माननीय मुख्यमंत्री जी,
अगर आपके पास करने के लिए इतने ही जरूरी काम बचे हैं कि अब आप चमार समाज की पहचान का नाम बदलने चले हैं, तो पहले यह स्पष्ट कीजिए—क्या आपको लगता है कि इस समाज की पहचान इतनी सस्ती और कमजोर है कि सरकार अपनी मर्जी से उसका नाम बदल देगी
इसका जवाब जनता देगी।
1. जेन-अल्फा अर्थात् सन् 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में भी ख़ासकर अपने थोड़े ’अच्छे दिन’ की उम्मीद लगाये स्कूली छात्र-छात्रायें व उनके माता-प��ता भी सुखी भविष्य हेतु अच्छी शिक्षा को लेकर हमेशा चिन्तित ही नहीं बल्कि उसके लिये लगातार काफी जद्दोजहद भी करते रहे हैं, किन्तु देश भर में व विशेषकर यूपी एवं उत्तर भारत के राज्यों के स्कूलों के बदतर हालत की कड़वी ज़मीनी हक़ीक़त के कारण वे लोग अति-मुखर होे गये हैं।
2. वे लोग जेन-जी अर्थात् कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी ’स्कूल ठीक करो’ अभियान में काफी बढ़चढ़ कर व पूरे उत्साह के साथ भा�� ले रहे हैं।
3. किन्तु यह बड़े दुख और चिन्ता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने व पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें अपनी प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा हेतु बुनियादी सुविधाओं के लिये भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
4. वैसे परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’शिक्षित बनो’ आह्वान के कारण शिक्षा में भी ख़ासकर स्कूली शिक्षा ’बहुजन समाज’ के लोगों के लिये हमेशा विशेष चिन्ता की बात रही है, और इसी के तहत् हमारी पार्टी बी.एस.पी. ने इन दबे-कुचले व शोषित-पीड़ित समाज के लोगों की, जिनकी केन्द्र व राज्य में रही सरकारें लगातार उपेक्षा करती रहीं हैं, उनके हित व कल्याण एवं शिक्षा आदि के लिये यूपी में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की सभी चारों रही सरकारों में पूरा-पूरा ध्यान दिया गया, ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी एवं कल्याणकारी भारतीय संविधान के हिसाब से उन सभी परिवार वालों को रोटी-रोजी व शिक्षा-युक्त आत्म-सम्मान का समतामूलक जीवन नसीब हो सके।
5. किन्तु यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि सरकारी स्कूल की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तरफ सम���चित ध्यान देने के बजाय सभी सरकारों ने ज़्यादातर इसकी घोर अनदेखी ही की है तथा इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को एक प्रकार से, इन वर्गों के आरक्षण की तरह ही, काफी हद तक निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया हुआ है और इस प्रक्रिया में हज़ारों सरकारी स्कूल बंद भी किये जा रहे हैं, जिसका भी विरोध बी.एस.पी. ने लगातार किया है और अब स्कूलों के भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी ज़रूरतों की अत्यन्��� कमी को लेकर नन्हें जेन-अल्फा स्वंय अति-मुखर होने के साथ-साथ अब आन्दोलित भी हैं।
6. अतः यूपी सहित अन्य राज्यों की भी सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था सम्बंधी उनकी ज़रूरतों/माँगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत व नीति से तत्काल ध्यान देना प्रारंभ करें और उनके विरुद्ध कोई भी सरकार बल का प्रयोग करने से पूरी तरह से बचें तो यह उचित होगा।
माननीय@cmohry@police_haryana जी फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर साहब कितने लापरवाह अधिकारी हैँ जो पीड़ित बेटी को न्याय नहीं दिला पा रहे, पीड़ित कभी #महिला_SHO_21A, #DCP_NIT मैडम #पुलिस_कमिश्नर साहब के,25 दिनों से चक्कर लगा रही,और आरोपी बेटी के गाँव मे आकर बेटी को बदनाम व बेज्जती करते
माननीय @DGPHaryana साहब एक लाचार,बेबस बेटी अपने न्याय पाने के लिए पुलिस थाने के चककर लगा रही,और IO मैडम पीड़िता से शिकायत दूसरी लिखने का दबाब बना रही,जिसकी शिकायत #DCP_NIT को की,जहाँ पर Acp ऑफिस मे कार्यरत महिला भी शिकायत बंद करने के लिए साइन करने के लिए बोला गया,IO मैडम पहले भी
माननीय मुख्यमंत्री @cmohry जी, एक विधवा महिला को 4 - 5 महीने से परेशान कर रखा है जो मजदूरी भी नहीं कर पर रही, #Adc विभाग मे कार्यरत #दीपक_कर्मचारी के नाम से शिकायत दी,@DC_Faridabad@DistrictAdm_FBD विभाग जल्द से ऐसे कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्यवाई कर��ं और पीड़ित की मदत की जाए।
माननी@DGPHaryana@police_haryana जी शिकायत और वीडियो देने के बाद भी #Acp_तिगांव_बल्लभगढ़ ने आज तक आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया,#Acp_अशोक_कुमार अपनी जातिगत मानसिकता दिखाते हुए पहले भी SC/ST एक्ट की शिकायतो और FIR को जबरन बंद कर चुके है। ऐसे अधिकारी को पदमुक्त किया जाए
क्या आपको पता है धुएँ कि भी जाति होती है 👇
मध्य प्रदेश में एक दलित की चिता जल��े से केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं “ब्राह्मणों के श्मशान” तक चला जाता…
उस पर भी शर्मना�� ये कि पुलिस भी दलित परिवार पर ही दवाब डाल रही है क्यूं की पुलिस प्रशासन खुद जातिवाद से अंदर तक सड़ा हुआ हैं।
शर्म आनी चाहिए ऐसे समाज पर, जहां मौत के बाद भी दलित को सम्मान नहीं मिलता।
ज़िंदा था तब दलित होने नाम पर भेदभाव, नफ़रत, ज़लालत, छुआछूत,
और जब मर गया तो उसकी चिता का धुंआ भी "अछूत" हो गया जो ब्राह्मणों के शमशान तक नहीं पहुंचना चाहिए वरना बेचारे मरे हुए ब्राह्मण भी अशुद्ध हो जाएंगे।
ये सि��्फ भेदभाव नहीं, ये इंसानियत की लाश पर खड़ा ब्राह्मणवाद है।
जिस समाज में मृतक की चिता का धुआं भी जाति देखकर स्वीकार किया जाए, उस समाज को सभ्य कहलाने का कोई अधिकार नहीं।