: रेडिसन ब्लू : रांची
https://t.co/wUcU6yOw7E
"ऊंची दुकान फीकी पकवान"
नेशनल टास्क फोर्स की बैठक मैं यहां की व्यवस्था ने देश भर देश भर में झारखंड का नाक कटा दिया। अधिकारी कर्मचारी का मोटा कमीशन सरकारी कार्यक्रम का कारण है
@Radisson@RadissonHotels@RadissonBlu@HLTH_JHARKHAND
139 की स्थिति बहुत खराब है 10 बार डायल करने पर एक बार इंस्ट्रक्शन मिलेगा उसमें भी लाख प्रयास के बाद प्रतिनिधि से बात नहीं होगी। @indianrail@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw
चार्ट तै��ार करने का प्रावधान क्या है।
PNR-6400213165
Trn:12877
Dt:09-03-26 Dep.Time-16:25 Hrs.
Frm RNC to NDLS
Cls:3A
P1-WL,3
P2-WL,4
Chart Prepared
Your Tickets are not confirmed, automatic refund processed.
For Enquiry/Complaint/Assistance,please dial 139 IR-CRIS
राज्य की व्यवस्था है। फिर भी उम्मीद की एक टिमटिमाती लौ के साथ मैने इसकी शिकायत माननीय मुख्यमंत्री महोदय के साथ साथ मुख्य सचिव व उर्जा सचिव को भी मेल कर इसकी शिकायत की है। अब देखना है कि राज्य के तारणहार, व्यवस्थागत कोढ़ को लेकर कितना गंभीर हैं। क्या कर पाते हैं। @HemantSorenJMM
एक कनेक्शन का 15-20 हजार रुपए घूस लेगा, क्योंकि उसके अनुसासर 12 हजार तो देना ही पड़ता है। लेकिन घूस देने ���े बाद बैठे बिठाए अविलंब काम करा देगा। घूस न दिए तो लाख पैरवी हो काम नहीं होगा। मेरा कटु अनुभव है।
हालांकि, मुझे इस व्यवस्था ने व्यथित जरूर किया। लेकिन कर क्या सकते हैं।
इसके उपयोगकर्ता म��ख्य रूप से बुजुर्ग हैं। जिन्हें पढ़ने में परेशानी तो होती ही है दवा का नाम छोटे अक्षरों में होने और एक ही दवा के पत्ते का हर बार बदलता स्वरूप परेशानी का मुख्य कारण है । लोग ना चाहते हुए भी गलत दवा खा लेते हैं। या मजबूरन ब्रांडेड उपयोग करते हैं @narendramodi
'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' गरीब ईमानदार और बीमार लोगों के लिए किसी वरदान से कम ���हीं है। लेकिन इसमें एक बहुत बड़ी परेशानी सामने आ रही है वह है पत्ते पर अंकित दवा का नाम बहुत छोटा होना। जिसके कारण अक्सर गलत दवा का उपयोग लोग कर जाते हैं। @PMOIndia @pmbjppmbi @JPNadda
@AjayLalluINC यही सब देश की जनता ने नेहरू के साथ किया लेकिन उसने देश को धोखा दिया उसे क्या... कहेंगे आज उसी का ... पप्पू में दौड़ रहा है जब मौका मिले देश को बर्बाद कर देगा
जज साहेब ये वीडियो तीन दिन पहले की है। देख लीजिए मरीजों की हालत। जिस देश ki न्याय व्यवस्था कुत्तों को लेकर भी गंभीर है वहाँ एक मरीज़ की सुध लेने वाला.कौन है।
@JHJudges@jhar_governor@Rimsranchi
रिम्स के अर्थोपेडिक्स विभाग में भर्ती यह युवक घंटों से कराह रहा है। मरीज असह्य दर्द से परिजन अपनी वि��शता से परेशान हैं। रिम्स में न तो इसकी कराह कोई सुनने वाला है, न ही इसका दर्द कोई हरने वाला है। वार्ड में न कोई नर्स है, न डॉक्टर। वीडियो रविवार सुबह 6 बजे की है @HemantSorenJMM
सूचना है कि हाई कोर्ट के निर्देश पर आयोजित पहली जीबी की बैठक से पूर्व प्रशासनिक अधिकारी निदेशक को लेकर ऑब्जर्वर से मिलने गए थे। वहीं ��र बैठक की रूपरेखा तय हो गई थी। असर बैठक में भी दिखा कि आब्जर्वर साहब ने एजेंदे के दूसरे ��ंड पर चर्चा नहीं होने दी। सच क्या है। ये जांच का विषय है।
रिम्स जीबी की बैठक में फिर से पूर्व न्यायाधीश अमरेश्वर सहाय मौजूद हैं। रिम्स मे चर्चा है इस बार भी कुछ नहीं होगा। हाई कोर्ट को प्रशा.अधिकारी और सहाय साहब के तार तलाशने चाहिए, जो निदेशक का कवच हैं @Rimsranchi@jhar_governor @NHMJharkhand @JHJudges @jharkhandHC