मथानिया नगर पालिका चुनाव में निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर पूर्व विधायक सुश्री दिव्या मदेरणा जी ने धरना दिया।
नामांकन के अंतिम दिन निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भाजपा विधायक भैराराम सियोल की RO कक्ष में मौजूदगी को लेकर चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। इसलिए हर कदम पारदर्शी होना चाहिए, ताकि किसी प्रत्याशी या मतदाता के मन में संदेह की कोई गुंजाइश न रहे।
चुनाव आयोग को मामले का संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए और पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए।
@DivyaMaderna
#NirmalChoudhary
दिल्ली में चलती बस के अंदर 16 वर्षीय छात्रा के साथ गैंगरेप की भयावह घटना ने देश को शर्मसार कर दिया है। राजधानी की सड़कों पर बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, और मोदी सरकार खोखले नारे देकर अपनी पीठ थपथपा रही है।
अगर निर्भया कांड के 14 साल बाद भी राजधानी दिल्ली में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, सार्वजनिक परिवहन में यात्रा नहीं कर सकती हैं, तो फिर महिला सुरक्षा के तमाम दावे किस काम के हैं?
BJP की डबल इंजन सरकारों में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है, बेटियों से दरिंदगी हो रही हों, तो ये सिर्फ अपराध नहीं, सरकार की नाकामी है।
"हम अपील करते हैं कि कृप्या राहुल गांधी जी हमसे मिल लें"
◆ बिहार के वायरल बॉय आदित्य ने कांग्रेस नेत्री अलका लांबा से कहा
#AlkaLamba | Alka Lamba | #Adtiya | Viral Boy Adtiya | Bihar | #Bihar | #Patna
सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर को दिल्ली में होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया
◆ कोर्ट ने कहा कि इस मार्च से कोई अप्रिय घटना होगी, ऐसा मानने की कोई ठोस वजह नहीं है
#SupremeCourt | Supreme Court | Cockroach Janta Party | #CockroachJantaParty | CJP | #CJP
मथानिया नगर पालिका चुनावों को लेकर पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा जी ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर धरना प्रदर्शन दिया। नामांकन के आख़िरी दिन निर्धारित समय समाप्ति के बाद भाजपा विधायक भैराराम सियोल की RO कक्ष में मौजूदगी चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
चुनाव आयोग को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए और प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए।
मथानिया में नगर निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान जो हुआ, उसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समय सीमा के बाद क्षेत्रीय विधायक और BJP के एक प्रत्याशी को RO कार्यालय में प्रवेश की अनुमति दी गई। क्षेत्रीय थानाधिकारी द्वारा स्थानीय विधायक को गेट से रिसीव कर कार्यालय के अंदर तक लाया गया, जबकि कार्यालय के अंदर मौजूद कांग्रेस प्रत्याशी के साथ बदतमीजीपूर्ण व्यवहार करते हुए उन्हें बाहर निकाल दिया गया। एक ही नियम दो लोगों के लिए अलग-अलग कैसे हो सकता है?
मैं इस भेदभाव के खिलाफ़ अभी RO कार्यालय, मथानिया के बाहर प्रशासन से जवाब मांगने के लिए बैठी हूँ। अगर चुनाव प्रक्रिया में ही पक्षपात होगा, तो निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र पर जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा? यह सिर्फ़ कांग्रेस प्रत्याशी के साथ भेदभाव नहीं, बल्कि संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।
RO को जवाब देना होगा कि आखिर यह भेदभाव किसके दबाव में और क्यों किया गया?
अखिलेश बनाम योगी
की AI जंग वायरल...
UP News: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'यूपी बदनाम हुआ टीपू तेरे मारे' वायरल वीडियो का जवाब दिया है. अखिलेश यादव ने सीएम योगी का AI वीडियो प्रेस कॉन्फ्रेंस में चला दिया. देखिए वीडियो...
बड़ी खबर-
बीजेपी AI बनाम सपा AI
आज अखिलेश यादव की PC में गजब की तस्वीर दिखी।
बीजेपी के लोगों ने अखिलेश यादव को अराजकता से जोड़ता हुआ AI वीडियो रिलीज किया,
तो समाजवादी पार्टी के शुभचिंतकों ने योगी आदित्यनाथ को चिलम और चढ़ावा चोरी से जोड़ता हुआ AI वीडियो रिलीज कर दिया।
बड़ी बात ये भी रही कि अखिलेश यादव ने पहले खुद पर बनाया वीडियो दिखाया और उसके बाद योगी आदित्यनाथ पर।
संदेश न्यूटन के थर्ड रूल के मुताबिक ‘क्रिया की प्रतिक्रिया’ का था।
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष @Kharge जी के भाषण के बाद सभास्थल के हुए “शुद्धिकरण” के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन आज तक FIR दर्ज नहीं हुई। वहीं, विडंबना देखिए— इस मुद्दे को छुआछूत और भेदभाव से जोड़कर नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी ने इसे दलित समाज का अपमान बताया, तो उन्ही के खिलाफ FIR दर्ज हो गई।
क्या न्याय की मांग करना भी अपराध है? FIR और मुकदमों के दबाव में आवाज़ नहीं दबाई जा सकती। भाजपा का दलित-विरोधी चेहरा उजागर हो चुका है।
सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की रक्षा के लिए राहुल जी और कांग्रेस पार्टी की आवाज़ पहले की तरह बुलंद रहेगी।