*एक जैसी ही दिखती थी माचिस की वो तीलियाँ,*
*कुछ ने "दीए" जलाये और कुछ ने "घर",*
*मिली हैं रूहें तो, रस्मों की बंदिशें क्या है,*
*यह जिस्म तो ख़ाक हो जाना है फिर रंजिशें क्या हैं,*
*है छोटी सी ज़िन्दगी तकरारें किस लिए,*
*रहो एक दूसरे के दिलों में यह दीवारें किस लिए,*
खट्टा सिंह की सगी भांजी के इन खुलासों के बाद भी अगर अफीमची खट्टा का नार्को टेस्ट नहीं हुआ तो फिर हाईकोर्ट ये भी जरूर बताये की जांच और न्याय प्रणाली का कोई पैमाना है भी या सब कुछ गोरखधंधा है इस देश में|
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