2014 के पहले की स्थिति होती तो
किसी मुख्यमंत्री के कुनबे के बारे में ऐसे खुलासे के बाद चैनलों ने मिट्टी खोद दिया होता . उस मुख्यमंत्री की जीना हराम कर दिया होता . चैनलों के रिपोर्टर माइक और कैमरा लेकर उसका पीछा कर रहे होते . उसकी पार्टी को सवालों के घेरे में लाया गया होता . पीएम तक से सवाल पूछे जा रहे होते .
इस्तीफा मांगा जा रहा होता
2014 के बाद क्या बदल गया
ग़ैर बीजेपी राज्य के मुख्यमंत्री या मंत्री पर आरोप लगे तो चैनलों पर चीख पुकार मचती है . बीजेपी प्रवक्ता से ज्यादा तेवर एंकर और एडिटर दिखाने लगते हैं . इस्तीफे के लिए मुहिम चलने लगती है लेकिन जब बीजेपी का कोई बड़ा नेता फंसता है तो सन्नाटा छा जाता है . सब चुप्पी साध लेते हैं , जैसे कुछ हुआ ही न हो .
अशोक जी आपके इस ट्विट में किसी को कोई दिलचस्पी नहीं है। सबकी दिलचस्पी बस यही जानने में है कि सच क्या था। आप तो बताओ जो आपने डोटासरा जी को बताया था कि बंद कमरे में किरोड़ी लाल मीणा जी आपके पैर में पड़ गया था।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के बारे में इतना बड़ा ज़मीन घोटाले और भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ
कितने चैनल पर डिबेट हुआ? 0
कितने चैनल पर हैडलाइन बना? 0
कितने कमांडो वारियर एंकर ने चीख चीख कर जवाबदेही माँगी? 0
किसी मीडिया ने इस बड़े खुलासे का फॉलो किया ? 0
अयोध्या, उज्जैन तो झांकी है।
काशी मथुरा बाकी है।
ED वालों, सोकर उठ गए हो तो मोहन प्यारे के भी घर चले जाओ, पूछ लो महाकाल के धाम में डाका क्यों डाला। वैसे देश जानता है तुम्हारी आवाज़ नहीं निकलेगी।
उज्जैन में महाकाल की नगरी, अयोध्या में प्रभु राम की नगरी।
जहाँ आस्था होनी चाहिए थी, वहाँ ज़मीन के सौदों और घोटालों के आरोप लग रहे हैं। एक तरफ़ अयोध्या में मंदिर से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं की जाँच की चर्चा है, तो दूसरी तरफ़ उज्जैन में भाजपा मुख्यमंत्री के परिवार पर बड़े पैमाने पर ज़मीन ख़रीद घोटाले के आरोप लगना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की एक बात में तो तारीफ़ होनी चाहिए कि वह बेनामी सम्पत्ति पर विश्वास नहीं रखते।जो भी हो हमारे और परिवार के के नाम पर हो।पद से हटने या इंसान की मृत्यु के बाद बेनामी लोग हड़प जाते है।पीछले कुछ सालों में ऐसे कई उदाहरण है।और जब इस्तीफ़े का डर ना हो फिर बेनामी क्यों ? क़ानूनी रूप से कुछ होना नहीं है और नैतिकता की तेरहवीं हो चुकी है।
बीजेपी के भीतर कौन है जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को निपटा रहा है।भोपाल से लेकर दिल्ली तक जाल बिछा हुआ है।उपर वालो की अनुमति के बग़ैर तो ख़बर छप नहीं सकती !
पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री विश्वेन्द्र सिंह जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
मैं ईश्वर से स्वस्थ, खुशहाल एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
कुल भूमि स्वामित्व रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों के पास 245 प्लॉट में 335 एकड़ जमीन है।
• नीलेश यादव: 108 एकड़
• गोविंद यादव: 47 एकड़
• मोहन यादव: 17 एकड़
• सीमा यादव: 11 एकड़
• वैभव यादव: 17 एकड़
• शालिनी यादव: 10 एकड़
• नारायण यादव: 19 एकड़
• नंदलाल यादव: 17 एकड़
• कलावती: 17 एकड़
• अभय यादव: 16 एकड़
• रेखा यादव: 6 एकड़
• इस मामले में 4 रियल स्टेट कंपनियों का जिक्र हुआ है और इनमें बहुमत हिस्सेदारी सीमा यादव और मोहन यादव की है
• मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव और पुत्र वैभव से 25 एकड़ जमीन जुड़ी है। वहीं, मोहन यादव की बहन कलावती की भाभी सुनीता से 47 एकड़ जमीन जुड़ी हुई है
• तीन अलग-अलग कंपनियों में परिवार के करीबी रिश्तेदारों की बड़ी हिस्सेदारी है
• मोहन यादव के मंत्री रहने और फिर मुख्यमंत्री बनने के दौरान कई सारे रोड प्रोजेक्ट्स इन जमीनों के आसपास से निकले
: @INCMP अध्यक्ष @jitupatwari जी
"राहुल गांधी जी आज एक दिन के दौरे पर यहां आए। हमने औपचारिक तौर पर 10 दिन का ट्रेनिंग कैंप शुरू किया।
राहुल जी के दौरे से छत्तीसगढ़ में पार्टी कार्यकर्ताओं में नई एनर्जी आई है। उन्होंने 41 जिला अध्यक्षों से अच्छे माहौल में बातचीत की...
हमने चर्चा की कि आने वाले समय में राज्य में पार्टी को कैसे मजबूत किया जाए—जिला लेवल से लेकर मंडल और पंचायत लेवल तक... ऐसे कैंप हर राज्य में लगाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस हमेशा मजबूत रही है। हमने एक परिवार की तरह बातचीत की..." श्री @SachinPilot जी @RahulGandhi
संगठन की सबसे बड़ी ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता होते हैं।
प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस के साथियों और कार्यकर्ताओं से संवाद हुआ। उनके विचार, सुझाव और ऊर्जा ही हमारे संगठन की असली पूंजी हैं।
जनता के विश्वास को और मजबूत करने के लिए, हम सब मिलकर एक सशक्त, सक्रिय और जनहित के प्रति समर्पित संगठन का निर्माण करेंगे।
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