दो डेढ़ स्याने...😛
...दोनों चाहते थे कि में प्रधानमंत्री बनू..
...दोनों चाहते थे इंडी गठबंधन का हेड बनू...
...दोनों कांग्रेस को .."चल हट बे" कहते थे...
...दोनों ने कांग्रेस को अपने किले में घुसने नहीं दिया था..
...दोनों के दिमाग में था कि मोदी, शाह से ज्यादा डेढ़ स्याने ये है इनका कोई कुछ नहीं उखाड़ पाएगा..
खुद अपने आप को विपक्ष का बड़ा नेता माना उन दोनों के मन में बस यही था
केंद्र में सरकार बने या न बने बस हमारा किला बचा रहना चाहिए..!!
दोनों नहीं चाहते थे कि राहुल गांधी PM का उम्मीदवार बने इसलिए गठबंधन के नाम पर कहते थे।
काहे की सीट शेयर ...ले ले 🔔
फिर आया .....अमित शाह का नम्बर
आज दोनों बेघर ओर घुमंतू...
केजरीवाल ओर
जो कभी ममता, दिल्ली नहीं आती थी.....
आज दोनों कांग्रेस की चौखट पर चाकरी कर रहे है
...कर लो बे गठबंधन,....हो जाओ एक,.. बचा लो पार्टी
कर रहे है...🤣🤣🤣
अभी पंजाब चुनाव आने दो....ये केजरीवाल दोगला फिर कांग्रेस गठबंधन छोड़ के भागेगा....ओर
लोकसभा आते आते ममता कांग्रेस को छोड़ बंगाल में भागेगी
अखिलेश, तेजस्वी,उद्धव, तीनों कपूतों में इतना दम नहीं बचेगा कि अकेले लड़ ले
.... उनकी स्थिति इतनी खराब होगी कि
एक तरफ ममता बोलेगी मेरे साथ आओ और
एक तरफ कांग्रेस की मेरे पास आओ
आज जो नदी किनारे सारे मौका परस्त जानवर एक साथ घाट पर पानी पीने इकट्ठा हुए है......
हर चालक लोमड़ी सोच रही है ....इन सबको तो में ही खाऊंगी.😛😛😛
सबको नि /पटा के में ही प्रधानमंत्री बनूंगी 🤣
साभार🙏
✍️Manish Soni
जिस जनता के वोटों से कुर्सी मिलती है, उसी जनता की ओर जूठा फेंकना कोई मज़ाक नहीं, कांग्रेसी सोच का आईना है।
सम्मान शब्दों से नहीं, व्यवहार से दिखता है।
जनता भीख नहीं मांगती, सम्मान मांगती है।
और जब सम्मान की जगह अहंकार दिखे, तब जनता जवाब भी देती है…
'अभिव्यंजना 5.0’ में तीन दिनों तक नवोदित कवियों और कवयित्रियों को सुनकर आश्वस्ति हुई कि इस पीढ़ी ने अपने भीतर करुणा, प्रेम और राष्ट्रचेतना के ऐसे बीज संजोए हुए हैं, जो आने वाले समय में साहित्याकाश को नई प्रभा प्रदान करेंगे। उनकी साहित्यिक जिजीविषा, उनकी अभिव्यक्ति की उत्कंठा और अपने स्वप्नों के प्रति उनका समर्पण सदा यूं ही बना रहे, सभी नवांकुर रचनाकारों को अशेष स्नेह एवं आशीर्वाद❣️
कांग्रेस और कांग्रेस के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता जनता को उसकी असली औकात अच्छे से बताते हैं
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार के स्टेज पर फलों की माला लगाई गई है
डीके कुमार सेवो को दांतो से काटकर मतलब जूठा करके जनता की तरफ फेंक रहे हैं
और जनता उसे प्रसाद के रूप में ले रही है
सुनो बे जनता कांग्रेस के सामने तुम्हारी यही औकात है बे
तुम यह कांग्रेस के नेताओं का जूठा और कांग्रेस के नेताओं के फेंका हुआ ही खाने के काबिल हो
आप कल्पना करिए यह काम अगर कोई बीजेपी का मुख्यमंत्री किया होता तो
ये हैं बाड़मेर के थानाराम जी...... जो एक छोटी सी ढाणी (गाँव का छोटा स्वरुप) में रहते हैं... और पिछले 20 सालों से हर आने जाने वाले यात्री को शीतल जल पिलाते हैं.
किसी प्यासे को पानी पिलाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं..... और इस काम में थानाराम जी की पत्नी भी उनका पूरा सहयोग करती हैं.
कोई बड़ी बात नहीं.... कि यह वीडियो वायरल हो जाए, लोग इस दंपत्ति को जानने लग जाएं... और कल को इन्हे इस समाज सेवा के लिए पद्म पुरस्कार भी मिल जाए.... क्यूंकि अब यह संभव है.
कुछ को यह काम सामान्य लग सकता है..... लेकिन यह है नहीं. भरी दुपहरी में..... जब लोग अपने घरों में दुबके पड़े हों... ऐसे में हर आती जाती बस का इंतज़ार करना और उनके आते ही यात्रियों को पानी पिलाना..... यह किसी भी लिहाज से आसान काम नहीं है.
राजस्थान में तो सैंकड़ो वर्षों से प्याऊ चलाने की संस्कृति रही है...... तपती दुपहरी में जब गला सूखा हो.. शरीर शिथिल हो... तब पानी के दो घूँट गले में जाते हैं... वह अमृत से भी बढ़ कर होते हैं.
थानाराम जी और उनकी पत्नी को ढेरों प्रणाम 🙏🙏
कुछ लोगों को समस्या होती है... कि ऐसे लोग वीडियो क्यों बनाते हैं... परोपकार करके उसका वीडियो नहीं बनाना चाहिए. अरे भाई... वीडियो नहीं बनता तो आपको या मुझे पता लगता कि 20 सालों से एक दंपत्ति ऐसा परोपकार कर रही है? नहीं ना.
इंसान दूसरों को देख कर सीखता है.... यह वीडियो देख कर हम भी सीखें.... अपने घर आने वाले delivery boys, maids या अन्य लोगों को पानी दें... पक्षियों जानवरों को पानी दें.... इस पुण्य को कमाएं.
सोशल मीडिया पर कुछ लोग कह रहे हैं कि बीजेपी जल्दी ही कुछ राज्यों में मुख्यमंत्री बदलने जा रही है।
बीजेपी के सर्च इंजन में predictive text का ऑप्शन पिछले कई साल से बंद है।
इसलिए अटकल के बजाए निर्णय ही विश्वसनीय है।
ये बच्चा अभी साफ़ बोल भी नहीं पा रहा ।
दो ढाई साल का लग रहा है ।
और कीर्तन कर रहा है
कितने अच्छे संस्कार दिए हैं इस बच्चे को इसके परिजनों ने
जय श्री हरि गोविंद 🙏
जय श्री गोपाल 🙏
यह जो खबर है यह हिंदुओं को बताने के लिए पर्याप्त है कि आप किनके दुकान पर खरीदारी करने जा रहे हैं और अगर दुकान पर वह लोग मालिक हैं तो खरीदारी मत करिए
यह खतरनाक खबर राजस्थान की झुंझुनू जिले के चिड़ावा कस्बे से आ रही है
जहां एक एस ए खान नामक व्यक्ति ने रेडीमेड कपड़ों लेडीज कपड़ों की तैयारी का बड़ा सा शोरूम खोल रखा है
उसका लड़का शाहरुख खान चेंजिंग रूम में होल करके वहां से सैकड़ो महिलाओं की वीडियो बनाता था
एक लड़की को शक हुआ शक इसलिए हुआ क्योंकि जब वह कपड़े बदल रही थी तभी उसके मोबाइल की घंटी बज गई फिर वह दौड़कर बाहर आई तो शाहरुख को वहां से भाग गया
उसके बाद उसने पुलिस बुलाया पुलिस ने शाहरुख का मोबाइल कब्जे में लिया तो उसमें ढाई सौ से ज्यादा लड़कियों और महिलाओं के कपड़े बदलते वीडियो मिले
।। जय माँ बगलामुखी ।।
माँ बगलामुखी, नलखेड़ा के आज के प्रात: दर्शन आपके लिये।
आपका दिन शुभ हो।
अपना ध्यान रखिए!
॥ ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥
👣जय माँ बगलामुखी जी 👣
😊🙏✌️
आज मेरा बिना शक्कर/चीनी खाये 3 महीना पूरा हुआ।
दिनचर्या Daily नाश्ते के पहले 15 km दौड़ना और फिर 2 घण्टे Exercise करना आदत हो गई है, कोई चाय Coffee नहीं।
केवल Fruits और हरी ताज़ी सब्ज़ियां, वो भी Organic.
शरीर में अभूतपूर्व परिवर्तन है। वजन 25 किलो कम हो गया है
इसी दिनचर्या को बाक़ी जीवन में लागू करना है, पूर्ण स्वस्थ व पोषक भोजन खाना है जो कैफीन/ ग्लूटेन/शुगर फ्री हो और बस दो घण्टे रोज व्यायाम।
पता नहीं किसकी पोस्ट है ये...
लेकिन मुझे भी Copy/paste करके बहुत हल्का महसूस हो रहा है...!!
जंतर मंतर पर हो रहा हर प्रदर्शन मुझे विख्यात लेखक रामचंद्र गुहा की पुस्तक ‘India After Gandhi’ की ओर ले जाता है।
गुहा ने जंतर मंतर का बेहतरीन चित्रण किया है।
उन्होंने इसे मिनी इंडिया बताया जो भारतीय लोकतंत्र का जीवंत प्रतीक है।
वे लिखते हैं कि यहाँ देश की विविधता, उसका असंतोष और उसकी लोकतांत्रिक भावना एक साथ दिखाई देती है।
गुहा के अनुसार, जंतर-मंतर पर एक ही समय में दर्जनों अलग-अलग मुद्दों पर प्रदर्शन चलते रहते हैं।
कहीं पंजाब के किसान सब्सिडी मांग रहे होते हैं, तो कहीं तिब्बती शरणार्थी नारे लगा रहे होते हैं।
गुहा लिखते हैं कि पश्चिमी विचारकों के दावों के विपरीत, भारत का लोकतंत्र इसलिए जीवित नहीं है कि यहाँ सब कुछ शांत और व्यवस्थित है, बल्कि इसलिए जीवित है क्योंकि यहाँ हर नागरिक को अपनी आवाज़ उठाने और असहमति जताने का अधिकार है।
राज्य भले ही विरोध को दबाने या छिपाने की कोशिश करे, लेकिन भारतीय जनता हमेशा अपनी आवाज़ सुनाने का रास्ता ढूंढ लेती है।
यही शोर और अराजकता ही वास्तव में भारतीय लोकतंत्र को बांधकर रखने वाला गोंद है।
@Ram_Guha