आयुष ऑफिसर भर्ती-2025 में एमबीसी आरक्षण पर सवाल
आयुष ऑफिसर भर्ती की अंतिम चयन सूची में शामिल कुछ एमबीसी अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर अभ्यर्थियों ने जांच की मांग उठाई है।
आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने कथित रूप से ओबीसी श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीसी आरक्षण का लाभ लिया।
अभ्यर्थियों ने सभी चयनित एमबीसी उम्मीदवारों के जाति प्रमाण पत्रों का पुनः सत्यापन कराने और पात्रता की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यह मांग भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाई जा रही है।
आयुष ऑफिसर भर्ती-2025 में MBC आरक्षण की पात्रता को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग
आयुष ऑफिसर भर्ती-2025 की अंतिम चयन सूची में शामिल कुछ MBC अभ्यर्थियों की आरक्षण पात्रता को लेकर अभ्यर्थियों द्वारा सवाल उठाए गए हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों द्वारा OBC श्रेणी से संबंधित प्रमाण-पत्र के आधार पर MBC आरक्षण का लाभ लिए जाने की आशंका है। ऐसे में उनकी मांग है कि चयनित सभी MBC अभ्यर्थियों के जाति प्रमाण-पत्र एवं आरक्षण पात्रता का नियमानुसार पुनः सत्यापन कराया जाए।
यह मांग किसी जाति, समुदाय या अभ्यर्थी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से की जा रही है।
यदि जांच में सभी अभ्यर्थी नियमानुसार पात्र पाए जाते हैं तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी, और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
निष्पक्ष जांच हो, तथ्य सामने आएं और पात्र अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित हो।
#AyushOfficer #MBCReservation #Recruitment2025 #Rajasthan
#जयपुर
तृतीय श्रेणी शिक्षक अपनी लंबे समय से स्थानांतरण की मांग लेकर आज शहीद स्मारक पर धरने पर बैठे हैं। ये शिक्षक लंबे समय से सरकार से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।
सरकार से आग्रह है कि शिक्षकों की जायज़ माँग को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। जो शिक्षक वर्षों से दूर-दराज़ क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, उन्हें स्थानांतरण का उचित अवसर दे और इस समस्या का जल्द समाधान करें।
@BhajanlalBjp@RajGovOfficial
तबादला नीति लागू करवाने, लम्बित डीपीसी सहित अपनी अन्य लंबित मांगों को लेकर प्रदेश के तृतीय श्रेणी शिक्षक जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर धरने पर बैठने को मजबूर हैं, लेकिन भाजपा सरकार शिक्षकों की जायज़ मांगों पर यथोचित कार्यवाही करने की बजाय उनकी आवाज़ को दबाने में लगी है। धरना स्थल पर बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं बंद करना सरकार की हठधर्मिता और तानाशाही रवैये को दिखाता है।
हमारे शिक्षक समाज व राष्ट्र निर्माण के आधार हैं, जिनकी मांगों पर सरकार गंभीरता दिखाए और त्वरित सकारात्मक हल निकाले।
@BhajanlalBjp@RajCMO
तृतीय श्रेणी शिक्षक लम्बे समय से स्थानांतरण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। आज अपनी इस जायज मांग को लेकर जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर उन्होंने धरना भी दिया |
जब शिक्षक ही अपनी मूलभूत प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए सड़कों पर उतरने को विवश हों, तो यह सरकार की संवेदनहीन कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से मांग करता हूँ कि इन शिक्षकों की पीड़ा को सुनते हुए जल्द से जल्द पारदर्शी रूप से तृतीय श्रेणी शिक्षकों का तबादला करने से जुड़ी मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाये |
@RajCMO
मुझे पता नहीं, यह सच है या झूठ; लेकिन यह बताया गया कि कुछ रोजनेताओं ने भारी भरकम पैसा देकर मुंबई की पीआर एजेंसीज को हायर किया हुआ है और वे जिस तरह कह रही हैं, उस तरह राजनेता कर रहे हैं।
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हमारी राजनीति और हमारे राजनेताओं का अपने संकीर्ण लाभों के लिए पीआर एजेंसियों वाले और इवेंट वाले किस तरह सत्यनाश कर रहे हैं, यह एक भयावह खेल हो गया है। उन्होंने दुनिया के संचार सिद्धांतों का कुछ पता नहीं है कि वे पत्रकारिता में कैसे काम करते हैं और राजनीति में कैसे। सोशल मीडिया में उनका क्या प्रभाव रहता है और आम जीवन में क्या।
इस हम कल या आज ही उदाहरण से समझ सकते हैं।
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जब कोई बड़ा और बुजुर्ग नेता किसी युवा नेता पर वार करे तो उस बारे में पब्लिक मनोविज्ञान क्या कहता है?
राजनीति में शब्द केवल विचार नहीं होते। वे संकेत होते हैं। और संकेत अक्सर वह कह देते हैं, जो वक्ता कहना नहीं चाहता।
कोई दो दशक पहले चुनाव विश्लेषक वाली योनि में रहते हुए योगेंद्र यादव ने दॅ हिन्दू में लिखा था कि चुनाव में जो हाेता है, वह दिखता नहीं और जो दिखता है, वह होता नहीं। इसे मैं नाना प्रकार के लोगों के यहाँ कल से 57 बार पढ़ चुका हूँ। बड़े-बड़े लोगों के पास मौलिक सोच नहीं है और वे एक बंजर दृष्टि के शिकार हैं।
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तो अब मूल बात पर।
कोई वरिष्ठ, अनुभवी और स्थापित नेता किसी युवा पर सार्वजनिक रूप से सीधा प्रहार करता है तो वह युवा को नहीं, स्वयं को परिभाषित कर रहा होता है। क्योंकि शक्ति का पहला नियम यह है कि जो वास्तव में शक्तिशाली होता है; वह प्रतिक्रिया नहीं देता, वह दिशा देता है।
तीन बार के मुख्यमंत्री, दशकों का राजनीतिक अनुभव, लाखों कार्यकर्ताओं का विश्वास और इतने तपेतपाए इनसान यानी यह सब लिए हुए कोई नेता जब किसी युवा के नाम पर बेचैन होता है तो जनमानस में एक ही प्रश्न जन्म लेता है, "इतने बड़े नेता को इस युवा से क्या भय है?"
यह प्रश्न ही युवा की सबसे बड़ी राजनीतिक पूँजी बन जाता है। वरिष्ठ नेता ने कुछ कहा, पर जनता ने कुछ और सुना। और जनता जो सुनती है, वही सत्य बन जाता है।
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हम लोग पत्रकारिता के विद्यार्थियों को संचार सिद्धांत सिखाते हैं तो उन्हें बताते हैं कि मनोविज्ञान में psychological reactance का सिद्धांत राजनीति के बारे में क्या कहता है। यह सिद्धांत कहता है कि जब किसी को सार्वजनिक रूप से दबाया जाता है तो दर्शक स्वतः उसके प्रति झुकने लगते हैं।
यह कोई सोची-समझी सहानुभूति नहीं। यह मानवीय स्वभाव की सहज और अनायास प्रतिक्रिया है।
प्रहार जितना बड़े मंच से हो, सहानुभूति उतनी गहरी और व्यापक होती है। युवा नेता बिना कुछ किए, केवल निशाने पर रहकर एक ऐसी छवि अर्जित कर लेता है, जो वर्षों की मेहनत से भी शायद न बनती। यानी हमला किस पर हो रहा है? और क्यों हो रहा है? क्योंकि वह इतना ताक़तवर है कि इतने बड़े व्यक्ति का हमला उस पर ज़रूरी हो जाता है।
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पत्रकारिता में हम विद्यार्थियों को यह भी सिखाते हैं कि social proof का वह सिद्धांत क्या है, जो राजनीति में सबसे निर्मम सत्य की तरह काम करता है। जनता यह नहीं देखती कि कौन क्या कह रहा है; जनता यह देखती है कि कौन किसके बारे में बात करने पर विवश है। जिस युवा का नाम वरिष्ठ नेता बार-बार लेते हैं, वह युवा जनता की दृष्टि में relevant, significant और inevitable हो जाता है।
वरिष्ठ नेता सोचते हैं कि वह युवा को छोटा कर रहा है; वास्तव में वह हर बार उसे स्थापित कर रहा होता है। यह राजनीतिक आत्मघात है। धीमा, अदृश्य, पर निश्चित।
इससे भी गहरी बात यह है कि जिस क्षण वरिष्ठता प्रतिक्रिया में उतरती है; वह अपना स्तर स्वयं तय कर देती है।
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दो नेता जब एक ही मैदान में खड़े दिखते हैं तो जनता उन्हें बराबर मानने लगती है। और जब मैदान बराबर हो तो वह युवा का होता है। क्योंकि युवा के पास खोने को कुछ नहीं और पाने को सब कुछ है। वरिष्ठ के पास खोने को प्रतिष्ठा है; जिसे उसने जाने कैसे-कैसे त्याग करके, कैसे काम करके, कैसी-कैसी ज़हरीली अनुभूतियों को आत्मसात करके अर्जित किया है और एक बार खोई प्रतिष्ठा लौटती नहीं।
इतिहास में जो नेता अमर हुए; वे इसलिए नहीं कि उन्होंने हर प्रहार का उत्तर दिया, इसलिए कि उन्होंने जाना कि कौन से प्रहार का उत्तर न देना ही सबसे बड़ा उत्तर है।
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मौन केवल चुप्पी नहीं; वह एक रणनीति है और प्रायः सबसे शक्तिशाली।
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जो सच में अप्रासंगिक होता है, उसका नाम नहीं लिया जाता। वरिष्ठ नेता का हर सार्वजनिक प्रहार युवा का वह परिचय लिखता है जो युवा स्वयं कभी न लिख पाता। राजनीति की यही सबसे बड़ी विडंबना है; और यही उसका सबसे निर्मम और शाश्वत सत्य भी। और यह वही ग़लती है, जो देश के शीर्षस्थ राजनेता और भाजपा के शिखर पुरुष राहुल गांधी के बारे में करते रहते थे।
पॉलिटिशियन और क्रिकेटर के बीच हमेशा काफी अच्छा रिश्ता रहा हैं!
मैं चाहता हूं कि सचिन पायलट सर भी हमारी साथ आए और कभी क्रिकेट खेले!
~सुरेश रैना भारतीय क्रिकेटर
वीडी सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री बनाकर राजस्थान की गलती दुहराने से बची पार्टी!
विधायक नहीं जनता की पसंद के बने मुख्यमंत्री । ✌️
@RahulGandhi जी के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं। 🙏
@INCIndia@priyankagandhi@SachinPilot
The 28-Day “Monthly” Recharge SCAM.
I raised this in Parliament today.
Telecom companies call their plans “monthly” — but they last only 28 days.
That means prepaid users pay for 13 recharges in a year instead of 12.
28 days × 13 recharges = 364 days
If it’s monthly, it should follow the actual calendar month.
Consumers deserve better. Not these clever tricks.
कांस्टेबल भर्ती: पुलिस दूरसंचार भर्ती-2025 का अस्थाई परिणाम जारी, 26 दिसंबर से शुरू होगा दस्तावेजों का सत्यापन
• गलत कैटेगरी भरने वाले अभ्यर्थी हो जाएं सावधान; दस्तावेज जांच और मेडिकल परीक्षण के बाद ही जारी होगी अंतिम चयन सूची
जयपुर। पुलिस अधीक्षक (प्रथम) पुलिस दूरसंचार डॉ. हेमराज मीना ने बताया कि निदेशालय पुलिस दूरसंचार द्वारा कॉन्स्टेबल ऑपरेटर और चालक भर्ती-2025 का अस्थाई परीक्षा परिणाम जारी कर दिया गया है। यह सूची अभ्यर्थियों द्वारा लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों, शारीरिक दक्षता (PST/PET) और उनके द्वारा आवेदन पत्र में भरे गए दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है।
एसपी डॉ मीना ने बताया कि सफल घोषित किए गए सभी अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए 26 दिसंबर 2025 से 04 जनवरी 2026 तक पुलिस दूरसंचार लाइन घाटगेट जयपुर आमंत्रित किया गया है। अभ्यर्थियों को अपने सभी मूल दस्तावेजों, स्वास्थ्य परीक्षण और चरित्र सत्यापन हेतु व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
कैटेगरी संबंधी विसंगतियों पर सख्त निर्देश:
विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ अभ्यर्थियों ने आवेदन करते समय अपनी मूल कैटेगरी के बजाय दूसरी कैटेगरी का चयन किया है (जैसे OBC उम्मीदवारों द्वारा MBC कैटेगरी चुनना)। इस संबंध में विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्थाई सूची में नाम आने मात्र से नियुक्ति सुनिश्चित नहीं मानी जाएगी। मूल दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही अभ्यर्थी की वास्तविक कैटेगरी तय की जाएगी।
यदि दस्तावेज आवेदित वर्ग के अनुसार सही नहीं पाए जाते हैं तो अभ्यर्थी को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा और मेरिट के आधार पर अगले सफल अभ्यर्थी को मौका मिलेगा। एसपी डॉ. मीना ने स्पष्ट किया कि वर्गवार अंतिम चयन सूची तभी जारी की जाएगी जब अभ्यर्थी दस्तावेज सत्यापन, स्वास्थ्य परीक्षण, चरित्र सत्यापन और वांछित शैक्षणिक योग्यता में पूरी तरह सफल पाए जाएंगे।
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