हैं डिलीवरी के लिए, उन सब में अगर भय बैठ जाए कि मेरा क्या होगा? मेरे इन्फेक्शन नहीं हो जाए, मेरी मौत नहीं हो जाए, मेरी किडनी ख़राब नहीं हो जाए, तो क्या होगा बताओ? इतना बड़ा इशू है।
मैं वेलकम करता हूँ, उन्होंने एम्स की टीम को बुलाया है। मैंने क���टा में भी यह बात कही थी। एम्स की टीम आ गई, स्टेट गवर्नमेंट की टीम आ गई, कल प्रिंसिपल सेक्रेटरी गायत्री राठौड़ जी आकर गईं, अच्छी बात है। कम से कम ध्यान सरकार का गया है। पर मैं यह कहना चाहता हूँ आज, 4 मई को भर्ती हुई थी कोटा के अंदर, 9 मई को भर्ती हुई थी। आज कितना टाइम हो गया? डेढ़ महीने से ज़्यादा हो गया लगभग। उसके अंदर आप बताने की स्थिति में नहीं हो, तो लोगों में चिंता व्याप्त है। सरकार को टॉप प्रायोरिटी देनी चाहिए इनको। क्योंकि हज़ारों-लाखों प्रसूताएँ पर डे अस्पतालों के अंदर जा रही हैं। क्या बीत रही होगी उनके ऊपर? यह बहुत गंभीर मामला है, सरकार की लापरवाही को न तो पब्लिक बर्दाश्त करेगी, न हम बर्दाश्त करेंगे। हमें और ज़्यादा क़दम उठाने पड़ेंगे, संघर्ष करना पड़ेगा।
पत्रकार का सवाल : स्वास्थ्य मंत्री बयान भी ऐसे ही दे रहे हैं सर?
जवाब : अब स्वास्थ्य मंत्री जी के बयान तो जब से बने हैं, तब से उनके बयान लीक से हटके आ रहे हैं और वो बहुत अच्छे मंत्री के रूप में उनकी पहचान थी। पिछली गवर्नमेंट में जब वसुंधरा जी ���ीं, तो उनकी अच्छी पहचान थी मंत्री के रूप में। इस बार पता नहीं कौन सा ग्रह लग गया उनको, पता नहीं वो जो बयान देते हैं, वो उल्टे ही पड़ रहे हैं। वो चिरंजीवी योजना के बारे में बयान जो दिया, तो मैंने भी उनको कहा जब वो मुझसे मिलने आए थे अस्पताल के अंदर, तो मैंने कहा, "आपने यह बयान दिया है, यह ग़लत है। यह ग़रीब-अमीर सबके लिए स्कीम है, चिरंजीवी योजना। हिंदुस्तान में एकमात्र राजस्थान राज्य है जहाँ 90% जनता जुड़ चुकी है। क्योंकि यह सबके लिए योजना है।" बाक़ी जो प्रधानमंत्री जी क�� जो योजना है, क्या नाम उसका?
आयुष्मान भारत, यह लोगों को गुमराह करने वाली योजना है। 5 लाख की बात है, वो अलग बात है। उसके अलावा भी, यह लोग जो है एसईसीसी (SECC) एक सर्वे हुआ था मनमोहन सिंह जी के वक़्त में, ख़ाली उनके लिए वो योजना है। पूरी पब्लिक के लिए नहीं है। पब्लिक इतनी शरीफ़ है, गहरायी में जाती नहीं है। उन्हें पता ही नहीं है कि सबके लिए योजना नहीं है वो। तो आप कल्पना कीजिए, क्या बीत रही होगी? हमने सबके लि��� यह योजना की है। हमारी योजना जैसी योजना हिंदुस्तान में कहीं नहीं है और शायद दुनिया में भी कहीं नहीं है।
मैं कल आया हूँ, उदयपुर से गया जालौर, जालौर से आया हूँ जोधपुर। रास्ते भर लोगों की आँखों में आँसू देखे मैंने। एक-एक किस्सा बता रहे थे, उनके परिवार में क्या हुआ, किस प्रकार से फ्री इलाज हो गया। 25 लाख का बीमा, क्या लोग उसके बारे में बोलते हैं। पेंशन बुज़ुर्गों को तीन-तीन, चार-चार महीने मिल नहीं रही है। थैला जो था, अरे, मैंने कहा मुख्यमंत्री जी, मेरी फोटो हटा के आप अपन�� फोटो लगा देते, स्कीम बंद क्यों की? ऐसे पचासों पॉइंट हैं, सरकार को समझ में आ नहीं रही है बात। नंबर एक बात। दूसरा क्या पूछा आपने?
क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी अग्निकांड की तरह घटना यहाँ पर हो? कोचिंग हब क्यों नहीं कर रहे शुरू?
अशोक गहलोत का बयान: जो घटना हुई है कल लखनऊ में, 15 बच्चे मर गए। यह घटना भी कोई मामूली नहीं है। क्या हमारी सरकार इंतज़ार कर रही है क्या ऐसी घटना का? मैं सरकार को कहना चाहूँगा, हमने क़रीब ₹400-500 करोड़ खर्च करके जयपुर में कोचिंग हब बना दिया है 240 इंस्टिट्यूशंस के लिए। 140 लोगों ने जमा करा दिए पैसे। इस सरकार की बेवकूफ़ी से 100 लोगों ने पैसे वापस ले लिए। हम तो आईआईटी का वहाँ ब्रांच खोलेंगे वहाँ पर, मज़ाक बना रखी है इन्होंने। आईआईटी की अगर आपको एक यूनिट खोलनी है वहाँ पर, नया भवन बना दीजिए उनके लिए।
पर जो हमने काम किया कि जो क़रीब 1 लाख बच्चे तो गोपालपुरा बायपास पर पढ़ रहे होंगे। घटना हो चुकी है दिल्ली में, बच्चे मर चुके हैं पानी के अंदर डूब करके अंडरग्राउंड में। गोपालपुरा में गैस से 25-30 बच्चे घायल हो गए। तो क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी की तरह घटना यहाँ पर हो? क्या चाहती है सरकार? क्यों उसको बंद कर रखा है? पड़ी-पड़ी बिल्डिंग टूट जाएगी, उसमें लाइब्रेरी भी है उसके अंदर, सारी सुविधाएँ हैं, फ़ूड कोर्ट भी है बच्चों के लिए, अच्छे माहौल में बच्चे पढ़ सकत�� हैं, अच्छा माहौल उनको मिलेगा ��ब तरह से। समझ के परे है कि क्यों इस प्रकार की हरकतें कर रही है?
हरकतें वहाँ ही नहीं कर रही है, जोधपुर में चार अस्पताल बिल्डिंग खड़ी पड़ी है। सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी की बिल्डिंग बन चुकी है, वहाँ पड़ी है। स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट पड़ा हुआ है। मैंने मुख्यमंत्री खुद को रिक्वेस्ट करी, टेलीफ़ोन पर बात करके, जब मेरे बर्थडे पर बात हो रही थी। मैंने कहा, "श्रीमान जी, आप आइए, हम स्वागत करेंगे आपका वहाँ। आप इनका क्यों नहीं फीता काट देते हो?" कि "नहीं, मैं जल्दी करूँगा।" वो जल्दी आज तक नहीं आई है।
कल मुझे किसान मिले, 2025 का मुआवज़ा अभी तक नहीं मिला उन किसानों को। पहले 23-24 का रुका हुआ था। यह आपके लूणी के जो हमारे मंत्री महोदय हैं, इनके क्षेत्र का ही था वो। और भी कई जगह से शिकायत आ रही थी। पर सरकार मुआवज़ा टाइम पर दे नहीं पा रही है और तमाम डिपार्टमेंट के पेमेंट रुके पड़े हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि हमारी फाइनेंशियल स्थिति बहुत ही नाज़ुक है, हम प���मेंट नहीं कर पाएँगे 6 महीना, साल भर, कुछ तो कहे। सारे डिपार्टमेंट में पेमेंट रुक गए, ₹2 करोड़ के चेक नहीं कट रहे हैं। डबल इंजन सरकार है, दिल्ली में इनकी खुद की सरकार है, इनको एक्स्ट्रा इमदाद मिल सकती है, मिल भी रही होगी। पर मैनेजमेंट ऐसा बकवास कर दिया है, कोई डिपार्टमेंट का पेमेंट नहीं है। बर्बाद हो गए लोग-बाग, दुखी हो गए हैं। समझ नहीं पड़ रही है पेंशन टाइम पर नहीं मिलती, कुछ नहीं हो रहा है। मतलब यह स��थिति बनी है।
ख़बर है गंगानगर, हनुमानगढ़ के अंदर और भी कई जगह कि गेहूँ की ख़रीद नहीं हो रही है। वहाँ हड़तालें चल रही हैं, लोग दुखी हैं, बारदाना नहीं आ रहा है। जो टारगेट फिक्स करते हैं, वो पूरा ख़रीद भी नहीं पा रही सरकार उनको और टाइम जो है पहले 30 जून तक का होता था ख़रीदारी का, इस बार 31 मई कर दिया, उसके कारण से अब बार-बार आगे बढ़ा रहे हैं और 30 जून भी आ जाएगा। तो किसान बर्बाद हो रहा है राजस्थान का, यह मैं कह��ा चाहूँगा।
पत्रकार का सवाल: अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर आपका क्या कहना है?
जवाब: जैसा कि अभी आप सबके सामने आया है, न तो दवाइयाँ आ रही हैं और न ही कोई सप्लाई हो रही है। आज जनता बेहद दुखी और परेशान है, और योजनाएँ सिर्फ कागज़ों तक सिमट कर रह गई हैं। यह बहुत गंभीर और चिंताजनक मामला है। हमारी सरकार की यह इतनी शानदार स्वास्थ्य योजना थी जिसकी तारीफ़ आज भी पूरे हिंदुस्तान और हर राज्य में हो रही है। शायद दुनिया के किसी भी कोने में ₹25 लाख तक का मुफ़्त इलाज नहीं मिलता, जहाँ एमआरआई, सीटी स्क��न, दवाइयाँ और डायलिसिस सब कुछ मुफ़्त था।
अब आप बताइए कि उसके बाद आज ऐसी बदतर स्थिति क्यों बन रही है? हम जहाँ भी जाते हैं, लोग हमसे शिकायत करते हैं कि अस्पताल वाले इलाज के बदले पैसे माँग रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वर्तमान सरकार से निजी और सरकारी अस्पतालों को समय पर भुगतान (Payment) नहीं मिल रहा है, और इस लापरवाही का हर्जाना वे आम जनता से वसूल रहे हैं। यह भला कौन सा तरीका हुआ? योजना अभी भी लागू ���ै, इसे बंद नहीं किया गया है, लेकिन सरकार से बजट न मिलने के कारण दवाइयाँ मिल नहीं रही हैं और ऑपरेशन ठप पड़े हैं। जब अस्पतालों को सरकार से पैसा नहीं मिल रहा है, तो वे जनता से पैसे माँग रहे हैं। इसमें भला उस गरीब और बेकसूर जनता का क्या दोष है? यह आज का सबसे महत्वपूर्ण और विचारणीय बिंदु है।
पत्रकार का सवाल: कल यमुना जल समझौते को लेकर मुख्यमंत्री जी एक बार फिर दिल्ली गए थे और वहाँ कोई मीटिंग हुई है, इस ��र आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब: यह अच्छी बात है, मैं तो इसका स्वागत करता हूँ। मैंने पहले भी कहा था और आज फिर दोह��ाता हूँ कि जिस दिन आप राजस्थान में यमुना का पानी ले आएँगे, मैं खुद मुख्यमंत्री निवास पर आकर आपको माला पहनाऊँगा। मैंने नीमकाथाना में भी यही घोषणा की थी कि 'मुख्यमंत्री जी, अगर आप जनता का यह सपना पूरा कर दें, तो मैं खुद आपके घर आकर आपका अभिनंदन करूँगा।' मैं अपने इस वादे पर आज भी पूरी तरह कायम हूँ। लेकिन बात सिर्फ दिल्ली या चंडीगढ़ जाकर बार-बार बैठकें करने से नहीं बनेगी, हमारा सीधा सरोकार ज़मीन पर पानी आने से है, मीटिंगों से नहीं।
पत्रकार का सवाल: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि गहलोत साहब बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, जबकि उनके खुद के राज में ज़बरदस्त भ्रष्टाचार हुआ था?
जवाब: नहीं, मैंने आज सुबह अखबारों में उनका बयान पढ़ा, जो कि बेहद अजीब और समझ से परे था। उन्होंने आपत्ति जताई कि मैंने चुने हुए जनप्रतिनिधियों को 'घोड़े और गधे' क्यों कहा। मैं स्पष्ट कर दूँ कि मैंने आम जनप्र��िनिधियों को ऐसा नहीं कहा; मैंने यह शब्द उन लोगों क�� लिए इस्तेमाल किए हैं जो बिक चुके हैं या बिक रहे हैं। जो विधायक (MLA) और सांसद (MP) जनता का भरोसा तोड़कर 10 करोड़, 25 करोड़ या 50 करोड़ रुपये में अपनी निष्ठा बेच रहे हैं, उनके लिए मैंने 'बिकने वाले घोड़े, गधे, भैंस और बकरी' जैसे चार शब्दों का प्रयोग किया था।
इसमें भला गलत क्या है? जनता जिन पर भरोसा करके, अपना कीमती वोट देकर उन्हें सदन में भेजती है, वे पैसों के लालच में आकर बिक जाते हैं। आज बंगाल और महाराष्ट्र में जो कुछ हो रहा है, वह सबके सामने है। महाराष्ट्र में शिवसेना के 28 में से 20 सांसद चले गए, 80 में से 60 विधायक पाला बदल गए और अभी कल ही 8 में से 6 सांसद और चले गए। ऐसे बिकने वाले लोगों की पूजा तो की नहीं जा सकती! मदन राठौड़ जी दरअसल सिर्फ अपने दिल्ली बैठे वरिष्ठ नेताओं (Seniors) को खुश करने और अपनी नंबरिंग बढ़ाने के लिए इस तरह की बयानबाज़ी का प्रयास कर रहे हैं।
पत्रकार का सवाल: सर, चर्चा है कि केंद्र की तर्ज पर ��ाज्य में भी मंत्रिम��डल का विस्तार या बदलाव होने वाला है?
मेरा जवाब: देखिए, यह हमारा काम नहीं है, यह पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। लेकिन मैं व्यक्तिगत तौर पर यही चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी ही अपने पद पर बने रहें। आजकल मीडिया में लगातार यह चलने लगा है कि 'ये हट रहे हैं, वो हट रहे हैं।' मैं चाहता हूँ कि वे बने रहें; वे एक भले आदमी हैं, व्यवहार कुशल हैं और सभी से बेहद सम्मान के साथ बात करते हैं। ��से शालीन व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री का पद शोभा देता है और वे विपक्ष के नाते हमें भी सूट करते हैं। 1/2
आज जोधपुर में जोधपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नए भवन निर्माण का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया।
सभी पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे जनहित के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाकर आम जनता की आवाज बनें और संगठन को धरातल पर और अधिक सशक्त बनाएं। इस दौरान आगामी दिनों में प्रशिक्षण व सोशल मीडिया शिविरों के आयोजन को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए।
पत्रकार का सवाल : गजेंद्र सिंह शेखावत ने यहाँ पर बयान दिया है उस पर आपकी प्रतिक्रिया?
जवाब : पा��ी का संकट जो जोधपुर के अंदर, उसकी मज़ाक मंत्री जी ने खुद ने ही उड़ा दी। राजीव गांधी आए थे जोधपुर में, आपकी नई पीढ़ी को नहीं मालूम होगा, पुरानी पीढ़ी को मालूम है। किस प्रकार से स्टेडियम ग्राउंड में मीटिंग में मैंने अनाउंस करवाया था। पीछे पड़ के मैंने वो काम पूरा करवाया, कोई 100 बार मैं गया था बॉर्डर पर, वहाँ से 200 किलोमीटर लाइन अब आ रही है। नहर बन करके छह जगह पंपिंग स्टेशन थे और तीसरा फेज़ भी मैंने अभी ₹1400 करोड़ मंजूर किए हैं, कोई फॉरेन फंडिंग होने वाली थी, देरी हो रही थी तो मैंने स्टेट गवर्नमेंट फंडिंग से सेंक्शन कर दिया। वो काम सरकार बदल गई, पूरा नहीं करवा पा रहे हैं। घर-घर में तकलीफ़ हो रही है पानी की और यह मज़ाक उड��ा रहे हैं पानी का भी। सप्लाई ढंग से हो नहीं पा रही इनसे।
अरे, हमने तो ट्रेन से पानी मंगाया जोधपुर के अंदर, इनको पता नहीं, मंत्री को खुद को नहीं मालूम है। मणाई से, मथानिया से ट्रेन से पानी की इमरजेंसी स्कीम बनी थी पाइपलाइन की। रणसी गाँव से पाइप बिछवाए, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया से बड़े-बड़े पाइप आए थे, तब जाके यहाँ पानी पहुँचा जोधपुर में और पानी पिलाया जोधपुर को। ट्रेनों से पानी आ��ा है। आज यह मज़ाक उड़ा रहे हैं, अच्छी बात नहीं है।
पत्रकार का सवाल : सर, शेखावत जी ने यहाँ पे बयान दिया है कि जोधपुर को पिछड़ा रखने का पाप आपने किया और साथ ही उन्होंने कहा कि एलिवेटेड रोड बनाने को लेकर आपने बाधाएँ उत्पन्न की थीं।
अशोक गहलोत का जवाब : देखिए, बाधा नहीं, यह जो एलिवेटेड रोड बन रही है वो मेरी रिक्वेस्ट पर बन रही है। गडकरी जी की देश में पहचान बड़े लिबरल मंत्री के रूप में है। हमारे समय में स्टेट गवर्नमेंट बना रही थी इसको और हम पावटा से शुरू कर रहे थे इसको। पर हमने देखा हैदर बिल्डिंग और सोजती गेट केिया में हम बना नहीं पाएँगे क्योंकि हो सकता है कहीं अंडरग्राउंड जाना पड़े, तो नेशनल हाईवे एक्सपर्टाइज़ रखती है। मैंने उनसे रिक्वेस्ट करी और उन्होंने रिक्वेस्ट इमीडिएटली मान ली।
मंत्री जी, केंद्रीय मंत्री हैं, मुझे एतराज़ नहीं है कि श्रेय लेवें तो, क्योंकि केंद्रीय मंत्री हैं तो यह इनका अधिकार बनता है कहने का भाई, "हमने काम को आगे बढ़ाया" या कुछ भी किया। निर्णय मैंने करवाया था उनसे। आप उनको खुद को पूछ सकते हो कि मैंने रिक्वेस्ट की कि नहीं की उनसे? मालूम पड़ जाएगा। इतना बड़ा काम हो रहा है, वो जल्दी पूरा होना चाहिए। स्टेट गवर्नमेंट तो खुद बना रही थी। इस बार जो मंत्री जी ने लीक से हटके जो आरोप लगाए हैं बड़े हल्के स्तर के, लगता है कि वो खुद घबरा गए दिखते हैं। अपनी खुद की जो स्थिति बनी जोधपुर जिले के अंदर उनकी, अब उनकी पोल खुल चुकी है देखो।
पत्रकार का सवाल : बीजेपी के विधायक वो भी साथ नहीं आ रहे कार्यक्रमों में।
अशोक गहलोत का जवाब : अब बता दीजिए क्या स्थिति बन रही है? अगर उनके विधायक खुद एब्सेंट रहते हैं, दो-दो विधायक। बहाना करते हैं कि कोई पाठ चल रहा था, भगवद गीता का पाठ चल रहा था इसलिए नहीं आए हैं। और एक, एक विधायक जी ने क्या कहा? "हाँ, मैं उद्घाटन कर चुका हूँ।" ऐसी मज़ाक आज तक इतिहास में किसी भी सरकार के अंदर, किसी विधायक ने नहीं करी होगी, जो इनके विधायक इनकी खुद की मज़ाक उड़ा रहे हैं। जिनकी स्थिति यह है, उनमें मैं क्या उनके लिए कमेंट करूँ, क्या मैं उ��को जवाब दूँ?
जोधपुर के पावटा अस्पताल और एम्स (AIIMS) पहुंचकर हाल ही में गंभीर संक्रमण का शिकार हुईं प्रसूताओं से मुलाकात की। उनके परिजनों ढांढस बंधाया और डॉक्टरों से बात कर प्रसूताओं के स्वास्थ्य की स्थिति तथा चल रहे इलाज की विस्तृत जानकारी ली।
प्रसूताओं की बिगड़ती तबियत और किडनी फेलियर जैसी स्थितियां बेहद चिंताजनक हैं। स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा यह मामला अत्यंत संवेदनशील है, जिसमें सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर टॉप प्रायोरिटी पर पूरी गंभीरता के साथ कड़े कदम उठाने चाहिए।
हमारी बेटियों-बहनों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो माताओं की हालत गंभीर होने का स��ाचार बेहद चिंताजनक है।
प्रसूताओं को सेप्टीसीमिया होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा होना चिकित्सा व्यवस्था में आई भारी गिरावट और गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। हैरान करने वाली बात है कि एक तरफ शहर में सरकारी आयोजन और वीआईपी दौरों की चमक बिखेरी जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ हमारी माताओं-बहनों की जिंदगी खतरे में थी और प्रशासन सच्चाई छुपाने में जुटा रहा।
आज जोधपुर पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात करूंगा।
Re-NEET देने वाले सभी छात्रों को मेरी अनेक शुभकामनाएँ।
पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दीजिए। कुछ भी हो, मैं हमेशा आपके साथ ��ूं और आपकी रक्षा करता रहूंगा।
सरकार से अपेक्षा है कि इस बार NEET बिना किसी गड़बड़ी के होगी। छात्र पहले ही बहुत तनाव झेल चुके हैं - अब किसी बच्चे की उम्मीद न टूटने पाए।
प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है जब गृह विभाग पूरी तरह विफल हो गया है।
जोधपुर में आपसी रंजिश के चलते एक व्यक्ति को सरेआम दौड़ा-दौड़ाकर बेरहमी से पीटना और फिर गोली मारकर हत्या कर देना, इस बात का जीता-जागता सबूत है कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
ये खौफनाक घटनाएं साफ संकेत हैं कि अपराधियों के दिलों से कानून और पुलिस का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। सरकार की नाकामी के कारण आज स्थिति बिल्कुल उलट गई है- "आमजन में डर बढ़ रहा है और अपराधियों में विश्वास!" एक सभ्य समाज के लिए यह बेहद खतरनाक और चिंताजनक स्थिति है।
सरकार तुरंत अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे।
योग केवल एक व्यायाम ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है । योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अहम है, बल्कि आत्मानुभूति का एक माध्यम है तथा मानसिक शक्ति और एकाग्रता को विकसित करने में सहायक है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आइए हम सभी योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संकल्प लें और स्वस्थ, संतुलित तथा सकारात्मक जीवन की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाएं।
राजस्थान के साथ लगी पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के जिलों में आजादी के बाद से ही माहौल हमेशा सौहार्दपूर्ण रहा है। देशभर में चाहे कैसा भी सांप्रदायिक माहौल रहा हो पर संभवतः यहां कभी आपसी तनाव भी पैदा नहीं हुआ।
यहां हिन्दू और मुस्लिम धर्मस्थल एक ही श्रेणी में हैं और दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों का पूरा सम्मान करते हैं। चाहे 1965 हो या 1971 का युद्ध हो, यहां के सभी धर्मों के लोगों ने पाकिस्तान को धूल चटाने में सेना और सरकार का पूरा सहयोग दिया।
ऐसी जगह पर केन्द्र सरकार के इशारे पर केवल तनाव पैदा करने व ध्रुवीकरण करने के लिए मस्जिदों, मदरसों पर चुन-चुनकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। इनमें से कई धार्मिक स्थल आजादी से भी पहले के बने हुए हैं। स्थानीय हिन्दू समुदाय भी इस कार्रवाई के खिलाफ है और कई जगहों पर इस कार्रवाई का विरोध ��ी किया है। एक धर्म को लक्षित कर की जा रहीं ऐसी कार्रवाई निंदनीय है। केन्द्र व राज्य सरकार को अनावश्यक तौर पर विवाद नहीं पैदा करना चाहिए।
राजस्थान की भाजपा सरकार के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा आज ACB मुख्यालय में की गई प्रेस वार्ता ने भाजपा सरकार की आपसी कलह को उजागर कर दिया है। कृषि मंत्री ने ACB पर सीधे उन्हें किसी दबाव में आकर फँसाने के आरोप लगाए हैं। कृषि मंत्री ने ACB को "पॉलिटिकल वैपन" यानी राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
ACB सीधे मुख्यमंत्री के अधीन है। क्या कृषि मंत्री सीधे मुख्यमंत्री पर उन्हें फँसाने का आरोप लगा रहे हैं? अब ज़िम्मेदारी मुख्यमंत्री की है कि वह सच्चाई बताएँ कि कृषि मंत्री इस रिश्वत प्रकरण में लिप्त हैं या मुख्यमंत्री के अधीन ACB उन्हें फँसा रही है?
मेरे युवा और Gen Z साथियों,
एक बात मेरे मन में साफ़ है और आप भी इसे दिल में बैठा लीजिए: भारत के हर युवा का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
��र ज़िम्मेदारी और ईमानदारी - दोनों ��ोदी सरकार की सोच से परे हैं।
पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, रद्द होती भर्तियाँ, आसमान छूती फीस, निजीकरण, घोटाले - इन्हीं औज़ारों से वो हर दिन करोड़ों सपने तोड़ रही है।
याद रखिए, युवा का भविष्य ही देश का भविष्य तय करेगा। यही सब आपसे विस्तार से कहना है। इसलिए मैं आपको बुला रहा हूँ - देश की हर गली, हर कस्बे, हर शहर से उठती ‘छात्रों की गूंज’ को, आइए कोटा में हुंकार बनाएँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj