मणिपुर सालों से जल रहा है, और आज फिर नफ़रत और हिंसा की आग में 20 घर राख हो गए।
दो सरकारों और राष्ट्रपति शासन के बावजूद संघर्ष गहराता ही जा रहा है। हज़ारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, अनगिनत परिवार उजड़ गए हैं - मणिपुर जिस असहनीय पीड़ा से गुज़र रहा है, उसकी कल्पना भी मुश्किल है।
यह मोदी सरकार की उस विभाजनकारी विचारधारा का नतीजा है, जो लोगों को धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और पहचान के नाम पर बाँटती है।
आज मणिपुर ही नहीं, पूरा देश प्रधानमंत्री से संवेदना के दो शब्द की भी उम्मीद छोड़ चुका है, कार्रवाई की बात तो दूर गई।
मणिपुर बेहतर का हक़दार है - और इसके लिए भारत जोड़ना ही एकमात्र रास्ता है।
किशनगढ़ विधायक एवं अजमेर ग्रामीण के जिलाध्यक्ष डॉ. विकास चौधरी जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
परमात्मा से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख, समृद्धि और निरंतर यश की प्राप्ति हो। आप सदैव जनसेवा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करते रहें। @DrVikasAjmer
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय श्री रामेश्वर डूडी जी की जयंती पर शत-शत नमन।
उनका समर्पित जनजीवन, संघर्षशील व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता सदैव स्मरणीय रहेगी।
डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि के अवसर पर राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन सभी डॉक्टरों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर है, जो दिन-रात अथक परिश्रम कर लोगों का जीवन बचाने में जुटे रहते हैं।
इस वर्ष की थीम "Behind the Mask: Who Heals the Healers?" एक महत्वपूर्ण प्रश्न हमारे सामने रखती है। जो डॉक्टर दूसरों का उपचार करते हैं, उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत की जिम्मेदारी कौन लेता है?
आज केवल तालियां बजाना या डॉक्टरों को "भगवान का रूप" कहना पर्याप्त नहीं है। उनके कार्य-परिस्थितियों और चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करना भी उतना ही आवश्यक है।
मार्च 2026 तक भारत में लगभग 13.88 लाख पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टर हैं और डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 तक पहुंच चुका है। लेकिन यह औसत तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती। सरकारी अस्पतालों में सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञों के हजारों पद अब भी रिक्त हैं। नतीजतन, उपलब्ध डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ता है और उन्हें अक्सर लगातार 24 से 36 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। सीमित संसाधनों, कम स्टाफ और बढ़ते मरीजों के दबाव के कारण रेजिडेंट डॉक्टरों में बर्नआउट और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।
राजस्थान भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। राज्य सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि कई छोटे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। चिकित्सा विभाग में करीब 50 हजार पद, जिनमें 27 हजार चिकित्सकों के पद भी शामिल हैं, लंबे समय से भर्ती की प्रतीक्षा में हैं।
डॉक्टरों का स्वास्थ्य सीधे मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज से जुड़ा है। एक थका हुआ और मानसिक दबाव में काम कर रहा डॉक्टर उतनी प्रभावी और सतर्क चिकित्सा नहीं दे सकता, जितनी एक सुरक्षित, संतुलित और सहयोगपूर्ण कार्य वातावरण में कार्यरत डॉक्टर दे सकता है।
आवश्यकता केवल डॉक्टरों का सम्मान करने की नहीं, बल्कि समयबद्ध भर्तियां पूरी करने, कार्य घंटे निर्धारित करने, सुरक्षित कार्यस्थल और मानसिक स्वास्थ्य सहायता सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी है।
इस राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर आइए, हम केवल डॉक्टरों का आभार ही न व्यक्त करें, बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण का संकल्प भी लें, जिसमें मरीजों के साथ-साथ उनके उपचार करने वाले "हीलर्स" को भी स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।
#nationaldoctorsday #doctor
कांग्रेस नेता एवं लोकसभा सांसद श्री बृजेंद्र सिंह ओला जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, अपार ऊर्जा, दीर्घायु एवं निरंतर जनसेवा का सामर्थ्य प्रदान करें। आपके जीवन का प्रत्येक वर्ष नई उपलब्धियों और खुशियों से परिपूर्ण हो।
@Brijendra_ola
राजस्थान किसी की दया का पात्र नहीं है... अपने हक़ और हिस्से का पानी मांग रहा है। "प्यासे को पानी उपलब्ध कराना" ऐसा बताया जा रहा है कि मानो हरियाणा अपनी मर्जी से पानी दे रहा हो।
हरियाणा के साथ किए गए यमुना जल समझौते (MoA) में राजस्थान के हितों की हत्या हुई है। एक तो हितों का समर्पण और ऊपर से हरियाणा की कृपा बताना शर्मनाक है। मुख्यमंत्री भजनलाल जी के द्वारा हरियाणा के सामने किए गए समपर्ण से पूरा राजस्थान शर्मिंदा है।
भजनलाल जी को ज्ञात होना चाहिए कि राजस्थान को मिलने वाला पानी किसी की मेहरबानी से नहीं, बल्कि 1994 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में हुए समझौते के तहत उसका हक़ है। जिसको हरियाणा के सामने गिरवी रखकर भाजपा सरकार ने समझौता किया है।
अगर 1994 के यमुना जल समझौते के आधार पर ही नया MoA किया गया है, तो फिर राजस्थान के हिस्से के पानी पर नई शर्तें क्यों लगाई गईं?
- राजस्थान को सिर्फ जुलाई से अक्टूबर (बारिश के समय) की अवधि में केवल 4 महीने ही पानी मिलेगा। यानि नवंबर से जून की अवधि में राजस्थान को कोई जल आवंटित नहीं होगा। ये समर्पण क्यों?
- MoA में राजस्थान सिर्फ 580 MCM पानी मिलने का जिक्र है, जबकि 1994 के मूल समझौते में 1.19 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलना था। यानी 1994 के समझौते के अनुरूप जल आवंटन नहीं होगा। ये समर्पण क्यों?
- यमुना नहर की पूरी क्षमता के उपयोग के बाद बारिश के समय अतिरिक्त पानी होने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा, जबकि 1994 के मूल समझौते ये शर्त नहीं थी। ये समर्पण क्यों?
- राजस्थान जाने वाली पाइप लाइन से हरियाणा भिवानी, फतेहाबाद और उन गांवों में पहले पानी लेगा जहां से पाइप लाइन गुजरेगी, जो 1994 के मूल समझौते की भावना के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों?
- हरियाणा द्वारा पहले 13,000 क्यूसेक पानी, फिर 18,000 क्यूसेक पानी, बाद में 24 000 क्यूसेक पानी, और अब पूरे जल समझौते पर अपनी मनमर्जी करना 1994 के मूल समझौते के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों?
- 1994 के मूल समझौते के अनुसार सभी राज्यों को Pro Rata Basis यानी पानी की उपलब्धता के अनुपात में पानी मिलना था। लेकिन अब पहले हरियाणा को पानी मिलेगा और फिर अधिशेष जल रहने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा। ये समर्पण क्यों?
- जल पर नियंत्रण केंद्रीय जल आयोग का होता है, फिर समझौते में कैसे हरियाणा ने अपनी मर्जी से एकतरफा पानी तय किया? ये समर्पण क्यों?
- राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने यमुना जल के लिए MoU का प्रपत्र भेजकर राजस्थान के हितों को आगे रखा लेकिन लेकिन केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार ने अटकाए रखा। बाद में हाईकोर्ट की फटकार पर हरियाणा पानी देने के लिए विवश हुआ। लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल जी ने इवेंटबाजी और वाहवाही के चक्कर में प्रदेश के हितों को गिरवी रख दिया। ये समर्पण क्यों?
- मुख्यमंत्री जी ने ढाई साल MoU और MoA में निकाल दिए। इनसे पूर्व भी यमुना जल पर कई समझौते हुए हैं.. लेकिन हितों का समर्पण नहीं हुआ। क्यों?
- MoA के हिसाब से अगर राजस्थान को सिर्फ पेयजल का ही पानी मिलेगा। फिर शेखावाटी की 1.05 लाख हेक्टेयर ज़मीन सिंचाई का झूठा भ्रम क्यों फैलाया गया?
मुख्यमंत्री जी, राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि जिस परियोजना के लिए वर्षों तक संघर्ष हुआ, डीपीआर बनी, अदालतों तक लड़ाई लड़ी गई.. उसका परिणाम "अधिकार है या समर्पण"? यमुना जल समझौते (MoA) की पूरी प्रति तत्काल सार्वजनिक करें.. जल आवंटन, वित्तीय ज़िम्मेदारी, लागत-बंटवारे, पानी छोड़ने के नियमों और सभी शर्तों को जनता के सामने रखें।
संत शिरोमणि कबीरदास जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
संत कबीर ने अपने दोहों और विचारों के माध्यम से समाज को सत्य, समानता, प्रेम और मानवता का संदेश दिया। उनके आदर्श आज भी हमें सामाजिक सद्भाव, आत्मचिंतन और जनकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
आइए, उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाकर एक समरस और संवेदनशील समाज के निर्माण का संकल्प लें।
आर्थिक परिवर्तन के युग का सूत्रपात करने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पी. वी. नरसिम्हा राव जी की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन।
उनकी दूरदृष्टि, निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रहित में लिए गए ऐतिहासिक फैसलों ने भारत को नई आर्थिक पहचान दिलाई। उनका योगदान देश के विकास के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के SC प्रकोष्ठ की अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री श्रीमती @mamta_bhupesh को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।
आपका जनसेवा के प्रति समर्पण एवं समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किया जा रहा कार्य निरंतर प्रेरणादायी है। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर सफलता प्रदान करें।
युवाओं, जागो!!! जब तक अपनी आवाज़ बुलंद नहीं करोगे, तब तक तुम्हारे भविष्य के साथ यही आतंक चलता रहेगा। एक बार फिर से तुम्हारे साथ धोखा हुआ है। महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक हो गया और परीक्षा टल गई।
NEET, CBSE, SSC, CUET और अब TET... यह सिलसिला बंद तभी होगा जब आंदोलन खड़ा करके अपनी ताक़त दिखाओगे। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री जी की तुम्हारे प्रति कोई जवाबदेही नहीं बनेगी। न वे परीक्षाओं में भ्रष्टाचार पर लगाम लगायेंगे, न तुम्हारे भविष्य की ज़िम्मेदारी लेंगे।
एक और पेपर लीक।
एक और परीक्षा रद्द।
इस बार महाराष्ट्र का TET।
देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को वसूली का सिस्टम बना दिया गया है, जिससे देश का हर युवा असुरक्षित है।
यह सिर्फ पेपर लीक नहीं,
यह युवाओं के भविष्य की चोरी है।
पीसीसी अध्यक्ष श्री @GovindDotasra जी पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी की मैं कड़ी निंदा करता हूँ।
लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध और तीखी आलोचना पूरी तरह स्वीकार्य है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में अशालीन, अमर्यादित और स्त्री-विरोधी भाषा का कोई स्थान नहीं हो सकता।
शिक्षा मंत्री जैसे संवैधानिक पद से अपेक्षा होती है कि वह संयम, मर्यादा और सभ्य संवाद का उदाहरण प्रस्तुत करें। ऐसे बयान न केवल उनके पद की गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति को भी कमजोर करते हैं। किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर हमला करने के लिए महिलाओं से जुड़ी अपमानजनक उपमाओं का प्रयोग करना महिलाओं के प्रति भी असंवेदनशीलता है।
सबसे बड़ा प्रश्ना #भाजपा के संगठनात्मक अनुशासन पर है। जिस पार्टी ने वर्षों तक स्वयं को अनुशासन और संस्कार की पार्टी बताया, आज वही अपने नेताओं की लगातार अमर्यादित भाषा पर मौन है।
भाजपा नेताओं के आए दिन आने वाले स्तरहीन बयान अब चिंताजनक प्रवृत्ति बनते जा रहे हैं। पार्टी को अपने नेताओं के लिए "सार्वजनिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक संवाद की कार्यशाला" आयोजित करनी चाहिए, जहाँ उन्हें यह सिखाया जाए कि राजनीतिक परिपक्वता का परिचय तर्क, तथ्यों और मर्यादित भाषा से दिया जाता है, न कि व्यक्तिगत कटाक्ष और अशोभनीय उपमाओं से।
अब समय आ गया है कि भाजपा अनर्गल बोलने वाले नेताओं पर संज्ञान। ऐसे गैर-जिम्मेदार, असंवेदनशील और प्रशासनिक गरिमा के अनुरूप आचरण न करने वाले व्यक्तियों को राज्य के महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपना प्रदेश के हित में है।
जब नेतृत्व ऐसी बयानबाज़ी पर न कार्रवाई करता है, न असहमति जताता है, तो यह संदेश जाता है कि यह अपवाद नहीं, बल्कि पार्टी की मौन स्वीकृति है। राजस्थान की जनता को अशालीन भाषा नहीं, बल्कि जवाबदेह और मर्यादित नेतृत्व चाहिए।
@madandilawar@BJP4Rajasthan
नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र के भविष्य को खोखला करता है।
भारत में मादक पदार्थों की लत युवाओं के बीच तेजी से बढ़ती चिंता का विषय बन चुकी है। नशा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है। राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, देश में करोड़ों लोग नशे के आदी हैं।
विभिन्न अध्ययनों और सरकारी आकलनों ने युवाओं में नशे की गंभीर स्थिति की ओर संकेत किया है। हाल के आकलनों के अनुसार, राज्य में लाखों युवा और किशोर किसी न किसी प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन से प्रभावित हैं।
नौजवना बच्चों से मेरा यही आग्रह है कि कुछ पल का नशा आपकी सेहत, परिवार का विश्वास और आपके सुनहरे भविष्य को छीन सकता है। आपकी ऊर्जा, आपकी प्रतिभा और आपका आत्मविश्वास ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। आपकी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है।
#WorldDrugDay #SayNoToDrugs
सत्ता के अहंकार में डूबी मोदी सरकार अब इस मुकाम पर पहुँच गई है कि अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग करने वाले छात्रों को ही शिक्षा मंत्री “आतंकवादी” कह रहे हैं।
ज़रा सोचिए - जिसकी नाकामी से इतने पेपर लीक हुए, जिसके राज में 20 बच्चों ने जान दे दी, जिसने करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया - वो आज पीड़ित बच्चों और उनकी आवाज़ उठाने वालों को “दहशतगर्द” बता रहा है।
पर यह कोई नई बात नहीं: अन्नदाता किसानों को "आंदोलनजीवी और परजीवी" कहा। सवाल पूछने वाले को “Anti-National” कहा। और अब युवाओं को “दहशतगर्द।”
जो भी सरकार से सवाल पूछे - उसे देशद्रोही बता दो, यही इनकी पूरी राजनीति है।
धर्मेंद्र प्रधान जी, देश के करोड़ों युवाओं से तुरंत माफ़ी माँगिए और अपनी नाकामियों के लिए इस्तीफ़ा दीजिए।
और रही मेरी बात - आप मुझ पर जितने चाहें हमले कर लीजिए। मैंने कोटा में कहा था, और फिर कहता हूँ: यह शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है। मैं इसे ऐसे ही नहीं रहने दूँगा।
हर बच्चे को सस्ती, अच्छी शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा मिले - इस आवाज़ को उठाना मैं कभी बंद नहीं करूँगा।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo