🌸 श्री राम दरबार 🌸
जहाँ मर्यादा है, वहाँ श्री राम हैं।
जहाँ करुणा है, वहाँ माता सीता हैं।
जहाँ शक्ति और सेवा है, वहाँ लक्ष्मण हैं।
और जहाँ भक्ति है, वहाँ हनुमान जी हैं।
श्री राम दरबार केवल एक दृश्य नहीं,
यह धर्म, प्रेम, त्याग और भक्ति का जीवंत स्वरूप है।
जो जीवन को सत्य, संयम और सेवा के मार्ग पर चलना सिखाता है।
🙏 जय श्री राम 🙏
*आत्मीय रिश्तों का कभी*
*"ब्रेक-अप"* *नहीं होता..*
*जहाँ विश्वास होता है वहाँ,*
*"चेक-अप"* *नहीं होता..*
*परोपकारी प्रवृति का कभी*
*"पैक-अप"* *नहीं होता..*
*जी लो मन भरके,*
*बीते हुए समय का कोई*
*"बैक-अप"* *नहीं होता..!!*.
*🦚🌹 जय श्री राम 🌹🦚*🙏
Shiva giving blessings to Devi Manasa to become the Serpent Queen signifies the divine recognition of her power over life, poison, healing, and hidden realms.
As the supreme yogi and lord of serpents, Shiva understands the subtle balance between danger and protection that serpentine energy represents.
By blessing Manasa, he empowers her to govern nagas, poisons, and unseen forces, transforming venom into medicine and fear into protection for devotees.
This blessing establishes Manasa not merely as a guardian against snake-related fears, but as a goddess who controls karmic toxins and restores harmony between nature and humanity.
Through Shiva’s grace, Devi Manasa rises as a sovereign force of discipline and compassion.
In this sacred moment, Shiva affirms that true authority is born when power is guided by wisdom and responsibility.
Maa Manasa ✨️🔱
जय श्री शनिदेव महाराज की
न्याय के देवता शनिदेव सदा सत्य का साथ देते हैं।
कर्म के अनुसार फल देना ही उनका महान धर्म है।
शनिदेव की कृपा से जीवन में अनुशासन और धैर्य आता है।
जो भक्त सच्चे मन से पूजन करता है, उसके कष्ट दूर होते हैं।
जय हो शनिदेव महाराज, सब पर कृपा बनाए रखें।
सूर्यनंदन शनिदेव, न्याय के आप आधार,
कर्मों के अनुसार देते, सुख-दुख का उपहार।
नीलवर्ण, मंदगामी प्रभु, भक्तों के हितकारी,
आपकी कृपा से कटें, जीवन की लाचारी।
जो सच्चे मन से ध्याए, शनि नाम महान,
उसके दुःख हर लेते प्रभु, देते सुख-सम्मान।
जय जय शनि महाराज, कृपा हम पर बनाएँ,
कष्ट, दोष और भय हरकर, जीवन सुखमय बनाएँ।
🙏 जय श्री शनिदेव 🙏
*जीवन को रथ कहा जाता है किन्तु क्यों?*
अब आप कहेंगे इसलिए क्योंकि जीवन भी रथ की ही भांति चलता रहता है।
किन्तु कभी आपने इस रथ को समझने का प्रयास किया है?
रथ में आगे अश्व होते है और पीछे पहिये।
ये अश्व आपके “कर्म” है और ये पहिये “कर्मफल” ये अश्व जहाँ जाते है ये पहिये उसी के पीछे-पीछे आते है।
यदि आपके अश्व यानि आपके कर्म शुभ, सरल मार्ग पर चले तो आपकी यात्रा आनंदमय होगी।
यदि दुष्कर्म के बुरे पथ पर चले तो आपकी यात्रा गड्ढों और झटकों से युक्त होगी।
अब चयन आपका है आप क्या चाहते है?
आपकी यात्रा आनंदमयी हो या पीड़ादायी हो।
अपने कर्मों के अश्वों को नियंत्रण में रखिये। फल का पहिया सदैव आपको मधुर रस ही देगा।
जय जय श्री राधे राधे
जय विंध्यवासिनी भवानी,
जय जगदम्बे दुर्गा रानी।
शक्ति रूपिणी पालनकारी,
सारे जग की तू रखवाली।
सिंहवाहिनी अंबे माता,
त्रिभुवन की तू रक्षक दाता।
तेरे चरणों में शरण हमारा,
दूर कर दे सब संताप हमारा।
भक्तों की तू इच्छा पूर्णा,
दुःख हर लेती, देती सुखपूरणा।
मांगें जो भी सच्चे मन से,
माता भर दे झोली क्षण में।
जय विंध्याचल पर्वत वासिनि,
जय माँ अन्नपूर्णा दयावान।
शरणागत की राखे लाज,
माता तेरा सदा गुणगान॥ 🙏🌺
माँ महालक्ष्मी की कृपा दृष्टि हम सभी के ऊपर बने रहें ...सही नियत से परिश्रम करने वाले को सही मार्ग मिले ..सकारात्मक ऊर्जा मिले..जो सफलता के शिखर तक ले जाएं यहीं मां से प्रार्थना करते हैं .🙏🙏