सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मिरा मक़्सद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
~ दुष्यंत कुमार
पूरा भारतवर्ष आज सोनम वांगचुक सर के साथ खड़ा है,
देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दे सकते हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मंगलवार को 17वां दिन है। उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। वजन 8.5kg कम हो गया है। अनशन शुरू होने पर वजन 67 किग्रा था।
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“अगर आप मेरी बात से सहमत हैं, तो मुझ पर दबाव क्यों? सरकार पर दबाव क्यों नहीं?”
सोनम वांगचुक जी का यह सवाल अनशन से बड़ा है। यह पूछता है कि लोकतंत्र में संवाद की पहल नागरिक करे, या सत्ता?
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सोनम जी आपको मेरी उम्र लग जाए आप स्वस्थ रहें हैं क्योंकि डकैत ब चोरों के खिलाफ आप लड़ रहे हैं इससे हमें संबल और बल मिल रहा है भगवान आपको पूर्ण स्वस्थ रखें ऐसी हम प्रार्थना करते हैं..। 🙏
💔 सोनम वांगचुक जी के 16 दिनों के आमरण अनशन को देखकर आतिशी भावुक हो गईं।
"उन्हें इस हालत में देखकर आँखें नम हो जाती हैं।"
16 दिनों से वे इस भीषण गर्मी में बिना भोजन के अनशन पर बैठे हैं। उनका वजन लगभग 8 किलो कम हो चुका है, ब्लड शुगर 60–70 के आसपास बताई जा रही है और रक्तचाप भी काफी कम है।
उन्होंने कहा कि अगर हममें से कोई इस स्थिति में होता, तो शायद अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में होता। लेकिन सोनम वांगचुक जी अब भी डटे हुए हैं, क्योंकि यह लड़ाई उनके लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य के लिए है।
उन्हें न NEET देना है, न SSC और न ही TET। वे उन लाखों छात्रों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, जिनके परिवार वर्षों की मेहनत और कमाई पढ़ाई पर खर्च करते हैं, लेकिन कथित पेपर लीक जैसी घटनाएँ उनकी उम्मीदों को झटका देती हैं।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और छात्रों के भविष्य का सवाल है। 🔥🇮🇳