12 वर्षों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और compromised विदेश नीति ने आज देश को ऐसे हालात में ला खड़ा कर दिया है जहाँ लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को लकड़ी के ज़हरीले धुएं की तरफ धकेल दिया गया है।
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दिया गया। उसपर पिछले 3 महीनों में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम ₹89 बढ़ा दिया गया - मतलब, पहले दाम बढ़ाओ, फिर सब्सिडी घटाओ, गरीबों का चूल्हा बुझाओ।
प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा, 5 किलो का सिलेंडर भी ₹323 महंगा कर दिया - वो कमाएगा क्या, खाएगा क्या, और बचाएगा क्या?
अरबपति मित्रों को लाखों करोड़ों की कर्ज़माफ़ी दिलाना और गरीबों को अपनी नाकामियों का बिल थमाना - ये लूट का मोदी मॉडल है।
मोदी जी, क्या आपकी नाकामियों का बोझ सिर्फ गरीब उठाएंगे? क्या आपकी बनाई इस चरमराती अर्थव्यवस्था की कीमत मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?
विश्व पर्यावरण दिवस के मौक़े पर राहुल गांधी ने निकोबार पर अपनी डॉक्यूमेंटरी रिलीज़ की। इसमें राहुल गांधी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का रक्षा रणनीति से लेना देना नहीं है, लेकिन ये इकोलॉजी को बिगाड़ने वाला ज़रुर है।
हमें प्रकृति की इस खूबसूरत देन को बचाना होगा, जिसे नरेंद्र मोदी अपने दोस्त के लिए बर्बाद करने पर तुले हैं।
📍 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
#GreenOverGreed
आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। आकांक्षा के पिता किसान हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर ₹3 लाख का कर्ज़ लिया। और नागपुर में खुद कुक की नौकरी कर ली, ताकि बेटी वहाँ coaching कर सके।
एक पिता ने जो कर सकता था, सब किया।
फिर NEET पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। उस अनिश्चितता में आकांक्षा हमें छोड़ कर चली गई।
आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं - मोदी जी की एक भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है।
और धर्मेंद्र प्रधान जी? आज भी कुर्सी पर हैं।
फिर वही कमेटी। वही ट्रांसफर। वही जाँच। न सुधार, न न्याय।
मोदी जी, कुर्सी स्थायी नहीं होती - आती-जाती रहती है। लेकिन आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है, उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।
Class 12 student Sarthak Sidhant, who investigated tenders awarded by #CBSE to COEMPT Eduteck, the technology vendor for Onscreen Marking Portal that has come under controversy alleged that COEMPT had a ‘very bad track record,’ He has alleged that ‘rules were rewritten,’ in the Request for Proposal (RFP) floated by CBSE were made to ‘favour,’ COEMPT.
Sarthak Sidhant (@sidhant_sarthak) in conversation with The Hindu's Maitri Porecha (@dawalelo) and John Xavier (@johnXavier777).
Watch the full video here: https://t.co/5FxhGpD37f
@RahulGandhi Thank you so much, LoP @RahulGandhi for amplifying this.
We need you and the Indian Media to stand up for Gen Z students like us and everyone affected by this.
the Central Board of Secondary Education, MUST answer for the discrepancies.
A revealing chat with my fellow “anti-national Soros agents.”
Vedant and his friends are brilliant, brave young Indians who asked CBSE and the Modi government simple questions - but got insults instead of answers.
They deserve a bright and secure future. We will make sure they get it.
स्वादिष्ट दाल-रोटी, घर का खाना... और ऑटो वाले भाइयों के साथ नेता विपक्ष @RahulGandhi जी की कुछ दिल की बातें।
पूरा वीडियो देखने के लिए क्लिक करें: https://t.co/9BJzhnVtd2
“हम तो तबाह हो गए हैं - और सुनने वाला कोई नहीं।”
कल दोपहर के खाने पर एक ऑटो चालक भाई ने यह कहा। एक वाक्य में देश के लाखों ग़रीबों की पूरी कहानी आ गई।
आमदनी का मीटर बंद। महंगाई का ब्रेक फेल। और सुनने वाली सरकार बहरी।
CNG से LPG तक। बच्चों की पढ़ाई से इलाज तक। दूध से लेकर खाने के तेल तक। हर बढ़ता रुपया इनके बजट पर, इनकी रसोई पर, सीधा वार है।
महंगाई मानव मोदी जी सलाह देते हैं - “public transport इस्तेमाल कीजिए।” और जो लोग public transport की रीढ़ हैं वो आज महंगाई के बोझ तले टूट रहे हैं।
आज इनकी थाली में रोटी-दाल के साथ एक सवाल भी है - कल की रोटी कहाँ से आएगी?
17-year-old Sarthak Sidhant has exposed how CBSE manipulated its own selection process to benefit COEMPT, using CBSE’s own documents.
The details in his blog reveal how CBSE changed the RFP to unduly benefit COEMPT, at the cost of TCS.
He has revealed the hollowness of Dharmendra Pradhan ji’s denials. The PM remains silent, as usual. The question is simple: who are they protecting, and why?
An independent judicial inquiry is now essential to uncover the full extent of this scam.
Sarthak’s work shows that India’s Gen Z is brilliant and fearless. And sooner or later, they will find out the full truth.